यह कहानी है उस एक्टर की जिसे बॉलीवुड ने राजकुमार की तरह पाला था। एक ऐसा एक्टर जिसने हर वो नशा किया जो अंडरवर में बेचा जाता था। एक ऐसा एक्टर जिसकी फिल्मों से ज्यादा तो गर्लफ्रेंड रहीं। उसने करीब 308 लड़कियों को डेट किया। रेखा और माधुरी दीक्षित जैसी बड़ी एक्ट्रेस से उनका नाम जुड़ा। उसने तीन शादियां भी की और जब उसकी पहली बीवी मर रही थी तब वह उससे हजारों किलोमीटर दूर अपना अफेयर चला रहा था। एक ऐसा एक्टर जिस पर आतंकवादी होने का आरोप लगा। यही कहना चाहता हूं कि मैं टेररिस्ट आदमी नहीं हूं।
इस एक्टर ने 5 साल जेल में बिताए। अपनी जवानी में हर वो बुरा काम किया जिसके लिए बॉलीवुड पर काला दाग लगा हुआ है। फिर चाहे वो नशे की लत हो या फिर अंडर वर्ल्ड से नाता। आप सोचिए। जी। जी। जी। लेकिन फिर सिर्फ एक फिल्म से दर्शकों ने उसकी हर गलती माफ कर दी और बना दिया सुपरस्टार। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के संजू बाबा उर्फ संजय दत्त की। लेकिन क्या संजय दत्त वाकई उस शोहरत और शान के हकदार हैं क्योंकि उनका नाम 1993 के बॉम्बे ब्लास्ट से भी जुड़ा था। जिसमें 257 लोग मारे गए थे। आज जानेंगे बॉलीवुड के सुपरस्टार कहे जाने वाले संजय दत्त की ड्रग्स की लत से लेकर 308 गर्लफ्रेंड्स और टाडा केस की पूरी कहानी। लेकिन उससे पहले ऐसी आंख खोल देने वाली वीडियोस लाने की हमारी कोशिश को सपोर्ट करने के लिए एक लाइक और कमेंट जरूर कीजिए।
29 जुलाई 1959 के दिन बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस दत्त के घर संजय दत्त का जन्म होता है। संजय को बॉलीवुड में राजकुमार की तरह पाला जाता था। सिर्फ 6 साल की उम्र में संजय ने अपने माता-पिता से सिगरेट पीने की आदत किज्जत की थी और 9 साल की उनके पिता ने जो आधी सिगरेट पी के फेंक दी थी संजय ने उसे उठाकर पहली बार सिगरेट का कश लगाया था। 11 साल की उम्र में उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया। स्कूल की पार्टीज दोस्तों के बीच वो बियर और रम के ग्लास ऐसे पकड़ते जैसे कोई चॉकलेट का पैकेट हो।
धीरे-धीरे उनका शरीर नशे का आदि होता चला गया। फिर आए वह दौर जब संजय दत्त की जिंदगी में चरस, गांजा, एलएसडी, हेरोइन, कोकीन, एमडी, एमए जैसे खतरनाक ड्रग्स ने एंट्री ली। वो अपने ड्रग्स पैडलर से हर वो ड्रग्स खरीदते जो मार्केट में नया आया था। धीरे-धीरे संजय को नशे की लत इतनी बढ़ गई कि वह हमेशा नशे में रहने लगे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं रोज सुबह उठकर सोचता था कि आज कौन सा नशा करूं। और रात को सोचता था कि भगवान प्लीज मुझे सुला दे। मैं सुबह उठना नहीं चाहता। और जब उनके पिता सुनील दत्त अपने बेटे के हाल को देखकर रिहब सेंटर ले गए तो संजय ने पेपर में लिखे सभी ड्रग्स के पास टिक कर दिए। तभी डॉक्टर ने उनसे हैरान होकर कहा था तुम अब तक जिंदा कैसे हो? जिसके बाद संजय दत्त को अमेरिका के एक हाई सिक्योरिटी ड्रग्स रिहब सेंटर में भर्ती कराया गया। जहां 2 सालों तक तड़प कर गुजारने के बाद संजय ने जैसे तैसे ड्रग्स की लत छोड़ी। कहा जाता है कि जब संजय की मां नरगिस दत्त की मौत हुई थी तब भी संजय रिहब सेंटर में ही थे। ड्रग्स के साथ संजय दत्त की एक और बुरी आदत थी अनगिनत प्रेमिकाएं बनाने की आदत। संजय दत्त ने खुद कहा था कि मैंने करीब 308 लड़कियों को डेट किया है। शायद गिनती भी गलत हो क्योंकि कुछ नाम तो अब याद भी नहीं। स्कूल और कॉलेज में हर हफ्ते उनकी गर्लफ्रेंड्स बदलती थी।
