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माधुरी से जबरदस्ती और संजय दत्त की बर्बादी… फिरोज़ खान के वो खौफनाक राज!

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तेरे चेहरे में वो जादू है। आज हम बात करेंगे गुजरे जमाने के एक ऐसे एक्टर और डायरेक्टर की जिसे पहला स्टाइलिश स्टार कहा गया। हमारे खानदान में जब बच्चा पैदा होता है उसे सबसे पहली चीज यही सिखाई जाती है कि इस दुनिया में भगवान के सिवा किसी के सामने अपना सर नहीं झुकाना। समझे? वो ऐसा फिल्म मेकर था जिसने पहली बार बॉलीवुड में वेस्टर्न लुक और स्टाइल को दिखाया। एक समय था जब इस डायरेक्टर की फिल्मों को सबसे अलग और बेहतरीन माना जाता था। के नाम से जानते होंगे। लेकिन असल में उनकी पहचान सिर्फ इतनी नहीं थी बल्कि इससे पहले वह अपना पूरा एक दौर देख चुके थे। तो हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के सबसे हैंडसम और स्टाइलिश एक्टर्स में से एक रहे फिरोज खान की। क्या खूब लगती हो? बड़ी सुंदर दिखती हो। आखिर क्यों उन्हें एक दबंग और गुंडा डॉक्टर कहा जाता था? क्या सच में उनका संबंध अंडरवर डॉन दाऊद इब्राहिम से था? कैसे विनोद खन्ना उनके दोस्त से जाने दुश्मन बन गए थे? फिरोज खान की मूवीज के सीन जरूरत से ज्यादा बोल्ड और विवादित क्यों होते थे? लव यू। आई वा लव यू। ये क्या है? कैसे उन्होंने एक सीधी साधी हिंदू लड़की से शादी की। उससे दो बच्चे पैदा किए और फिर उसे मरने के लिए छोड़ दिया। फिरोज खान सच में लीजेंड थे या फिर वह एक अडियल घमंडी और गुंडा थे। जानेंगे फिरोज खान की वह कहानी जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी। तो चलिए शुरू करते हैं। फिरोज़ खान का जन्म 25 सितंबर 1939 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका परिवार भारत का नहीं था। फिरोज खान के पिता का नाम था सादिक अली खान जो अफगानिस्तान के गजनी परिवार से थे और मां का नाम था फातिमा जो ईरान की थी और इस तरह उनका जन्म एक कट्टर मुस्लिम परिवार में हुआ था। हमको अपने मालिक से मिलने का वक्त हो गया है। और शायद आपको भी फिरोज़ खान के बचपन का नाम था जुल्फिकार अलीसा खान। वो सात भाई बहनों में सबसे बड़ी थी। बॉलीवुड के फेमस एक्टर रहे अकबर खान और संजय खान भी फिरोज खान के भाई ही थे। फिरोज खान ने बेंगलुरु से ही अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की और जब वह कॉलेज के दिनों में थे तभी उनका लुक अट्रैक्टिव लगने लगा था। उनका शरीर और चाल ढाल देखकर उनके दोस्त उन्हें हीरो बनने के लिए कहने लगे थे। रोज-रोज़ गली मोहल्ले और दोस्तों के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर फिरोज़ खान भी हीरो बनने के सपने देखने लगे थे। मैं समाजसेवक नहीं हूं शायद। एक ऐसी बहन का बदनसीब भाई हूं

