[संगीत] एक पिता की जिंदगी में इससे बड़ा और भारी बोझ कोई दूसरा नहीं हो सकता जब उसे अपने ही जवान बेटी की अर्थी को कंधा देना पड़े। उत्तर प्रदेश के उन्नाव की मिश्रा कॉलोनी का मुक्तिधाम [संगीत] घाट रविवार को एक ऐसे ही असहनीय दर्द का गवाह बना। चारों तरफ सेना की वर्दी में जवान तैनात थे। हवा में [संगीत] मात्मी सन्नाटा था और उसी सन्नाटे को चीरती हुई उठी कुछ ऐसी सिसकियां जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंख को भिगो दिया। 24 जून को
जो पिता अपने 17 साल के इकलौते बेटे अभिनव को देश सेवा के सबसे बड़े मंच यानी एनडीए की दहलीज पर छोड़कर आया था वही पिता ठीक 20 दिन बाद उसी बेटे के तिरंगे में लिपटे शव को मुखाग्नि दे रहा था। आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए जब बेबस पिता प्रदीप कुमार वाजपेई ने अपने लाडले को मुग्नि दी तो उनका कलेजा फट पड़ा। उनके मुंह से निकले शब्द सिर्फ शब्द नहीं थे बल्कि एक टूटे हुए बाप का वो दर्द था जो शायद जिंदगी भर उनके सीने में एक खंजर की तरह चुभता रहेगा। अभिनव के पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन अभिनव का सपना बचपन से ही देश सेवा का था।
यही वजह थी कि पिता ने अपने सपने को मारकर बेटे का साथ दिया। लेकिन अब वह इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल बता रहे हैं। अभिनव सिर्फ 17 साल का था। घर का इकलौता चिराग चार भाइयों के परिवार में अकेला बेटा। इसी साल कानपुर के केंद्रीय विद्यालय से इंटर पास किया और अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकैडमी एनडीए में जगह बनाई। पूरा परिवार खुश था। बहन कानपुर के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है
और भाई देश की सरहद की हिफाजत के लिए तैयार हो रहा था। पिछले महीने जब अभिनव पुणे पहुंचा तो अपने पिता से यही बात कहता कि आप चिंता मत करना ट्रेनिंग थोड़ी मुश्किल है लेकिन बहुत मजा आ रहा है। पिता को क्या पता था कि 10 जुलाई की सुबह होने वाली बातचीत उनके बेटे की आखिरी आवाज बन जाएगी। 10 जुलाई शुक्रवार की सुबह पुणे के [संगीत] खड़कवासला में अभिनव अपनी पहली ऑफिशियल फिजिकल ट्रेनिंग परेड के लिए मैदान में उतरा था। जोश हाई था। सपने बड़े थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। दौड़ते-दौड़ते अचानक अभिनव के सीने में बेचैनी हुई और देखते ही देखते वह मैदान पर बेहोश होकर गिर पड़ा।
आनन-फानन में उसे मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। हर मुमकिन कोशिश की लेकिन इस 17 साल के जांबाज कैडेट की सांसे हमेशा के लिए थम गई। डॉक्टरों को अंदेशा है कि वजह हार्ट अटैक हो सकती है। लेकिन असली सच पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। रविवार को जब एयरबेस से अभिनव का पार्थिव शरीर पहले लखनऊ और फिर सड़क मार्ग से उन्नाव के लिए नेहरू नगर पहुंचा तो पूरा इलाका रो पड़ा। सेना के जवानों ने अपने इस युवा साथी को कंधा दिया। मुक्तिधाम घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। हवा में हवाई फायरिंग गूंजी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अभिनव को अंतिम विदाई दी गई। अभिनव चला गया। देश सेवा का उसका सपना अधूरा रह गया और पीछे छोड़ गया एक ऐसा परिवार जिसकी दुनिया अब कभी भी पहले जैसी नहीं होगी। एबीपी गंगा खबर आपकी जुबान आपकी