उन्होंने कई लड़कियों का दिल तोड़ा। यहां तक कि एक बार तो वह अपने ही दोस्त की प्रेमिका के साथ सो गए थे जो किस्सा संजू फिल्म में भी दिखाया गया है। लेकिन कॉलेज में उन्हें पहली बार सच्चा प्यार हुआ टीना मुनीब से जो आज टीना अंबानी हैं। साल 1981 में संजय को अपने पिता सुनील दत्त की मदद से अपने करियर की पहली फिल्म रॉकी मिलती है। जिसमें वह अपने कोस्टार टीना मुनीब को दिल दे बैठते हैं और दोनों काफी लंबे समय तक एक दूसरे को डेट करते हैं। लेकिन संजय दत्त के नशे की लत इस रिश्ते को भी बिगाड़ देती है और दोनों का ब्रेकअप हो जाता है। इस रिश्ते को लेकर टीना ने एक इंटरव्यू में कहा था संजू लवेबल है लेकिन उसके साथ रहना आत्महत्या जैसा था। जिसके बाद फिल्म जमीन आसमान के सेट पर संजय और रेखा की नजदीकियां बढ़ी थी। उस वक्त रेखा अमिताभ बच्चन के साथ रिश्ते को लेकर पहले से ही विवादों में फंसी थी और संजय के साथ उनका नाम जुड़ना एक बड़ी सनसनी थी। हालांकि दोनों का रिश्ता लंबा नहीं चला। जिसके बाद संजय की पहली शादी रिचा शर्मा से दोनों को एक प्यारी बेटी भी हुई।
लेकिन शादी के 4 साल बाद रिचा को ब्रेन ट्यूमर हुआ और वह अपना इलाज करवाने अमेरिका चली गई। शुरू में संजय भी अपनी बीवी का ध्यान रखने अक्सर अमेरिका जाया करते थे। लेकिन धीरे-धीरे उनका अमेरिका आना जाना कम हो गया। जिसके कुछ समय बाद यह खबर आई कि जहां संजय दत्त की बीवी रिचा शर्मा अमेरिका में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही हैं, वहीं यहां भारत में संजय दत्त ने माधुरी दीक्षित को डेट करना शुरू कर दिया था। इस बीच रिचा अपना बचा हुआ जीवन बिताने भारत आती हैं। लेकिन संजय उन्हें बिल्कुल भाव नहीं देते। मगर फिर साल 1993 में संजय दत्त के साथ कुछ ऐसा होता है कि माधुरी भी उनसे दूरी बना लेती हैं। और यह था 1993 का मुंबई बम ब्लास्ट। वो दर्दनाक हादसा जिसने संजय दत्त पर आतंकवादी होने का आरोप लगा दिया। लेकिन संजय दत्त का नाम इस आतंकवादी हमले से कैसे जुड़ा? उनकी गिरफ्तारी कैसे हुई और कैसे एक पत्रकार ने संजय दत्त के जीवन में भूचाल ला दिया? चलिए जानते हैं। कहानी की शुरुआत होती है 6 दिसंबर 1992 से जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ दिया जाता है।
जिसके बाद पूरे देश भर में भयंकर सांप्रदायिक दंगे होने लगते हैं। और जल्द ही इसकी चिंगारी सपनों के शहर मुंबई तक पहुंचने वाली थी। 12 मार्च 1993 दोपहर 1:30 बजे मुंबई की फिजा अचानक गोलियों और धमाकों से थर्रा उठती है। 13 जगहों पर सीरियल ब्लास्ट्स होते हैं। जिनमें शिवसेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, होटल सी रॉक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और कई भीड़भाड़ वाली जगहें शामिल थी। इन बॉम्बिंग्स में 257 लोगों की जान चली जाती है और 1400 से अधिक लोग घायल हो जाते हैं। यह आजादी के बाद देश में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला था। जिसने भारत के धड़कन कहे जाने वाले मुंबई की मानो नब्ज़ ही काट दी थी। लेकिन भारत में इतनी बड़ी मात्रा में आरडीएक्स, ग्रेनेड और बंदूक लाया कौन? पुलिस इस खोजबीन में लग जाती है जिसमें सबसे पहला नाम आता है बाबा मूसा का जिसे गिरफ्तार करके जब पूछताछ की गई तो तीन नाम सामने आए। अबू सलीम, हनीफ गढ़वाला और समीर हिंगोरा। यह लोग सीधे तौर पर दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेनन के नेटवर्क से जुड़े थे। टाइगर मेनन इस हमले का मास्टरमाइंड था। लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। पुलिस को यह पता चला कि हनीफ और समीर सिर्फ माफिया के आदमी नहीं बल्कि संजय दत्त के