लेकिन सर आपने कहा कि इसको की सजा होगी ये जो चेतन लड़का है इसको इसको भी लेकिन सर सोनम रघुवंशी को क्या हुआ आजकल जमानत पर है शिलंग में रह रही है।
तमाम टीवी चैनल्स और यूर्स को इंटरव्यू देते फिर रही है सर वो तो बाहर आ गई सर सर उसके परिवार के लोग जो शुरुआत में कह रहे थे कि वो राजा का साथ देंगे राजा के परिवार का साथ देंगे वकील वगैरह तो उन्होंने ही मुहैया करवाए बेशक ये देखिए हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और जी यह पूरा परिवार मिला हुआ था और जिस बेशर्मी के साथ इन्होंने सोनम को पाला पोसा और जिस बेशर्मी के साथ उन्होंने स्वांग किया वो सब साफ सामने आ गया है और सोनम तो कह ही रही निर्लज्ज की तरीके से मैं बिल्कुल बेगुनाह हूं मुझे फसाया गया है।
तो ये भी इनका एक भी सुनना बाकी रह गया था लेकिन मुझे साफ दिख रहा है मैं बता दूं आपको अक्सर कभी-कभी एक्सीडेंट्स हो जाते हैं ऐसे जब अपराधी जेल जाते हैं तो जेल के कुछ शातिर अपराध जैसे निर्भया के केस में नहीं हुआ था कि दो जो गए वहां पे तो जेल के अपराधियों ने ही उनकी ऐसी कुटाई कर दी मुझे याद आ रहा है शायद एक का तो अंग भंग हो गया था शायद वो खत्म भी हो गया था तो जेल के अपराधी कभी-कभी ऐसा न्याय कर देते हैं मैं चाहता नहीं कि ऐसा कुछ हो क्योंकि मैं कानून मानने वाला हूं न्याय करेगा जज न्याय करेगी हमारी न्याय व्यवस्था लेकिन कभी-कभी ऐसे पापियों आतताइयों अत्याचारियों के साथ ऐसा ही जो है सलूक जेल में हो जाता है कि जो से भी बदतर होता है। खैर जिसने जो किया है सो बढ़ेगा। तो अब उस तो देख लीजिए कि इनके साथ क्या होता है। मुझे उम्मीद है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में पुणे में डाल के इनकी सजा जल्द से जल्द सुनाई जाए।
इनको जेल में कोई अतिरिक्त सुविधा ना मिले। सुविधा मिले तो इनके मां-बाप को भी को एक्यूज बना करके इनको भी जेल में भेजें कि अपनी पुत्री को नाम तो सिया रखा तब जाकर के सिया जी की सेवा जेल की सलाह के पीछे माता-पिता करें। सर सिया के वो जो दोस्त है जो उसका बॉयफ्रेंड है चेतन चौधरी उसके वकील ने तो कहना शुरू कर ही दिया ना कि वो तो हुडी पहनकर पता नहीं चल रहा है कि ये है भी या नहीं यानी कि इन दोनों को भी इनके परिवारों की तरफ से पूरा समर्थन है वकील तो परिवार के लोगों ने हायर करके दिए ना सिया गोयल को भी और इस चेतन चौधरी को भी बिल्कुल और कौन देगा चेतन चौधरी की औकात थोड़ी है कि वो वकील वगैरह कर ले मैं एक चैनल पे था जहां इनका वकील आया था तो उनको वकील को मैंने कह दिया साफ दिख रहा है कि ये वही चेतन है एआई बता देगा कॉनफेशन बिफोर पुलिस ऑफिसर हो गया कॉन्फेशन बिफोर पुलिस ऑफिसर मान्य नहीं है ।
अंजू जी तब तक मान्य नहीं है जब तक केवल पुलिस ऑफिसर के सामने है लेकिन वही बयान जब मजिस्ट्रेट के सामने हो जाएगा कलमबद्ध हो जाएगा तो वो बिल्कुल एक तरीके से कनफेशन बिफोर ए जुडिशियल मैजिस्ट्रेट और दूसरी चीज जब कभी वो रिकवरी टू ऑफ एन इंस्ट्रूमेंट या कोई और फैक्ट को या ऐसी कोई चीज को ले दे देता है तो वो कन्फेशन भी मान्य हो जाता है तो वकील साहब अपनी डिफेंस तो दे रहे हैं। उनको डिफेंस देनी भी चाहिए। लेकिन जब हमने उनको एक तरीके से कन्फ्रंट किया उसका कोई जवाब वकील साहब के पास नहीं था। अंजू जी। लेकिन सर सबसे इंपॉर्टेंट बात तो ये है कि जैसे आपने बेंगलुरु की घटना का भी जिक्र किया। वहां पर वो श्वेता अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहना चाहती थी।
