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मिर्जापुर में मछली की जगह जाल में फसी रहस्यमय बोरी जिसमे निकले दर्जन…

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आज से पहले आपने शायद ऐसा कोई वाक्या सुना होगा। आप तस्वीरें देख रहे हैं। दरअसल मछली पकड़ने गए मछुआरे। जाल फेंका। मछली नहीं आई जाल के अंदर बल्कि पासपोर्ट से भरा एक रहस्यमय बोरा हाथ लग गया। यानी कि एक बोरा जिसके अंदर दर्जनों पासपोर्ट जी हां, यह वही पासपोर्ट है जिसकी तस्वीरें दिखा रहे हैं। यह हुआ यूपी के मिपुर में। सुबह का वक्त था, सुबह का पहर था। तालाब के किनारे कुछ मछुआरे रोज की तरह अपना जाल लेकर पहुंचे थे।

इस उम्मीद में कि जाल में अच्छी मछलियां आएंगी तो दिन की कमाई ठीक-ठाक हो जाएगी। लेकिन जाल पानी में डाला जाता। कुछ देर इंतजार किया जाता और फिर अचानक जाल कुछ भारी सा महसूस होने लगा। उनको लगा कि भाई आज शायद कोई बड़ी मछली हाथ लग गई। लेकिन जैसे-जैसे जाल बाहर निकलता गया यह हैरानी और बढ़ती चली गई। जाल में कोई मछली नहीं थी। जैसा कि हमने आपको बताया एक बंद बोरी में यह दर्जनों पासपोर्ट जो आपको दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण की भीड़ लग गई। गांव वाले आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। बोरी को खोला गया। जैसे ही बोरी खोली गई वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए। कंकड़ पत्थरों के बीच दबे हुए थे। एक दो नहीं बल्कि पूरे 26 पासपोर्ट। जी हां, 26 पासपोर्ट एक साथ तालाब के अंदर और वो भी एक बोरी में भर कर रखे गए। यह देखकर हर कोई हैरान रह गया। किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर इतने पासपोर्ट तालाब में पहुंचे कैसे?

किसने इन्हें फेंका? और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर इन्हें फेंका क्यों गया? मामला मिर्जापुर के कछुआ क्षेत्र के मेताई गांव का बताया जा रहा है। यहां का तुलापुर इलाका है जहां ये घटना घटी है। जैसे ही ये खबर आई यह पता चला आग की तरह यह खबर फैल गई। देखते ही देखते आसपास के गांव में लोग पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर एक ही एक ही सवाल था। ये किसी बड़े राज की शुरुआत है क्या? लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। मामले में ट्विस्ट तो उसके बाद सामने आता है। गांव वालों का दावा है कि ये पहली बार नहीं हुआ है।

यह बताया जा रहा है कि करीब एक हफ्ते पहले भी इसी इलाके में चार और पासपोर्ट मिले थे। यानी अब कुल 30 पासपोर्ट मिलने की बातें सामने आ रही हैं। अब जरा सोचिएगा अगर पहले चार पासपोर्ट मिले फिर एक हफ्ते में एक हफ्ते बाद 26 और मिल गए तो क्या यह सिर्फ सहयोग कहा जा सकता है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक बरामद गए पासपोर्ट से एक पासपोर्ट इसी गांव के एक व्यक्ति का भी निकला है। यानी मामला और ज्यादा रहस्यमय हो गया है। पहले सुनिए गांव वालों का क्या कुछ कहना है इस पूरे मामले पर। आपका झुनझुन।

यह पासपोर्ट कहां मिला था? पुखरा तालाब में। कौन सा तालाब है? ये मुलबा पुखरा तुलापुर में बस बाबा मंदिर बस बाबा मंदिर ऊपर मछली मरा था तालाब में। तो उसी जाल में फंस के ऊपर आया तो लोग कहे कि इसमें क्या है? इसमें क्या है? तो लोग बहरे निकाले तो खोले तो उसमें गिट्टी बोरी था। बोरी में गिट्टी भर के पासपोर्ट भर करके और मुंह ओकर बांध करके तालाब में फेंक दिए। कितना पासपोर्ट है ये? है हमारे पास है ए टाइम 26 है। अच्छा सूचना पुलिस को मिला। हां पुलिस के सूचना मिला तो पुलिस बोले कि कल लेके आना है थाने पर।

