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पंचायत एक्ट्रेस सुनीता ने खोली इंडस्ट्री की पोल

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समाज में भेदभाव नहीं होना चाहिए। गरीब और अमीर में स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं देना चाहिए। इस तरह की चीजें फिल्मों में तो बहुत दिखाई है। लेकिन असलियत तो यह है कि फिल्मों के सेट पर फिल्म इंडस्ट्री में ही सबसे ज्यादा बड़ा भेदभाव किया जाता है। यह खुलासा किया है फिल्म इंडस्ट्री की एक बेहतरीन एक्ट्रेस सुनीता राजभर ने जिन्हें हम पंचायत में देख चुके हैं।

सुनीता ने एक्टर जतिन नेगी के साथ रिसेंटली एक इंटरव्यू दिया जिसमें जतिन ने और सुनीता ने फिल्म इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव के बारे में बात की। सुनीता राजभर ने बताया कि यहां पर अगर लीड एक्टर है तो उसको चार वैनिटी वैन्स मिल जाएगी। काफी स्टाफ भी मिलता है। लेकिन आप कैरेक्टर रोल्स कर रहे हैं तो आपको वैनिटी वैन मिलना मुश्किल है। सिर्फ एक स्पॉटबॉय दिया जाता है जो आपके सामान का ध्यान रखता है।

अगर वैनिटी वैन दी भी जाती है तो आपको बाकी के पांच सात कैरेक्टर आर्टिस्ट के साथ उस वैनिटी वैन को शेयर करना होता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप अनुपम खैर या परेश रावल के दर्जे के कैरेक्टर एक्टर नहीं हैं तो फिर आपको इंडस्ट्री में इज्जत नहीं मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सेट पर सबसे ज्यादा इज्जत होती है लीड एक्टर्स की। उन्हीं के इर्द-गिर्द सभी लोग घूमते हैं और उन्हीं को सारी फैसिलिटीज मिलती है। अगर आप कैरेक्टर रोल्स निभा रहे हैं तो आपको स्पॉटबॉय भी इज्जत नहीं देगा और तो और आपको पेमेंट भी 90 दिनों बाद मिलती है। इधर जतिन नेगी ने बताया कि बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस में वह काम कर चुके हैं। कई बार उन्होंने कुछ प्रोजेक्ट्स में छोटे-मोटे रोल्स किए, कैरेक्टर रोल्स किए, बैकग्राउंड के रोल्स किए। वहां पर उनके साथ बहुत भेदभाव हुआ।

उनका कहना है कि लंच भी लगता है तो वह तीन कैटेगरीज में बटा हुआ होता है। ए, बी, सी। ए लीड एक्टर्स के लिए, बी सपोर्टिंग स्टार कास्ट के लिए सी बैकग्राउंड डांसर्स के लिए। कई बार तो कॉफी भी नहीं मिलती है और खाने के लिए अगर पूछ ले तो हमारे लिए बड़ी बात होती है। बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस ए बी सी कैटेगरी वाली जो रूल है इसे फॉलो करते हैं। तो बहुत ही शॉकिंग चीजें यह सेट से बताई है उन एक्टर्स ने जो फिल्म इंडस्ट्री में अच्छा कर रहे हैं। लेकिन जो सेट पर यह भेदभाव होता है। यह कहीं ना कहीं इस फिल्म इंडस्ट्री का डबल स्टैंडर्ड दिखाता है कि फिल्मों में तो आप भेदभाव खत्म करने की बातें करते हैं। उसूलों की बातें करते हैं। लेकिन खुद प्रोफेशनल लाइफ में इन्हीं चीजों को फॉलो किए हुए हैं और हर एक स्टेज पर भेदभाव कर रहे

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