Cli

78 साल बाद इजराइल का ये ऐलान बदल देगा भारत की किस्मत !

Uncategorized

[संगीत] 1948 में अपने जन्म के बाद इजराइल पहली बार ऐसा फैसला लेने जा रहा है जिसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलेगा। जिस घटना को लेकर इजराइल यह फैसला ले रहा है, वह इजराइल के जन्म से भी 33 साल पहले यानी पहले विश्व के दौरान 1915 में हुई थी। लेकिन अब इजराइल और भारत ने मिलकर इस दबे हुए मुद्दे को जिंदा कर दिया है।

इसी साल फरवरी में लोहा भारत ने गर्म किया था। हथौड़ा अब इजराइल ने मार दिया है। भारत और इजराइल ऐसे देश को ठिकाने लगाने वाले हैं जो नासूर बन चुका है। यह कितना बड़ा खेल है आ जाएगा। दरअसल इजराइल ने अपने और भारत के सबसे बड़े दुश्मन तुर्की को बर्बाद करने के लिए एक ऐसा फैसला लिया है जो पीएम मोदी को खुश कर देगा।

नेतन याू की सरकार ने इजराइल की संसद में एक प्रस्ताव रखा जिसमें कहा गया है कि 1915 में ऑटोमन साम्राज्य जो आज का तुर्की है उसने अर्मेनिया के 15 लाख लोगों को मारा था। अब हम इस घटना को नरसंहार घोषित करने जा रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अर्मेनिया तुर्की का पड़ोसी है और दुश्मन भी। भारत पहले ही अर्मेनिया में कदम रख चुका है। अब इजराइल ने अर्मेनिया में एंट्री ले ली है।

यानी पहली बार किसी देश से बदला लेने के लिए भारत और इजराइल एक साथ उसके पड़ोस में आकर बैठ गए हैं। यहां दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में रिटायर हुए भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान इसी साल फरवरी में आर्मीनिया के उन लोगों को श्रद्धांजलि देने पहुंच गए जिन्हें तुर्कों ने मारा था। इस घटना के कुछ महीनों बाद इजराइल ने इन लोगों की को कहना शुरू कर दिया है। इजराइल ने कहा है कि तुर्की अब हमारे लिए नया ईरान है।

इजराइल ने कहा है कि जो हाल सद्दाम हुसैन का हुआ था वही एर्दवान का होगा। अर्मेनिया को लेकर इजराइल का यह फैसला इसलिए बड़ा है क्योंकि पहली बार किसी नाटो देश को शिकार बनाया जा रहा है। इजराइल चाहता है कि एर्दवान का वही हाल हो जो कुछ समय पहले खामिनई का हुआ था। और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है कि इजराइल यह कर भी दे। अपने इस बड़े मिशन को पूरा करने के लिए इजराइल अब अर्मेनिया में आकर बैठ गया है। यहां पर भारत को अचानक एक बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है। दरअसल कुछ दिन पहले तुर्की के कहने पर अज़र-बैजान ने पहली बार अपने देश में ख़स्तानियों को एक भारत विरोधी सेमिनार करने की इजाजत दी थी। तुर्की और अज़रान दोनों दोस्त हैं और ये दोनों मिलकर अर्मेनिया को मारते हैं।

तुर्की ने अब पाकिस्तान के आतंकियों और ख़ालिस्तानियों को अज़र बैजान में नया ठिकाना दिलवा दिया है जो अर्मेनिया के साथ-साथ भारत के लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। ऐसे में भारत अर्मेनिया में बैठकर इजराइल की मदद से अज़र बैजान को भी निपटाएगा। आपको बता दें कि इजराइल पहले ही आधिकारिक तौर पर खालिस्तान आंदोलन का विरोध कर चुका है।

इजराइल ने इसे अपने रणनीतिक सहयोगी यानी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा माना है। इजराइल ने कहा था कि जो संगठन भारत की अखंडता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाएगा, हम उसे सक्रिय रूप से मिटाने के लिए भारत की मदद करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *