पंछी सुर में गाते हैं, भंवरे गुनगुनाते हैं, घुंघरू बचाती है हवा। आज हम बात करेंगे 90 के दशक के एक ऐसे एक्टर की जिसने केवल तीन चार फिल्मों से धूम मचा दी थी। इश्क में मेरी ऐसी हालत की है। कुछ समझ वो एक्टर है जिससे कभी माधुरी दीक्षित यह कहती थी तुमने अगर प्यार से देखा नहीं मुझको तो छोड़ के शहर में चली जा। जब वो सिर्फ तुमका दीपक बना तो उसके प्यार में पूरा बंबई रोया। एक मुलाकात जरूरी है सनम। एक ऐसा एक्टर जिसने जब यह कहा झुकी झुकी नजर तेरी कमाल कर गई उठी जो एक तो प्रेमी उसे अपना आइडल मानने लगे थे तो हम बात कर रहे हैं 90 के दशक में सिर्फ तीनचार फिल्मों से हर किसी का दिल जीतने वाले एक्टर संजय कपूर की। जरा फिर से कहना कैसे जहां उनके एक सगे भाई अनिल कपूर ने उनके साथ दुश्मनों से भी बुरा बर्ताव किया तो वहीं दूसरे सगे भाई बोनी कपूर ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। भाई भाई में अक्सर यह होता है। ऐसा क्या हुआ कि अचानक से संजय कपूर बॉलीवुड से गायब हो गए। सलमान खान ने कैसे उनके लिए उनके सगे भाइयों से भी बढ़कर काम किया। ढूंढते रह जाओगे यार हमारे जैसा कैसे माधुरी दीक्षित का हीरो दाने-दाने का मोहताज हो गया क्यों तब्बू ने उनका पहले इस्तेमाल किया और फिर उन्हें बर्बाद करके छोड़ दिया आज संजय कपूर कहां है और किस हाल में है जानेंगे और भी बहुत कुछ तो चलिए शुरू करते हैं
सात जन्म सात वचन सात समंदर संजय कपूर का जन्म जन्म 17 अक्टूबर 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम था सुरेंद्र कपूर और मां का नाम था निर्मल कपूर। 1987 में अनिल कपूर मिस्टर इंडिया बने और इस फिल्म से जहां अनिल कपूर रातोंरात सुपरस्टार बन गए तो वहीं बोनी कपूर भी नामी प्रोड्यूसर बन चुके थे। तो उसी समय उनके छोटे भाई संजय कपूर को भी लॉन्च करने की तैयारियां शुरू हुई। मूवी का नाम था प्रेम जिसे बनने में ही 6 साल लग गए। तेरा मेरा प्रेम है सबसे और पहली ही मूवी में संजय कपूर के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उनकी जिंदगी एक गहरी खाई में चली गई जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। इस मूवी की हीरोइन थी तब्बू। छूना मेरा बदन आग लग जाएगी। और इसमें विलन बने थे अमरेश पुरी। यह मूवी बेहतरीन थी जिसका हर गाना लाजवाब था। फिर चाहे यह गाना हो ये धरती ये अंबर जब से या फिर यह सैड सॉन्ग हो मैंने जी लिया मर लिया और आज भी लोग इस मूवी के गानों को एवरग्रीन कहकर सुनते हैं और संजय कपूर के भोलेभाले लुक और चॉकलेटी इमेज ने हर किसी का दिल जीत लिया था। तेरे बस में नहीं मेरा मन ओ मैंने कर देखे सा सब कुछ अच्छा होने के बाद भी यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप हो गई जिसका कारण यह था कि इसे बनने में ही 6 साल लग गए और उस समय तक लोगों ने इसे सीरियस लेना भी छोड़ दिया था। इसलिए संजय कपूर को इस मूवी से उतना फायदा नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। इसके बाद संजय कपूर राजा बने। बनूंगी मैं राजा की रानी। और सच में 90ज का शायद ही कोई होगा जिसने राजा मूवी ना देखी हो और अगर मूवी ना भी देखी हो तो इसके गाने तो हर किसी ने सुने ही होंगे। फूल मांगो ना बहार मांगो मूवी का हर गाना ऐसा था जिसे आज भी एवर ग्रीन कहकर लोग अपनी फेवरेट वाली लिस्ट में संभाल कर रखते हैं।