बेहद करीबी थे। इन्होंने संजय की हिट फिल्म साजन को डिस्ट्रीब्यूट किया था और अक्सर उनके घर आते जाते रहते थे। पुलिस को आगे जांच में पता चला कि 16 जनवरी 1993 को अबू सलीम और अंजुम परवेज आरडीएक्स और हथियारों की एक भारी खेप लेकर मुंबई पहुंचे। इनमें सात AK-56, राइफलें, नौ हैंड ग्रेनेड और सैकड़ों कारतूस शामिल थे। इनमें से एक AK-56, एक मैगजीन और कुछ कारतूस और एक पिस्तौल संजय दत्त के बांद्रा स्थित पॉली हिल के बंगले पर पहुंचाई गई। पुलिस के अनुसार यह डिलीवरी हनीफ कडवाला ने खुद की थी। इधर बॉम्बे ब्लास्ट के तुरंत बाद संजय दत्त फिल्म शूटिंग के लिए मॉरीशस चले गए थे।
और पुलिस ने जब समीर हिंगोरा और हनीफ को पकड़ कर पूछताछ की तब उन्होंने सीधे-सीधे संजय का नाम ले लिया। लेकिन संजय दत्त सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि कांग्रेस के एमपी सुनील दत्त के बेटे थे। इसलिए पुलिस ने इस हाई प्रोफाइल केस को दुनिया की नजरों से बचाए रखा और संजय दत्त के आने का इंतजार करने लगे। लेकिन यह खुलासा सबसे पहले हुआ एक पत्रकार की रिपोर्टिंग से नाम था बलजीत परमार। बलजीत जो क्राइम बीट कवर करते थे। उन्हें सूत्रों से पता चला कि बॉलीवुड के एक बड़े अभिनेता ने अंडरवर्ल्ड से हथियार लिए हैं और उन्होंने संजय दत्त से फोन पर बात करते हुए कहा कि तुम खुद बंदूक लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच जाओ वरना टाड़ा लग जाएगा। लेकिन संजय ने कहा मेरी पापा से बात हो गई है के वेपन जमा करवा दो डैडी तेरे सबको जानते हैं वो मैनेज करके तेरे वो बचा सकते हैं तेरे को टाड़ा लाके फिर बचाना मुश्किल हो जाएगा हम इधर संजय दत्त से बात करके बलजीत समझ गए कि खबर तो पक्की है और अगली सुबह उन्होंने अखबार में एक लेख छाप दिया संजय दत्त के पास AK-56 है और हर तरफ सनसनी फैल गई। 19 अप्रैल 1993 के दिन संजय दत्त मॉरीशस से वापस लौट रहे थे। जैसे ही एयरपोर्ट पर उनका विमान उतरा पुलिस पहले ही से तैयार खड़ी थी। जब उन्हें रोका गया तो संजय पहले घबराए नहीं लेकिन जैसे ही पुलिस ने टाडा का जिक्र किया संजय के चेहरे के रंग उड़ गए। उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया गया और जैसे ही यहां पर एंट्री होती है उस अफसर की जो इस केस को लीड कर रहे थे राकेश मारिया एक सख्त लेकिन ईमानदार पुलिस ऑफिसर जो बाद में मुंबई पुलिस के कमिश्नर भी बने। कहा जाता है कि जब संजय दत्त पुलिस के सामने बैठे और मासूमियत दिखा रहे थे तो राकेश मारिया ने गुस्से में उसे एक जोरदार थप्पड़ मारा और कहा AK-56 कोई पटाखा नहीं संजय यही वो पल था जब संजय का नकाब उतरने लगा। उन्होंने धीरे-धीरे कबूल किया कि उन्होंने हथियार अपने घर पर रखे थे। संजय का कहना था कि मेरे पिता उस वक्त राजनीति में थे। मुझे अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर संजय को वाकई सिर्फ सुरक्षा चाहिए थी तो उन्होंने अवैध तरीके से अंडरवर्ड से हथियार क्यों लिए? और सिर्फ हथियार ही नहीं संजय दत्त पर आरोप था कि उन्होंने विस्फोटकों से भरी कार को छुपाने में मदद की और जिन हथियारों की सप्लाई मुंबई ब्लास्ट में की गई थी, उनमें से कुछ उनके पास थे। दोस्तों, संजय दत्त की गिरफ्तारी के बाद देश भर में हड़कंप मच गया। मीडिया का ट्रायल शुरू हो गया। क्या संजय दत्त देशद्रोही हैं? क्या उसे बचाया जाएगा? क्योंकि वह स्टार है। अदालत ने उन्हें टाटा यानी कि टेररिस्ट एंड डिस्परेटिव एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत चार्ज किया। टाडा एक ऐसा कानून था जिसमें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों को कड़ी सजा दी जाती थी। लेकिन संजय के वकीलों ने दलील दी कि उन्होंने आतंक फैलाने के इरादे से हथियार नहीं रखे थे। वहीं पुलिस कस्टडी के दौरान संजय ने बताया कि उन्होंने AK-56 को अपने दोस्त यूसुफ नलवाला के जरिए कहीं डिपोज करवा दिया है।