जो एक दरिंदे के हाथों बेमौत मारी गई। और यही कारण रहा कि जैसे ही उनकी पढ़ाई लिखाई पूरी हुई तो वह बेंगलुरु से बंबई आ गए और फिल्मों में काम पाने के लिए संघर्ष करने लगे। शुरुआत में फिरोज़ खान को किसी बड़ी मूवी में काम नहीं मिला। इसलिए वह बी ग्रेड और सी ग्रेड मूवीज में काम करने लगे। आकाश पे एक बादल भी नहीं नदियां में घंटा घेर आई है। फिरोज खान ने पहली बार 1956 में आई मूवी हम सब चोर में काम किया था जिसमें उनका बहुत ही छोटा सा किरदार था। इसके बाद उन्हें काम मिलने लगा और उन्होंने कुछ और मूवीज में छोटे-मोटे किरदार निभाए। 1959 में आई मूवी दीदी जिसमें हीरो थे सुनील दत्त और इस मूवी का यह गाना हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत लेकिन जब आपने कभी ना कभी जरूर सुना होगा। इस मूवी में फिरोज़ खान को एक नौकर का किरदार मिला था जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। 1960 में आई मूवी घर की इज्जत जिसमें पहली बार फिरोज़ खान ने एक दमदार और लीड रोल निभाया। वह अलग बात है कि लोगों ने उनसे ज्यादा ध्यान जॉनी वॉकर पर दिया जो कॉमेडी कर रहे थे। नीली नीली काली-काली पीली पीली गोरी-गोरी बाहों का श्रृंगार ले लो। इसके बाद फिरोज़ खान को एक हॉलीवुड मूवी टार्जन गोस टू इंडिया में काम करने का मौका मिला। 1962 में आई मूवी रिपोर्टर राजू जिसमें फिरोज़ खान का किरदार बड़ा दमदार रहा। लेकिन उस समय रिपोर्टर को लोग देखना ही जरूरी नहीं समझते थे। समझते तो आज भी नहीं है लेकिन जबरदस्ती देखना पड़ता है। भाई इसके बाद बह रानी में उन्होंने गुरुदत्त के साथ काम किया और इसके बाद आई चार दरबेज जिसमें फिरोज़ खान हीरो बनकर हीरोइन के साथ रोमांस करते हुए नजर आए। यह पहली मूवी थी जिसमें उन्होंने लीड रोल में काम किया। हीरोइन के साथ गाने भी गाए और मूवी भी बड़ी चर्चित रही। इसके बाद सुहागन और सैमसन जैसी मूवीज में भी फिरोज खान ने काम किया। लेकिन इन मूवीज में वह मेन लीड में नहीं थे। 1965 में आई राजेंद्र कुमार की बेहतरीन मूवी आरजू और राजेंद्र कुमार की मूवीज की तो बात ही अलग होती थी। जिन्हें उस समय का जुबली कुमार कहा जाता था। ना दिल होश में है ना हम होश में है नजर का मिला। इस मूवी में फिरोज़ खान ने एक सपोर्टिंग किरदार निभाया। लेकिन वो किरदार इतना दमदार रहा कि हीरो को टक्कर देता था। इसके बाद आई तीसरा कौन? लेकिन जनता यह जानने के लिए थिएटर में गई ही नहीं कि तीसरा कौन? अच्छा सनम कर ले सितम। और यह मूवी फ्लॉप हो गई। 1965 में आई मूवी ऊंचे लोग जिसमें पहली बार फिरोज खान ने दादा मुनि और राजकुमार के साथ काम किया और राजकुमार के साथ यही उनका आखिरी काम भी था क्योंकि शायद राजकुमार ने उन्हें अपने रौपदार डायलॉग सुना दिए। सुना है तुम बहुत बड़े दादा बन गए हो। हां राणा हां नहीं कहते। राणा कुंजी कहते हैं जिनसे दोनों में ठन गई और फिर दोबारा दोनों ने कभी एक साथ काम नहीं किया। हालांकि यह मूवी बहुत अच्छी थी और सच में फिरोज़ खान का लुक भी इतना अट्रैक्टिव था जिसे देखकर लड़कियां पागल हो जाती थी। आजा रे मेरे प्यार तेरा ही राह निहारी। उन्हें सबसे गुड लुकिंग और हैंडसम एक्टर की लिस्ट में शामिल किया जा चुका था। इसके बाद फिरोज़ खान सपेरा और लुटेरा दोनों बने और इस मूवी में भी उनका काम सबने पसंद किया क्योंकि वह नागमणि ढूंढ रहे थे। मूवी के गाने भी दिल टूटे लोगों ने खूब सुने। हम तुमसे जुदा हो के मर जाएंगे। इसके बाद भी तस्वीर 100 साल बाद मैं वही हूं। वो कोई और होगा। दिन और रात जैसी कई मूवीज में फिरोज खान ने बेहतरीन काम किया। 