एक तरीके से देखिए तो लव ट्रायंगल्स और क्राइम बहुत पुरानी बात है सदियों पुरानी। लेकिन जाहिर है अभी की जो युवा पीढ़ी है रिश्तों के मामले में सामाजिक और पर्सनल चॉइस के कॉन्फ्लिक्ट में और शायद हिडन क्रिमिनल टेंडेंसीज। तो ये सब मिलके जो हम देख रहे हैं तीन चार पांच साल से बढ़ता जा रहा है और इस पे कहीं रोक लगनी होगी। मुझे लगता है एक बहुत कॉम्प्रहेंसिव प्रोग्राम
चाहिए होगा। नॉट जस्ट पुलिसिंग बट एजुकेशन द बेसिक रिस्पेक्ट ऑफ़ समबडीज़ लाइफ वो नहीं हो रहा ना। हम सेम थिंग हैपेंड इन इंदौर एंड आफ्टर दिस वही तो काफी काफी बढ़ता जा रहा है और मुझे लगता है प्रेम संबंध का जो प्रेशर होता है ना वो इंसान के लॉजिक को थोड़ा गड़बड़ कर देता है। सो दैट इज वेयर वी नीड मोर ऑफ अवेयरनेस एंड हेल्प इन टाइम। सर इसमें पेरेंट्स का क्या रोल आप कहेंगे या पेरेंट्स को [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] किस तरह से गाइड करना चाहेंगे? मुझे लगता है कि यंग यंग व्यक्तियों को हां ये बड़ा नाजुक है क्योंकि यंग यंग व्यक्तियों को आजकल के वक्त में प्राइवेसी बहुत पसंद है और सही भी है।
तो रिश्तों के बारे में संबंध के बारे में प्राइवेसी मेंटेन करेंगे लेकिन अपने प्रेशर्स बताएंगे नहीं। तो अगर परिवार में या दोस्तों में वो माहौल हो सके जो भी अपनी परेशानियां हैं वो इंसान व्यक्त करें। एटलीस्ट एट डेडली एंड तो नहीं होगा ना। हम सर इस पर्टिकुलर केस में पुणे केस में जहां तक कि उसका एक्यूज़्ड का कहना है कि नहीं चाहते थे कि फैमिली को ह्यूमिलेशन फेस करना पड़े लेकिन इस हद तक स्टेप उठाना क्या कहेंगे इस यहां पे यहां पे जैसे मैंने हमेशा कहा है
मनो मनोरोग एक ग्रुप है मानसिक बीमारियां मनोविकृति अलग चीज है तो जो क्रिमिनल टेंडेंसीज है हिडन वो ऐसे वक्त में अगर बाहर आ जाती है तो उसको हम मनोरोग से कंफ्यूज भी ना करें मानसिक बीमारियों की तरफ पॉजिटिव एटीट्यूड बनता जा रहा है। है ना? तो मनोविकृति को हमें फर्क करना पड़ेगा मनोरोग से। तो इसके लिए काउंसलिंग की जरूरत है सर यहां पे। काउंसलिंग की जरूरत है। जल्दी से आइडेंटिफाई किया जाए। जो व्यक्ति ऐसे सस्टेप्टबल हो उनको सपोर्ट किया