नजरें मिली दिल धड़का मेरी धड़कन ने कहा फिर चाहे सदाबहार लव सॉन्ग हो मूवी के सैड सॉन्ग हो सजना तुझको भुला दिया और खासकर संजय कपूर ने जब परेश रावल के लिए यह गाना गाया चोट लगी तुझको तो दर्द मुझे होता है जिसे सुनकर आज भी लगता है कि भाई दुनिया में सबसे बढ़कर होता है। भाई भाई में अक्सर ये होता है होता माधुरी दीक्षित की तो इस मूवी में बात ही अलग थी अं मिला कभी अं चुराओ क्या तूने किया जादू और दोनों की जोड़ी ने वो तहलका मचाया कि लोगों ने इसे एवरग्रीन हिट जोड़ी मान लिया था। इस मूवी के विलेन थे बच्चों के शक्तिमान बड़ों के भीष्म पितामह और बीच वालों के एक्टर मुकेश खन्ना। अरे प्यार करना कोई खेल नहीं है बच्चों का। तेल निकल जाता है अच्छे-अच्छों का। यह मूवी इतनी बड़ी हिट हुई कि आज भी लोग इसके फैन हैं और मूवी के गानों की तो क्या ही तारीफ की जाए। मतलब तारीफ के लिए शब्द भी नहीं है। तो रहने दो फिर। लेकिन बड़ी बात यह थी कि इस मूवी के लिए भी जितनी तारीफ संजय कपूर को मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली। और मूवी का पूरा क्रेडिट माधुरी दीक्षित के नाम चला गया। हर किसी को लगा कि मूवी सिर्फ माधुरी दीक्षित की वजह से ही चली है। हालांकि ऐसा नहीं था। संजय कपूर की एक्टिंग भी इस मूवी में अलग ही लेवल की थी। और रही बात फैसले की तो सुन। तुझ जैसी हजार लड़की मैं अपने भाई पर कुर्बान करता हूं। समझी? और कोई भी यह नहीं कह सकता था कि ये संजय कपूर की दूसरी मूवी है। इसके बाद संजय कपूर की मूवी आई कर्तव्य। और जूही चांवला के साथ आई उनकी मूवी कर्तव्य ने भी रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। के सीने में ऐसे दीवानों के जैसे कसम से यूं करवट इस मूवी का भी सब कुछ हिट था और इसके गाने तो लाजवाब थे। एक बार बेटा मुझे कह दे तू मां। और खासकर यह सैड सॉन्ग परदेियों से पूछ पूछ रोई मैं। परदेियों से इतना बड़ा हिट हुआ कि जिसका पति या प्रेमी बाहर था तो उसे याद करते हुए प्रेमिका कहने लगी मेरा माही जाके क्यों नहीं आया मूवी से जुड़ी एक खास बात यह भी थी कि पहले इस मूवी की हीरोइन दिव्या भारती होने वाली थी। संजय कपूर के साथ उनकी शूटिंग की तैयारियां भी हो चुकी थी। लेकिन फिर दिव्या भारती की मौत हो गई और उनका किरदार जूही चांवला ने निभाया। इन दोनों फिल्मों से संजय कपूर एक बेहतरीन एक्टर बनकर लोगों के सामने आ चुके थे। इसके बाद संजय बेकाबू बने और उनकी हीरोइन बनी मुझको राणा जी माफ करना