हैदराबाद के रेडियल्स में एक हॉस्पिटल है जहां हर सुबह हज़ारों माएं अपने बच्चों को लेकर आती है। एक ऐसा हॉस्पिटल जहां फ्री ट्रीटमेंट कोई पैसा नहीं। क्या आपको पता है यह हॉस्पिटल किसने बनाया और एक ऐसी लेडी जो कभी मां नहीं बन पाई। एक ऐसी प्रिंसेस जिसको दुनिया ने भुला दिया लेकिन हैदराबाद ने नहीं। और इनका नाम है प्रिंसेस [संगीत] नीलोफर। 4 जनवरी 1916 इस्तानबुल तुर्की ऑटोमन के रॉयल फैमिली में एक ऐसी लड़की का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया नीलोफर। इनके फादर सलाद्दीन बेह ऑटोमन कोर्ट में एक रेस्पेक्टेड पोजीशन पर थी और इनकी मां एडिल सुल्ताना डायरेक्टली सुल्तान मुराद की फिफ्थ डॉटर थी। मतलब प्योर रॉयल ब्लड लाइन। लेकिन यह बस दो साल ही रहता है।
1918 में न्यूफर के फादर का इंतकाल हो जाता है और 1924 में [संगीत] तुर्की रिपब्लिक बन जाता है और ऑटोमन की रॉयल फैमिली को देश से बाहर निकाल दिया जाता है परमानेंटली। एक आठ साल की बच्ची अपनी मां के साथ फ्रांस के नाइस शहर में आ बसती है। कोई सेविंग्स नहीं और कोई प्रॉपर्टी नहीं। नीलफर बाद में अपने लेटर में लिखते हैं कि वह पब्लिक स्कूल [संगीत] जाते थे और बाकी शहजादियां अपने घर में प्राइवेट टिटर से पढ़ते थे। यह उनकी रियल स्टार्टिंग पॉइंट थी। प्योर ब्लड लाइन लेकिन बिल्कुल नॉर्मल और गरीब जिंदगी। इस पूरी स्ट्रगल में एक चीज कंसिस्टेंट रही। हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान उनकी फैमिली को फाइनेंशियली सपोर्ट किया।
टाइम मैगज़ीन ने निजाम को दुनिया का सबसे बड़ा अमीर इंसान डिक्लेअ किया। लेकिन जब 1931 में निजाम के बेटों के लिए रिश्ता आया तो इसमें 15 साल के नीलोफर को भी इंक्लूड किया गया। 12 नवंबर 1931 में नाइस के विला सेबल में डबल वेडिंग की गई। जहां प्रिंसेस दुरुशावर जो ऑटोमन के लास्ट कैलिप अब्दुल मजीद टू की बेटी से आजम जा की शादी हुई जो निजाम के बड़े बेटे थे और प्रिंसेस निलोफर जो दुरुशवर के कजिन थे इनकी शादी मोजम जा से हुई जो निजाम के छोटे बेटे थे। लोकल न्यूज़पेपर में हेडलाइन छपी [संगीत] एज एंड वन नाइट विन से पीसना शिप निकला। रास्ते में दोनों बर्ड्स को सिखाया गया कि साड़ी कैसे पहनते हैं और निजाम के सामने कैसे बिहेव करना है और उस शिप में और एक शख्स थे महात्मा गांधी वो लंदन से आ रहे थे और इसके बाद हैदराबाद पर ट्रेन रुकी नीलोफर स्टेशन पर उतरे और पूरे लोग नीलोफर को देख रहे थे। निजाम ने पूरे कोर्ट के सामने नीलोफर का इंट्रोडक्शन कराया। नागिना निजाम के अपने बच्चे उन्हें सरकार कहते थे। लेकिन नीलोफर ने उन्हें पापा कहा और वो स्टिक निजाम ने सिर्फ नीलोफर के लिए एक्सेप्ट किया। हॉलीवुड से फिल्म ऑफर हुए। लेकिन नीलोफर ने मना कर दिया। विग और टाइम्स के कवर पर नीलोफर आए थे। दुनिया के टॉप 10 मोस्ट ब्यूटीफुल वुमस के [संगीत] नाम में। लेकिन यह सिर्फ एक ग्लैमर था। असली काम कुछ अलग ही था। नीलोफर नौबत पहाड़ के हिलफोर्ट पैलेस में रहने लगे। जहां मौजम रोज शाम को मुशायरा सजाते। नीलोफर की पेंटिंग्स करवाते और फोटोस खिंचवाते। बाहर से सब परफेक्ट लग रहा था।
