2001साल 2001 बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स एक ही कमरे में बैठे थे। सामने थे राजकुमार संतोषी। टेबल पर रखी [संगीत] थी एक स्क्रिप्ट और अगर उस रात सब कुछ प्लान के मुताबिक हो जाता तो शायद बॉलीवुड का इतिहास आज अलग होता। लेकिन हुआ उल्टा क्योंकि कुछ महीनों बाद यह फिल्म टूट गई और यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड की सबसे अजीब कहानियों में से एक। कल्पना कीजिए साल 2000 का वह सुनहरा दौर। बॉक्स ऑफिस पर एक तरफ रोमांस के बादशाह शाहरुख खान का राज था और दूसरी तरफ आमिर खान अपनी अलग पहचान बना चुके थे। अब जरा सोचिए क्या हो अगर यह दोनों सुपरस्टार एक ही फिल्म में साथ आते एक ही कहानी, एक ही स्क्रीन, एक ही फ्रेम और सिर्फ साथ ही नहीं बल्कि आमने-सामने। जी हां, एक समय ऐसा सचमुच होने वाला था और अगर वो फिल्म बन जाती तो शायद हिंदी सिनेमा का इतिहास कुछ और होता। उस फिल्म का नाम था रश जिसका मतलब होता है ईर्ष्या जलन लेकिन यह सिर्फ एक फिल्म की कहानी नहीं है क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि रश क्यों नहीं बनी? सवाल यह है कि इसके साथ आखिर हुआ क्या था? शाहरुख खान और आमिर खान के बीच बंद कमरों में ऐसी कौन सी बातें हुई कि बॉलीवुड की सबसे बड़ी कास्टिंग टूट गई। कैसे इस प्रोजेक्ट के साथ नए-नए सितारों के नाम जुड़ते चले गए? कैसे एक समय इस कहानी तक अंडरवर्ल्ड की छाया भी पहुंची और कैसे सालों बाद यही प्रोजेक्ट एक बिल्कुल अलग नाम के साथ वापस लौटा लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योंकि इस फिल्म से जुड़ा एक विवाद सालों तक अदालत के चक्कर काटता रहा और यही वजह है कि रश की कहानी एक सेल्फ फिल्म की कहानी कम और एक बॉलीवुड मिस्ट्री ज्यादा लगती है। एक ऐसी मिस्ट्री [संगीत] जिसमें जितना गहराई से जाओ उतने ज्यादा सवाल पैदा होते जाते हैं। आखिर ऐसी कौन सी स्क्रिप्ट थी जिसके लिए बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे तैयार तो हो गए थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि वही फिल्म कभी फ्लोर पर ही नहीं पहुंची।
कहानी की शुरुआत होती है राजकुमार संतोषी से। उस दौर में संतोषी सिर्फ एक सफल निर्देशक नहीं थे बल्कि बॉलीवुड के भरोसेमंद कहानीकारों में गिने जाते थे। घायल, दामिनी और घातक जैसी फिल्मों ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि संतोषी सिर्फ गंभीर और एक्शन फिल्मों तक सीमित नहीं थे। 1994 में उन्होंने अंदाज अपना-अपना बनाई थी और उस फिल्म में आमिर खान और सलमान खान की जोड़ी को जिस तरह पेश किया गया वो आज भी याद की जाती है। यानी बड़े सितारों को एक साथ संभालना संतोषी के लिए कोई नई बात नहीं थी और शायद इसी वजह से साल 2000 के आसपास उनके दिमाग में एक बेहदत्वाकांक्षी विचार आकार लेने लगा। एक ऐसी कहानी जो दोस्ती से शुरू होती है लेकिन दोस्ती पर खत्म नहीं होती। लेकिन यहां जलन किसी प्रेम कहानी की नहीं थी। यह जलन थी सफलता की, पहचान की और उस दर्द की जो तब पैदा होता है जब आपका सबसे करीबी दोस्त आपकी आंखों के सामने आपसे ज्यादा सफल हो जाए। यह कोई आम मसाला फिल्म नहीं थी। इसमें दोस्ती थी, धोखा था, संगीत [संगीत] था और सबसे खतरनाक बात एक इंसान के अंदर धीरे-धीरे जन्म लेते अंधेरे की कहानी थी। राजकुमार संतोषी समझ चुके थे कि रश की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी है। लेकिन वह यह भी जानते थे कि इतनी भारी और जटिल कहानी को संभालने के लिए उन्हें साधारण कलाकार नहीं चाहिए थे। उन्हें चाहिए थे सबसे बड़े कलाकार और यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड की सबसे दिलचस्प कास्टिंग में से एक।