वाली ममता कुलकर्णी। यह मूवी भी बेहतरीन थी। इसके गाने भी बड़े हिट हुए। तू वो तू है ये दिल बेकाबू हो गया। और संजय कपूर की एक्टिंग भी गजब की थी। हां हां मेरे बाप ने अय्याशी की और तुम्हारे बाप ने बिना कुछ किए पैदा कर दिया तुम्हें। मेरे मुंह से निकल गई। लेकिन यह मूवी उतना कमाल नहीं दिखा पाई। इसके बाद एक बार फिर से माधुरी दीक्षित उनकी हीरोइन बनी। मूवी आई मोहब्बत और अक्षय खन्ना के साथ इस मूवी में भी संजय कपूर अलग ही लेवल के जमी। आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है। आज फिर अकेले। इस मूवी के गाने भी बेहतरीन रहे और एक तरफ जहां अक्षय खन्ना माधुरी दीक्षित से यह कह रहे थे दिल की धड़कन कहती है जिस दिल में रहती है तो वहीं संजय कपूर भी माधुरी दीक्षित के प्यार में पड़कर यह कह रही थी तेरे दिल में मुझे रहना है और माधुरी दीक्षित भी ऐसे प्यार की डिमांड कर रही थी मुझे प्यार करना सबके सामने क्या चाहिए तुम्हें? कौन हो तुम? यह मूवी भी बड़ी हिट हुई और इसके बाद संजय कपूर सलमान खान के साथ अपना औजार लेकर आए। मतलब मूवी का नाम था औजार। यह वो समय था जब सलमान खान बड़े स्टार बन चुके थे। लेकिन फिर भी इस मूवी में संजय कपूर अपने लुक और एक्टिंग से सलमान खान पर भी भारी पड़े थे। ढूंढते रह जाओगे यार हमारे जैसे। मूवी से जुड़ा एक किस्सा भी कमाल का था।
जब यह मूवी रिलीज होनी थी तो इसके पोस्टर पूरे शहर में लगाए गए थे। जिसमें सलमान खान की बड़ी फोटो थी और संजय कपूर की छोटी फोटो थी जिससे सलमान खान भड़क गए। सलमान खान ने मूवी के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर से कह दिया कि संजय कपूर का इस मूवी में मुझसे भी बड़ा रोल है और वो मुझसे भी ज्यादा एक्टिंग करते हुए दिखाई दिए हैं। इसलिए इस मूवी में उनका पोस्टर ज्यादा बड़ा होना चाहिए। तू क्या समझता है कि तू इस दुनिया में एक ही पागल है? अच्छा यहां दो हैं। और इसके बाद प्रोड्यूसर को पूरे शहर से वो पोस्टर हटाने पड़े और फिर ऐसे पोस्टर लगाए गए जिनमें संजय कपूर भी सलमान खान के बराबर दिखाई दिए। और इस तरह इसी फिल्म के दौरान संजय कपूर और सलमान खान में गहरी दोस्ती हो गई, और बाद में इसी दोस्ती का फायदा बोनी कपूर और अनिल कपूर ने उठाया। इस मूवी के हर सीन में संजय कपूर छा गई थी। 90 के दशक की फिल्मों की सबसे बेहतरीन चीज होती थी उनके गाने। तुम बचोगे जिस तरह क्या ये ऐसा काम है? और यह गाने ही होते थे जो किसी भी मूवीज को सदाबहार बनाती थी। दिल के 100 टुकड़े हैं हर टुकड़े पे तेरा नाम है। इसके बाद संजय कपूर की मूवी जमीर आई और इस मूवी में उनकी हीरोइन शिल्पा शेट्टी ही बनी और यह मूवी भी बहुत अच्छी थी। लेकिन इसे भी लोगों ने उतना रिस्पांस नहीं दिया जितना कि इसे मिलना चाहिए था और यह मूवी भी फ्लॉप हो गई। इसके बाद आई मेरे सपनों की रानी। इस मूवी में संजय कपूर एक साथ दो-दो हीरोइन के साथ नजर आई। एक