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चढ़ावे के पैसों को क्यों लूटा गया ?’अयोध्या कांड’ से पूरा देश हिला

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अयोध्या के भव्य राम मंदिर से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरे देश के राम भक्तों को झकझोर कर रख दिया है। आस्था के सबसे बड़े केंद्र में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए दान के पैसों में हेरफेर और गमन का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। मामला कितना गंभीर है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी अयोध्या के डीएम और एसपी खुद मंदिर परिसर में डेरा डाले हुए हैं। जांच का आज तीसरा दिन है।

और साल 2021 से लेकर अब तक के मंदिर के सभी रिकॉर्ड्स को बहुत बारीकी से खंगाला जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम आने से मामला और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है। आइए जानते हैं आखिर क्या है यह पूरा माजरा और कौन है इसके पीछे के बड़े किरदार।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक राम मंदिर के चढ़ावे में करीब ₹3 करोड़ की चोरी का आरोप लगा है। इस सिलसिले में अयोध्या के थाने में एक दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने साफ़ कर दिया है कि एसआईटी इस मामले की तह तक जाएगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी की टीम इस समय सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर कर रही है कि मंदिर की स्थापना के बाद से यहां कर्मचारियों की भर्ती कैसे हुई थी?

कौन सा कर्मचारी कहां से आया और उसकी क्या जिम्मेदारी थी? खासकर उन लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है जिनकी डोनेशन बॉक्स के पास नोटों और सोने चांदी को संभालने और उनकी गिनती करने में लगाई गई थी। पिछले दो दिनों की जांच में एसआईटी के हाथ कुछ ऐसे पक्के सबूत लगे हैं जो दान पत्र से सीधे तौर पर रुपए गायब होने की कहानी बयां कर रहे हैं। अब बात करते हैं इस मामले के छह मुख्य आरोपियों की जिनसे एसआईटी इस समय पूछताछ कर रही है।

इनमें सबसे पहला और बड़ा नाम है रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव का। टिन्नू यादव पहले चंपत राय के ड्राइवर थे और अब उनके बेहद खास सहयोगी माने जाते हैं। आरोप है कि कुछ साल पहले तक साधारण जिंदगी जीने वाले टिन्नू यादव के पास आज अयोध्या और लखनऊ में करीब ₹50 करोड़ की चल और अचल संपत्ति है। आरोप है कि उन्होंने पिछले कुछ सालों में कई महंगे प्लॉट्स खरीदे हैं और 5 से छह बड़े रेस्टोरेंट्स में उनकी हिस्सेदारी है। हालांकि टिन्नू ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उनका चंदे के पैसे से कोई लेना देना नहीं है। उनके पास सिर्फ एक गेस्ट हाउस है और वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। टिन्नू यादव के बाद इस लिस्ट में दूसरा नाम है उनके भतीजे मनीष यादव का।

मनीष मंदिर में नोटों की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा थे। आरोप है कि दान की चोरी में वह भी बराबर के साझेदार थे। एसआईटी उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है। तीसरा बड़ा नाम है गोपाल राव का। गोपाल राव मंदिर के व्यवस्थापक और खास आमंत्रित सदस्य हैं।

मंदिर का रखरखाव, साफ सफाई और सबसे जरूरी दान पेटियों से मिलने वाले चढ़ावे को संभालने का पूरा जिम्मा गोपाल राव के पास ही था। अब जब उन पर आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लगे तो उन्होंने सफाई में कहा कि वह हर जांच के लिए तैयार हैं और उन्होंने खुद ट्रस्ट के साथ मिलकर एसआईटी जांच की मांग की थी। इस मामले की जांच में चौथे और पांचवें किरदार हैं।

लवकुश और अनुकल्प। यह दोनों आपस में जीजा साले हैं और मंदिर के दान पत्र के पैसों की गिनती करने वाली टीम में शामिल थे। बताया जाता है कि पिछले कुछ ही सालों में इन दोनों की माली हालत रॉकेट की तरह बदल गई। आरोप है कि अनुकल्प ने गांव में एक आलीशान फार्म हाउस बना लिया और अयोध्या में 65 लाख का एक नया घर खरीद लिया। वहीं लवकुश फैजाबाद में एक आलीशान मकान बनवा रहा था।

हालांकि इनके परिवार वाले इन्हें बेकसूर बता रहे हैं लेकिन एसआईटी दोनों से पूछताछ कर रही है। अब बात छठे आरोपी की जिनका नाम है तिवारी जी। तिवारी जी राम मंदिर में दान में आने वाले सोने चांदी के जेवरातों को संभालने का काम करते थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने कुछ ही समय पहले 1.5 करोड़ की जमीन खरीदी और उनके पास करीब 5 करोड़ की बेहिसब संपत्ति है। हालांकि तिवारी जी का कहना है कि वह सालों तक टीचर रहे हैं।

उनका एक बेटा आईबी में बड़े पद पर है और दूसरा बेटा यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। इसलिए यह संपत्ति उनकी पारिवारिक कमाई की है। साथियों इन छह आरोपियों के अलावा इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी तेजी से उछला है। अनिल मिश्रा पर मंदिर के निर्माण कार्य और दान पुण्य पर नजर रखने की मुख्य जिम्मेदारी थी। अयोध्या के नगर निगम और अवधपुरी में बन रहे उनके नए घरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मंदिर के प्रबंधन में उनका बड़ा रोल था इसलिए जांच की सुई उन तक भी जा पहुंची है। भक्तों की आस्था के पैसे पर इस तरह का डाका पड़ना वाकई बेहद शर्मनाक और हैरान कर देने वाला है। फिलहाल मुख्यमंत्री दफ्तर और पीएमओ इस मामले को खुद मॉनिटर कर रहे हैं। एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई और बड़े चेहरों के नकाब उतरना तय है।

उम्मीद है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ताकि राम मंदिर की पवित्रता पर कोई आंच ना आ सके।

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