डीसीपी मैडम रंजीता शर्मा से मैंने निवेदन किया है कि अभी जो वर्तमान में जो मुख्य अभियुक्त बलराम शर्मा अभी पकड़ से बाहर है और जो नोटों की सुपारी दी गई है उन नोटों की रिकवरी अभी तक नहीं की गई है। इसके अलावा जो उनकी सास है व अन्य अभियुक्त हैं जो कब्जा करके मकान में रहे थे उनको भी पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
और सबसे बड़ी बात यह है कि जिस तरीके से मैंने सिंपल एप्लीकेशन दर्ज कराई थी। मैंने किसी का नाम नहीं लिखा। इसके बावजूद भी भारी मात्रा में परिवार के लोग जो पकड़ में आए तो इस बात से कैसे अंदेशा किया जा सकता है कि यह 14 करोड़ 15 करोड़ की संपत्ति जो भी है इसके लालच में आकर के इन्होंने अपनी मां को ही मार दिया तो जो मेरे जिजाजी थे दिसंबर तक दिसंबर 24 तक वो अस्पताल में भर्ती रहे थे।
भर्ती होने के बाद में उनको प्राइवेट जगह पे बलराम और आयुष मेरी भांजी ने रखा था और उसके बारे में किसी भी व्यक्ति को जानकारी नहीं दी थी। 9 अप्रैल 2025 को जरिया मैसेज के द्वारा मुझे पता लगा जो मेरी भांजी ने भेजा था तब मैं जाके हॉस्पिटल में मिला डॉक्टर से संपर्क किया तो डॉक्टर से पूछा क्या वर्तमान में क्या पोजीशन है तो उन्होंने कहा कि भाई अभी तो देखो होप देना मुश्किल है आपके लिए 90% आपके जिया जी का दोनों फेफड़ों में पानी भरा हुआ है लीवर पूरा 90% डैमेज है हार्ट हार्ट का जो स्थिति है वो 90% ब्लॉक है तो होप तो हम नहीं दे सकते लेकिन हम डॉक्टर हैं अंतिम समय तक हम प्रयास करेंगे करेंगे जो हमारा कर्म है हम हमारा करेंगे उस दिन से लेके जब मैंने बच्ची संपर्क किया तो उसके पास कोई ठोस जवाब नहीं था
तो 3 महीने के ड्यूरेशन में जब निवे हॉस्पिटल में वो अच्छी रिकवर हो गए थे तो तीन सा 3 महीने जो इन्होंने अंडरग्राउंड रखा है कहां रखा है क्यों रखा है यह संदेह के घेरे में और अचानक आकर के उनको भर्ती करा देना ये कहीं ना कहीं अगर पुलिस इन्वेस्टिगेशन करे तो निश्चित रूप से यह बात सामने आएगी कि मेरे जीजाजी की मृत्यु में भी इन आयुष बलराम का 100% हाथ होगा क्योंकि सारा लालच प्रॉपर्टी का शुरू से ही चल रहा है। मेरा नाम एडवोकेट चंद्र प्रकाश शर्मा है। राजस्थान क्यों आपको लगता है कि उसने पिता की हत्या की है?
क्या पता चला? देखिए जो उस आयुषी लड़की जो है उसने प्रॉपर्टी के लालच में अपनी मां की हत्या की है और टोटल जो संपत्ति थी लगभग 14 करोड़ की संपत्ति थी जिसमें पांच बीघा खेत है और दो प्लॉट हैं इसको हथियाने के लिए और उसके अलावा जो अनुकंपा पर जो उसकी मां को पिताजी की जगह जो उसकी मां की नौकरी मिली थी उस नौकरी को हथियाना वो चाहती थी और वो यह चाहती थी कि किसी भी तरीके से नौकरी जो है उसको मिल जाए और लेकिन लेकिन वो किसी भी यह नहीं चाहती थी कि मां जो है वो नौकरी करे।
इसी ये बात तो सारी हो गई है। ये तो में कि इसमें वो पिता की उसने की है। देखिए उसके पिताजी जो थे पहले न्यूक अस्पताल में एडमिट थे जिनको ब्रेन ट्यूमर था और हॉस्पिटल में लगभग 90% पिताजी उसके बिल्कुल ठीक हो गए थे। लेकिन उस लड़की ने आयुषी ने जो है जबरदस्ती हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराकर उसको किसी अन्य जगह पे किराए का कमरा लेकर रखा था