संतोषी की पहली पसंद थे शाहरुख खान और आमिर खान। अगर यह कास्टिंग फाइनल हो जाती, तो पहली बार बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सुपरस्टार एक दूसरे के सामने अभिनय करते दिखाई देते। सिर्फ यही खबर फिल्म को चर्चा का विषय बनाने के लिए काफी थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। फिल्म की लीड एक्ट्रेस के लिए भी बड़े नामों पर विचार किया जा रहा था। उस दौर की दो सबसे चर्चित अभिनेत्रियां ऐश्वर्या राय और करीना कपूर इस प्रोजेक्ट के साथ जोड़ी जा रही थी। यानी रश धीरे-धीरे उस फिल्म में बदल रही थी जिसके बारे में पूरी इंडस्ट्री बात कर रही थी और फिर आया एक और नाम ए आर रहमान। उस समय तक रहमान सिर्फ सफल नहीं थे बल्कि भारतीय संगीत का चेहरा बन चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक रश की कहानी दो बचपन के दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती थी। दो ऐसे दोस्त जिनके लिए संगीत सिर्फ एक शौक नहीं पूरी जिंदगी था। दोनों बड़े सपने देखते हैं। दोनों स्टार बनना चाहते हैं। दोनों एक ही मंजिल की तरफ बढ़ते हैं। लेकिन मंजिल तक पहुंचता है सिर्फ एक। समय के साथ उनमें से एक बहुत बड़ा रॉकस्टार बन जाता है। उसके पास नाम है, दौलत है, शोहरत है, हजारों चाहने वाले हैं। जबकि दूसरी तरफ उसका सबसे करीबी दोस्त पीछे छूटता चला जाता है और यहीं से कहानी एक खतरनाक मोड़ लेती है। क्योंकि यह सिर्फ असफलता की कहानी नहीं थी। यह उस इंसान की कहानी थी जो अपने दोस्त की सफलता को धीरे-धीरे नफरत में बदलते हुए देखता है। बताया जाता है कि कहानी में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि वह अपने ही दोस्त को बर्बाद करने की साजिश रचने लगता है। सिर्फ कैरियर नहीं पूरी जिंदगी बर्बाद करने की। यहां तक कि उसे ड्रग्स की दलदल में धकेलने की भी कोशिश करता है। यानी रश कोई साधारण म्यूजिक ड्रामा नहीं थी। इसके केंद्र में संगीत जरूर था। लेकिन इसकी असली कहानी इंसानी भावनाओं के सबसे अंधेरे हिस्से में छुपी हुई थी और शायद यही वजह थी कि राजकुमार संतोषी को लगने लगा था कि अगर यह फिल्म सही तरीके से बनी तो यह सिर्फ हिट नहीं होगी। यह याद रखी जाएगी। सोचिए उस कमरे का माहौल क्या रहा होगा जब राजकुमार संतोषी ने शाहरुख खान और आमिर खान को एक साथ बैठाकर इस फिल्म की जॉइंट नरेशन दी होगी। संतोषी ने पूरी स्क्रिप्ट दोनों को विस्तार से सुनाई।
