शाहरुख और गौरी की लव स्टोरी और उनकी शादी की कहानी तो सच में बॉलीवुड की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर गाथा है। धर्म की दीवार से लेकर तीन-तीन बार शादी करने तक, इनकी कहानी बेहद दिलचस्प है।जब दोनों ने शादी करने का फैसला किया, तो सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अलग-अलग धर्म होना। गौरी एक कट्टर पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार से थीं और शाहरुख मुस्लिम थे। गौरी के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे।दिलचस्प किस्सा: गौरी के परिवार वालों को मनाने के लिए शाहरुख ने शुरुआत में अपना नाम बदलकर ‘अभिनव’ रख लिया था ताकि उनके माता-पिता को लगे कि लड़का हिंदू है।
लेकिन सच ज्यादा दिन नहीं छुप सका। आखिरकार, शाहरुख की सादगी और उनके सच्चे प्यार को देखकर गौरी का परिवार मान गया।शाहरुख और गौरी के बीच प्यार इतना गहरा था कि उन्होंने दोनों परिवारों और कानूनी तौर-तरीकों का सम्मान करने के लिए एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार शादी की रस्में निभाईं:पहली शादी (कोर्ट मैरिज): दोनों ने सबसे पहले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज की।
यह वह शादी थी जिसमें न कोई तामझाम था, न सात फेरे और न ही निकाह। सिर्फ कागजों पर दस्तखत हुए और दोनों कानूनी तौर पर एक-दूसरे के हो गए।दूसरी शादी (निकाह): कोर्ट मैरिज के बाद मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार दोनों का निकाह हुआ, जहाँ गौरी का नाम बदलकर ‘आयशा’ रखा गया था।तीसरे शादी (हिंदू रीति-रिवाज): आखिरकार 25 अक्टूबर 1991 को दोनों ने पूरे पारंपरिक हिंदू (पंजाबी) रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।
शादी की रात का मजेदार किस्साशाहरुख खान हमेशा अपने मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनकी शादी के रिसेप्शन में गौरी के कुछ रिश्तेदार फुसफुसा रहे थे कि लड़का मुस्लिम है, क्या गौरी का धर्म बदल जाएगा?शाहरुख ने यह सुन लिया और माहौल को हल्का करने के लिए मजाक में गौरी से सबके सामने कहा, “चलो गौरी, बुर्का पहनो और नमाज पढ़ना शुरू करो!” यह सुनकर वहां मौजूद सभी रिश्तेदार हैरान रह गए थे, लेकिन बाद में सब समझ गए कि शाहरुख सिर्फ मजाक कर रहे थे। दोनों ने हमेशा एक-दूसरे के धर्म का बराबर सम्मान किया है।