तरफ उर्मिला मानतोड़कर थी तो दूसरी तरफ थी मधु। तू है मेरी स्वप्न सुंदरी मन है तेरा। और इस मूवी में एक ऐसा गाना था जिसमें बॉलीवुड की हर बड़ी हीरोइन की छवि को दिखाया गया था और यह बॉलीवुड का एकमात्र सॉन्ग है जिसमें 90 के दशक की हर खूबसूरत हीरोइन की झलक थी। लेकिन यह मूवी भी कुछ खास नहीं चली। अपनी असफल फिल्मों को देखकर संजय कपूर को चिंता होने लगी और उन्हें लगा कि अब उनका करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन फिर 1999 में एक ऐसी मूवी आई जिसने संजय कपूर को अमर कर दिया। मूवी का नाम था सिर्फ तुम। पहलीप मोहब्बत की है कुछ ना समझ और आज भी इसके लिए संजय कपूर को याद किया जाता है। इस मूवी के गाने ऐसे थे कि उनका सिर्फ म्यूजिक सुनकर लोग गाना गुनगुनाने लगते हैं। [संगीत] [प्रशंसा] फिर चाहे यह गाना हो का टुकड़ा होता। जो आज भी लवर्स की पहली पसंद है या फिर यह गाना हो ऊपर वाला अपने साथ है। मूवी में सुष्मिता सेन भी थी और उनका यह गाना होश ना खबर है ये कैसा असर है तुमसे मिलने के बाद इतना बड़ा हिट हुआ कि आज भी इसके रिमेक बनती हैं और नोरा फतेही इसी गाने पर नाच कर बॉलीवुड की नंबर वन आइटम गर्ल बन गई थी। के प्रिया गिल की मासूमियत और खूबसूरती ने भी इस मूवी में चार चांद लगा दिए थे और जब उसने दीपक को ढूंढने के लिए दीपक के ही ऑटो में बैठकर पूरी बंबई घूमी क्या बात कर रहा है तो उसके इस दुख को बंबई का मौसम भी बर्दाश्त नहीं कर पाया और ऐसा रोया कि पूरा बंबई पानीपानी हो गया मेरे साथ में रो रहा आसमान और इस सिचुएशन में जब यह गाना बजा जिंदा रहने के लिए तेरी कसम तो सच में इसने लोगों के दिलों में वो जगह बनाई कि लोग इसके दीवाने हो गए। मुलाकात जरूरी है सनम। इस मूवी के गाने इसकी आत्मा थे और साउथ की खूबसूरती को दिखाते हुए जब संजय कपूर ने यह गाया देखो क्या घनेरे ऊंचे ऊंचे पर्वतों के सारे तो यह गाना भी इतना बड़ा हिट हुआ कि आज भी लोग इसे सुनते हुए लिखते हैं कि 2025 में कौन सुन रहा है। ऐसे मुस्कुराती है, यूं फिजा बुलाती है, जैसे हो यह मेरी दिलवा। सिर्फ तुम मूवी संजय कपूर के पूरे फिल्मी करियर की सबसे बेहतरीन मूवी बनी। हालांकि ऐसा नहीं था कि यह ओरिजिनल थी बल्कि साउथ की एक मूवी का ही रिमेक थी।
लोगों को लगा कि संजय कपूर अब लंबी रेस का घोड़ा होने वाले हैं। लेकिन जैसा कि कहा जाता है किस्मत बड़ी कुत्ते चीज है? कभी भी पलट जाती है। तो संजय कपूर के साथ भी वही हुआ। इस मूवी में संजय कपूर की एक्टिंग बेहतरीन थी और उनका काम भी हर किसी को पसंद आया। लेकिन फिल्म का पूरा क्रेडिट प्रिया गिल की मासूमियत ले गई और संजय कपूर को वो तारीफ नहीं मिली जो उन्हें मिलनी चाहिए थी। इसके बाद 2001 में संजय कपूर छुपा रुस्तम बनी। रे बाबा धोखा खा गए हम। तू निकला छुपा रुस्तम। मूवी में पहली बार संजय कपूर ने डबल रोल निभाया था और एक तरफ जहां ममता कुलकर्णी उनसे यह कह रही थी