क्या आपने कभी सोचा था कि जिस अफगानिस्तान को पूरी दुनिया ने उसके हाल पर छोड़ दिया वहां भारत एक ऐसा कृषि फोड़ने जा रहा है जिससे पूरा दक्षिण एशिया दहल गया है। जी हां, पाकिस्तान हाथ फैलाकर खड़ा रह गया। बांग्लादेश और नेपाल बस देखते रह गए और भारत ने अफगानिस्तान के लिए अपनी तिजोरी और तकनीक के दरवाजे एक साथ खोल दिए।
दिल्ली के गलियारों से निकली यह खबर इस्लामाबाद से लेकर ढाका तक खलबली मचा रही है। आखिर शिवराज सिंह चौहान ने तालिबान के मंत्री के कान में ऐसा क्या कह दिया कि रातोंरात भारत और अफगानिस्तान के सदियों पुराने संबंध सुपरफास्ट मोड में आ गए हैं। क्या यह पाकिस्तान की घेराबंदी का नया मास्टर प्लान है?
आज की रिपोर्ट में हम भारत के दिए हुए खजाने को लेकर आपको खबर बताएंगे जिसने अब पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। नमस्कार जय हिंद मैं हूं आयुष और आप देख रहे हैं भारत तक। दरअसल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमारी की यह मुलाकात सिर्फ एक प्रोटोकॉल नहीं थी। यह अफगानिस्तान की तकदीर बदलने वाला ऐलान था। भारत ने साफ कर दिया और कह भी दिया कि वह अफगानिस्तान को सिर्फ दान यानी एड नहीं देगा बल्कि उसे भी आत्मनिर्भर बनाएगा।
जैसे कि उसने क्रिकेट में बनाया है। यानी भारत ने बनाया अफगानिस्तान को। अब भारत ने अफगानिस्तान को वो तकनीक देने का वादा किया है जिसे हासिल करने के लिए दुनिया के बड़े-बड़े देश तरसते हैं कि भारत हमें दे दो। भारत के पास क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर का जो खजाना है वह अब काबुल और कंधार के खेतों में लहलहाएगा। गेहूं, मक्का और आलू की ऐसी किस्में जो रेगिस्तान में भी सोना उगलेंगी, अब भारत से अफगानिस्तान भेजी जा रही हैं।
अब जरा नजर डालिए उन पड़ोसियों पर जो इस खबर से सदमे में आ गए हैं। सबसे पहला है नापाक मुल्क पाकिस्तान जहां का पानी ठप है। पाकिस्तान हमेशा से अफगानिस्तान को अपना रणनीतिक बैकयार्ड समझता है, मानता है। लेकिन आज जब पाकिस्तान खुद दाने-दाने को मोहताज है। अफगानिस्तान ने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाकर पाकिस्तान के मुंह पर तमाचा जड़ दिया है। दूसरे नंबर पर है बांग्लादेश और नेपाल ये दोनों देश अक्सर जरूरतों के लिए भारत और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं।
लेकिन इस बार भारत ने अफगानिस्तान की मदद करके इन दोनों देशों को दिखा दिया बता दिया कि जो भारत के साथ खड़ा रहेगा भारत उसके विकास के लिए अपनी आखिरी हद तक जाएगा। भारत का मैसेज बिल्कुल साफ है और भारत ने संदेश दे दिया है कि हम मदद वहां करते हैं जहां नियत साफ होती है। अब इस पूरी डील की सबसे बड़ी ताकत है आईसीएआर यानी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद। अफगान डेलीगेशन ने साफ कहा भारत आकर कि गेहूं उनकी अर्थव्यवस्था की रीड है और भारत के पास गेहूं की ऐसी कई किस्में हैं जो बायोफर्टिफाइड हैं। यानी इनमें पोषण भी ज्यादा है और यह कम पानी में जिंदा रह सकती हैं। अफगानिस्तान में पानी की भारी कमी है। यह आपको पता होना चाहिए।
भारत अपनी माइक्रो इरीगेशन और चेक डैम की तकनीक वहां पर ले जा रहा है। इसका मतलब है कि अब अफगान किसान बारिश के भरोसे नहीं बल्कि भारतीय तकनीक के दम पर तीन-तीन फसलें ले जाएंगे। यह तकनीक का ऐसा ट्रांसफर है जिसने रातोंरात तालीबान को भारत का मुरीद बना दिया। तो वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों से बात करते हुए एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने साफ कह दिया कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंध है और यह बयान पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है। भारत याद दिला रहा है कि मौर्य काल से लेकर आज तक हमारा संबंध और संस्कृति का है। अब शिवराज सिंह चौहान ने आगे क्या कुछ कहा आप खुद सुनिए। भारत और अफगानिस्तान दोनों देशों के संबंध अत्यंत प्राचीन है और आज अफगानिस्तान के कृषि मंत्री और उनके प्रतिनिधि मंडल के साथ बहुत दोस्ताना माहौल में बातचीत हुई है।
सहयोग के कई क्षेत्र हैं। अफगानिस्तान चाहता है कि रिसर्च के क्षेत्र रिसर्च के क्षेत्र में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने जो कृषि के क्षेत्र में उन्नति की है, अलग-अलग वैरायटीज के बीज बनाए हैं। नई कृषि पद्धतियां हैं भारत की। सिंचाई पानी का बेहतर उपयोग। उन सब क्षेत्रों में कैपेसिटी बिल्डिंग का मामला है। उनकी अपेक्षा है कि आईसीआर और हमारी संबंधित संस्थाओं और उनकी समकक्ष संस्थाओं के बीच में सहयोग का आदान प्रदान हो और हमारे देश को भी वह कई क्षेत्रों में सहयोग करना चाहते हैं।
तो कृषि और संबंधित क्षेत्रों पर बहुत विस्तृत और व्यापक चर्चा हुई है। ड्राई लैंड एग्रीकल्चर जो शुष्क खेती है हमारी तो उनकी तो परिस्थितियां वैसी है कि पानी कम है तो ऐसे कई क्षेत्रों पर एक दूसरे को सहयोग करेंगे उसकी व्यापक पैमाने पर चर्चा हुई है और सहयोग के कई क्षेत्र है जिन पर हम लोग मिलकर काम करेंगे। इस बैठक का अंत एक रोड मैप के साथ हुआ है। दोस्तों एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाया जा रहा है जो हर महीने प्रगति की समीक्षा करेगा। इसका मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि यह सिर्फ घोषणा नहीं है। यह हकीकत है। भारत अब अफगानिस्तान के बाजारों में अपनी बीजों और कृषि उत्पादनों के लिए एक नया रास्ता खोल चुका है। अब आप जरा सोचिए कि जब अफगानिस्तान की धरती पर भारतीय तकनीक से अनाज होगा तो वहां के लोगों के दिल में भारत के लिए कितनी जगह होगी। यह निवेश यह जिस तरह से व्यापार है वो भविष्य का निवेश है और भारत ने एकदम साफ कर दिया है साबित कर दिखाया है कि वो दुनिया का विश्व गुरु क्यों है।
एक तरफ दुनिया युद्ध की बातें कर रही है और कर भी रही है आप देख रहे हैं और दूसरी तरफ भारत बीज और तकनीक बांटकर शांति और समृद्धि ला रहा है। पाकिस्तान और बाकी पड़ोसियों के लिए यह सीखने का वक्त है कि तरक्की बम से नहीं चीजों से आती है। बीजों से आती है।