1967 में आई मूवी सीआईडी 909 जिसमें एक बार फिर से हीरो बनकर फिरोज़ खान ने सबका दिल जीता और फिरोज़ खान की यह मूवी शानदार रही जिसमें उनकी एक्टिंग की भी लोगों ने खूब तारीफ की। मूवी के गाने भी खूब सुने। मेरे सपनों की इसके बाद भी फिरोज़ खान की एक से बढ़कर एक मूवीज आती रही। 1967 में ही आई मूवी औरत जिसमें हीरो थे राजेश खन्ना जो इस समय पर एक स्ट्रगलिंग एक्टर थे। इस मूवी में भी फिरोज खान का लुक देखते ही बनता है। और खासकर उन पर फिल्माया गया मूवी का यह गाना। ये कौन है जिसके आने से सूरज की किरण शर्माई? जिसे आज भी लोग फिरोज खान को याद करते हुए देखते हैं। इसके बाद भी आग, आजा सनम, अंजाम, प्यासी शाम, अनजान है कोई जैसी कई बेहतरीन मूवीज में फिरोज़ खान नजर आए। फिरोज़ खान ने दूसरे एक्टर्स के साथ भी खूब जोड़ी बनाई और कई मल्टीस्टारर मूवीज में भी काम किया। जैसे धर्मेंद्र के साथ आई उनकी मूवी आदमी और इंसान जो गजब की मूवी थी और लोगों ने इसे खूब पसंद किया जिसके लिए फिरोज खान को अपने करियर का पहला बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड भी मिला था। जमीर वहां जागता है जहां जमीर हो।

हमारा जमीर मर चुका है। आत्मा सो गई है। इसी तरह राजेश खन्ना के साथ आई मूवी सफर और इसमें भी फिरोज खान ने गहरी छाप छोड़ी जिसे देखकर लोग आज भी कमेंट करते हैं कि उनके जैसा दूसरा कोई नहीं था। 1971 में आई मूवी मेला अरे आमिर खान वाली नहीं फिरोज़ खान वाली और इसमें फिरोज़ खान ने अपने ही भाई संजय खान को हीरो बनाया रुत है मिलन की साथी मेरे हारे मोहे कहीं ले और खुद सपोर्टिंग किरदार में काम किया। यह मूवी इतनी बड़ी हिट हुई जिसे आज भी लोग सर्च करते हैं। वह अलग बात है कि लोग सर्च फिरोज़ खान को करते हैं और ट्विंकल खन्ना आ जाती है। इसके बाद फिरोज़ खान ने एक पहेली से मनोज कुमार की गुमनाम जैसा फील देने की कोशिश की और कुछ मिस्ट्री जैसा लेकर वो आए। लेकिन शायद उनकी पहेली सुलझाने की किसी को फुर्सत ही नहीं थी। तो यह मूवी भी फ्लॉप हो गई। अब तक गले ना मिल सके ये और बात। इसके बाद उपासना में एक बार फिर से फिरोज खान ने अपने भाई संजय खान के साथ काम किया और यह मूवी भी ठीक-ठाक रही। इसके बाद अपराध में उन्होंने मुमताज के साथ रोमांस किया। इस मूवी की खासियत यह थी कि इसके डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी फिरोज़ खान ही थे। मतलब इसी मूवी से एक फिल्म मेकर के तौर पर फिरोज़ खान ने अपनी शुरुआत की थी। फिरोज खान हॉलीवुड मूवीस बहुत देखते थे और हमेशा सोचते थे कि हम ऐसी मूवीज क्यों नहीं बनाते? हीरो को स्टाइलिश क्यों नहीं दिखाते? हीरोइन को हॉट और बोल्ड क्यों नहीं दिखाते? उन्होंने खूब कोशिश की कि उन्हें इस तरह के रोल मिलें। वो अपनी मर्जी के स्टाइलिश कपड़े पहने और अपने लुक को अलग तरीके से दिखाएं। लेकिन कोई भी फिल्म मेकर्स उन्हें इस तरह के रोल ऑफर नहीं करता था और ना ही