अरे ओ शहरी बाबा हमें माफी दे तू तो वहीं दूसरी तरफ मनीषा कोराला भी उनसे यह कह रही थी दिल मत देना मेरी सौगन को और इस मूवी का हर गाना लाजवाब था और संजय कपूर हर किसी के दिल में बसते चले जा रहे थे लेकिन फिर अचानक से संजय कपूर का लुक बदल गया और वह हीरो से विलेन बन गए। मूवी आई कोई मेरे दिल से पूछे और पहली बार संजय कपूर ऐसे विलिलेन बने कि हर कोई डर गया और जब उनकी मां जया बच्चन ने अपने ही बेटे को जहर वाली खीर खिलाकर मारा तो लोगों ने कहा कि जहर वाली खीर में बच्चन परिवार का कोई जवाब नहीं। जहर खीर में नहीं तुम्हारे अंदर भरा हुआ है। मेरे साथ अन्याय हुआ है। इसके बाद सोच आई और ऐसी फ्लॉप हुई कि संजय कपूर को सोचने तक का मौका नहीं मिला और अब संजय कपूर के लिए सबसे बड़ी प्रॉब्लम उनका लुक ही बन चुका था। जो एक साल पहले तक एक चॉकलेटी हीरो था जिसका लुक मासूम और इनोसेंट था। वह अचानक से इतना बदल गया था कि अब उनमें हीरो जैसा फील ही नहीं आ रहा था और वह हीरो से विलेन बनने लगे थे। इसके बाद शाहरुख खान और नाना पाटकर की मूवी आई शक्ति जिसमें संजय कपूर ने करिश्मा कपूर के पति का किरदार निभाया था। हालांकि उनका किरदार दमदार था लेकिन मूवी उनकी नहीं बल्कि शाहरुख खान की कहलाई। 2003 में अजय देवगन और सुनील शेट्टी कयामत लेकर आए और इस मूवी में भी संजय कपूर विलेन ही बनी। हैप्पी बर्थडे टू यू। इसके बाद रामगोपाल वर्मा की डरना मना है आई। और इस मूवी में संजय कपूर ने शिल्पा शेट्टी के पति का किरदार निभाया जो राजपाल यादव का सेब खाकर खुद ही सेब बन जाती हैं। इसके बाद भी कल हो ना हो एलओसी कारगिल, जागो और जली जैसी कई फिल्मों में संजय कपूर सपोर्टिंग किरदार निभाते हुए नजर आए। जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। 2005 में आई एक हॉरर मूवी अनजाने में भी संजय कपूर का काम बेहतरीन था। इसके बाद भी ऊंस, लक बाय चांस, क्रिकेट और प्रिंस जैसी कई फिल्मों में संजय कपूर ने काम किया। लेकिन अब ना तो संजय कपूर हीरो रह गए थे और ना ही उनके काम को कुछ खास पसंद किया जा रहा था। मुंबई द गैंगस्टर में भी संजय कपूर दिखाई दिए थे और देखते ही देखते एक बेहतरीन स्टार एक सपोर्टिंग एक्टर बन चुका था। मुंबई पे राज करने के वास्ते अब उनका दबदबा। अब उनकी धान इसके बाद भी है मेरा प्यार कहीं शानदार लस्ट स्टोरीज मिशन मंगल जैसी कई फिल्में आई और इन सभी फिल्मों में संजय कपूर छोटे-मोटे किरदार निभाते हुए नजर आए। संजय कपूर आखिरी बार 2019 में फिल्म जोया फैक्टर में दिखाई दिए थे। दिल संभलजा जरा से उन्होंने छोटे पर्दे का रुख भी किया और इस टीवी सीरियल में भी संजय कपूर को खूब पसंद किया गया। इसके बाद करिश्मा, द मिरेकल ऑफ डेस्टिनी, द लास्ट आवर, द गॉन गेम, जिंदगी इन शॉर्ट और द फेम गेम जैसे कई बेहतरीन वेब सीरीज में भी संजय कपूर काम कर चुके हैं। तो वरी अप केस सॉल्व हो जाएगा। संजय कपूर आखिरी बार माधुरी