माता-पिता ने ऑब्जेक्शन किया तो उसने उसके घर पर जब माता-पिता आए और साथ में बहन आई। उनको भी मार डाला। तो सर ये इस तरह की मनोवृत्ति अचानक से लड़कियों में क्यों देखने को मिल रही है? पापा की परियां अचानक से चुड़ैल कैसे बन रही है? उसका समाज ओटीटी प्लेटफार्म और जो साहित्य मैंने उत्कृष्ट बताया था जो मैंने आपके सामने नाम प्रस्तुत किए थे उनके चलते दिमाग की वायरिंग एक तरीके से एक रूटीन हो गया है जो कि आपसे मैंने कहा कि आपका थप्पड़ नहीं लगा सकती है किसी को यहां पर हत्या करने में नीले ड्रम में डाल देने में खाई में धकेल देने में अगर किसी को एक सेकंड नहीं लग रहा है तो जाहिर है कि दिमाग की जो वायरिंग है।
अंजूजी वो पूरी तरीके से नष्ट भ्रष्ट हो चुकी है। संस्कार मर चुके संस्कार तो तब बनेंगे जब संस्कार रहे हो। संस्कार विहीन और बिल्कुल रोबोटिक तरीके से आपको अपना प्रेम संबंध इतना जो है प्रगाढ़ करना है। उसके आगे आपने कुछ नहीं समझा। अरे कुछ नहीं समझा। चलो तुमने केतन को नहीं समझा। तुमने राजा को नहीं समझा। उधर अगर हम बात कर ले सोनम रघुवंशी को लेकिन तुमने कम से कम अपने बारे में तो सोचा कि तुम्हारा क्या होगा? ना माया मिली ना राम। इनको ना केतन मिला और ना इनका यह चेतन मिलेगा। दोनों से हाथ धो बैठे चक्की पीसेंग दिन भर वहां और सारी जो है इनकी एक मिनट में सारी जो इनको जो ठसक थी वो सब निकल जाएगी जेल में जबंगी 24 घंटे जाते ही जेल में कड़क वार्डन आ गई और इनकी खातिर कर दी तो सारा इनका लाभकार निकल जाए और मैं चाहूंगा इसके साथ सख्ती की जाए कोई मुरमत ना हो इनके साथ क्योंकि इसने जो पारश्विक कृत किया अंजू जी जो भी कड़ाई की जाए वो कम होगी ऐसी के लिए सर क्या आपको लगता है कि माता-पिता भी कहीं ना कहीं बच्चों पर अपने फैसले थोप देते हैं। इसलिए शायद यह देखने को मिला हो सिया के मामले में क्योंकि अरेंज्ड मैरिज थी। परिवार एक दूसरे को जानते थे तो उन्होंने लड़का पसंद कर लिया। उनको अपनी बेटी से पहले पूछ लेना चाहिए था कि कोई और तो पसंद नहीं है।
क्या ऐसा कर सकते थे मां-बाप? तो शायद ये घटना नहीं होती। आपको लगता है ऐसा? अच्छा सवाल। अच्छा सवाल। आप आ जाइए। ये जो एक ये लड़की है सिया और दूसरी वाली लड़की जो थी उसका नाम सोनम। यह दोनों एक ऐसे व्यक्ति से प्यार करते थे जिसका सामाजिक स्तर बहुत नीचा था। इन दोनों लड़कियों को जो मेरी समझ में आ रहा है कि अगर यह कह देते कि हम इस अरबपति से नहीं करेंगे। इस करोड़पति से नहीं करेंगे।
हम इस बीपीएल के लड़के से करेंगे तो माता-पिता अलग हो जाते। कहे बीपीएल से क्यों करोगे? तो अगर एक बार जैसा कि सोनम ने भी कहा था इसके मन में आया होगा। अगर यह लड़का सामने से गायब हो जाए तो यही तर्क रहेगा।
हमने तो कह दिया था कि कर लेंगे। लेकिन अब नहीं हुआ तो चलिए फिर हम अपने हिसाब से कहीं भी हम कर लेंगे साल दो साल बाद और फिर उसमें फिर माता-पिता का नैतिक साहस नहीं रहेगा या नैतिक अधिकार नहीं रहेगा कि नहीं बेटा तुम यहां ना करो फिर वो वही करेंगे जो बच्ची चाहती थी लेकिन आपकी जो पहला मूल प्रश्न है कि अगर तुम कह देती पहली बार में कि हमको यहां नहीं करना करना है कौन माता पिता मना कर दे कौन माता पिता मना कर सब माता पिता यही कह देते कि ठीक है तुम्हें जहां पूछनी है तुम कर लो ।
