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क्रिकेट इतिहास का वह ऐतिहासिक मैच जिसे दुनिया देख ना सकी!

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हैं:यह कहानी है उस पारी की जो उस खिलाड़ी के बल्ले से निकली थी, जिसके जैसी पारी क्रिकेट के इतिहास में फिर कभी नहीं खेली गई। यह कहानी है एक भारतीय खिलाड़ी के उस जुनून की जिसने भारतीय क्रिकेट की तकदीर को हमेशा के लिए बदल दिया। इस ऐतिहासिक पारी के बाद भारत में क्रिकेट को सिर्फ एक खेल के रूप में नहीं बल्कि एक धर्म के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन इस पारी की बदकिस्मती यह थी कि यह मैच लाइव रिकॉर्ड नहीं हो सका और मैदान के बाहर कोई भी इस ऐतिहासिक पारी को नहीं देख पाया। लेकिन ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे की असली वजह क्या थी? आइए जानते हैं।> *”मैंने कई पारियां देखी हैं, लेकिन मेरे दिमाग में, मैंने आज तक 175 रन (नाबाद) से बेहतर वनडे पारी कभी नहीं देखी।”*> **18 जून 1983, टर्नब्रिज वेल्स का मैदान** और सामने थी जिम्बाब्वे की टीम, जो इस वर्ल्ड कप में भारत से एक मैच हार चुकी थी और बदले की आग में कुछ भी करने को तैयार थी। आपको बता दें कि यह आज की निचले स्तर की जिम्बाब्वे टीम नहीं थी, बल्कि यह 80 के दशक की जिम्बाब्वे थी, जिसके खूंखार गेंदबाज इतने घातक थे कि वे पावरप्ले में ही बड़े से बड़े बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस कर देते थे; और इस मैच में भी कुछ ऐसा ही होने वाला था।मैच शुरू होता है और टॉस के लिए सिक्का उछाला जाता है। कपिल देव टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हैं। कपिल देव यह जानते हुए भी पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हैं कि इस पिच पर पहले बल्लेबाजी करना मौत को दावत देने जैसा है। हालांकि, इसके पीछे एक बड़ी वजह थी और वह यह थी कि भारत ने इस वर्ल्ड कप में अपने पहले दो मैच लगातार जीते थे, लेकिन अगले दो मैच भारत इतनी बुरी तरह हार गया कि अखबारों की सुर्खियों समेत पूरी दुनिया भारत की जीत को एक तुक्का (फ्लुक) मान रही थी। ऐसा इसलिए भी था क्योंकि भारतीय टीम ने इस वर्ल्ड कप से पहले टूर्नामेंट के इतिहास में केवल एक मैच जीता था, और वह भी ईस्ट अफ्रीका जैसी कमजोर टीम के खिलाफ।दो लगातार मैच हारने के बाद, यह मैच अब भारत के लिए करो या मरो (Do or Die) का मुकाबला बन चुका था, यानी अगर भारत को सेमीफाइनल की रेस में बने रहना है, तो यह मैच हर हाल में जीतना ही होगा। हालांकि, भारत के लिए सिर्फ मैच जीतना ही काफी नहीं था। भारत को यह मैच अच्छे रन रेट के साथ जीतना था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया भी अंकों के मामले में भारत के बराबर था और उसका रन रेट भारत से बेहतर था। रन रेट सुधारने के लिए जरूरी था कि भारत पहले बल्लेबाजी करे और शानदार स्कोर बनाए।कपिल देव अपनी आत्मकथा **’स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट’ (Straight from the Heart)** में लिखते हैं

:> *”चूंकि ऑस्ट्रेलियाई टीम अंकों के मामले में हमारे बराबर आ गई थी और उनका रन रेट हमसे बेहतर था, इसलिए हमारा पूरा ध्यान अपने रन रेट को सुधारने पर था। समय की मांग थी कि हम पहले बल्लेबाजी करें और 300 से अधिक रन बनाएं, और यही कारण था कि टॉस जीतकर मैंने पहले बल्लेबाजी चुनी।”*> बहरहाल, पारी की शुरुआत होती है और भारत की ओर से ओपनिंग के लिए लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर और कृष श्रीकांत मैदान पर आते हैं। इन दोनों ओपनर्स के मैदान पर जाने से पहले ही कपिल देव ने उनसे कहा था, *”तुम जाओ और ऐसा खेल खेलो कि मुझे मैदान पर आने की जरूरत ही न पड़े।”* यह कहकर कपिल देव नहाने चले जाते हैं।ट्यूनब्रिज वेल्स की यह पिच पहले ही ओवर से अपना रंग दिखाना शुरू कर देती है और पीटर रॉसन के पहले ही ओवर में सुनील गावस्कर बिना खाता खोले अपना विकेट गंवा बैठते हैं। इसके बाद श्रीकांत भी इस घातक गेंदबाजी आक्रमण के सामने ज्यादा देर नहीं टिक पाते और केविन कुरन की गेंद का शिकार होकर बिना खाता खोले आउट हो जाते हैं। इस तरह भारत के दोनों ओपनर बिना कोई रन बनाए पवेलियन लौट चुके थे।इसके बाद मोहिंदर अमरनाथ बल्लेबाजी करने आए, जिन्होंने इस गेंदबाजी आक्रमण का सामना करने की पूरी कोशिश की लेकिन वे भी महज पांच रन बनाकर आउट हो गए। भारत के इस पतन को देखकर ड्रेसिंग रूम में बैठे बलविंदर सिंह संधू ने कपिल देव के दरवाजे को खटखटाना शुरू कर दिया, लेकिन कपिल देव अभी भी बेफिक्र होकर नहा रहे थे।संदीप पाटिल अपनी किताब **’सैंडी स्टॉर्म’ (Sandy Storm)** में लिखते हैं:> *”कपिल ने सोचा कि शायद उनकी बारी देर से आएगी, इसलिए वे नहाने चले गए, लेकिन हमारे खिलाड़ी इतनी जल्दी आउट हो गए कि मैं खुद को यशपाल शर्मा के साथ क्रीज पर पाया। तभी 12वें खिलाड़ी सुनील वाल्सन दौड़ते हुए हमारे पास क्रीज पर आए और कहा कि कपिल अभी भी वॉशरूम में नहा रहे हैं, कम से कम तब तक खेलो जब तक कि कपिल देव बल्लेबाजी के लिए वॉशरूम से बाहर न आ जाएं।”