दीक्षित के साथ द फेम गेम वेब सीरीज में दिखाई दिए थे और इसमें उनके काम को भी लोगों ने खूब पसंद किया। और अब हम बात करेंगे संजय कपूर की पर्सनल लाइफ की और साथ ही जानेंगे कि कैसे उनके सगे भाइयों ने ही उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। संजय कपूर की पहली फिल्म थी प्रेम और इस मूवी के प्रोड्यूसर थे संजय कपूर के भाई बोनी कपूर और डायरेक्टर थे शिखर कपूर। इसी समय बोनी कपूर दूसरी फिल्म अनिल कपूर को लेकर भी बना रहे थे जिसका नाम था रूप की रानी और चोरों का राजा। इसके डायरेक्टर भी शिखर कपूर ही थे। और इसी मूवी के दौरान शिखर कपूर और बोनी कपूर में बहस हो गई और शिखर कपूर ने बीच में ही दोनों फिल्मों को छोड़ दिया। इसके बाद बोनी कपूर ने सतीश कौशिक को डायरेक्टर चुना और वो दोनों फिल्मों को डायरेक्ट करने लगे। लेकिन रूप की रानी और चोरों का राजा बड़े बजट की फिल्म थी। क्या सबूत है तुम्हारे पास कि यही जुगरान है? और तुम्हारे पास क्या सबूत है? क्या जुगरा नहीं है? साथ ही इसमें श्रीदेवी, अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ जैसे स्टार थे। तो बोनी कपूर ने सतीश कौशिक से कहा कि तुम अपना पूरा ध्यान इसी मूवी पर लगाओ और साथ ही अनिल कपूर ने भी अपने भाई के डेब्यू से ज्यादा अपनी फिल्म को पहले पूरा करना ज्यादा जरूरी समझा और यही कारण रहा कि संजय कपूर के प्रेम को बनने में पूरे 6 साल लग गए। मर लिया कर लिया। जब संजय कपूर ने यह मूवी साइन की थी तो वह 25 साल की थी। लेकिन जब यह रिलीज हुई तो संजय कपूर 31 साल के हो चुके थे। मतलब वो शुरुआती 6 साल जो उनके लिए गोल्डन टाइम था जिसमें वो बहुत कुछ कर सकते थे। कई हिट फिल्में दे सकते थे। वो उनके दोनों सगे भाइयों ने अपनी लालच और स्वार्थी बनकर बर्बाद कर दिए। इस मूवी से तब्बू ने भी बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। और इसी मूवी की शूटिंग के दौरान संजय कपूर और तब्बू की नजदीकियां भी बढ़ गई थी। हो कुछ ऐसी चली है पवन आग लग जाएगी। दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे के प्यार में डुबकी लगाई।
तब्बू को लगा कि संजय कपूर बोनी कपूर और अनिल कपूर के भाई हैं तो उनके साथ रिश्ता रखकर उसे बहुत फायदा होगा। लेकिन जब उनके सगे भाइयों ने ही संजय कपूर के 6 साल मक्खन लगाकर शहद की तरह चाट लिए, तो तब्बू भी समझ गई, कि संजय कपूर का कुछ नहीं होने वाला। और एक तरफ जहां संजय कपूर इन छ सालों में सिर्फ इसी मूवी में अटके रहे तो वहीं तब्बू ने दूसरी कई फिल्मों में काम किया और वो एक जानीमानी एक्ट्रेस बन गई। तेरा मेरा प्रेम है सबसे तेरा और जब यह मूवी रिलीज हुई और कुछ खास नहीं चली तो तब्बू ने संजय कपूर को छोड़कर दूसरा सहारा ढूंढ लिया। संजय कपूर जब अपने करियर में थोड़े ढलान पर थे और उन्हें एक हिट फिल्म की जरूरत थी। तभी रामगोपाल वर्मा साउथ की एक फिल्म का हिंदी रिमेक बना रहे