लेते हैं। एक अजब गजब चोरी की वारदात सामने आई है। जिसमें युवक एक युवक ने चोरी नहीं की बल्कि अपनी दरियादली और ईमानदारी भी दिखाई है। वो चोरी तो करता है लेकिन ईमानदारी के साथ चोर दुकान में रखा रोटावेटर चोरी कर ले गया। लेकिन वारदात से पहले उसने दुकानदार के नाम एक पत्र लिखा और यह बताया कि वो 3 साल में वह पैसा जो है वह लौटा देगा और वो भी ब्याज के साथ।
मतलब आराम से आराम से मैं आपका ये उपकरण लेकर जा रहा हूं जिसका अगर मैं मूल्य लगाऊं तो 90000 है और 3 साल में 10% के हिसाब से 27000 ब्याज होगा जो कि टोटल ₹17000 होता है जो कि आपको 3 साल के समय अंतराल के अंदर मिल जाएंगे। ईश्वर आपको दिन रात तरक्की दे। मैं आपको यह भरोसा दिलाता हूं कि ओझा कार्य अपने अत्यंत कठिन समय के कारण कर रहा हूं।
जिसमें मेरे कुछ दोस्तों का हाथ है। उन्होंने मुझे बर्बाद करने की कोशिश की और मेरे सारे उपकरण उठा लिए गए। कृपया मुझ पर विश्वास करें। धन्यवाद भाई। यह शब्द किसी बैंक के एग्रीमेंट के नहीं बल्कि उस चोर के पत्र के हैं जो वारदात को अंजाम देने के बाद वह पीछे छोड़ गया था। चोर की ईमानदारी और बेबसी के इस कहानी की वजह से यह चोरी उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसके बाद कई सवाल भी क्या इतना ईमानदार चोर देखा है आपने? यह चोरी थी या बाद में पैसे लौटाने की डील थी। बेबसी और ईमानदारी की एक साथ कहानी।
सीतापुर में चोरी का एक अजब गजब कारनामा देखने को मिला है। जहां पर चोर ने अपनी जरूरत के लिए एक मशीन को चोरी करता है और चोरी का कारण भी है। वो एक नोट में लिख के वहां पर छोड़ता है। लेकिन मशीन जब लेकर के घर पहुंचता है तो वह मशीन उसके काम की नहीं होती है। इसके बाद चोर उस मशीन को वापस करने फिर उसी दुकान पर पहुंच जाता है। देर रात जब चोर वहां पर पहुंचा तो दुकानदार ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। यह कहानी चोरी की है।
लेकिन इसमें अपराधी से ज्यादा हैरान करने वाला किरदार है ईमानदारी का। सीतापुर की धरती पर एक ऐसा चोर सामने आया जिसने पहले चोरी की फिर उस पर गणित लगाया और अंत में खुद ही सुधार यात्रा पर निकल पड़ा। रात के अंधेरे में एक दुकान से उठाया गया रोटरी वेटर। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। चोर ने पीछे छोड़ा एक पत्र। जो किसी अपराधी की नहीं एक बिजनेस एग्रीमेंट जैसा था। पत्र में लिखा था ₹90,000 का सामान है। 3 साल में 10% ब्याज लगेगा। यानी कुल रकम ₹17,000 हो जाएगी और वादा किया समय पर चुका दूंगा। पत्र में दर्द बयां किया गया।
खुद को मजबूरी का शिकार बताया गया और जिम्मेदारी डाली गई। दोस्तों के धोखे की। पर यह कोई आम चोरी नहीं थी। यह एक ऐसा केस था जहां चोर खुद को पीड़ित साबित कर रहा था। पूरा मामला महमूदाबाद कोतवाली क्षेत्र का है। इस क्षेत्र के लवरहा गांव निवासी सुरेश पटेल ने इस अजब गजब चोरी को अंजाम दिया है। सुरेश पटेल चोरी करने तो रोटावेटर गया था लेकिन रात के अंधेरे में वह रोटावेटर और रोटरी वेटर में फर्क नहीं कर पाया। जिसके चलते वह रोटरीवेटर चोरी करके चला गया। जिसके बाद में दिन के उजाले में जब उसको समझ आया कि उसने चोरी करने में गलती कर दी है तो वह उस मशीन को वापस करने फिर से उसी दुकान पर पहुंच गया। जिस जहां पर दुकानदार ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।
जैसे ही ट्रैक्टर दुकान के पास पहुंचा हलचल मच गई। ग्रामीण जाग गए और मौके पर चोर को पकड़ लिया गया। अब वही मशीन जिसे चोरी समझा गया था। सबूत बन चुकी थी। सूचना पुलिस तक पहुंची। दो युवक हिरासत में लिए गए और साथ में बरामद हुआ चोरी किया गया सामान और ट्रैक्टर। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह चोरी थी या मजबूरी का गलत हिसाब? पुलिसिया पूछताछ में एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि सुयस जो है वह कोई पेशेवर चोर नहीं है बल्कि जो नोट में उसने लिखा था कि अपने मित्रों के संगत में आकर के उसकी यह हालत हो गई है कि उसे चोरी करने पर मजबूर होना पड़ा है।
फिलहाल इस चोर की ईमानदारी को देखते हुए दुकानदार ने कोई भी कानूनी कारवाई करने से मना कर दिया है। सीतापुर के मामला सिर्फ चोरी का नहीं है। उस दौर की कहानी है जहां अपराध भी भावनाओं के साथ लिखा जा रहा है और चोर भी खुद को ईमानदार साबित करने की कोशिश में एक तरफ कानून है और दूसरी तरफ वो चिट्ठी जिसमें लिखा था ब्याज सहित लौटा दूंगा