इधर पिछले एक हफ्ते से हर एक की नजर पुणे की सिया पर थी और उधर पुणे से दूर मेघालय में हनीमून पर ले जाकर अपने ही पति का करने वाली सोनम बड़ी खामोशी से आजाद हो गई।
आईपीसी से बीएएनएस बनी कानून की नई धाराओं की मामूली सी हेरफेर के चलते मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम की जमानत की अर्जी बहाल रखी। आइए आपको बताता हूं कि नए और पुराने कानून में उलझकर मेघालय पुलिस ने कहां पर गलती कर दी। इधर पिछले एक हफ्ते से सभी की निगाहें पुणे की सिया पर टिकी थी। सिया और उसकी खाई वाली कहानी में सभी डूबे हुए थे।
इसी बीच बड़ी खामोशी से मेघालय से खबर आई और किसी का ध्यान तक उस तरफ नहीं गया। असल में यह खबर इंदौर की उस सोनम की थी जिसकी कहानी असल में हूबहू पुणे की सिया ने दोहराई थी। सिया तो अभी पुणे पुलिस की कस्टडी में है लेकिन इधर सोनम जमानती जिंदगी पर आजाद हो गई। मर्डर जैसे संगीन जुर्म में 11 महीने के अंदर-अंदर कोई आरोपी कातिल जमानत पर लिहा हो जाए। अमूमन ऐसी मिसाल कम ही मिलती है।
फिर सोनम ने तो जो किया उसके बाद इतनी आसानी से और इतनी जल्दी वो जमानत पर बाहर आ जाएगी। लोग [संगीत] यकीन ही नहीं कर पा रहे। सोनम को जमानत पर क्यों रिहा किया? तो इसका जवाब जब आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। शायद।
जी हां, शायद यह देश का पहला ऐसा मामला होगा जिसमें कानून की एक गलत धारा और मेघालय पुलिस की एक मामूली सी चूक ने सोनम को जेल से बाहर निकाल दिया।
दरअसल मेघालय पुलिस ने सोनम की गिरफ्तारी के बाद से जुड़े मामले में नए-नए जन्मे भारतीय न्यायिक संहिता यानी बीएएनएस की जो धारा लगाई थी वो कानून की किताबlमें तो छोड़िए किसी अदालत या पुलिस स्टेशन के पन्नों तक में दर्ज नहीं। यानी मेघालय पुलिस ने राजा रघुवंशी के कत्ल के मामले में सोनम पर जो धारा लगाई उस धारा का कोई वजूद ही नहीं है। अब जब वो धारा ही नहीं है तो अदालत को कैसे पता चलेगा कि पुलिस ने सोनम को किस जुर्म में पकड़ा है और जब पुलिस को ही पता नहीं तो पुलिस सोनम को कैसे बताएगी कि उसे किस जुर्म में उसने गिरफ्तार किया है। यह लाइनें हमारी नहीं है।
यह मेघालय हाई कोर्ट ने कहा है सोनम को जमानत देते हुए। अगर अब भी आप पूरी कहानी नहीं समझ पाए तो चलिए आसान लफ्जों में समझाता हूं। पिछले साल मई में राजा रघुवंशी के कत्ल के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।
इनमें तीन किराए के कातिल थे और एक सोनम का प्रेत। बाद में मेघालय पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की और सोनम को अपने ही पति के कत्ल के इल्जाम में आरोपी नंबर एक बनाया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में मुकदमा शुरू हो गया। मुकदमा शुरू होते ही सोनम ने शिलांग की निचली अदालत में जमानत की अर्जी लगा दी। बस यहीं से खेल शुरू हुआ।
असल में 1 जुलाई 2024 से देश में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सीआरपीसी और आईपीसी में बड़े बदलाव करते हुए न सिर्फ इनके नाम बदल दिए गए बल्कि बहुत सी धाराएं या तो हटा दी गई या फिर कई धाराओं को एक साथ जोड़ दी गई। अब आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोड या भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता यानी बीएएनएस का जन्म हो चुका था। इस बीएएनएस के तहत देश में होने वाले तमाम जुर्मों को कुल 358 धाराओं में लपेट दिया गया।
