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सोनम वांगचुक की पत्नी ने सरकार को ये क्या कह दिया, मचा हड़कंप!

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दिस इज़ एस पर द हाई कोर्ट ऑर्डर नो द हाई कोर्ट ऑर्डर नेवर वाज़ अबाउट हॉस्पिटलाइजेशन। हाई कोर्ट ऑर्डर ने बस इतना कहा है कि किसी भी इंडिविजुअल की हेल्थ बहुत इंपॉर्टेंट होती है और उसको रेगुलर इंटरवल पे मॉनिटर करना है।

लेकिन हाई कोर्ट ऑर्डर ने ये नहीं कहा कि हॉस्पिटलाइज करना है। तो ये हाई कोर्ट ऑर्डर के हिसाब से नहीं है। ये नहीं हो रहा है। हां। मैडम आप अंदर गई हैं। क्या इलाज चल रहा है? क्या बता रहे हैं हेल्प? नहीं नहीं कुछ इलाज नहीं चल रहा।

अभी जस्ट ऑब्जरवेशन हो रही है और टेस्ट हो रहे हैं और वो भी हम बाहर की लैब से भी टेस्ट करवाने जा रहे हैं क्योंकि जो हमने इनसे रिपोर्ट मांगी है नहीं दे रहे हैं तो इसकी और जो ये नंबर्स कह रहे हैं 2.9 हो गया पोटशियम वो कल 4.3 था आज नहीं हो सकता तो हम इसको क्रॉस चेक करना चाहते हैं दूसरी लैब से बिफोर वी टेक एनी मेडिकेशन कोई तो वो नहीं नहीं नहीं वो ना कोई इलेक्ट्रोलाइट्स ले रहे हैं ना कुछ वो अभी भी फास्ट पे ही हैं उनका फास्टिंग अभी भी जा रही है क्योंकि वो कोई शुगर नहीं ले रहे हैं।

वो जस्ट जो ले रहे थे पहले वाटर विद साल्ट वही ले रहे हैं। शिफ्टिंग की बात आपने कही है कि यहां से डिस्चार्ज कर दिया जाएगी। एप्लीकेशन सीएमओ को लिखी जाएगी। हां जी। क्या उसमें लिखा क्या है? ये लिखा है कि हम अपने ये गवर्नमेंट नहीं डिसाइड करती इंडिया में। ये कोई कम्युनिस्ट देश तो है नहीं कि गवर्नमेंट डिसाइड करेगी कि आप कौन से हॉस्पिटल में जा रहे हैं। ये एक प्राइवेट पर्सन की इंडिविजुअल चॉइस है। तो हम जिस हॉस्पिटल को हम ट्रस्ट करते हैं और जहां हम कंफर्टेबल हैं, हम वहां उनको लेके जाएंगे।

तो यह मैं आभारी हूं कि गवर्नमेंट ने इतना सोचा और यहां ले आए पर यहां से क्या करना है वो हम अपने आप करेंगे और ना कि गवर्नमेंट कुछ इसमें दखल अंदाजी करने की उनको जरूरत नहीं है। मैम आप आपसे बातचीत हुआ उनका क्या लग रहा है आपको आप संतुष्ट हैं उनका? हां हां वो जैसे कल थे मतलब वीक तो डेफिनेटली है मसल मास लूज कर रहे हैं वो तो किसी भी फास्ट में होता है लेकिन वो अलर्ट है और बहुत स्ट्रांग है उनका आज ईसीजी भी हुआ वो भी ठीक है और जस्ट एक ही पैरामीटर जो यहां कह रहे हैं वो पोटैशियम वो हम क्रॉस चेक कर रहे हैं।

जैसे अभी मैं सो रहा हूं तो पिताजी को जगाना है मुझे तो वो डायरेक्ट उठाने के बजाय और हिंसा की परंपरा मेरे यहां नहीं थी।

सौभाग्य से तो वो क्या करते थे कि उस कमरे में आ जाएंगे या बाहर से गुजरेंगे और चौपाई बोलेंगे प्रातकाल उठ गए रघुनाथामात पिता गुरु नाव माता कभी-कभी मैं गुस्से में उठ के अरे बाबा तो चरण स्पर्श किया और सो गया मैंने कहा मतलब उठानी

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