स्क्रिप्ट इतनी दमदार थी कि दोनों सुपरस्टार्स मंत्रमुग्ध हो गए। दोनों को कहानी बेहद पसंद आई और दोनों फिल्म करने के लिए तुरंत तैयार हो गए। लेकिन असली ड्रामा तो इसके बाद शुरू होने वाला था। फिल्म में दो मेन लीड थी। एक वो बिंदास टैलेंटेड और सीधा-साधा रॉकस्टार जो अपनी मेहनत और किस्मत के दम पर सफलता की बुलंदियों तक पहुंचता है। दूसरी तरफ था उसका सबसे करीबी दोस्त। एक ऐसा इंसान जो उसके साथ बड़ा हुआ था उसके साथ सपने देखे थे। लेकिन अब उसी दोस्त की सफलता उसे अंदर ही अंदर खाए [संगीत] जा रही थी। धीरे-धीरे यही जलन नफरत में बदलने लगती है और फिर नफरत एक खतरनाक साजिश में। यही वो किरदार था जो रश की पूरी कहानी का सबसे डार्क और सबसे दिलचस्प हिस्सा माना जा रहा था। आमतौर पर किसी भी बड़े स्टार को टॉक स्टार वाला पॉजिटिव किरदार ज्यादा आकर्षित कर सकता था। आखिर उसमें ग्लैमर था, स्टारडम था और दर्शकों का प्यार भी। लेकिन यहां खेल पूरी तरह पलट गया। शाहरुख खान जो अपने करियर की शुरुआत में बाजीगर, डर, अंजाम जैसी फिल्मों में नेगेटिव रोल्स निभाकर ही सुपरस्टार बने थे। उन्हें लगा कि यह डार्क जेलस फ्रेंड वाला किरदार उनके लिए परफेक्ट है। वो इस किरदार में अपनी पुरानी डार्क एनर्जी वापस लाना चाहते थे। एक ऐसा किरदार जो उन्हें फिर से अपने सबसे खतरनाक और अनप्रिडिक्टेबल अवतार में लौटने का मौका दे सकता था। लेकिन वहीं दूसरी तरफ बैठे थे आमिर खान। और आमिर खान की पहचान भी हमेशा से अलग तरह के किरदार चुनने के लिए रही है। उन्हें भी वो सीधा सादा रॉकस्टार वाला किरदार बोरिंग लगा। उनकी नजर भी उसी किरदार पर जाकर रुकी जिसमें सबसे ज्यादा संघर्ष था। सबसे ज्यादा परतें थी और सबसे ज्यादा अभिनय की गुंजाइश थी। आमिर ने भी संतोषी से साफ कह दिया कि उन्हें भी यही डार्क और नेगेटिव रोल ही करना है और यहीं से शुरू हुई पूरी कहानी की सबसे बड़ी समस्या क्योंकि अब फिल्म के दो सबसे बड़े सितारे एक ही किरदार निभाना चाहते थे। सोचिए जिस स्क्रिप्ट ने शाहरुख खान और आमिर खान दोनों को एक साथ बैठने के लिए तैयार कर लिया था। अब वही स्क्रिप्ट उनके बीच टकराव की वजह बनने लगी थी। राजकुमार संतोषी के लिए यह स्थिति किसी मुश्किल परीक्षा से कम नहीं थी। एक तरफ शाहरुख खान, दूसरी तरफ आमिर खान, और दोनों को लगता था कि फिल्म का सबसे मजबूत किरदार वही है जिसे वह निभाना चाहते हैं। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि किरदारों को लेकर शुरू हुई यह खींचातान आगे चलकर पूरे प्रोजेक्ट का भविष्य बदल देगी। यहीं से शुरू हुआ बॉलीवुड के इतिहास का सबसे चर्चित कास्टिंग क्लैश। अब समस्या यह थी कि फिल्म के दोनों बड़े सितारे एक ही किरदार निभाना चाहते थे। कोई भी उस पॉजिटिव रॉकस्टार की भूमिका करने को तैयार नहीं था। दोनों की नजर उसी डार्क और नेगेटिव किरदार पर थी जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके बाद हफ्तों तक चर्चाएं चलती रही, मीटिंग्स होती रही, समाधान खोजने की कोशिश होती रही लेकिन बात बनती नजर नहीं आ रही थी। ना तो शाहरुख पीछे हटने को तैयार थे और ना ही आमिर। लेकिन मामला सिर्फ रोल तक सीमित नहीं था। इसी दौरान एक और मुद्दा सामने आया। अंदरूनी रिपोर्ट्स के अनुसार आमिर खान का मानना था कि रश कोई साधारण फिल्म नहीं है। यह एक बेहद बड़ा औरत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था और इसलिए इसे पूरा समय और पूरा ध्यान मिलना चाहिए। बताया जाता है कि आमिर ने राजकुमार संतोषी के सामने शर्त रखी कि जब तक रश की शूटिंग पूरी नहीं हो जाती तब तक वह किसी दूसरी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। उनका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ रस्क पर होना चाहिए। अब संतोषी एक मुश्किल स्थिति में फंस चुके थे। एक तरफ किरदारों को लेकर चल रहा विवाद था, दूसरी तरफ यह नई शर्त और धीरे-धीरे हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए जहां समझौते की गुंजाइश कम होती जा रही थी।