यानी बीएएनएस के तहत देश में होने वाले हर तरह के जुर्म के लिए कुल 358 धाराएं ही। अब जाहिर है आजादी के बाद से चली आ रही आईपीसी की धाराओं की जगह जब बीएएनएस और उसकी नई धाराएं आई तो आम लोगों को छोड़िए खुद पुलिस और कानून के रखवालों को इसे समझने रटने और याद करने में मुश्किलें आने लगी। मसलन पहले लोगों की जुबान पर रटा हुआ था कि आईपीसी की धारा 300 यानी केस मर्डर का है और धारा 302 यानी कितनी सजा उस मर्डर के लिए मिलेगी।
बीएएनएस में धारा 300 की जगह 100 हो गया। 101 मतलब मर्डर केस का है। जबकि बीएएनएस में 302 [संगीत] की जगह 103 नई धारा बनी। 103 यह बताती है कि मर्डर के लिए क्या सजा मिलेगी। सोनम के केस में गलती यह हुई कि मेघालय पुलिस ने बीएएनएस की धारा 103 यानी के केस की जगह 403 लिख दिया। अब क्योंकि बीएएनएस की धारा 358 पर आकर ही खत्म हो जाती है तो जाहिर है कानून की किताब में 403 नंबर की धारा कोई हो ही नहीं सकती।
बस इसी एक गलती को शिलंग की निचली अदालत ने पकड़ लिया। कोर्ट का कहना था कि जब धारा 304 है ही नहीं तो उन्हें कैसे पता चलेगा कि सोनम को किस जुर्म में पकड़ा गया है।
यानी इस हिसाब से सोनम का भी उसका जुर्म पुलिस ने नहीं बताया होगा। इसीलिए निचली अदालत ने इसी साल 27 अप्रैल को सोनम को जमानत पर रिहा करने का हुक्म सुना दिया। जाहिर है सोनम को जमानत मिल जाना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था। मेघालय पुलिस भी हैरान थी। इसी के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाई कोर्ट ने चुनौती दी। मेघालय हाईकोर्ट में इस पर लंबी बहस हुई। उम्मीद यही थी कि हाई कोर्ट निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सोनम की जमानत खारिज कर देगी।
लेकिन मेघालय हाई कोर्ट ने भी चौंका दिया। वास गिवन ऑन द ग्राउंड दैट ड्यू टू क्लेरिकल एरर सेक्शन द नंबर ऑफ़ द सेक्शन वाज़ चेंज्ड फ्रॉम फ्रॉम 103 टू 403 देयर इज़ नो 403 इन द बीएमएस एंड द ग्राउंड्स ओवर रेस इट वाज़ नॉट दैट द ग्राउंड्स ओवर रेस्ट वर नॉट मेड टू अंडरस्टैंड अह व्हेन अह द ट्रांजिट रिमांड वाज़ मेड आल्सो द ग्राउंड्स ओवर रेस्ट फॉर मीट गिवन टू टू टू अंडरस्टैंड टू द प्रोडक्शन आल्सो द क्राउस गिवन टू अंडरस्टैंड एंड द अंडरस्टुड दैट दैट शी वास रेस्टेड फॉर मर्डर बट कोर्ट हैज़ टेकन डिफरेंट स्टैंड एंड गिवन ऑर्डर दैट यू नो ग्राउंड्स ऑफ़ अरेस्ट नॉट मेड टू बी अंडरस्टुड बाय द बाय द अक्यूज़ वी हैव अपील फॉर दैट इट डस नॉट मीन दैट देयर विल बी एनी डिफरेंस इन द ट्रायल। दरअसल मेघालय हाई कोर्ट ने भी सोनम के केस में बीएएनएस की वही 403 वाली धारा पकड़ ली जो कहीं कानून में है ही नहीं।
हाई कोर्ट का कहना था कि बीएएनएस की धारा 403 जो वजूद में ही नहीं है उससे कैसे पता चलेगा कि सोनम पर इल्जाम क्या है? हाई कोर्ट का यह भी कहना था कि गलत धारा लगाने से यह भी पता चलता है कि खुद सोनम भी इस बात से अनजान थी कि पुलिस ने उसे क्यों पकड़ा। इसीलिए निचली अदालत का फैसला सही और सोनम जमानत के हकदार। मेघालय हाईकोर्ट ने 29 [संगीत] जून को इसी बिना पर मेघालय पुलिस की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया जिसमें सोनम की जमानत खारिज करने की गुजारिश की गई थी।