*> हालांकि, संदीप पाटिल के तमाम प्रयासों के बावजूद, वे जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों का सामना नहीं कर सके और अगले ही पल जिम्बाब्वे की रफ्तार के आगे घुटने टेक दिए। भारत का टॉप ऑर्डर पूरी तरह से तबाह हो चुका था। टीम का स्कोर अभी सिर्फ **9 रन** तक पहुंचा था और भारत ने अपने **4 विकेट** गंवा दिए थे।भारत की इस दुर्दशा को देखकर जिम्बाब्वे के खिलाड़ी जश्न मना रहे थे और मैदान के बीचो-बीच एक तरह से नाच रहे थे, जबकि स्टेडियम में बैठे जिम्बाब्वे के फैंस इस जश्न में इतने दीवाने हो गए थे कि उन्होंने शराब की बोतलें खोलनी शुरू कर दी थीं। स्टेडियम में बैठे भारतीय फैंस इस समय भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए और देश की साख पूरी तरह से बदनाम होने से बच जाए, क्योंकि स्थिति ऐसी थी कि 50 रन तक पहुंचना भी असंभव लग रहा था।जैसे-जैसे भारत के विकेट गिर रहे थे, बलविंदर सिंह उसी रफ्तार से दरवाजा खटखटा रहे थे। लेकिन जैसे ही कपिल देव दरवाजा खोलते हैं, उनकी नजर ड्रेसिंग रूम में बैठे उन सभी खिलाड़ियों पर पड़ती है जो नम आंखों से सिर झुकाए बैठे थे। तब कपिल देव ने उनसे टीम का स्कोर पूछा, लेकिन किसी भी खिलाड़ी में कपिल देव को टीम का स्कोर बताने की हिम्मत नहीं थी। तब टीम मैनेजर मान सिंह उंगलियों के इशारे से कपिल को बताते हैं कि टीम के

**चार विकेट गिर चुके हैं और सिर्फ नौ रन** बने हैं।यह सुनते ही कपिल देव जल्दी से अपने कपड़े पहनते हैं, पैड और ग्लव्स पहनकर मैदान की ओर निकल पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही कपिल देव मैदान पर पहुंचते हैं और वहां की भीड़ को देखते हैं, उनकी आंखें भर आती हैं। वे देख रहे थे कि कैसे भारतीय फैंस का सपना चकनाचूर हो गया था। हर भारतीय प्रशंसक मान चुका था कि भारत वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है और भारत की प्रतिष्ठा का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। लेकिन भारत का यह कप्तान इस निराशा से बिल्कुल भी नहीं डरा और उन्होंने संकल्प लिया कि हम इस तरह नहीं हारेंगे, हम कायरों की तरह देश की प्रतिष्ठा को डूबने नहीं देंगे।इसके बाद कपिल देव क्रीज पर आते हैं और यशपाल शर्मा को समझाते हैं कि *”तुम्हें बस क्रीज पर टिके रहना है, तुम्हें रन बनाने की जरूरत नहीं है, तुम अपना विकेट बचाओ, बाकी मैं संभाल लूंगा।”* कपिल देव के आने के बाद भारतीय खेमे में उम्मीद की एक किरण अभी भी बाकी थी। स्टेडियम में मौजूद हर भारतीय बस यही दुआ कर रहा था कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए और बची-कुची इज्जत बच जाए क्योंकि अब मैच किसी भी तरह से भारत के पक्ष में नहीं था।हालांकि, किसी तरह एक छोटी सी साझेदारी बनती दिख रही थी और तभी यशपाल शर्मा भी पीटर रॉसन की गेंद पर कीपर को कैच दे बैठे। इस समय भारत का स्कोर सिर्फ **17 रन** था और 17 रन के स्कोर पर भारत ने अपने **5 शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों** को खो दिया था।मैच हाथ से निकल चुका था, वर्ल्ड कप का सफर खत्म लग रहा था और टीम इंडिया के उस कप्तान की कप्तानी भी खतरे में थी, क्योंकि कपिल देव टीम के सबसे युवा कप्तान थे और उनकी कप्तानी में टीम की यह स्थिति साफ बता रही थी कि भारत का सपना अब इंग्लैंड की धरती पर दम तोड़ चुका है। जब महज 17 रन पर पांच विकेट गिर जाते हैं और भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह से ढह जाती है, तो स्टेडियम में बचे हुए फैंस भी अपने टिकट फाड़कर घर जाने लगते हैं। सालों बाद कुछ भारतीय प्रशंसकों ने टिकट खरीदकर भारतीय टीम पर इतना भरोसा जताया था। उस दौर में भारतीय प्रशंसकों का मानना था कि जब भारत मैच जीतता ही नहीं है, तो टिकटों पर पैसे क्यों बर्बाद किए जाएं? लेकिन इस वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज जैसी अजेय टीम को हराने के बाद फैंस ने भारतीय टीम पर भरोसा जताया था, हालांकि भारतीय बल्लेबाजों ने उस भरोसे को पूरी तरह से तोड़ दिया था। लेकिन कपिल देव अभी भी क्रीज पर डटे हुए थे और ऐसा लग रहा था कि आज उनके मन में कुछ और ही था।इसके बाद रोजर बिन्नी बल्लेबाजी करने आए और कपिल देव ने रोजर बिन्नी से भी वही बात कही जो उन्होंने यशपाल शर्मा से कही थी कि *”तुम्हें बस अपना विकेट बचाना है।”* पूरा देश हार मान चुका था और अब लड़ाई सिर्फ अपनी साख बचाने की थी, लेकिन भारत का वह कप्तान अभी भी इस हारे हुए खेल को जीतने का रास्ता तलाश रहा था।पांच विकेट खोने के बाद कपिल देव पारी को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहे थे और रोजर बिन्नी भी जिम्बाब्वे की तेज गेंदों का अच्छे से सामना कर रहे थे। कपिल देव और रोजर बिन्नी के बीच 60 रनों की साझेदारी हुई और फिर रोजर बिन्नी ने भी जिम्बाब्वे के आगे घुटने टेक दिए। अब भारत ने अपना छठा विकेट **76** के स्कोर पर गंवाया। भारत ने अपना सातवां विकेट **78** के स्कोर पर गंवाया और जो फैंस 300 का सपना देख रहे थे, वे अब दुआ कर रहे थे कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए, लेकिन क्रीज पर मौजूद भारत का कप्तान अभी भी उस स्कोर की तरफ देख रहा था जिसका जिम्बाब्वे ने सपना भी नहीं देखा था।