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मोदी ने टास्क बड़ा ले लिया… G-7 से लौटते ‘हड़कंप’?

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क्या संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए सांसदों की संख्या को 362 यानी बहुमत के आंकड़े से पार पहुंचाना चाहते हैं? क्या मानसून सत्र में सरकार फिर से महिला आरक्षण विधेयक और डीलिमिटेशन बिल को सदन में लाने की तैयारी में है? मिशन बंगाल के बाद दिल्ली से महाराष्ट्र तक अब ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज हो चुकी है। नरेंद्र मोदी अभी फ्रांस में है।

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉन्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हुई। हालांकि यह मुलाकात जो है वो अनौपचारिक थी। लेकिन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अगर देखा जाए तो यह मुलाकात बेहद अहम है। दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए गर्मजशी के साथ हाथ मिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया। दोनों के बीच 16 महीनों के बाद यह मुलाकात हुई। कल औपचारिक तौर पर दोनों नेताओं की बैठक होनी है।

लेकिन G7 से लौटते ही प्रधानमंत्री मोदी के सामने टास्क बढ़ा है। संसद के मानसून सत्र को लेकर क्या है सरकार की फुल तैयारी? एक स्पेशल रिपोर्ट दिखाते हैं इस पर।

क्या आने वाले मानसून सत्र से पहले लोकसभा में मोदी के सांसदों की संख्या 350 के पार हो जाएगी? क्या राहुल गांधी वाले मोदी विरोधी गुट मानसून सत्र से पहले 200 से नीचे आ जाएगा? यह सवाल इसलिए क्योंकि मिशन बंगाल लगभग पूरा हो चुका है।

टीएमसी के बीच बागी सांसद एनडीए को समर्थन देने की खुलेआम बात कर रहे हैं। क्या अब टारगेट पर मिशन ठाकरे हैं? ऑपरेशन टाइगर की चर्चा दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक के सियासी गलियारे में जोर शोर से हो रही है। कयास तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि मिशन पवार पर काम होना बाकी है। क्या फिर मिशन डीएमके होगा और कांग्रेस भी टूटेगी। ऑपरेशन के अपॉइंटमेंट दिन आना है।

ऑपरेशन के दिन आ जाएगा। उस दिन ही ऑपरेशन हो जाएगा। सत्र के पहले में यह हो जाएगा। किस राज्य में क्या हलचल मची है? इसकी चर्चा आगे करेंगे। पहले जान लीजिए कि मोदी सरकार की तैयारी क्या है? संसद का मानसून सत्र शुरू होने में करीब-करीब एक महीने का वक्त बचा है। लेकिन उससे पहले मोदी सरकार की तैयारी पूरी है। बजट सत्र में सरकार का गणित गड़बड़ा गया था। लेकिन मोदी सरकार देश में लगातार बदल रहे सियासी माहौल का पूरा लाभ मानसून सत्र में उठाना चाहती। बीजेपी के रणनीतिकारों को लग रहा है कि केवल अंकगणित नहीं बदल रहा है बल्कि विपक्षी राजनीतिक दलों के भाव भी बदल रहे हैं।

जरूरी आंकड़े जुटाने के साथ सरकार का फोकस फिर से उन बिल को सदन में लाना है जो उसके कोर एजेंडे में है। माना जा रहा है कि सरकार मानसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और डीलिमिटेशन बिल को सदन में ला सकती है। पूरा खेल नंबर का है क्योंकि संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में 362 का नंबर चाहिए। बजट सत्र के दौरान डीलिमिटेशन बिल पर लोकसभा में वोटिंग हुई। पक्ष में 298, [संगीत] विरोध में 230 वोट मिले।

एनडीए की ताकत 293 सांसदों की है। यानी बिल पर एनडीए सांसदों की संख्या से पांच वोट ज्यादा मिली। पर्याप्त संख्या बल नहीं होने से सदन में बिल गिर गया। टीएमसी के बागी 20 सांसद औपचारिक टूट की कगार पर हैं। उनकी ओर से घोषणा की जा चुकी है कि वह सरकार को समर्थन देंगे। तमिलनाडु में डीएमके चुनाव हार चुकी है और उसके कुछ सदस्यों को लगता है कि परिसीमन का जो फार्मूला दिया गया था वो राज्य के लिए लाभदायक था। कई और क्षेत्रीय दल परिसीमन के विरोध में नहीं थे। हालांकि गठबंधन की एकजुटता की मजबूरी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मोदी विरोधी पार्टियों ने देश में बार-बार कई नैरेटिव गढ़े। राहुल गांधी ने दावा किया एक साल में मोदी सरकार गिर जाएगी।

देश में भयंकर सुनामी आएगी। कुछ विरोधी दलों ने राहुल के नैरेटिव को सपोर्ट भी किया। डायनेमिक चल रही है और आप देखना मेरे अंदाजे से मेरा असेसमेंट है। एक साल के अंदर मोदी जी प्राइम मिनिस्टर नहीं होंगे। आर्थिक सुनामी आ रही है। भयंकर आर्थिक सुनामी अब आ रही है। उसका कारण है कि हिंदुस्तान का जो प्रोटेक्शन का सिस्टम था जो इंटरनेशनल इकॉनमी से एक प्रकार से शॉक ऑब्जर्वर था उसको बीजेपी ने हटा दिया है। तो एक तरफ से भयंकर आर्थिक सुनामी आ रही है। प्राइसेस बढ़ रही है और ये अभी शुरुआत देखी है आपने। ऐसी इकोनॉमिक क्राइसिस आएगी हिंदुस्तान में जो आपने अपने लाइफ में नहीं देखी होगी।