अब सोचिए कानून की एक छोटी सी गलती ने सोनम को वो आजादी दिला दी जो आने वाले कई बरसों तक शायद ही उसके हिस्से आने वाली थी। सोनम जमानत पर बाहर आने के बाद से ही शिलांग में रह रही। मेघालय हाई कोर्ट के फैसले के बाद खुद राजा रघुवंशी के मां-बाप भी हैरान है। मेरे को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।
अब तो बिल्कुल भी कि मतलब सोनम को मतलब जमानत की जगह मतलब जेल में डालना था तो उसको जेल में तो नहीं डाला और उसको जमानत दी गई। आपके जो वकील हैं उन्होंने क्या पक्ष रखा था आपकी ओर से? यह कुछ आपकी अंतर है। इसकी जानकारी मेरे को नहीं है। वकील ने क्या पक्ष रखा था यह विपिन को पता है। क्या बातचीत हो रही थी इतने दिनों से आपकी आपके वकील से? यह कुछ नहीं ये जो बातचीत हो रही थी ना वो तो मतलब बोल रहे थे कि नहीं सोनम को मतलब अपन सजा दिलवा के मानेंगे। मगर वो हमारा वकील ने भी क्या करा हमको कुछ समझ नहीं पड़ रही है कि सोनम जेल के अंदर होना चाहिए तो बाहर कैसे मतलब वो कर रही है। लगातार टीवी चैनलों पर भी आ रही है। अपना इंटरव्यू दे रही है। बोल रही है कि मैं बाहर ही रहूंगी। हां देखो मैं वो बाहर रहने का बोल रही है। मेरे को तो हमको तो कानून पर भरोसा था और कानून के भरोसे ही हम अभी तक बैठे थे कि कानून हमारा साथ देगा। मतलब हमारे राजा को इंसाफ मिलेगा। मगर हमको आज तक इंसाफ नहीं मिला। तो वहां की लड़के उनको क्या इंसाफ मिलेगा?
जब हमको नहीं मिला तो मतलब आगे क्या हम उम्मीद रख सकते कानून से मतलब कि इंसाफ मिलेगा। क्योंकि है ना जब सोनम ने इतना बड़ा गुनाह करा उसको छोड़ दिया है तो छोटे-मोटे उनको तो वैसे भी छोड़ सकती है सरकार मतलब कानून मतलब क्योंकि हमको कानून पे अब विश्वास नहीं है क्योंकि हमने सोचा था कि कानून हमारा साथ देगा मगर है ना कानून पे से भी हमारा विश्वास अब हटते ही जा रहा है। ये पड़ता है कि सोनम को जमानत नहीं मिलना चाहिए। अगर उसको जमानत दे दिए तो अभी आप सरकार पूरे ऑल इंडिया देख रहे कि लेडी से आदमी को क्यों मार रही है? उसकी वजह सरकार से पूछो। सरकार ने पूछा कि क्यों मार रही है? सरकार तो हमारे आंख बंद आंख बंद करके बैठी है। ऐसे औरतों को अगर सरकार छूट देती रहेगी तो कई पति मरेंगे। कई पति मरेंगे तो मेरा कहने का मतलब उसको जो जमानत नहीं उसकी रद्द करना चाहिए। क्या लगता है पुलिस ने जो वहां पर कारवाई की है जो केस डायरी उन्होंने उसकी जो केस डायरी बनी थी 790 की चाशी बनी थी उसमें एक भी धारा नहीं लगी है वो सोनम बाहर आ गई है तो जो अभी तक वो केस के जो फाइल में है अभी तक यही नहीं मालूम पड़ा कि इसको किस आधार पर छोड़ा है।
इसका फायदा वो सोनम उठा रही है। हालांकि मेघालय पुलिस ने ऐलान किया है कि अब वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। मेघालय पुलिस का यह भी कहना है कि धारा लिखने के दौरान उनसे गलती जरूर हुई और बाद में उन्होंने कोर्ट के सामने अपनी इस गलती को माना था। मगर इस एक गलती के लिए सोनम के जमानत पर बाहर आने को मेघालय पुलिस गलत मानती है। आज तक ब्यूरो