समय और परिस्थितियों ने भारत की हार का जनाजा तैयार कर लिया था, लेकिन यह तो कहानी का सिर्फ पहला पन्ना था। पूरी कहानी तो रवि शास्त्री के बाद आनी बाकी थी। मदन लाल मैदान पर आते हैं, मदन क्रीज पर टिकते हैं और कपिल से अपना असली खेल खेलने को कहते हैं। लंच के समय तक कपिल देव अपना अर्धशतक पूरा कर चुके थे, लेकिन इन 50 रनों में उन्होंने एक भी चौका या छक्का नहीं लगाया था। आपको बता दें कि कपिल देव इस दौर में अपने विस्फोटक अंदाज के लिए जाने जाते थे, लेकिन टीम की दुर्दशा और इन परिस्थितियों के कारण उन्होंने अपने आक्रामक रवैये पर काबू रखा और टीम को डूबने से बचाया।कपिल देव अपनी जीवनी में लिखते हैं:> *”मैं क्रीज पर खड़ा था और खुद से कह रहा था कि तुम्हें आखिरी ओवर तक खेलना है, और तभी मदन लाल मेरे पास आए और कहा कि ‘आप एक छोर संभालिए, मैं इसे संभाल लूंगा, आप रन बनाइए।’ जब 35वें ओवर के बाद लंच हुआ, तो भारत का स्कोर सात विकेट पर 106 रन था और मैं 50 रनों पर खेल रहा था।”*> लंच के समय जब कपिल देव ड्रेसिंग रूम पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि कोई भी भारतीय खिलाड़ी उनसे आंखें नहीं मिला पा रहा था क्योंकि सभी खिलाड़ी अपने खराब प्रदर्शन से शर्मिंदा थे। कपिल देव कहते हैं:> *”लंच के समय जब मैं ड्रेसिंग रूम पहुंचा, तो मेरी कुर्सी के पास पानी का एक गिलास रखा हुआ था। हमारी टीम में एक नियम है कि जब भी कोई नॉट आउट बल्लेबाज लंच पर पवेलियन लौटता है, तो टीम का रिजर्व खिलाड़ी एक प्लेट में उसके लिए खाना ले जाता है, लेकिन उस दिन लंच का कहीं अता-पता नहीं था। मुझे खुद डाइनिंग रूम में जाकर अपना खाना लेना पड़ा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथी खिलाड़ी मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं और बाद में मुझे पता चला कि वे मेरे गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे थे, और यह सुनकर मैं बहुत जोर से हंसा। उस दिन मैंने लंच में कुछ नहीं खाया और सिर्फ दो गिलास संतरे का जूस पीकर वापस खेलने चला गया।”*> लंच के बाद कपिल देव ने अपना स्वाभाविक खेल और विस्फोटक अंदाज दिखाना शुरू किया। वे विकेटों की परवाह किए बिना अब जिम्बाब्वे पर अपना दबदबा बनाना शुरू करते हैं और जिम्बाब्वे के हर गेंदबाज की इस तरह धुनाई करते हैं कि मैदान में एक बार फिर ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे गूंजने लगते हैं। भारत के इस कप्तान ने अब एक करिश्माई पारी की शुरुआत कर दी थी और जो खिलाड़ी पहले 50 रनों तक एक भी चौका नहीं मार पाया था, अब वही खिलाड़ी बाउंड्री के बिना कुछ सोच ही नहीं रहा था। कपिल देव ने उस दिन मैदान पर ऐसा कोहराम मचाया कि किसी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उस मैदान में बैठे दर्शक इतिहास की सबसे बड़ी पारी के गवाह बन रहे थे।हालांकि, गावस्कर, श्रीकांत, अमरनाथ, यशपाल और संदीप पाटिल अभी भी ड्रेसिंग रूम के कोने में अपना चेहरा छुपाए बैठे थे क्योंकि वे अपने प्रदर्शन से इतने शर्मिंदा थे कि वे बाहर आकर मैच देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इस घटना के बारे में संदीप पाटिल ‘सैंडी स्टॉर्म’ में लिखते हैं:> *”हम खुद को दुनिया की नजरों से छिपाना चाहते थे और हममें से किसी में भी ऊपर जाकर मैच को करीब से देखने की हिम्मत नहीं थी। 20 मिनट बाद हमें दर्शकों का शोर सुनाई देने लगा और इसके बाद हर 5 मिनट में शोर बढ़ता ही जा रहा था। यह सुनकर हमें भी लगा कि शायद एक और विकेट गिर गया है, लेकिन जब कुछ समय बाद शोर और बढ़ने लगा, तो हमें एहसास हुआ कि शायद कपिल देव ने अब लाठीचार्ज शुरू कर दिया है। लेकिन फिर भी हमें पक्के तौर पर कुछ पता नहीं था। इसके बाद श्रीकांत ने सबसे पहले ऊपर जाने का फैसला किया और इसके बाद एक-एक करके सभी खिलाड़ी मैच देखने के लिए ऊपर पहुंच गए। लेकिन इसके बाद जो चमत्कार हमने मैदान पर देखा, वह किसी अजूबे से कम नहीं था।”*> वह जादुई चमत्कार और कुछ नहीं बल्कि कपिल देव के बल्ले से निकला एक ऐसा अजूबा था जिसे दुनिया में आज तक किसी ने नहीं देखा था। कपिल देव की इस पारी को देखने के बाद भारतीय खिलाड़ी जिस एंगल पर और जहां खड़े थे, कपिल देव की पारी खत्म होने तक वहीं खड़े रह गए। जो जहां खड़ा था, वहीं खड़ा रहा और जो जहां बैठा था, वहीं बैठा रहा क्योंकि सबको डर था कि अगर वे इधर-उधर हिले तो कपिल आउट हो जाएंगे। आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कपिल देव ने अपनी किताब में लिखा था कि गावस्कर ने हमारे कोच के ड्राइवर बॉब की तरफ इशारा किया और वह भी एक पैर कुर्सी पर रखकर खड़े थे। उन्होंने भी कहा कि जब तक कपिल सर क्रीज पर हैं, वे अपनी जगह से नहीं हिलेंगे। मेरी पत्नी रोमी ने मदन लाल की पत्नी अनु से कहा कि हम अपना लंच नहीं करेंगे और भारत के अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रार्थना करेंगे।सुनील गावस्कर अपनी किताब **’आइडल्स’ (Idols)** में लिखते हैं:> *”जब कपिल 160 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो हम सब डरे हुए थे क्योंकि इस समय कपिल ग्लेन टर्नर के 171 रनों के रिकॉर्ड से महज 11 रन दूर थे और हमें डर था कि तेज शॉट खेलने के चक्कर में यह रिकॉर्ड न छूट जाए, लेकिन कपिल को इस बारे में कोई अंदाजा नहीं था और वे बस अपनी ही धुन में आगे बढ़ रहे थे।”