आखिरकार वो हुआ जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। आमिर खान ने इस प्रोजेक्ट से खुद को अलग कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने राजकुमार संतोषी को अपना साइनिंग अमाउंट भी वापस लौटा दिया और इसी के साथ बॉलीवुड की सबसे बड़ी ड्रीम कास्टिंग टूट गई। शाहरुख खान और आमिर खान को एक साथ देखने का सपना सपना ही बनकर रह गया। कई लोगों के लिए यहीं रश की कहानी खत्म हो गई थी। लेकिन सच तो यह है कि असली कहानी अब शुरू होने वाली थी। आमिर का जाना फिल्म के लिए एक बड़ा झटका था लेकिन असली तूफान तो अभी आना बाकी था। फिल्म के प्रोड्यूसर थे उस दौर के बॉलीवुड के सबसे बड़े डायमंड मर्चेंट और ताकतवर फाइनेंसर भरत शाह। भरत शाह वो नाम था जिसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन साल 2000 और 2001 के आसपास बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड का साया लगातार मंडरा रहा था। और तभी एक ऐसी खबर आई जिसने सब कुछ बदल दिया। मुंबई पुलिस ने भरत शाह को अंडरवर्ल्ड कनेक्शन और पैसों की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। भरत शाह का पूरा सिस्टम हिल गया। फिल्मों की फंडिंग रुक गई। कानूनी पछड़ों ने हालात और मुश्किल बना दिए और रश भी इसकी चपेट में आ गई। एक तरफ आमिर जा चुके थे। दूसरी तरफ फिल्म का फाइनेंसर जेल पहुंच चुका था। जैसे इतना काफी नहीं था, वैसे ही शाहरुख खान और भरत शाह के रिश्तों को लेकर भी अलग-अलग खबरें आने लगी। नतीजा रश आगे बढ़ ही नहीं पाई। सेट कभी नहीं लगा। शूटिंग कभी नहीं हुई और बॉलीवुड का यह ड्रीम प्रोजेक्ट डब्बा बंद हो गया। कम से कम उस समय लोगों को यही लगा था। लेकिन राजकुमार संतोषी हार मानने वालों में से नहीं थे। साल बीतते गए लेकिन वह रश की कहानी को भूल नहीं पाए। शाहरुख और आमिर के साथ बात नहीं बनी तो संतोषी ने सोचा कि क्यों ना इस फिल्म को नई पीढ़ी के दो सबसे चर्चित सितारों के साथ बनाया जाए। उस समय बॉलीवुड में एक नया दौर शुरू हो रहा था। साल 2000 में कहूं ना प्यार है रिलीज हुई और रितिक रोशन रातोंरात सुपरस्टार बन गए। उधर अभिषेक बच्चन ने भी रिफ्यूजी से बॉलीवुड में कदम रख दिया था। संतोषी को लगा कि अगर रितिक और अभिषेक को एक साथ लाया जाए तो रश को नई जिंदगी मिल सकती है। धीरे-धीरे इंडस्ट्री में खबरें फैलने लग गई। अब फिल्म में शाहरुख और आमिर की जगह ऋतिक, रोशन और अभिषेक बच्चन नजर आ सकते हैं। एक बार फिर से लगने लगा कि शायद रश वापस लौटने वाली है। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। अक्टूबर 2001 में रितिक रोशन ने इन खबरों पर चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वह रश से जुड़ी इन सभी अफवाहों से हैरान है और उनका इस प्रोजेक्ट से कोई संबंध नहीं है। यानी जिस कास्टिंग की चर्चा मीडिया में चल रही थी उसे खुद रितिक ने खारिज कर दिया। उधर अभिषेक बच्चन की स्थिति भी आसान नहीं थी। उनका करियर अभी शुरू हुआ था और शुरुआती फिल्में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही। ऐसे में अभिषेक कोई बड़ा जोखिम लेने के मूड में नहीं थी। बताया जाता है कि उन्हें लगा कि करियर के इतने शुरुआती दौर में एक डार्क और नेगेटिव किरदार निभाना उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है