अगर पासपोर्ट असली है तो फिर उनके मालिक कौन है? क्या ये सभी लोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं? क्या यह किसी एजेंट ने इन दस्तावेजों को इकट्ठा किया था? गया या फिर किसी ने सबूत मिटाने के लिए इन्हें तालाब में फेंक दिया। इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। घटना की सूचना तुरंत डायल 112 पर दे दी गई। पुलिस भी मौके पर पहुंची।

मामले की जानकारी ले ली गई। जांच शुरू करने की बात भी कही जा रही है। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने गांव वालों की नाराजगी बढ़ा दी है। गांव वालों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद कोई अधिकारी पासपोर्ट लेने नहीं पहुंचा। उन्होंने उन्हें उन्हें कहा गया कि वह खुद अगले दिन पासपोर्ट थाने में जमा कर दें। यहीं से एक नया विवाद भी शुरू हो गया। गांव वालों का कहना है कि वो रोज दिहाड़ी मजदूरी करके अपना घर चलाते हैं। अगर वो थाने जाएंगे तो कहीं उन्हें उन्हें ही गवाह बनाकर बार-बार ना बुलाया जाए।

वो मतलब कानूनी पछड़ों में ना फंस जाए। ये डर उन्हें है। और अगर ऐसा हुआ तो उनकी रोजीरोटी पर असर पड़ सकता है। गांव वालों का सवाल है कि जब उन्होंने जिम्मेदार नागरिक की तरह पुलिस को सूचना दे दी तो फिर बरामद दस्तावेजों को कब्जे में लेने की जिम्मेदारी पुलिस की क्यों नहीं है? हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान से देखा जा रहा है, रखा जा रहा है।

लेकिन इस बीच गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई इसे फर्जी पासपोर्ट रैकेट से जोड़कर देख रहा है। कोई मानव तस्करी के एंगल की बात कर रहा है। तो कोई कह रहा है कि कहीं विदेश भेजने वाले किसी नेटवर्क का मामला तो नहीं। हालांकि इन सभी दावों की अभी कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। और यही बात इस कहानी को और ज्यादा रहस्यमई बना देती है। क्योंकि अभी तक यह साफ नहीं है कि पासपोर्ट असली है या नकली। वो किन लोगों के हैं? उनके मालिक कहां है? और सबसे अहम उन्हें तालाब में फेंकने वाला कौन है? क्या किसी ने किसी बड़े राज को पानी में डुबोने की कोशिश की है?

या किसी नेटवर्क के सबूत मिटाए जा रहे थे या फिर इसके पीछे कोई बिल्कुल अलग कहानी छिपी है जिसका अंदाजा अभी किसी को नहीं है। फिलहाल तालाब से निकली इस बोरी ने जो पासपोर्ट से भरी हुई उसने मिर्जापुर के माहौल में सवालों का ऐसा जाल बिछा दिया है जिससे निकलना फिलहाल आसान नहीं दिख रहा है। एक तरफ 26 पासपोर्ट दूसरी तरफ पहले मिले चार पासपोर्ट और बीच में ढेर सारे अनसुलझे सवाल आप सबकी निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी है क्योंकि इस रहस्यमय बोरी का सच जो भी होगा वो सिर्फ मिर्जापुरी नहीं बल्कि कई लोगों को चौंका सकता है। आखिर तालाब के पानी में छिपा ये राज क्या है? किसके हैं ये पासपोर्ट? यह किसकी करतूत है और कौन है वो शख्स जिसने इन्हें पानी के हवाले कर दिया?

इन सवालों के जवाब अभी तलाशे जा रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि मछली पकड़ने निकले मछुआरों ने उस दिन सिर्फ एक बोरी नहीं निकाली है बल्कि शायद एक ऐसे रहस्य का धागा पकड़ लिया जिसकी पूरी कहानी अभी सामने आना बाकी है। ये जो घटना यूपी के मिर्ज़ापुर से आई है।

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