लेकिन उस जमाने में हैदराबाद के रॉयल वूमेन का एक रूल था। घर के अंदर पर्दा सिस्टम में पब्लिक में [संगीत] नहीं लेकिन नीलोफर में मना किया वह फंक्शंस में जाते इवेंट इनोगेशन करते और कॉकटेल पार्टीज भी अटेंड करते थे। इसे देख के लोग हैरान हो जाते थे। फिर एक के बाद एक काम किए। जैसे इंडियन वूमेन कॉन्फ्रेंस हैदराबाद चैप्टर के प्रेसिडेंट बने। सरोजनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू से दोस्ती हुई। दो अलग वर्ड लेकिन एक ही डायरेक्शन और वर्ल्ड वॉर टू में नर्स की ट्रेनिंग ली और वांडेड सोल्जर्स की सेवा की। लेडी हैदरी क्लब के जरिए चैरिटी फंड रेर्स ऑर्गेनाइज किए। यह उस जमाने में कोई रॉयल मूवमेंट नहीं करती थी। लेकिन नीलोफर ने किया। अब एक ऐसी चीज जो पब्लिकली बहुत कम लोगों को पता है। नीलोफर की सबसे बड़ी पर्सनल ख्वाहिश थी कि उनका एक बच्चा उन्होंने यूरोप में डॉक्टर से कंसल्ट किया, ट्रीटमेंट कराया लेकिन कुछ नहीं हुआ। और 1948 में शादी के पूरे 17 साल बाद मोज़म जा ने बिना बताए दूसरी शादी कर ली। और 4 साल में तीन बच्चे हुए और इसके बाद नीलफर में फिर कभी मौजम से बात नहीं की। वो अंदर से टूट चुके थे। लेकिन अभी भी एक काम बाकी था जो [संगीत] शायद उनकी पूरी लाइफ का सबसे बड़ा काम बनने वाला था। 1949 नीलोफर के सबसे क्लोज्ड हेल्पर रफत उनीसा बेगम की डिलीवरी के वक्त डेथ हो गई। कोई स्पेशलिस्ट नहीं और कोई फैसिलिटी भी नहीं थी और यह लॉस सिर्फ पर्सनल नहीं था। यह एक रियलाइजेशन था कि हैदराबाद के हजारों औरतों के साथ यह रोज हो रहा है। अब वह सीधा निजाम के पास गई और कहा अब कोई रफत नहीं मरेगी। और फिर निजाम ने रेड हिल्स में एक जमीन खरीदी, आर्किटेक्ट्स बुलाए और कंस्ट्रक्शन स्टार्ट हुआ। लेकिन 13 सितंबर 1948 में इंडियन आर्मी हैदराबाद आई और ऑपरेशन पोलो स्टार्ट हुआ। यह ऑपरेशन पोलो सिर्फ पांच दिन चला। 17 सितंबर की रात निजाम [संगीत] ने खुद दक्कन रेडियो में आके अपने फौज को सरेंडर करने का हुकुम दिया। जिस सल्तनत ने 224 साल दक्कन पर राज किया वो सल्तनत एक हफ्ता भी नहीं चल पाई। और जब नीलोफर लंदन में थे। करीब के लोगों ने कहा मत आओ। यहां हालात बहुत ज्यादा खराब है।
लेकिन नीलोफर आए इंडिया की बदलती हुई सड़कों से गुजरा और निजाम से मिला। जिन्होंने कभी इंडिया को अपनी मुट्ठी में रखा था। अब वह उसी महल के चार दीवारों में समेट के रह गए। जहां कभी पूरी दुनिया उन्हें हाजिर देता था। इसके बाद सीधा नीलोफर कंस्ट्रक्शन साइट पर जाती है और अपने हाथों से उठाई हुई दीवार देखती है और यह उनका हैदराबाद में आखिरी काम था। इसके बाद वह लंदन चली गई और वापस नहीं आई। 1953 में हॉस्पिटल खुला। 100 बेड्स से शुरू हुआ यह हॉस्पिटल आज 1200 बेड्स का हो गया है। ऑस्ट्रेटिक्स, इडियट्रिक्स और नियटोलॉजी फ्री इलाज एशिया का सबसे बड़ा वुमेन और चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल में से एक। इसके बाद 1952 में मौजमजा को डिवोर्स दिया और वापस फ्रांस आए और वग ने इनके साड़ियों को फीचर किया। 21 फरवरी 1963 को पेरिस में एडवर्ब जूलिस पॉप से दूसरी शादी हुई जो कि एक अमेरिकन वार हीरो और फिल्म प्रोड्यूसर थे। इसके बाद 12 जून 1989 को इनका पैरस में इंतकाल हो जाता है। बॉबिन सिमिंग ट्री में इनको ततफिन किया जाता है इनके मां के बिल्कुल पास में। लेकिन हैदराबाद ने इन्हें जाने नहीं दिया। आज भी हैदराबाद के नीलोफर हॉस्पिटल में 1200 से ज्यादा बेड्स हैं। जहां हर रोज फ्री इलाज होता है। इनके 34 साड़ीज न्यूयॉर्क के फैशन इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रिजर्व है। फैशन हिस्टोरियंस कहते हैं कि निलोफर इंडोवेस्टर्न स्टाइल की सबसे पहले प्रीनियोर थे और नीलोफर को दुनिया भुला सकती है लेकिन हैदराबाद