*> हालांकि, कुछ ही पलों के बाद जब कपिल देव ने एक रन लेकर ग्लेन टर्नर का यह रिकॉर्ड तोड़ा, तो स्टेडियम में बैठे सभी दर्शक इस पारी के सम्मान में खड़े हो गए और तालियां बजाने लगे। भारतीय खिलाड़ी भी इस रिकॉर्ड के टूटने के बाद अपनी जगहों से उठ खड़े हुए और इतिहास की इस सबसे बड़ी पारी को सलाम करने लगे, लेकिन मैदान पर खड़े कपिल देव को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उन्होंने आज इतिहास रच दिया है।जब सिंगल लेने के बाद मैदान पर इतना शोर हुआ तो कपिल और सैयद किरमानी कुछ समझ नहीं पाए और इस दौरान कपिल देव ने किरमानी से कहा कि *”जब मैं बड़े छक्के मारता हूं तब भी इतना शोर नहीं सुनाई देता, लेकिन उस एक सिंगल ने ऐसा क्या कर दिया कि दर्शकों का शोर सातवें आसमान को छूने लगा है?”* फिर कपिल देव और किरमानी अंपायर के पास जाते हैं और अंपायर से शोर की वजह पूछते हैं, तब अंपायर ने बताया कि *”आपने क्रिकेट इतिहास में सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।”* इसके बाद कपिल को पता चला कि उन्होंने इस रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है और फिर कपिल देव ने अपना बल्ला उठाकर इस पल का जश्न मनाया।इस तरह कपिल देव **175 रन बनाकर नाबाद** लौटे और भारत ने 60 ओवर में बोर्ड पर **266 रन** टांग दिए। जिस टीम से 100 रन की भी उम्मीद नहीं थी, अब उसी टीम ने 266 रन बनाए थे, जिसमें अकेले कपिल देव ने **138 गेंदों में 175 रन** बनाए थे और कपिल देव की इस शानदार पारी में **16 चौके और 6 शानदार छक्के** शामिल थे।जब कपिल देव पारी के बाद ड्रेसिंग रूम में लौटे, तो उन्होंने पाया कि जो खिलाड़ी लंच से पहले सिर झुकाए बैठे थे और दुख में सिर नहीं उठा पा रहे थे, अब उनके सिर गर्व से ऊंचे हो गए थे। भारत के हर खिलाड़ी की आंखों में खुशी के आंसू थे। इस दौरान सुनील गावस्कर ने कपिल को पानी का गिलास दिया और कहा, *”कपिल, बदकिस्मती है दोस्त… इसलिए नहीं कि आज हम सब रन नहीं बना सके, बल्कि इसलिए क्योंकि आज मैदान के बाहर कोई भी इस पारी को नहीं देख सका, क्योंकि आज बीबीसी (BBC) की हड़ताल के कारण इस मैच का लाइव टेलीकास्ट नहीं हो सका। आज इस मैदान में मौजूद हम सब खुशकिस्मत हैं जिन्होंने इतिहास की इस सर्वश्रेष्ठ पारी को अपनी आंखों से देखा है।”*कपिल की इस पारी को देखकर मैदान में बैठा हर शख्स बस तालियां बजा रहा था, चाहे वह भारतीय फैंस हों या जिम्बाब्वे के फैंस, क्योंकि उस समय क्रिकेट एक जुनून और शुद्ध भावना हुआ करता था, आज की तरह सट्टेबाजी नहीं थी।इस पारी के बारे में रवि शास्त्री अपनी किताब **’स्टार गेजिंग’ (Star Gazing)** में लिखते हैं:> *”इस पारी ने कपिल देव को क्रिकेट जगत में अमर कर दिया और इस पारी ने, इस जीत ने टीम इंडिया में पहली बार वह जज्बा पैदा किया कि हम भी वर्ल्ड कप जीत सकते हैं।”*> आखिरकार, टीम इंडिया ने इस मैच में जिम्बाब्वे को 235 रनों पर रोक दिया और यह मैच **31 रनों से जीत लिया**। सही मायने में कपिल देव ने जिम्बाब्वे के जबड़े से यह जीत छीन ली थी। भारत मैच हार चुका था, क्योंकि इस मैच में एक पल ऐसा आया था जब पूरी दुनिया मान चुकी थी कि भारत मैच हार गया है और वर्ल्ड कप की रेस से बाहर हो गया है। लेकिन आपको बता दें कि इस मैच को जीतने के बाद भारत ने अगले मैच में ऑस्ट्रेलिया को भी हराया और पहली बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा। इसके बाद भारत ने इंग्लैंड को उसी की धरती पर हराया और वर्ल्ड कप का फाइनल भी खेला जहां उसका सामना दो बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज से था। लेकिन वेस्टइंडीज के 7 फुट लंबे गेंदबाजों का खौफ इस बार भारत को हरा नहीं सका और इस तरह भारत क्रिकेट की दुनिया में पहली बार विश्व विजेता बना।हालांकि, कपिल देव की इस ऐतिहासिक पारी को इस वर्ल्ड कप के पीछे की सबसे बड़ी वजह कहा जा सकता है, वह पारी जिसने करोड़ों भारतीयों को गौरवान्वित किया। वास्तव में, कपिल देव उस दिन एक स्वतंत्रता सेनानी की तरह लड़े और उस दिन मैदान में मौजूद हर व्यक्ति ने उस 22 गज की पिच पर इतिहास बनते देखा। हालांकि, हड़ताल के कारण बीबीसी मैच का लाइव प्रसारण और रिकॉर्डिंग नहीं कर सका, जिसके कारण मैदान के बाहर कोई भी इस ऐतिहासिक पारी को नहीं देख पाया और यही कारण है कि आज हम कपिल देव की इस अद्भुत पारी का सिर्फ जिक्र कर सकते हैं, उसे अपनी आंखों से देख नहीं सकते।खैर, हमें उम्मीद है कि आपने आज इसे महसूस जरूर किया होगा। आप कपिल देव की इस पारी को 10 में से कितने अंक देना चाहेंगे? हमें कमेंट में जरूर बताएं। और आपके अनुसार वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बेहतरीन पारी कौन सी है? यह भी हमें बताएं। अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो, तो वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें। और हाँ, चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें क्योंकि भविष्य में भी ऐसे ही कई शानदार वीडियो आने वाले हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में।