ये हो रहा है। इसको अब कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने इसलिए ठीक कहा यूपी में समाजवादी सरकार बनते ही दिल्ली गिर जाएगी। 1 साल में मोदी सरकार गिर जाएगी। क्या राहुल गांधी के इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिकआधार था या फिर राहुल गांधी का दावा हवाहवाई है। राहुल गांधी और विरोधियों का यह नैरेटिव भी ध्वस्त होता दिखाई दे रहा है। अगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो राहुल गांधी का दावा जमीन से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी लगता है।

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार लगातार मजबूत होती दिख रही है। भले ही बीजेपी अकेले उस आंकड़े को पार ना कर पाई हो, लेकिन गठबंधन लगातार मजबूत होता जा रहा है और यह कुबा बढ़ता ही जा रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टूट चुकी है। 28 में से 20 सांसद एनसीपीआई में विलय करने और एनडीए को सपोर्ट करने की खुलकर बात कर चुके हैं। काकोली घोष को नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया का अध्यक्ष भी बनाया जा चुका है। जो नहीं हो रहा कोई है हम 20 अभी नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के साथ हम लोग मर्ज करके एनडीए के साथ काम करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हमारे अमित शाह जी के नेतृत्व हालांकि टीएमसी के बागी विधायकों का विलय होगा या नहीं इस पर आखिरी फैसला लोकसभा स्पीकर को लेना है। लोकसभा स्पीकर कानूनी पहलुओं की पड़ताल पर ही फैसला देंगे।

हालांकि स्पीकर ओम बिरला ने ममता गुट को भी चर्चा के लिए बुलाया है। अच्छी बात है। स्पीकर का का काम है निरपेक्ष रहना। तो मैंने ऐसा सुना कि स्पीकर ने तृणमूल कांग्रेस को भी एक चिट्ठी दिया है उनसे मिलने के लिए। अब चर्चा ऑपरेशन टाइगर की तेज हो गई है। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक इसकी चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना उद्धव गुट के नौ सांसदों में से छह से सात सांसद शिंद गुटकी शिवसेना के संपर्क में हैं। हालांकि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंद अभी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। एकनाथ शिंद [संगीत] भले कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेता खुलकर बोल रहे हैं कि ऑपरेशन तैयार है। सिर्फ डेट का तो क्या 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले उद्धव ठाकरे को झटका लगने वाला है अगर उद्धव ठाकरे की पार्टी का ममता की पार्टी जैसा ही हाल होता है नौ में से छह सांसद पार्टी छोड़ते हैं तो फिर 4 साल बाद उद्धव ठाकरे को एक बार फिर सबसे बड़ा झटका लग सकता है।

21 जून 2022 को उन 40 विधायकों को लेकर एकनाथ शिंद ने पार्टी तोड़ दी और बीजेपी से हाथ मिला लिया। नतीजा यह हुआ कि तब एकनाथ शिंद को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई। हालांकि इस बार उद्धव ठाकरे की पार्टी का दावा है कि उनके सांसद कहीं नहीं जा रहे हैं। चंद दिन पहले उद्धव ठाकरे ने मीटिंग भी बुलाईश थी। तब चार सांसद फिजिकली और पांच सांसदों के ऑनलाइन जुड़ने की बात कही गई थी। ऑपरेशन व्फ होता ना टाइगर ऑपरेशन कैसा करना म सांगा वाघ तुम हाथ ला का वांगी आवा ला इंजेक्शन वाला ला इंजेक्शन मारावा गंगी म तो वाघ आए का डो उड़ का वग बु जा त पाय बांधवे शक्य नहीं कड़े ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर तब ऑपरेशन करता है जब मरीज होते हैं सामने पेशेंट होते हैं और हमें नहीं लग रहा है कि हमारे कोई भी सांसद पेशेंट या मरीज है या कोई कहीं जाने वाला है। रही बात जाने की जाने वाले को कोई रोक सका नहीं है।

हमारे नेता श्री उद्धव जी ने कहा है कि जिसको जाना है वह तो चले ही जाएंगे। मैं कितना भी प्यार लुटाऊं उद्धव ठाकरे ने 22 जून को फिर सांसदों की बैठक बुलाई है। कांग्रेस भी फिलहाल उद्धव की पार्टी के साथ नजर आ रही है और ऑपरेशन टाइगर को अफवाह बता रही है। ये अफवाह होगी और जिसके एक भय निर्माण करने का यह इनकी स्टाइल है। ऐसा बीजेपी के लोग जो चुन के आए वो जितने उनको चाहिए थे उनको लगा 300 के आगे आएंगे। वो आए नहीं इसलिए इस तरह से पार्टियां तोड़ के अपनी मेजॉरिटी बनाने की कोशिश हो रही है। अब उद्धव ठाकरे की पार्टी एकजुट रहेगी या फिर टूट जाएगी यह आने वाला वक्त बताएगा। अगर उद्धव ठाकरे के सांसद टूटकर शिंद गुट में मिलेंगे तो भी कुनबा एनडीए का ही बढ़ेगा। अगर मोदी सरकार की ताकत बढ़ती है तो सरकार बिना दबाव के अपने प्राथमिकता वाले काम को तेजी से आगे बढ़ा सकती है। संख्या बल ज्यादा होगा तो विपक्ष का नैरेटिव ध्वस्त हो जाएगा।

कल नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होनी है। इस बैठक में भारत अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इसका एजेंडा हो सकता है। ईरान अमेरिका पर समझौता साइन हो चुका है। अब युद्ध खत्म होने के बाद इकोनॉमिक फ्रंट पर बड़े फैसले लेना भी सरकार की प्राथमिकता में होगा ताकि भारत की इकॉनमी को बूस्ट मिल सके।

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