थे। जिसके लिए उन्होंने संजय कपूर को साइन भी कर लिया था। संजय कपूर इस मूवी को लेकर बहुत उत्साहित थे। उन्हें भरोसा था कि यह मूवी उनकी किस्मत बदल देगी। लेकिन रामगोपाल वर्मा उस समय अपनी दूसरी फिल्मों में बिजी थे और इसे शुरू करने में उन्हें थोड़ा समय लग गया। लेकिन तभी बोनी कपूर को उस मूवी की जानकारी मिली और उन्होंने दुगने पैसे देकर उस फिल्म के हिंदी राइट्स खरीद लिए और तुरंत उस पर काम भी शुरू कर दिया और यही नहीं उन्होंने संजय कपूर को खबर तक नहीं होने दी कि जिस मूवी को वो साइन कर चुके हैं उसे बोनी कपूर बना रहे हैं और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वो मूवी थी तेरे नाम जो ओरिजिनल साउथ की सेतु का रिमेक थी। एक दूजे का साथ कभी ना छोड़ेंगे नहीं। बोनी कपूर ने ना सिर्फ अपने भाई से उसकी मूवी छीन ली बल्कि उसे हटाकर सलमान खान को हीरो बनाया और यह फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई कि सलमान खान का डूबता हुआ करियर बच गया और संजय कपूर का चलता हुआ करियर डूब गया। कदमों में तेरे रख दूं दोनों ज तेरे नाम मूवी को कौन नहीं जानता और अगर इसे संजय कपूर ने किया होता तो उनका करियर अलग ही ऊंचाइयों पर पहुंच गया होता। इस तरह बोनी कपूर ने अपने सगे भाई का करियर मिटा दिया और सिर्फ पैसों के लिए संजय कपूर को बर्बाद कर दिया। भाई भाई में असर ही होता है। संजय कपूर बोनी कपूर से धोखा खाने के बाद बुरी तरह से टूट गए और इस बात का उन पर इतना असर पड़ा कि उन्होंने एक्टिंग करना ही कम कर दिया और फिल्मों से दूरी बना ली। कुछ समय के बाद संजय कपूर दोबारा लौटे। लेकिन इस बार वह एक्टर नहीं बल्कि फिल्म प्रोड्यूसर बनने का सपना लेकर आए थे। उन्होंने सोचा था कि बोनी कपूर ने उन्हें धोखा दे दिया है। लेकिन उनका दूसरा भाई अनिल कपूर जो कि अब सुपरस्टार बन चुका है वो उसके साथ ऐसा कभी नहीं करेगा। तो उन्होंने सोचा कि मैं अनिल कपूर को हीरो लेकर एक फिल्म प्रोड्यूस करूंगा और मेरा भाई मुझे कभी मना नहीं करेगा। लेकिन अनिल कपूर तो अब स्टार बन चुके थे। तो उन्होंने अपने भाई पर तरस खाने की बजाय शर्त रखी कि मैं तुम्हारी फिल्म में तभी काम करूंगा जब तुम डायरेक्टर मेरी पसंद का लोगे। जिसे मैं कहूंगा उसे ही तुम्हें डायरेक्टर बनाना होगा। अब मैं कुछ नहीं सुनूंगा। समंदर में तूफान उमड़ चुका है।
संजय कपूर ने उनकी यह शर्त भी मान ली लेकिन फिर भी मूवी कभी शुरू ही नहीं हो पाई। संजय कपूर 4 से 5 साल तक अनिल कपूर के चक्कर ही लगाते रह गए। अनिल कपूर ने अपने ही भाई का मजाक बना दिया और 4- 5 साल तक चक्कर लगवाने के बाद एक दिन संजय कपूर की मूवी करने से मना कर दिया और हद तो तब हो गई जब एक दिन संजय कपूर अपने भाई अनिल कपूर से मिलने के लिए गए। तो अनिल कपूर के मैनेजर ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया और संजय कपूर से कहा कि अब अनिल कपूर एक स्टार हैं। और