यहाँ इस ऐतिहासिक कहानी का हिंदी अनुवाद (Hindi Translation) प्रस्तुत है, जिसे आप वीडियो स्क्रिप्ट या लेख के रूप में उपयोग कर सकते हैं:यह कहानी है उस पारी की जो उस खिलाड़ी के बल्ले से निकली थी, जिसके जैसी पारी क्रिकेट के इतिहास में फिर कभी नहीं खेली गई। यह कहानी है एक भारतीय खिलाड़ी के उस जुनून की जिसने भारतीय क्रिकेट की तकदीर को हमेशा के लिए बदल दिया। इस ऐतिहासिक पारी के बाद भारत में क्रिकेट को सिर्फ एक खेल के रूप में नहीं बल्कि एक धर्म के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन इस पारी की बदकिस्मती यह थी कि यह मैच लाइव रिकॉर्ड नहीं हो सका और मैदान के बाहर कोई भी इस ऐतिहासिक पारी को नहीं देख पाया। लेकिन ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे की असली वजह क्या थी? आइए जानते हैं।> *”मैंने कई पारियां देखी हैं, लेकिन मेरे दिमाग में, मैंने आज तक 175 रन (नाबाद) से बेहतर वनडे पारी कभी नहीं देखी।”*> **18 जून 1983, टर्नब्रिज वेल्स का मैदान** और सामने थी जिम्बाब्वे की टीम, जो इस वर्ल्ड कप में भारत से एक मैच हार चुकी थी और बदले की आग में कुछ भी करने को तैयार थी। आपको बता दें कि यह आज की निचले स्तर की जिम्बाब्वे टीम नहीं थी, बल्कि यह 80 के दशक की जिम्बाब्वे थी, जिसके खूंखार गेंदबाज इतने घातक थे कि वे पावरप्ले में ही बड़े से बड़े बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस कर देते थे; और इस मैच में भी कुछ ऐसा ही होने वाला था।मैच शुरू होता है और टॉस के लिए सिक्का उछाला जाता है। कपिल देव टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हैं। कपिल देव यह जानते हुए भी पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हैं कि इस पिच पर पहले बल्लेबाजी करना मौत को दावत देने जैसा है। हालांकि, इसके पीछे एक बड़ी वजह थी और वह यह थी कि भारत ने इस वर्ल्ड कप में अपने पहले दो मैच लगातार जीते थे, लेकिन अगले दो मैच भारत इतनी बुरी तरह हार गया कि अखबारों की सुर्खियों समेत पूरी दुनिया भारत की जीत को एक तुक्का (फ्लुक) मान रही थी। ऐसा इसलिए भी था क्योंकि भारतीय टीम ने इस वर्ल्ड कप से पहले टूर्नामेंट के इतिहास में केवल एक मैच जीता था, और वह भी ईस्ट अफ्रीका जैसी कमजोर टीम के खिलाफ।दो लगातार मैच हारने के बाद, यह मैच अब भारत के लिए करो या मरो (Do or Die) का मुकाबला बन चुका था, यानी अगर भारत को सेमीफाइनल की रेस में बने रहना है, तो यह मैच हर हाल में जीतना ही होगा। हालांकि, भारत के लिए सिर्फ मैच जीतना ही काफी नहीं था। भारत को यह मैच अच्छे रन रेट के साथ जीतना था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया भी अंकों के मामले में भारत के बराबर था और उसका रन रेट भारत से बेहतर था।

रन रेट सुधारने के लिए जरूरी था कि भारत पहले बल्लेबाजी करे और शानदार स्कोर बनाए।कपिल देव अपनी आत्मकथा **’स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट’ (Straight from the Heart)** में लिखते हैं:> *”चूंकि ऑस्ट्रेलियाई टीम अंकों के मामले में हमारे बराबर आ गई थी और उनका रन रेट हमसे बेहतर था, इसलिए हमारा पूरा ध्यान अपने रन रेट को सुधारने पर था। समय की मांग थी कि हम पहले बल्लेबाजी करें और 300 से अधिक रन बनाएं, और यही कारण था कि टॉस जीतकर मैंने पहले बल्लेबाजी चुनी।”*> बहरहाल, पारी की शुरुआत होती है और भारत की ओर से ओपनिंग के लिए लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर और कृष श्रीकांत मैदान पर आते हैं। इन दोनों ओपनर्स के मैदान पर जाने से पहले ही कपिल देव ने उनसे कहा था, *”तुम जाओ और ऐसा खेल खेलो कि मुझे मैदान पर आने की जरूरत ही न पड़े।”* यह कहकर कपिल देव नहाने चले जाते हैं।ट्यूनब्रिज वेल्स की यह पिच पहले ही ओवर से अपना रंग दिखाना शुरू कर देती है और पीटर रॉसन के पहले ही ओवर में सुनील गावस्कर बिना खाता खोले अपना विकेट गंवा बैठते हैं। इसके बाद श्रीकांत भी इस घातक गेंदबाजी आक्रमण के सामने ज्यादा देर नहीं टिक पाते और केविन कुरन की गेंद का शिकार होकर बिना खाता खोले आउट हो जाते हैं। इस तरह भारत के दोनों ओपनर बिना कोई रन बनाए पवेलियन लौट चुके थे।इसके बाद मोहिंदर अमरनाथ बल्लेबाजी करने आए, जिन्होंने इस गेंदबाजी आक्रमण का सामना करने की पूरी कोशिश की लेकिन वे भी महज पांच रन बनाकर आउट हो गए। भारत के इस पतन को देखकर ड्रेसिंग रूम में बैठे बलविंदर सिंह संधू ने कपिल देव के दरवाजे को खटखटाना शुरू कर दिया, लेकिन कपिल देव अभी भी बेफिक्र होकर नहा रहे थे।संदीप पाटिल अपनी किताब **’सैंडी स्टॉर्म’ (Sandy Storm)** में लिखते हैं:> *”कपिल ने सोचा कि शायद उनकी बारी देर से आएगी, इसलिए वे नहाने चले गए, लेकिन हमारे खिलाड़ी इतनी जल्दी आउट हो गए कि मैं खुद को यशपाल शर्मा के साथ क्रीज पर पाया। तभी 12वें खिलाड़ी सुनील वाल्सन दौड़ते हुए हमारे पास क्रीज पर आए और कहा कि कपिल अभी भी वॉशरूम में नहा रहे हैं, कम से कम तब तक खेलो जब तक कि कपिल देव बल्लेबाजी के लिए वॉशरूम से बाहर न आ जाएं।”