लेकिन कम से कम कोई ऐसा अपराध की बात मत करना। माता पिता की चूक ये भी है कि उन्होंने बच्ची के ऊपर नजर नहीं रखा। इतने हजारों कॉल हो रहे हैं। 28 घंटे की बातचीत का ये रिकॉर्ड मिल रहा है। तो क्या माता-पिता अंधे हो गए थे? उन्होंने जरूरी नहीं समझा कि बेटी कहां जा रही? किसके साथ प्रेम प्रसंग बना रही है और पंगे बढ़ा रही है प्यार मोहब्बत की। इसके ऊपर तो माता-पिता को देखना ही चाहिए था।
और जिस तरीके का अश्लील साहित्य ओटीटी लड़कियां देख रही है उसके ऊपर माता-पिता को अंकुश रखना चाहिए था। आपका जो सवाल था क्या माता-पिता की परवरिश की कमी थी? छोटी मोटी कमी नहीं थी। 200% माता-पिता की परवरिश की कमी थी। समय दीजिए बच्चों के ऊपर देखिए क्या किताबें पढ़ रही है। द बुक्स दैट आई रीड आर एन एक्सटेंशन ऑफ माय पर्सनालिटी।
जो किताबें मैं पढ़ता हूं मेरे व्यक्तित्व का विस्तार है। जो पिक्चरें मैं देख रहा हूं बराबर देख रहा हूं वो मेरी व्यक्तित्व का विस्तार है। अंजू जी और जिस तरीके की अश्लील पिक्चरें और ये सब मैंने आपको बताया तो माइंड की वायरिंग तो बदल ली जाएगी। फिर तो वही करेंगे अपराध करेंगे। फिर तो सभी बन जाएगी जो है हत्यारी ने खून पीने वाली चुड़ैलें फिर तो होना ही था और यही मैं फिर कहूंगा कि शादी ब्याह करने से पहले कुंडली मिला ना मिला लेकिन कम से कम एक बार मनोचिकित्सक से और चिकित्सक से एक बार मेडिकल परीक्षण दोनों का जरूर करवाएं। सर आपको लगता है कि इस मामले में जैसे सोनम तो बाहर आ गई है सर जमानत मिल गई है जब फैसला होगा तब की तब से हमारे देश की न्याय व्यवस्था किस रफ्तार से चलती है।
हम सबको पता है जिनका बेटा जाना था राजा रघुवंशी वो तो चला गया यहां पर केतन हमेशा के लिए चला गया मां-बाप का लॉस है अब फैसला जो भी आए सर आपको लगता है कि उनको न्याय मिलेगा या धीमी रफ्तार से केस होता रहेगा और एक दिन आएगा जब सिया भी जमानत पर बाहर होंगी और वो चेतन भी अंजू जी दोनों परिवार खत्म हो गए राजा रघुवंशी का भी और केतन का भी। अब सजा मिल जाए तो आंसू पोछने भर को तो होगा। न्याय तो अब होने लगा जिसका बेटा चला गया वो परिवार खत्म हो गया। वो माता-पिता मिट गए और अब सजा हो जाए तो उसके लिए ठीक है आंसू पूजिया दिल को तसल्ली शायद थोड़ी हो जाए लेकिन परिवार के साथ न्याय अब परमात्मा ही करेंगे।
बिल्कुल सर सख्त धाराओं के तहत तो केस दर्ज किए गए हैं सिया और चेतन पर लेकिन इस मामले का हाल भी सोनम रघुवंशी जैसा ना हो मुझे तो कतई पसंद नहीं आया था वो फैसला कि वो जमानत पर बाहर है तो इनको भी कहीं ऐसा ना हो आने वाले एक दो महीने बाद जमानत मिल जाए तो ये कतई नहीं होना चाहिए जिन्होंने ऐसा जघन्य अपराध किया है उनको तो हमेशा हमेशा के लिए जेल के अंदर सड़ना ही चाहिए भले ही मामले की सुनवाई होती रहे।
लेकिन आप सही कह रहे हैं कि जिस तरह का ओटीटी पर आजकल फिल्म फिल्में आती हैं, सीरीज आती हैं। कहीं ना कहीं वो सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं। और ऐसी लड़कियां क्योंकि सिया की उम्र 20 साल है सर। आप सोचिए 20 साल की उम्र में वो हत्यारी बन गई। तो आप सोचिए किस तरह की परवरिश भी हुई होगी और किस तरह के माहौल में वो होगी जहां पर उसको लगा कि हत्या करके वो आजाद हो जाएगी। कुछ किसी को पता नहीं चलेगा और उसकी शादी चेतन से हो जाएगी। तो सोचिए इस तरह की सोच जहां से पनप रही है उसको वहीं पर दुरुस्त करने की जरूरत है।