और फिर एक और वजह सामने आई। उसी दौरान सूरज बजातिया ने रितिक रोशन और अभिषेक बच्चन को लेकर मैं प्रेम की दीवानी हूं की घोषणा कर दी। अब दोनों सितारे पहले से ही एक बड़ी टू हीरो फिल्म से जुड़े हुए थे। ऐसे में एक ही समय दूसरी टू हीरो फिल्म करना ज्यादा व्यवहारिक नहीं लग रहा था और इसी के साथ रश का दूसरा अवतार भी दम तोड़ गया। पहले शाहरुख और आमिर वाला संस्करण खत्म हुआ था और अब रितिक और अभिषेक वाला सपना भी अधूरा रह गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो बार असफल होने के बाद भी राजकुमार संतोषी इस कहानी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। जब ऋतिक रोशन और अभिषेक बच्चन के साथ बात नहीं बन पाई तो राजकुमार संतोषी ने एक और कोशिश की। इस बार उनकी नजर गई अपने पसंदीदा अभिनेता अजय देवगन पर। अजय और संतोषी पहले भी कई फिल्मों में साथ काम कर चुके थे और दोनों के बीच शानदार समझ थी। बताया जाता है कि अजय देवगन इस डार्क किरदार को निभाने के लिए तैयार भी हो गए थे लेकिन समस्या वही पुरानी थी। कहानी थी, [संगीत] एक्टर था लेकिन प्रोड्यूसर नहीं और बिना फाइनेंस के इतना बड़ा प्रोजेक्ट आगे बढ़ाना लगभग नामुमकिन था। नतीजा रश एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली गई और इस बार ऐसा लगा कि शायद अब यह कभी वापस नहीं लौटेगी। लेकिन राजकुमार संतोषी ने हार नहीं मानी। साल गुजरते गए 1 2 3 नहीं लगभग 7 से 8 साल बीत गए और फिर आया साल 2008। इतना समय बीत जाने के बाद भी संतोषी के दिल में रश्क जिंदा थी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को एक बार फिर जिंदा करने का फैसला किया। लेकिन इस बार सिर्फ कास्टिंग नहीं बदली पहचान भी बदल गई थी। रस्क अब बन चुकी थी लंदन ड्रीम्स। भरत शाह अब इस कहानी का हिस्सा नहीं थे। इसलिए संतोषी ने नए प्रोड्यूसर परमजीत सिंह के साथ हाथ मिला लिया। नई कास्ट भी फाइनल हो गई। जो डार्क किरदार कवि शाहरुख और आमिर के बीच विवाद की वजह बना था वो अब अजय देवगन के पास था और सफल बिंदास रॉकस्टार के रोल के लिए चुने गए थे सलमान खान। यानी सालों बाद पहली बार ऐसा लग रहा था कि यह कहानी आखिरकार पर्दे तक पहुंच जाएगी। हीरोइन को लेकर भी कई नाम सामने आए। प्रियंका चोपड़ा का नाम भी चर्चा में रहा। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी और आखिरकार फिल्म अपनी नई टीम के साथ आगे बढ़ने लगी। इस बार मामला सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। फिल्म फ्लोर पर पहुंच गई। शूटिंग शुरू हो गई। यहां तक कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में फिल्म के कुछ शुरुआती हिस्सों की शूटिंग भी कर ली गई। लग रहा था कि सालों तक संघर्ष करने के बाद राजकुमार संतोषी आखिरकार अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। लेकिन रश की कहानी में एक और मोड़ आना अभी बाकी था।