फिरोज़ खान की सुनता था। गम का बोझ हर इंसान को अकेले ही धोना पड़ता है। तुमने किसी से कभी प्यार किया है? बोलो ना। यही कारण था कि फिरोज़ खान ने सोच लिया था कि अब वह खुद फिल्में बनाएंगे। खुद डायरेक्टर और प्रोड्यूसर बनेंगे और अपने मन की मूवी बनाएंगे। तो फिर उन्होंने डायरेक्टर प्रोड्यूसर बनकर अपराध बनाई। जिसमें उन्होंने सब कुछ फिल्म इंडस्ट्री से हटकर किया। इस तरह वो एक एक्टर से डायरेक्टर बन गए और एक ऐसे स्टाइलिश फिल्म मेकर बने जिसकी फिल्मोग्राफी में स्टाइल था। फिर कशमकश में रेखा के साथ उन्होंने रोमांस किया और रेखा को मिलन का फायदा बताने लगे। जितना जरूरी मन का मिलन तन का मिलन उतना वाओ 1974 में दारा सिंह की एक बेहतरीन मूवी आई किसान और भगवान जिसमें फिरोज खान ने भी सपोर्टिंग किरदार निभाया था और गीता बाली के साथ जंगल में मंगल करते हुए गाने भी गाए। इसके बाद साधना ने कहा गीता मेरा नाम और फिरोज़ खान एक बार फिर से सुनील दत्त के साथ नजर आए और यह मूवी भी बहुत अच्छी थी। फर्ज और इंसाफ के नाम पर जिंदगियां कुर्बान कर देने वाले जॉनी आज तेरे हाथ क्यों कांप रहे हैं? यह तेरी कौन लगती है? इसके बाद आई एक ऐसी मूवी जिसने फिरोज़ खान की जिंदगी बदल दी। मूवी का नाम था खोटे सिक्के और इस मूवी में पहली बार फिरोज़ खान एक डसिंग और दमदार किरदार में नजर आए। यह वो मूवी बनी जिसके बाद फिरोज़ खान की इमेज ही बदलने वाली थी। मतलब अभी तक फिरोज़ खान एक रोमांटिक हीरो थे। लेकिन अब वो एक ड्रेसिंग और दमदार एक्टर दिखने वाली थी। चोरी चाहे एक पैसे की हो या लाख रुपए की चोरी चोरी है। आप आधे चोर एक चौथाई चोर ऐसे चोर नहीं बन सकते। या तो आप चोर हैं या एक शरीफ आदमी। इसके बाद फिरोज़ खान ने एक से बढ़कर एक मूवीज में काम किया जिनमें अनजान राहें, इंटरनेशनल क्रूक, काला सोना जैसी मूवीज शामिल रहीं। इसके बाद फिरोज़ खान ने एक ऐसी मूवी बनाई जिसने उन्हें अमर कर दिया। मूवी का नाम था धर्मात्मा जिसके डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी वही थे और धर्मात्मा इतनी बड़ी हिट हुई कि लोग इसे आज भी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन मूवीज में से एक मानते हैं। यह बॉलीवुड की पहली मूवी थी जो अफगानिस्तान में शूट हुई थी। तेरे चेहरे में वो जादू है बिन डोर खींच। इसके गानों ने वो तहलका मचाया कि लोग इसमें खो गए और आज भी लोग इन्हें सुनते हैं। मूवी में फिरोज खान की दो हीरोइन थी। एक तरफ थी रेखा जो उस समय बॉलीवुड में अपनी रेखा चमकाने में लगी हुई थी। लाखों मरते होंगे। हां हां लाखों मरते होंगे। और दूसरी तरफ थी ड्रीम गर्ल यानी कि हेमा मालिनी जिसके साथ फिरोज खान की जोड़ी ऐसी जमी कि इनके गाने आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। क्या खूब लगती हो बड़ी सुंदर दिखती हो। इसके बाद कबीला, शंकर शंभू, नागिन, दरिंदा और चुनौती यह ऐसी मूवीज रही जिनमें फिरोज खान का नाम और किरदार दोनों बदल गए थे। और हर कोई अब उन्हें मोस्ट हैंडसम एक्टर इन बॉलीवुड कहने लगा था। जिसके पास स्टाइल था, लुक था और भारी आवाज थी। जिसे देखकर थिएटर में अपने आप सीटियां बजने लगती थी।

जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए तो बन जाए। 1980 में फिरोज खान ने एक और बेहतरीन मूवी बनाई जिसका नाम था कुर्बानी और मूवी में उन्होंने मेन हीरो के तौर पर विनोद खन्ना को लिया और कुर्बानी वाला विनोद खन्ना अगर आपने नहीं देखा तो समझो कुछ नहीं देखा बचना ए हसीनों तो मैं आ गया कुर्बानी फिरोज़ खान की बनाई गई वो मूवी बनी जिसे आज भी लोग बॉलीवुड की टॉप मूवीज में से एक मानते हैं। क्या देखते हो सूरत तुम्हारी क्या चाहते हो फिर चाहे मूवी में हीरो का ड्रेसिंग लुक हो हीरोइन का बेस्टन लुक हो मूवी के गाने हो या फिर मूवी का डायरेक्शन हो हर तरीके से यह मूवी कल्ट बनी और फिरोज खान की गिनती नामी डायरेक्टर्स में होने लगी इसके बाद भी लहू पुकारेगा, खून और पानी, कच्चे हीरे जैसी मूवीज भी आई। 1986 में फिरोज खान ने अनिल कपूर को हीरो लेकर मूवी बनाई जानबाज जिसमें हीरोइन थी काका की काकी मतलब डिंपल कपाडिया। जब तेरी सूरत देखो। इस मूवी के लिए भी फिरोज खान को बहुत तारीफें मिली और खासकर घास वाले बोल्ड सीन के लिए जिसे देखकर सब ने कहा कि फिरोज खान ने क्या रोमांटिक सीन शूट किया है। जानबाज मूवी का भी सब कुछ हिट रहा। फिर चाहे कहानी हो, एक्टिंग हो या फिर मूवी के गाने। तेरे मिलन की लगन में हमें आना पड़ेगा दुनिया। ओह माय गॉड। वाओ और खुद फिरोज खान ने श्रीदेवी के साथ रोमांस किया और उनका रोमांस भरा यह गाना भी किसी को नहीं मिलता यहां प्यार बड़ा हिट हुआ। 1988 में आई मूवी दो वक्त की रोटी और यह भी फिरोज़ खान की बनाई हुई एक शानदार मूवी रही। इस मूवी से जुड़ा किस्सा भी बड़ा रोचक रहा। यह मूवी 1976 में ही बनना शुरू हो गई थी। लेकिन फिर किसी कारण से इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद 1980 में इसे दोबारा शूट किया गया। लेकिन यह मूवी पूरी नहीं बन पाई और इसी बीच संजीव कुमार की भी मौत हो गई। इस मूवी के डायरेक्टर संजीव कुमार के भाई नकुल जरीवाला थे। लेकिन इसी बीच उनकी भी मौत हो गई तो यह मूवी दोबारा से बंद हो गई। तूने मुझे बुलाया शेरावा लिए। मैं आया। जब फिल्म मेकर्स को लगा कि अब यह मूवी कभी नहीं बनेगी तो उन्होंने इस मूवी के कुछ सीन सनी देओल और अनिल कपूर की मूवी जोशीले में फिल्मा लिए। लेकिन फिर 1988 में अचानक से फिरोज खान ने इसे दोबारा शुरू कर दिया और जोशीले से पहले रिलीज भी कर दिया था। मूवी का कुछ हिस्सा शूट किया गया और कुछ पुराना ही लगा दिया गया था। यही कारण रहा कि मूवी के कुछ सीन में जो एक्टर जवान दिखते हैं वो अगले ही सीन में अधेड़ लगने लगते हैं। मतलब एक्टर्स का लुक ही बदल जाता है। तुम्हें याद होगा मैंने तुमसे एक दिन कहा था कि अगर मेरे और तांटिया के बीच कोई आएगा तो दो गोलियां चलेंगी। इस तरह फिरोज़ खान की एक अलग ही तरह की मूवी बन गई जो जब रिलीज हुई तो कोई इसे देखने ही नहीं गया। मतलब 10 साल का इंतजार, तीन-तीन बार शूटिंग, भारी स्टार कास्ट और बजट लेकिन फिर भी मिला कुछ भी नहीं। जो दिल में इसके बाद इसी साल फिरोज़ खान ने एक और मूवी बनाई जिसमें विनोद