बाद में पुलिस को वह हथियार भी मिल गए लेकिन संजय की मुश्किलें कम नहीं हुई क्योंकि सबसे बड़ा सवाल यह था कि संजय दत्त के पास वो हथियार बरामद हुए उनका इस्तेमाल 12 मार्च के ब्लास्ट्स में किया गया था। तो पुलिस ने जब हथियारों की फॉेंसिक जांच करवाई तो साफ हो गया कि संजय के पास मौजूद AK-56 और कारतूस ब्लास्ट में इस्तेमाल नहीं हुए थे। यानी उन्हें सीधे हमलों में हिस्सा नहीं लिया गया था। लेकिन उसने ऐसे लोगों से हथियार लिए थे जो हमले के मास्टरमाइंड थे और यह बात भारत के कानून में एक बड़ा अपराध मानी जाती है। संजय ने कबूल किया कि उसने हथियार सिर्फ सेल्फ डिफेंस के लिए थे क्योंकि उस समय मुंबई में दंगे हो रहे थे और उसे अपने पिता की राजनीतिक छवि के चलते जान का खतरा था। संजय दत्त को 1993 में गिरफ्तार किया गया और उन पर टाडा, आर्म्स एक्ट और आईपीसी की कई धाराएं लगाई गई। टाडा एक ऐसा कानून था जिसमें जमानत लगभग नामुमकिन मानी जाती थी। लेकिन 16 महीने जेल में रहने के बाद संजय को 1995 में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई और टाटा की धाराएं बाद में उन पर से हटा दी गई। इस बीच 1998 में उन्होंने रिहा पिलाई से दूसरी शादी की जो लंबी नहीं चली। लेकिन केस खत्म नहीं हुआ।
2006 में टाटा कोर्ट ने संजय दत्त को दोषी करार दिया लेकिन आतंकवादी करार नहीं दिया। उन्हें केवल गैरकानूनी हथियार रखने का दोषी माना गया और 6 साल की सजा सुनाई गई। वह 7 महीने जेल में रहकर जमानत पर बाहर आ गए। फिर संजय ने 2008 में मान्यता दत्त से शादी की और यह तीसरी शादी थी। फिर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन 2013 में कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा और उन्हें सजा काटने के लिए फिर जेल भेज दिया गया। संजय दत्त ने तीन बार गिरफ्तारी झेली, तीन बार जेल में बेल ली और आखिरकार 25 फरवरी 2016 को पुणे की यरवदा जेल से रिया हुए, अपनी पूरी सजा काटकर। आखिर में बात करते हैं संजय दत्त की वापसी की। तो जब संजय दत्त को दोषी ठहराया गया तब उनकी छवि पूरी तरह से टूट चुकी थी। मीडिया जनता और फिल्म इंडस्ट्री तक उन्हें अलग-थलग कर चुकी थी। लेकिन इसी दौर में राजकुमार हिरानी की फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस आई जिसने संजय दत्त की एक नई छवि गढ़ दी। एक मासूम दिल से नेक इंसान। यह रोल इतना प्रभावशाली था कि लोग एक बार फिर संजय को माफ करने लगे। जेल के बाहर भीड़ लगने लगी। मुन्ना भाई के नारे लगने लगे। शायद यही वो वक्त था जब बॉलीवुड और जनता ने तय किया कि अब संजय को दूसरा मौका मिलना चाहिए। जिसके बाद साल 2018 में संजय दत्त अपनी सजा पूरी करके जेल से बाहर आ चुके थे। राजकुमार हिरानी ने उनकी जिंदगी पर एक बायोपिक फिल्म बनाई संजू जिसे लेकर कई लोगों ने कहा कि यह संजय दत्त की छवि साफ करने के लिए बनाई गई वाइट वॉश मूवी है। तो दोस्तों, संजय दत्त और उनके विवादित जीवन को लेकर आपकी राय क्या है? हमें कमेंट्स में बताइए। वीडियो अच्छी लगी हो तो इसे लाइक और शेयर करके 11,000 लाइक्स करवा दीजिए जरूर। और ऐसे ही आंख खोल देने वाली वीडियोस के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके पास वाली घंटी जरूर बजा दीजिए। जय हिंद जय भारत।