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अपनी ही फ़िल्म नूरी को क्यूँ फ्लॉप कराना चाहते थे यश चोपड़ा?

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नमस्कार आदाब, मैं हूं सना और आज हम बात करेंगे एक ऐसी अनबिलीवेबल कहानी की जिसमें एक बड़ा प्रोड्यूसर डायरेक्टर अपनी ही फिल्म के फ्लॉप होने की दुआ मांग रहा था। [संगीत] है ना अजीब बात? लेकिन यह बिल्कुल सच है। तो चलिए जानते हैं। बॉलीवुड में फिल्में बनती हैं हिट होने के लिए। [संगीत] लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि एक डायरेक्टर अपनी ही फिल्म के फ्लॉप होने की दुआ कर रहा था तो शायद आपको यकीन ना हो। लेकिन यह बात बिल्कुल सच [संगीत] है

और वो कोई छोटे-मोटे डायरेक्टर नहीं बल्कि रोमांस के बादशाह यश [संगीत] चोपड़ा थे। तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि यश चोपड़ा चाहते थे कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाए और कैसे वही फिल्म सुपरहिट बन गई? साल था 1975 दीवार की बड़ी सफलता के बाद यश चोपड़ा बॉलीवुड के टॉप डायरेक्टर बन चुके थे। मेरे पास मां है। अब उनके पास बड़ा प्लान था। एक बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म काला पत्थर। एक रास्ता है। सेठ धनराज पुरी की माइंड में काम करने वाला हर मजदूर अपनी तनख्वाह पाते ही सबसे पहले अपना कफ़न खरीद लेता है। अभी तक दुनिया में कोई ऐसी जगह ही नहीं बनी जहां से मंगल ना निकल सके। देखो [संगीत] और दूसरी तरफ एक छोटी सॉफ्ट रोमांटिक फिल्म नूरी।

तुम जानती हो तुम कितनी खूबसूरत? तुम तो इस गांव को जानते हो। एक से एक शैतान बड़ा है। मैं दूरी से शादी करना चाहता हूं। अगर आइंदा नूरी का नाम भी तुम्हारी जुबान पे आया मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। चोरी चोरी कोई आए मैं उनकी खुशियों को आग लगा दूंगा। [संगीत] यानी एक तरफ बड़ी फिल्म और दूसरी तरफ छोटा सा इमोशनल एक्सपेरिमेंट। अब यहां आता है कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट [संगीत] कि उन्होंने नूरी बनाई ही क्यों और उसे फ्लॉप क्यों कराना चाहते थे? दरअसल उनका पूरा ध्यान काला पत्थर पर था। जिसमें अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे थे। [संगीत] कहा जाता है कि यश चोपड़ा को पूरा भरोसा था कि काला पत्थर ब्लॉकबस्टर होगी। अब काला पत्थर से जो मुनाफा होता उस पर लगने वाले टैक्स को बचाने के लिए उन्होंने सोचा कि एक छोटी फिल्म बनाई जाए जो फ्लॉप हो जाए। फिल्म धूल का फूल के समय जब [संगीत] यश चोपड़ा असिस्टेंट थे। तब उन्होंने कैरेक्टर एक्टर मनमोहन कृष्ण से वादा किया था कि अगर वह कभी प्रोड्यूसर बने तो उन्हें एक फिल्म डायरेक्ट करने के लिए देंगे।

बस उसी वादे को पूरा करने के लिए नूरी उन्हें डायरेक्ट करने के लिए दे दी गई। इस फिल्म में हीरो फारूक शेख को लिया गया और नई हीरोइन पूनम ढिलो को लॉन्च किया गया। म्यूजिक खयाम साहब का था। रे रे मेरे दिल में। यह गाना आज भी लोगों के दिल में बसता है। अब आता है असली ट्विस्ट। [संगीत] 11 मई 1979 को नूरी रिलीज होती है और जिस फिल्म को यश चोपड़ा फ्लॉप मान रहे थे वो सुपरहिट हो जाती है। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि चीन में भी यह फिल्म बहुत चली। दूसरी तरफ फिल्म काला पत्थर जिस पर [संगीत] उन्हें पूरा भरोसा था वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बस एवरेज रही। कमाई ठीक-ठाक हुई लेकिन बजट ज्यादा होने की वजह से मुनाफा कम रहा।

यानी जिस फिल्म से उम्मीद थी वो एवरेज निकली और जिससे उम्मीद नहीं थी वो सुपरहिट बन गई। फिल्म काला पत्थर धनबाद में 27 दिसंबर 1975 को [संगीत] चासनाला कोलियरी में हुए हादसे पर आधारित थी जिसमें 375 खनिकों की जान चली गई थी। शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच तनाव भी बढ़ गया था। [संगीत] यानी फिल्म के पीछे भी ड्रामा था और बॉक्स ऑफिस पर भी। यश चोपड़ा जिस फिल्म को फ्लॉप देखना चाहते थे वही उनकी सबसे यादगार फिल्मों में से एक बन गई और जिस पर उन्होंने सबसे ज्यादा भरोसा किया वो बस एवरेज बनकर रह गई। [संगीत] इसलिए कहते हैं किस्मत के खेल के सामने प्लानिंग भी फेल हो जाती है। तो दोस्तों अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक करें, शेयर [संगीत] करें और ऐसे ही बॉलीवुड के अनसुने किस्सों के लिए आईजे प्लस को जरूर सब्सक्राइब करें। मिलते हैं अगले वीडियो में। टेक केयर। [संगीत]

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