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17 दिन से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक, विदेशी मीडिया ने मोदी सरकार के लिए कह दी इतनी बड़ी बात!

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एनवायरमेंटलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जंतरमंतर पर बीते 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। हर गुजरते दिन के साथ सोनम वांगचुक का वजन घट रहा है। सेहत बिगड़ गई है और चिंता बढ़ती जा रही है। लेकिन अब यह मामला सिर्फ दिल्ली के जंतरमंतर तक सीमित नहीं रहा। ब्रिटेन से लेकर अमेरिका, जर्मनी और पाकिस्तान तक के बड़े मीडिया संस्थान इस आंदोलन पर नजर बनाए हुए हैं। कहीं इसे सरकार की अंतरात्मा को जगाने की कोशिश बताया जा रहा है तो कहीं मोदी सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा। सवाल [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह है आखिर दुनिया की मीडिया संस्थान सोनम वांगचुके इस भूख हड़ताल को किस नजरिए से देख रही है और विदेशी अखबारों

और चैनल्स में उनके आंदोलन को लेकर क्या लिखा जा रहा है क्या कहा जा रहा है शुरुआत ब्रिटिश मीडिया संस्थान बीबीसी से बीबीसी ने लिखा वांगचुक की भूख हड़ताल सरकार को जगाने का एक माध्यम है। वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर उनके समर्थकों में चिंता है। हजारों लोग उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं। खुद को महात्मा गांधी का अनुयाय बताने वाले वांगचुक का कहना है कि वह गांधी जी के अहिंसक विरोध के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं और उन्हीं की तरह सरकार की अंतरात्मा को जगाने के लिए भूख हड़ताल का सहारा ले रहे हैं। इसी के साथ बीबीसी ने यह भी लिखा कि गर्मी के बढ़ते तापमान के बावजूद सैकड़ों लोग वांगचुक के सपोर्ट में जंतरमंतर आ रहे हैं।

अब बात पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान एक्सप्रेस ट्रिब्यू ने आर्टिकल की शुरुआत वांगचुक के एक बयान से की। एक्सप्रेस ट्रिब्यू ने लिखा कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने एक बार कहा था कि वह सिर्फ एक आम नागरिक हैं। मॉडर्न गांधी या फिर कोई हीरो नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की किसी दूसरे में प्रेरणा ढूंढने से बेहतर है कि खुद के हीरो बनो। उनके सपोर्ट में आए लोगों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि दो तरह के बयान उन्हें बहुत दुख देते हैं। पहला जो मुझे 21वीं सदी का गांधी कहते हैं और दूसरा जो मुझे हीरो बुलाते हैं। मैं दोनों ही नहीं हूं। किसी दूसरे में अपना हीरो मत देखो। जिम्मेदार नागरिक बनो और खुद के हीरो बनो। जर्मन मीडिया संस्थान डीडब्ल्यू ने भी इस प्रोटेस्ट को शेयर किया। डॉक्टर्स के बीच लेटे सोनम वांगचुक की एक तस्वीर शेयर की और

आर्टिकल को हेडिंग दी सोनम वांगचुक हंगर स्ट्राइक टेस्ट मोदी। इसका भावानुवाद होगा। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल मोदी सरकार की परीक्षा ले रही है। साथ में लिखा भारतीय एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के विरोध में दो हफ्ते से ज्यादा समय से उपवास कर रहे हैं। जैसे-जैसे उनकी सेहत बिगड़ रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बढ़ रहा है। वांगशु के सपोर्ट में कई भारतीय नेता जंतरमंतर पहुंचे, लेकिन उनमें से एक भी नेता रूलिंग पार्टी भारतीय जनता पार्टी का नहीं था। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पहले ही बताया था कि वांगचू का वजन और मसल्स तेजी से कम हो रहे हैं और उनका ब्लड शुगर असामान्य रूप से बहुत कम स्तर पर गिर रहा है।

वहीं अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग ने इस भूख हड़ताल को मोदी सरकार के खिलाफ एक रेयर स्टेप बताया। ब्लूमबर्ग ने अपने आर्टिकल में लिखा वांगचुक का विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के विरोध का एक दुर्लभ उदाहरण है। अभिजीत दीपके ने वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल को खत्म करने को कहा था लेकिन एक्टिविस्ट ने मना कर दिया। वांगचुक ने सवाल किया कि सरकार प्रदर्शनकारियों से इस मामले पर बातचीत क्यों नहीं कर रही है? भारत के शिक्षा मंत्रालय ने इस हड़ताल पर अभी तक कुछ नहीं कहा है। विपक्ष के नेता वांगचुक से उपवास खत्म करने की अपील कर रहे हैं। उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।

इसके अलावा ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी राइटर्स ने लिखा कि भारत में पेपर लीक को लेकर लोगों में गुस्सा है। एजेंसी ने लिखा कि भूख हड़ताल पर बैठा एक व्यक्ति बेहोश हो गया था। उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया। हड़ताल पर ना तो धर्मेंद्र प्रधान कोई प्रतिक्रिया दे रहे हैं और ना ही उनका कोई मंत्रालय। पेपर लीक होने की घटनाओं से युवाओं में नाराजगी है। जंतरमंतर पर शुरू हुआ यह विरोध अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों का हिस्सा बन चुका है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट में एक बात बार-बार सामने आ रही है। सोनम वांगचू की बिगड़ती हालत और सरकार की चुप्पी। इस बीच आंदोलनकारियों की मांग वही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही। अब सवाल है क्या यह भूख हड़ताल सिर्फ खबरों की हेडलाइन बनकर रह जाएगी या फिर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकलेगा बीच का कोई रास्ता फिलहाल दुनिया की निगाहें जंतरमंतर पर टिकी हुई है और 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च पर भी जिसका आह्वान सीजेपी और सोनम वांगचुक ने किया है। मामले पर जो भी अपडेट होगा हम आप तक पहुंचाएंगे। आपकी क्या राय है? आपके क्या विचार हैं? कमेंट करके बता सकते हैं। मेरा नाम है वै भाबरी। देखते रहिए द लंडन टॉक। शुक्रिया।

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