*> हालांकि, संदीप पाटिल के तमाम प्रयासों के बावजूद, वे जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों का सामना नहीं कर सके और अगले ही पल जिम्बाब्वे की रफ्तार के आगे घुटने टेक दिए। भारत का टॉप ऑर्डर पूरी तरह से तबाह हो चुका था। टीम का स्कोर अभी सिर्फ **9 रन** तक पहुंचा था और भारत ने अपने **4 विकेट** गंवा दिए थे।भारत की इस दुर्दशा को देखकर जिम्बाब्वे के खिलाड़ी जश्न मना रहे थे और मैदान के बीचो-बीच एक तरह से नाच रहे थे, जबकि स्टेडियम में बैठे जिम्बाब्वे के फैंस इस जश्न में इतने दीवाने हो गए थे कि उन्होंने शराब की बोतलें खोलनी शुरू कर दी थीं। स्टेडियम में बैठे भारतीय फैंस इस समय भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए और देश की साख पूरी तरह से बदनाम होने से बच जाए, क्योंकि स्थिति ऐसी थी कि 50 रन तक पहुंचना भी असंभव लग रहा था।जैसे-जैसे भारत के विकेट गिर रहे थे, बलविंदर सिंह उसी रफ्तार से दरवाजा खटखटा रहे थे। लेकिन जैसे ही कपिल देव दरवाजा खोलते हैं, उनकी नजर ड्रेसिंग रूम में बैठे उन सभी खिलाड़ियों पर पड़ती है जो नम आंखों से सिर झुकाए बैठे थे। तब कपिल देव ने उनसे टीम का स्कोर पूछा, लेकिन किसी भी खिलाड़ी में कपिल देव को टीम का स्कोर बताने की हिम्मत नहीं थी। तब टीम मैनेजर मान सिंह उंगलियों के इशारे से कपिल को बताते हैं कि टीम के **चार विकेट गिर चुके हैं और सिर्फ नौ रन** बने हैं।यह सुनते ही कपिल देव जल्दी से अपने कपड़े पहनते हैं, पैड और ग्लव्स पहनकर मैदान की ओर निकल पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही कपिल देव मैदान पर पहुंचते हैं और वहां की भीड़ को देखते हैं, उनकी आंखें भर आती हैं। वे देख रहे थे कि कैसे भारतीय फैंस का सपना चकनाचूर हो गया था। हर भारतीय प्रशंसक मान चुका था कि भारत वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है और भारत की प्रतिष्ठा का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। लेकिन भारत का यह कप्तान इस निराशा से बिल्कुल भी नहीं डरा और उन्होंने संकल्प लिया कि हम इस तरह नहीं हारेंगे, हम कायरों की तरह देश की प्रतिष्ठा को डूबने नहीं देंगे।इसके बाद कपिल देव क्रीज पर आते हैं और यशपाल शर्मा को समझाते हैं कि *”तुम्हें बस क्रीज पर टिके रहना है, तुम्हें रन बनाने की जरूरत नहीं है, तुम अपना विकेट बचाओ, बाकी मैं संभाल लूंगा।”* कपिल देव के आने के बाद भारतीय खेमे में उम्मीद की एक किरण अभी भी बाकी थी। स्टेडियम में मौजूद हर भारतीय बस यही दुआ कर रहा था कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए और बची-कुची इज्जत बच जाए क्योंकि अब मैच किसी भी तरह से भारत के पक्ष में नहीं था।हालांकि, किसी तरह एक छोटी सी साझेदारी बनती दिख रही थी

और तभी यशपाल शर्मा भी पीटर रॉसन की गेंद पर कीपर को कैच दे बैठे। इस समय भारत का स्कोर सिर्फ **17 रन** था और 17 रन के स्कोर पर भारत ने अपने **5 शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों** को खो दिया था।मैच हाथ से निकल चुका था, वर्ल्ड कप का सफर खत्म लग रहा था और टीम इंडिया के उस कप्तान की कप्तानी भी खतरे में थी, क्योंकि कपिल देव टीम के सबसे युवा कप्तान थे और उनकी कप्तानी में टीम की यह स्थिति साफ बता रही थी कि भारत का सपना अब इंग्लैंड की धरती पर दम तोड़ चुका है। जब महज 17 रन पर पांच विकेट गिर जाते हैं और भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह से ढह जाती है, तो स्टेडियम में बचे हुए फैंस भी अपने टिकट फाड़कर घर जाने लगते हैं। सालों बाद कुछ भारतीय प्रशंसकों ने टिकट खरीदकर भारतीय टीम पर इतना भरोसा जताया था। उस दौर में भारतीय प्रशंसकों का मानना था कि जब भारत मैच जीतता ही नहीं है, तो टिकटों पर पैसे क्यों बर्बाद किए जाएं? लेकिन इस वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज जैसी अजेय टीम को हराने के बाद फैंस ने भारतीय टीम पर भरोसा जताया था, हालांकि भारतीय बल्लेबाजों ने उस भरोसे को पूरी तरह से तोड़ दिया था। लेकिन कपिल देव अभी भी क्रीज पर डटे हुए थे और ऐसा लग रहा था कि आज उनके मन में कुछ और ही था।इसके बाद रोजर बिन्नी बल्लेबाजी करने आए और कपिल देव ने रोजर बिन्नी से भी वही बात कही जो उन्होंने यशपाल शर्मा से कही थी कि *”तुम्हें बस अपना विकेट बचाना है।”* पूरा देश हार मान चुका था और अब लड़ाई सिर्फ अपनी साख बचाने की थी, लेकिन भारत का वह कप्तान अभी भी इस हारे हुए खेल को जीतने का रास्ता तलाश रहा था।पांच विकेट खोने के बाद कपिल देव पारी को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहे थे और रोजर बिन्नी भी जिम्बाब्वे की तेज गेंदों का अच्छे से सामना कर रहे थे। कपिल देव और रोजर बिन्नी के बीच 60 रनों की साझेदारी हुई और फिर रोजर बिन्नी ने भी जिम्बाब्वे के आगे घुटने टेक दिए। अब भारत ने अपना छठा विकेट **76** के स्कोर पर गंवाया। भारत ने अपना सातवां विकेट **78** के स्कोर पर गंवाया और जो फैंस 300 का सपना देख रहे थे, वे अब दुआ कर रहे थे कि किसी तरह भारत 100 रन तक पहुंच जाए, लेकिन क्रीज पर मौजूद भारत का कप्तान अभी भी उस स्कोर की तरफ देख रहा था जिसका जिम्बाब्वे ने सपना भी नहीं देखा था।