भाईचारा निभाते हुए उनसे आप काम मत मांगा कीजिए। और अगर आप उन्हें अपनी मूवी में साइन करना चाहते हैं तो अगली बार जब आप अनिल कपूर सर से मिले तो एक एडवांस चेक जेब में मत डालकर आएं और यह सब अनिल कपूर ने ही अपने मैनेजर को संजय कपूर से कहने के लिए बोला था। मैं आपके मसकेबाजी में नहीं आने वाला। आप जाइए और किसी और को ढूंढिए। यह सुनने के बाद संजय कपूर का दिल टूट गया। उन्हें समझ में आ गया कि बाप ना भैया सबसे बड़ा रुपैया और दोनों भाइयों ने मिलकर संजय कपूर की जिंदगी ही बदल दी। दोनों भाई बॉलीवुड का बड़ा नाम थे। और अगर वह चाहते, तो संजय कपूर भी एक अच्छे एक्टर या प्रोड्यूसर बन सकते थे, और आज वो बॉलीवुड से गुमनाम ना होते। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अनिल कपूर ने सलमान खान की युवराज में एक घटिया सा किरदार सिर्फ इसलिए निभाया कि कहीं सलमान खान को बुरा ना लग जाए, और वह अनिल कपूर पर गुस्सा ना हो जाए। मतलब सलमान खान की मूवी में वो एक जोकर बनने को तैयार हो गए थे। लेकिन अपने ही सगे भाई की मूवी में वो हीरो बनने को तैयार नहीं हुए। साले और इस तरह बोनी कपूर और अनिल कपूर ने ही अपने सगे भाई की जिंदगी के लगभग 10 साल बर्बाद कर दिए और किसी की जिंदगी में 10 साल कितने मायने रखते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। एक समय ऐसा आ गया जब बोनी कपूर टॉप के डायरेक्टर बन चुके थे। अनिल कपूर सुपरस्टार बन चुके थे। तो वहीं संजय कपूर की हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें अपने घर का खर्च चलाने के लिए टीवी सीरियल में काम करना पड़ा था और वह भारी आर्थिक संकट का शिकार हो गए थे। मतलब ऐसे भाई किसी दुश्मन के भी ना हो। क्या बात है सर, क्या बात है? यह बात है। हालांकि संजय कपूर ने फिर भी अनिल कपूर को अपना भाई माना और उनके साथ कभी भी काम करने से मना नहीं किया।
फिल्म मुबारका में उन्होंने अनिल कपूर के साथ काम किया और उनकी बेटी के साथ फिल्म जोया फैक्टर में भी काम किया था। तेरे लिए भाई मेरी जान है। संजय कपूर हमेशा कहते हैं कि उन्हें जिंदगी में जो भी मिला बहुत देर से मिला लेकिन फिर भी वो खुश हैं। उन्होंने अपने प्रोड्यूसर बनने का सपना भी पूरा किया और 2015 में आई अर्जुन कपूर की मूवी तेवर के प्रोड्यूसर संजय कपूर ही बने थे। उन्होंने और भी कई फिल्में प्रोड्यूस की। संजय कपूर ने लंबे समय तक महिप साधु नाम की एक ज्वेलरी डिजाइनर को डेट किया था और दोनों ने सालों तक प्यार की पतंग उड़ाई और फिर 1997 में संजय कपूर ने महिप से शादी कर ली और उसे सादू से कपूर बना लिया। उनके घर दो बच्चों का जन्म हुआ। एक बेटा जिसका नाम जहान कपूर रखा गया और एक बेटी जिसका नाम सनाया कपूर रखा गया। संजय कपूर आज भी बॉलीवुड में एक्टिव हैं और छोटा-मोटा जो भी किरदार मिलता है उसे निभाते हुए नजर आते रहते हैं। तो यह थी छुपा रुस्तम की छुपी हुई कहानी।