रश या अब कहें लंदन ड्रीम्स की किस्मत में शायद अभी भी चैन नहीं लिखा था। शूटिंग शुरू हो चुकी थी लेकिन तभी एक नई समस्या खड़ी हो गई। राजकुमार संतोषी इस फिल्म को बॉलीवुड की मशहूर म्यूजिक फिल्म मोलिन रूस की तरह बेहद भव्य और बड़े स्तर पर बनाना चाहते थे। लेकिन समस्या थी बजट। जैसे-जैसे संतोषी का विज़न बड़ा होता गया वैसे-वैसे फिल्म का बजट भी बढ़ता गया। लेकिन प्रोड्यूसर परमजीत सिंह इतने भारी भरकम खर्च के लिए तैयार नहीं थे। यहीं से शुरू हुई डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के बीच टकराव की कहानी। एक तरफ संतोषी अपने विज़न से समझौता नहीं करना चाहते थे। दूसरी तरफ प्रोड्यूसर बजट को नियंत्रण में रखना चाहते थे। बजट और क्रिएटिव कंट्रोल को लेकर दोनों के बीच मतभेद लगातार बढ़ते गए। यानी फिल्म एक बार फिर मुसीबतों से घिर चुकी थी और इस बार झटका पहले से भी [संगीत] बड़ा था क्योंकि विवाद इतना बढ़ गया कि राजकुमार संतोषी ने खुद ही इस प्रोजेक्ट से अलग होने का फैसला कर लिया। सोचिए जिस फिल्म को बचाने के लिए उन्होंने लगभग एक दशक तक संघर्ष किया था जिसे बार-बार नई जिंदगी देने की कोशिश की थी। आखिरकार उसी फिल्म को उन्हें छोड़ना पड़ गया और संतोषी के बाहर होते ही लंदन ड्रीम्स एक बार फिर अधर में लटक गई। ऐसा लगने लगा कि शायद इस कहानी का मंजिल तक पहुंचना अभी भी बाकी है। संतोषी के जाने के बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई क्योंकि फिल्म के सारे राइट्स अब भी प्रोड्यूसर परमजीत सिंह के पास थे। उनके पास कहानी थी। सलमान खान और अजय देवगन जैसे बड़े सितारों की डेट्स थी लेकिन एक समस्या थी जहाज था मगर उसका कप्तान नहीं यानी फिल्म के पास कोई डायरेक्टर नहीं था और यहीं पर एंट्री हुई सलमान खान की सलमान खान को इस कहानी के बेसिक प्लॉट पर पूरा भरोसा था दो दोस्त जलन और संगीत बताया जाता है कि संतोषी की पुरानी स्क्रिप्ट भी सलमान खान के पास मौजूद थी एक दिन सलमान ने मशहूर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विपुल अमृत लाल शाह को फोन किया उस समय विपुल शाह आंखें वक्त और नमस्ते लंदन जैसी सफल फिल्में दे चुके थे। सलमान ने उनसे कहा स्क्रिप्ट पढ़ो हमें यह फिल्म बनानी है। विपुल शाह ने स्क्रिप्ट पढ़ी। उन्हें कहानी का बेसिक आईडिया पसंद आया। लेकिन एक समस्या थी। उन्हें रश का डार्क ट्रैजिक और उदास ट्रीटमेंट बिल्कुल पसंद नहीं आया और तभी उन्होंने एक बड़ी शर्त रख दी। विपुल ने साफ कहा वह इस फिल्म को तभी डायरेक्ट करेंगे जब उन्हें पूरी स्क्रिप्ट दोबारा से लिखने की आजादी दी जाएगी।
यानी कहानी वही रहेगी लेकिन उसे पेश करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। सलमान खान और प्रोड्यूसर परमजीत सिंह दोनों विपुल शाह की इस शर्त पर तुरंत राजी हो गए। इसके बाद विपुल ने पूरी स्क्रिप्ट पर दोबारा काम शुरू किया। अयान मुखर्जी और सुरेश नायर जैसे लेखकों की नई टीम को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया और इस बार बदलाव सिर्फ छोटे-मोटे नहीं थे। पूरी फिल्म की टोन ही बदल दी गई। जो कहानी कभी एक डार्क और ट्रैजिक म्यूजिक ड्रामा थी वो अब ज्यादा कमर्शियल हल्कीफुल्की और बड़े दर्शक वर्क को ध्यान में रखकर बनाई जा रही म्यूजिक फिल्म बन चुकी थी। कई लोगों ने इसकी तुलना हॉलीवुड की मम्मा मियां जैसी फिल्मों के अंदाज से भी की। कास्टिंग में भी बदलाव हुए। साउथ की सुपरस्टार असीम को फिल्म की लीड एक्ट्रेस के तौर पर साइन किया गया और इसके साथ ही लंदन ड्रीम्स ने आखिरकार वो काम शुरू कर दिया जिसका इंतजार सालों से किया जा रहा था। फिल्म की भव्य शूटिंग शुरू हुई और इस बार कैमरा मुंबई नहीं बल्कि लंदन के शानदार लोकेशनेशंस पर चल रहा था। 30 अक्टूबर 2009 को लंदन ड्रीम सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म में सलमान खान का स्टारडम था। अजय देवगन की दमदार एक्टिंग थी। विशाल शेखर का शानदार म्यूजिक था। लेकिन इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ऑन द मुंह गिर गई। लंदन ड्रीम्स बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। कई क्रिटिक्स का मानना था कि 2000 के दशक में लिखी गई यह कहानी 2009 तक आते-आते काफी पुरानी और आउटडेटेड लगने लगी थी और जो डार्क मैजिक कभी रश की ओरिजिनल स्क्रिप्ट में मौजूद था वो लंदन ड्रीम्स के कमर्शियल ट्रीटमेंट में कहीं खो गया था। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती क्योंकि फिल्म भले ही
बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई लेकिन इसके पीछे की कानूनी लड़ाई अगले 16 साल तक चलती रही। दरअसल लंदन ड्रीम्स की शूटिंग के दौरान प्रोड्यूसर परमजीत सिंह को पैसों की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। उस समय विपुल शाह की कंपनी ने फिल्म पूरी करने के लिए उन्हें बड़ा लोन दिया था। लेकिन जब लोन चुकाने का वक्त आया तो परमजीत सिंह के दिए गए चेक बाउंस हो गए। इसके बाद विपुल शाह ने उनके खिलाफ चेक बाउंस का क्रिमिनल केस दर्ज करा दिया। यह मामला सालों तक अदालत में चलता रहा और आखिरकार अप्रैल 2026 में पूरे 16 साल बाद अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने विपुल शाह के पक्ष में फैसला दिया। लंदन ड्रीम्स के प्रोड्यूसर परमजीत सिंह को चेक [संगीत] बाउंस के मामले में दोषी करार दे दिया। यानी जिस कहानी की शुरुआत रश के रूप में हुई थी,
उसका आखिरी अध्याय भी एक कोर्ट रूम में जाकर खत्म हुआ। यह सिर्फ एक फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि एक ऐसे प्रोजेक्ट की दास्तान है जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बन सकती थी। एक ऐसी कहानी जो शाहरुख खान और आमिर खान को एक साथ पर्दे पर ला सकती थी। लेकिन स्टार्स का टकराव, रोल्स की लड़ाई, प्रोड्यूसर की कानूनी मुश्किलें और क्रिएटिव मतभेद इन सब ने मिलकर इस फिल्म को बॉलीवुड के इतिहास की सबसे दिलचस्प अधूरी कहानियों में बदल दिया। सोच कर देखिए अगर साल 2000 में राजकुमार संतोषी के निर्देशन और ए आर रहमान के संगीत के साथ रश्क रिलीज होती तो आज बॉलीवुड का इतिहास क्या होगा। शायद रश हमारी कल्पनाओं में जिंदा रहेगी। एक ऐसी खयाली दुनिया में जहां दो बड़े सुपरस्टार्स ईगो भूलकर एक ही फ्रेम में खड़े हैं और शायद यही वजह है कि रश आज भी सिर्फ एक अधूरी फिल्म नहीं है बल्कि बॉलीवुड का सबसे बड़ा क्या होता अगर बनकर रह गई है। दोस्तों अगर आपको इसी तरह की बॉलीवुड स्टोरीज पसंद है तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करिए और वीडियो को लाइक भी ताकि इसी तरह के और भी वीडियोस हम आपके लिए लाते रहें।