समय और परिस्थितियों ने भारत की हार का जनाजा तैयार कर लिया था, लेकिन यह तो कहानी का सिर्फ पहला पन्ना था। पूरी कहानी तो रवि शास्त्री के बाद आनी बाकी थी। मदन लाल मैदान पर आते हैं, मदन क्रीज पर टिकते हैं और कपिल से अपना असली खेल खेलने को कहते हैं। लंच के समय तक कपिल देव अपना अर्धशतक पूरा कर चुके थे, लेकिन इन 50 रनों में उन्होंने एक भी चौका या छक्का नहीं लगाया था। आपको बता दें कि कपिल देव इस दौर में अपने विस्फोटक अंदाज के लिए जाने जाते थे, लेकिन टीम की दुर्दशा और इन परिस्थितियों के कारण उन्होंने अपने आक्रामक रवैये पर काबू रखा और टीम को डूबने से बचाया।कपिल देव अपनी जीवनी में लिखते हैं:> *”मैं क्रीज पर खड़ा था और खुद से कह रहा था कि तुम्हें आखिरी ओवर तक खेलना है, और तभी मदन लाल मेरे पास आए और कहा कि ‘आप एक छोर संभालिए, मैं इसे संभाल लूंगा, आप रन बनाइए।’ जब 35वें ओवर के बाद लंच हुआ, तो भारत का स्कोर सात विकेट पर 106 रन था और मैं 50 रनों पर खेल रहा था।”*> लंच के समय जब कपिल देव ड्रेसिंग रूम पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि कोई भी भारतीय खिलाड़ी उनसे आंखें नहीं मिला पा रहा था क्योंकि सभी खिलाड़ी अपने खराब प्रदर्शन से शर्मिंदा थे। कपिल देव कहते हैं:> *”लंच के समय जब मैं ड्रेसिंग रूम पहुंचा, तो मेरी कुर्सी के पास पानी का एक गिलास रखा हुआ था। हमारी टीम में एक नियम है कि जब भी कोई नॉट आउट बल्लेबाज लंच पर पवेलियन लौटता है, तो टीम का रिजर्व खिलाड़ी एक प्लेट में उसके लिए खाना ले जाता है, लेकिन उस दिन लंच का कहीं अता-पता नहीं था। मुझे खुद डाइनिंग रूम में जाकर अपना खाना लेना पड़ा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथी खिलाड़ी मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं और बाद में मुझे पता चला कि वे मेरे गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे थे, और यह सुनकर मैं बहुत जोर से हंसा। उस दिन मैंने लंच में कुछ नहीं खाया और सिर्फ दो गिलास संतरे का जूस पीकर वापस खेलने चला गया।”*> लंच के बाद कपिल देव ने अपना स्वाभाविक खेल और विस्फोटक अंदाज दिखाना शुरू किया। वे विकेटों की परवाह किए बिना अब जिम्बाब्वे पर अपना दबदबा बनाना शुरू करते हैं और जिम्बाब्वे के हर गेंदबाज की इस तरह धुनाई करते हैं कि मैदान में एक बार फिर ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे गूंजने लगते हैं। भारत के इस कप्तान ने अब एक करिश्माई पारी की शुरुआत कर दी थी और जो खिलाड़ी पहले 50 रनों तक एक भी चौका नहीं मार पाया था, अब वही खिलाड़ी बाउंड्री के बिना कुछ सोच ही नहीं रहा था। कपिल देव ने उस दिन मैदान पर ऐसा कोहराम मचाया कि किसी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उस मैदान में बैठे दर्शक इतिहास की सबसे बड़ी पारी के गवाह बन रहे थे।हालांकि, गावस्कर, श्रीकांत, अमरनाथ, यशपाल और संदीप पाटिल अभी भी ड्रेसिंग रूम के कोने में अपना चेहरा छुपाए बैठे थे क्योंकि वे अपने प्रदर्शन से इतने शर्मिंदा थे कि वे बाहर आकर मैच देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इस घटना के बारे में संदीप पाटिल ‘सैंडी स्टॉर्म’ में लिखते हैं:> *

“हम खुद को दुनिया की नजरों से छिपाना चाहते थे और हममें से किसी में भी ऊपर जाकर मैच को करीब से देखने की हिम्मत नहीं थी। 20 मिनट बाद हमें दर्शकों का शोर सुनाई देने लगा और इसके बाद हर 5 मिनट में शोर बढ़ता ही जा रहा था। यह सुनकर हमें भी लगा कि शायद एक और विकेट गिर गया है, लेकिन जब कुछ समय बाद शोर और बढ़ने लगा, तो हमें एहसास हुआ कि शायद कपिल देव ने अब लाठीचार्ज शुरू कर दिया है। लेकिन फिर भी हमें पक्के तौर पर कुछ पता नहीं था। इसके बाद श्रीकांत ने सबसे पहले ऊपर जाने का फैसला किया और इसके बाद एक-एक करके सभी खिलाड़ी मैच देखने के लिए ऊपर पहुंच गए। लेकिन इसके बाद जो चमत्कार हमने मैदान पर देखा, वह किसी अजूबे से कम नहीं था।”*> वह जादुई चमत्कार और कुछ नहीं बल्कि कपिल देव के बल्ले से निकला एक ऐसा अजूबा था जिसे दुनिया में आज तक किसी ने नहीं देखा था। कपिल देव की इस पारी को देखने के बाद भारतीय खिलाड़ी जिस एंगल पर और जहां खड़े थे, कपिल देव की पारी खत्म होने तक वहीं खड़े रह गए। जो जहां खड़ा था, वहीं खड़ा रहा और जो जहां बैठा था, वहीं बैठा रहा क्योंकि सबको डर था कि अगर वे इधर-उधर हिले तो कपिल आउट हो जाएंगे। आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कपिल देव ने अपनी किताब में लिखा था कि गावस्कर ने हमारे कोच के ड्राइवर बॉब की तरफ इशारा किया और वह भी एक पैर कुर्सी पर रखकर खड़े थे। उन्होंने भी कहा कि जब तक कपिल सर क्रीज पर हैं, वे अपनी जगह से नहीं हिलेंगे। मेरी पत्नी रोमी ने मदन लाल की पत्नी अनु से कहा कि हम अपना लंच नहीं करेंगे और भारत के अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रार्थना करेंगे।सुनील गावस्कर अपनी किताब **’आइडल्स’ (Idols)** में लिखते हैं:>