खन्ना ने एक बार फिर से तहलका मचाया। मूवी आई दयावान जिसमें फिरोज़ खान और विनोद खन्ना साथ में नजर आए। रे मस्त लोखन का बॉडी है मेरे यार का। यह मूवी बहुत चर्चित रही और चर्चा का मुख्य कारण रहा 16 साल की माधुरी दीक्षित जिस पर जब विनोद खन्ना को ऐसे प्यार आया फिर तुम पे प्यार आया। तो इस प्यार ने पूरे बॉलीवुड में हड़कंप मचा दिया। अपने से दुगनी उम्र के विनोद खन्ना के साथ माधुरी दीक्षित ने ऐसे सीन दिए जिन्हें बाद में देखकर खुद माधुरी भी शर्मा गई और जब लोगों ने उनकी क्लास लेना शुरू किया तो उसने कह दिया कि फिरोज़ खान और विनोद खन्ना ने यह सीन उससे जबरदस्ती शूट करवाए हैं तो वह चुपचाप सब कुछ सहन करने को मजबूर थी क्योंकि वह एक बड़े डायरेक्टर हैं। चाहे मेरी जान को ले ले चाहे ईमान को ले ले चाहे मेरी जान तू ले ले।

इसके बाद 1991 में फिरोज खान एक और मूवी लेकर आए जिसका नाम था मीत मेरे मन के और इस मूवी के भी कर्ताधर्ता वही थे। इसमें फिरोज खान ने एक ठाकुर का किरदार निभाया क्योंकि इस समय पर ठाकुर वाली मूवीज का ही बोलबाला था। हर कोई ठाकुर बन रहा था। तो फिर खान ने कहा कि मैं क्यों पीछे रहूं और बस वो भी एक दमदार ठाकुर के किरदार में नजर आ गई। शेर हमेशा अकेला होता है। टोलियां तो सिर्फ भेड़ बकरियों की होती हैं। जिसने दूसरे ठाकुर यानी कि महाभारत के दुर्योधन यानी कि पुनीत इसरार के साथ दमदार डायलॉगबाजी भी की। 1992 में फिरोज़ खान ने संजय दत्त को लेकर एक मूवी बनाई जिसे आज भी लोग संजू बाबा की सबसे बेहतरीन मूवीज में से एक मानते हैं। मूवी का नाम था यलगार जिसका सब कुछ हिट था। फिर चाहे नगमा की हॉटनेस और बोल्डनेस हो, संजय दत्त का ड्रेसिंग लुक हो, मूवी के गाने हो जिन्हें आज भी लोग सुनते हैं। आखिर तुम्हें आना है जरा देर लगे। या फिर खुद फिरोज खान हो जो एक पुलिस वाले के किरदार में थे। उनके किरदार से जुड़ा एक किस्सा भी बड़ा चर्चित रहा। मूवी में उनके पिता का किरदार बड़ों के भीष्म पितामह, बच्चों के शक्तिमान और बीच वालों के मुकेश खन्ना ने निभाया था। जो असल जिंदगी में फिरोज़ खान से 21 साल छोटे थे। मतलब मूवी में उन्होंने खुद से 21 साल छोटे मुकेश खन्ना के बेटे का किरदार निभाया था। वो अलग बात है कि फिरोज़ खान ने पुलिस वाले काम सिर्फ मूवी में किए। मूवी के पीछे उनका कारनामा अलग ही था। यही वो मूवी थी जिससे संजय दत्त की बर्बादी शुरू हुई थी। क्योंकि इसी मूवी की शूटिंग के दौरान फिरोज खान ने संजय दत्त को दाऊद इब्राहिम से मिलवाया था। जिसके बाद ही संजय दत्त की जिंदगी के एल लगना शुरू हुए थे। मेरा भी यही ख्याल है विशाल कि अगर तुम्हारी मौत मेरे सिवा किसी और के हाथ हुई तो मुझे बेहद अफसोस होगा। मतलब फिरोज़ खान का अंडरवर में भी दबदबा था जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। यही फिरोज खान की आखिरी मूवी थी। जिसके बाद एक लंबे समय तक उन्होंने दूसरी किसी मूवी में काम नहीं किया और एक लंबा ब्रेक लिया और लंबे ब्रेक के बाद फिरोज खान ने 1998 में एक मूवी बनाई प्रेम अगन और अपने बेटे फरदीन खान को लॉन्च किया जिसके