*”जब कपिल 160 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो हम सब डरे हुए थे क्योंकि इस समय कपिल ग्लेन टर्नर के 171 रनों के रिकॉर्ड से महज 11 रन दूर थे और हमें डर था कि तेज शॉट खेलने के चक्कर में यह रिकॉर्ड न छूट जाए, लेकिन कपिल को इस बारे में कोई अंदाजा नहीं था और वे बस अपनी ही धुन में आगे बढ़ रहे थे।”*> हालांकि, कुछ ही पलों के बाद जब कपिल देव ने एक रन लेकर ग्लेन टर्नर का यह रिकॉर्ड तोड़ा, तो स्टेडियम में बैठे सभी दर्शक इस पारी के सम्मान में खड़े हो गए और तालियां बजाने लगे। भारतीय खिलाड़ी भी इस रिकॉर्ड के टूटने के बाद अपनी जगहों से उठ खड़े हुए और इतिहास की इस सबसे बड़ी पारी को सलाम करने लगे, लेकिन मैदान पर खड़े कपिल देव को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उन्होंने आज इतिहास रच दिया है।जब सिंगल लेने के बाद मैदान पर इतना शोर हुआ तो कपिल और सैयद किरमानी कुछ समझ नहीं पाए और इस दौरान कपिल देव ने किरमानी से कहा कि *”जब मैं बड़े छक्के मारता हूं तब भी इतना शोर नहीं सुनाई देता, लेकिन उस एक सिंगल ने ऐसा क्या कर दिया कि दर्शकों का शोर सातवें आसमान को छूने लगा है?”* फिर कपिल देव और किरमानी अंपायर के पास जाते हैं और अंपायर से शोर की वजह पूछते हैं, तब अंपायर ने बताया कि *”आपने क्रिकेट इतिहास में सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।”* इसके बाद कपिल को पता चला कि उन्होंने इस रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है और फिर कपिल देव ने अपना बल्ला उठाकर इस पल का जश्न मनाया।इस तरह कपिल देव **175 रन बनाकर नाबाद** लौटे और भारत ने 60 ओवर में बोर्ड पर **266 रन** टांग दिए। जिस टीम से 100 रन की भी उम्मीद नहीं थी, अब उसी टीम ने 266 रन बनाए थे, जिसमें अकेले कपिल देव ने **138 गेंदों में 175 रन** बनाए थे और कपिल देव की इस शानदार पारी में **16 चौके और 6 शानदार छक्के** शामिल थे।जब कपिल देव पारी के बाद ड्रेसिंग रूम में लौटे, तो उन्होंने पाया कि जो खिलाड़ी लंच से पहले सिर झुकाए बैठे थे और दुख में सिर नहीं उठा पा रहे थे, अब उनके सिर गर्व से ऊंचे हो गए थे। भारत के हर खिलाड़ी की आंखों में खुशी के आंसू थे। इस दौरान सुनील गावस्कर ने कपिल को पानी का गिलास दिया और कहा, *”कपिल, बदकिस्मती है दोस्त… इसलिए नहीं कि आज हम सब रन नहीं बना सके, बल्कि इसलिए क्योंकि आज मैदान के बाहर कोई भी इस पारी को नहीं देख सका, क्योंकि आज बीबीसी (BBC) की हड़ताल के कारण इस मैच का लाइव टेलीकास्ट नहीं हो सका। आज इस मैदान में मौजूद हम सब खुशकिस्मत हैं जिन्होंने इतिहास की इस सर्वश्रेष्ठ पारी को अपनी आंखों से देखा है।”*कपिल की इस पारी को देखकर मैदान में बैठा हर शख्स बस तालियां बजा रहा था, चाहे वह भारतीय फैंस हों या जिम्बाब्वे के फैंस, क्योंकि उस समय क्रिकेट एक जुनून और शुद्ध भावना हुआ करता था, आज की तरह सट्टेबाजी नहीं थी।इस पारी के बारे में रवि शास्त्री अपनी किताब **’स्टार गेजिंग’ (Star Gazing)** में लिखते हैं:> *”इस पारी ने कपिल देव को क्रिकेट जगत में अमर कर दिया और इस पारी ने, इस जीत ने टीम इंडिया में पहली बार वह जज्बा पैदा किया कि हम भी वर्ल्ड कप जीत सकते हैं।”*> आखिरकार, टीम इंडिया ने इस मैच में जिम्बाब्वे को 235 रनों पर रोक दिया और यह मैच **31 रनों से जीत लिया**। सही मायने में कपिल देव ने जिम्बाब्वे के जबड़े से यह जीत छीन ली थी।

भारत मैच हार चुका था, क्योंकि इस मैच में एक पल ऐसा आया था जब पूरी दुनिया मान चुकी थी कि भारत मैच हार गया है और वर्ल्ड कप की रेस से बाहर हो गया है। लेकिन आपको बता दें कि इस मैच को जीतने के बाद भारत ने अगले मैच में ऑस्ट्रेलिया को भी हराया और पहली बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा। इसके बाद भारत ने इंग्लैंड को उसी की धरती पर हराया और वर्ल्ड कप का फाइनल भी खेला जहां उसका सामना दो बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज से था। लेकिन वेस्टइंडीज के 7 फुट लंबे गेंदबाजों का खौफ इस बार भारत को हरा नहीं सका और इस तरह भारत क्रिकेट की दुनिया में पहली बार विश्व विजेता बना।हालांकि, कपिल देव की इस ऐतिहासिक पारी को इस वर्ल्ड कप के पीछे की सबसे बड़ी वजह कहा जा सकता है, वह पारी जिसने करोड़ों भारतीयों को गौरवान्वित किया। वास्तव में, कपिल देव उस दिन एक स्वतंत्रता सेनानी की तरह लड़े और उस दिन मैदान में मौजूद हर व्यक्ति ने उस 22 गज की पिच पर इतिहास बनते देखा। हालांकि, हड़ताल के कारण बीबीसी मैच का लाइव प्रसारण और रिकॉर्डिंग नहीं कर सका, जिसके कारण मैदान के बाहर कोई भी इस ऐतिहासिक पारी को नहीं देख पाया और यही कारण है कि आज हम कपिल देव की इस अद्भुत पारी का सिर्फ जिक्र कर सकते हैं, उसे अपनी आंखों से देख नहीं सकते।खैर, हमें उम्मीद है कि आपने आज इसे महसूस जरूर किया होगा। आप कपिल देव की इस पारी को 10 में से कितने अंक देना चाहेंगे? हमें कमेंट में जरूर बताएं। और आपके अनुसार वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बेहतरीन पारी कौन सी है? यह भी हमें बताएं। अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो, तो वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें। और हाँ, चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें क्योंकि भविष्य में भी ऐसे ही कई शानदार वीडियो आने वाले हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में।

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