प्रेम में कुछ ज्यादा ही अगन थी। सूरज मुझे वो हसीन दर्द दे दो। फिरोज खान ने अपने बेटे को अपने ही प्रोडक्शन से लॉन्च किया और उसे इंडस्ट्री में उतार दिया। वो अलग बात है कि फरदीन खान कभी बड़ा स्टार नहीं बन पाया। जिसके बाद 2003 में फिरोज खान ने फरदीन को लेकर एक और मूवी बनाई जिसका नाम था जानसीन। इस मूवी से जुड़ा एक किस्सा भी बड़ा रोचक रहा। पहले इस मूवी में अक्षय खन्ना को कास्ट किया गया था। शूटिंग शुरू भी हो गई थी। लेकिन फिर अचानक से फिरोज़ खान ने अक्षय खन्ना को मूवी से निकाल दिया और अपने बेटे फरदीन खान को ले लिया और खुद भी एक बदले हुए लुक के साथ खतरनाक रोल प्ले करते हुए नजर आए। हमने खून खराबा बहुत देखा है कपूर साहब ब खुदा हमको लहू के रंग से बहुत नफरत है लेकिन क्या करें कमबख्त हमारे रगों में दौड़ता है भाई जिसने भी इस मूवी में फिरोज़ खान को देखा वो चौंक गया एक समय का हैंडसम और गुड लुकिंग एक्टर अब एक खतरनाक और दमदार लुक में नजर आ गया था जिसे देखकर ही खूंखार विलेन वाला फील आ रहा था। इस किरदार को भी फिरोज खान ने ऐसे निभाया कि उन्हें बेस्ट एक्टर इन नेगेटिव रोल यानी कि विलेन के लिए भी अवार्ड मिला और जानसीन का हीरो फरदीन होने के बाद भी पूरा क्रेडिट खुद फिरोज़ खान ले गए और फरदीन खान फिर से फ्लॉप हो गए। लेकिन फिरोज़ खान ने हार नहीं मानी और एक और मूवी बनाई एक खिलाड़ी एक हसीना। इसमें भी हीरो अपने बेटे को ही बनाया और यह मूवी भी अपने अलग तरह के डायरेक्शन के लिए चर्चित हुई। अगर दुनिया को जेब में करना है तो बस सिर्फ एक ही तरीका है। जिसे लोगों ने बहुत ही स्टाइलिश मूवी बताया। मूवी को हिट कराने के लिए फरदीन खान और हीरोइन का एक एमएमएस तक लीक कर दिया गया था ताकि लोग इसे देखने के लिए थिएटर तक भागे आए।

हालांकि यह सब करने के बाद भी फिरोज खान अपने बेटे को हिट नहीं करवा पाए और फिर उन्होंने अपने बेटे से बस यह कहा तुमसे ना हो पाएगा। 2007 में फिरोज़ खान एक बार फिर से एक दमदार और यादगार किरदार में दिखाई दिए। मूवी आई वेलकम जिसका लोगों ने बाहें फैलाकर वेलकम किया जिसका सब कुछ हिट था और फिरोज खान का आरडीएक्स का किरदार भी लोगों ने खूब पसंद किया। एक्टिंग के तौर पर फिरोज़ खान की यही आखिरी मूवी थी जिसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए एक्टिंग से दूरी बना ली। लेकिन फिरोज़ खान की असली पहचान मूवीज में नहीं बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ से थी। जिसके किस्से सुनकर ही लोग दंग रह जाते थे। तो अब हम बात करेंगे फिरोज खान की पर्सनल लाइफ की। फिरोज खान ने 1965 में सुंदरी नाम की एक एयर होस्टेज से प्रेम संबंध बनाए। उसके साथ अपनी लव स्टोरी बनाई और फिर शादी कर ली। हालांकि सुंदरी पहले से शादीशुदा थी और उनकी एक बेटी भी थी जिसका नाम था सोनिया। लेकिन फिरोज खान ने सुंदरी और उनकी बेटी दोनों को अपना लिया। शादी के बाद उनके दो बच्चे हुए। एक बेटा फरदीन खान जो आगे चलकर बॉलीवुड एक्टर बना और दूसरी बेटी लैला खान। लेकिन फिरोज खान का कहना था कि वह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते हैं और शायद इसीलिए सबसे पहले उन्होंने उसे हिंदू से मुसलमान बनाया और फिर दो मुस्लिम बच्चे भी पैदा कर लिए। अबे साले और जैसे ही बच्चे पैदा हुए तो फिरोज खान का मन अपनी जान से प्यारी पत्नी से भरने लगा और इतना भर गया कि उन्होंने बाहर मुंह मारना शुरू कर दिया। मतलब तीन बच्चों का बाप होने के बाद और लव मैरिज वाली पत्नी होने के बाद भी फिरोज खान एक दूसरी एयर होस्टेस से संबंध बनाने लगे और उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को अपनी बेटी की उम्र की लड़की के लिए छोड़ दिया

। फिरोज़ खान की जिंदगी में ज्योतििका धनराज गिर नाम की लड़की आ गई और उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया और बाद में उनकी पत्नी ने उनसे तलाक ले लिया और फिरोज़ खान ने अपनी पत्नी को भी उसी हालत में छोड़ दिया था। मतलब फिरोज खान ने अपनी पत्नी को उस समय डिवोर्स दिया जब उसकी हालत दयनीय हो चुकी थी। वो सहारे की मोहताज हो गई थी। उसके पास पालने के लिए तीन-तीन बच्चे थे और सहारा कुछ भी नहीं था। लेकिन यह सब छोड़कर फिरोज़ खान दूसरी ही लड़की के साथ मजे कर रहे थे। जितना जरूरी मन का मिलन साले। हालांकि यह रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चला और कुछ समय के बाद उस दूसरी एयर होस्टेस से भी फिरोज खान का मन भर गया और लंबे समय तक उसके साथ रहने के बाद फिरोज खान ने उसे भी छोड़ दिया। इसके अलावा फिरोज़ खान का नाम मुमताज के साथ भी जुड़ा। कहा जाता है कि फिरोज़ खान का करियर मुमताज के साथ ही शुरू हुआ था। जब वह बिग ग्रेड मूवीज में काम कर रहे थे तो मुमताज भी उन मूवीज की हीरोइन हुआ करती थी। दोनों ने लंबे समय तक साथ में काम किया और प्यार के समंदर में गोते भी लगाए। तेरे मेरे हो तेरे हालांकि यह रिश्ता भी किसी मुकाम पर नहीं पहुंच सका। इसके बाद फिरोज़ खान का नाम उनसे कई साल छोटी जिन्नत अमान के साथ भी जुड़ा और इस खबर ने भी खूब सुर्खियां बटोरी।

हालांकि यहां से भी फिरोज खान साफसथरी इमेज के साथ बच निकले। फिरोज खान सबसे ज्यादा चर्चित रहे अपने रोबदार अंदाज और ड्रेसिंग लुक के लिए। वो एकमात्र एक्टर रहे जिसने राजकुमार के साथ भी बहस की और राजकुमार उनसे बिना कुछ बोले ही चले गए। मतलब राजकुमार ने उन्हें जवाब नहीं दिया। फिरोज खान को शिकार का बहुत शौक था। मतलब इतना कि उनके फार्म हाउस पर जानवरों की खाल लटकी रहती थी। फिरोज खान को सबसे स्टाइलिश और हैंडसम एक्टर का टैग मिल चुका था। उनका लुक और स्टाइल देखकर लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी उनके दीवाने थे। तो फिर ऐसा करता हूं। ये चोटी मैं बांध लेता हूं। ये बंदिया और काजल मैं लगा लेता हूं। कैसा रहेगा? खाते में नहीं रहेगा। वो इतने मनमौजी थे कि शाम होते ही पैकअप बोल देते थे। फिरोज़ खान को रात में शूटिंग पसंद नहीं थी। फिर चाहे मूवी का सीन कितना ही जरूरी क्यों ना हो। वो फिल्म मेकर्स को अपना गुलाम समझते थे। वो कह देते थे कि मैं रात में शूटिंग नहीं करना चाहता। चाहे मूवी क

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