जब शशि कपूर के जुहू वाले बंगले में पुलिस और वकील दाखिल हुए तो उनकी अलमारी की गुप्त दराज में एक पीला लिफाफा मिला। जिस पर लिखा था मत खोलना। यह लिफाफा 33 साल तक छुपाया गया था।
इसके अंदर जेनिफर कैंडल की कांपती हुई लिखावट में वो आखिरी खत था। जो उन्होंने मौत से तीन दिन पहले लिखा था। उस खत में एक गुजारिश थी। एक आखिरी इच्छा जिसे शशि ने कभी पूरा नहीं किया। अस्पताल की नर्सों ने बताया कि अपने आखिरी घंटों में शशि बार-बार जेनिफर का नाम बुदबुदाते थे और कहते थे मुझे माफ कर दो मैं वादा नहीं निभा सका लेकिन वो वादा क्या था? किसने इस खत को इतने सालों तक दुनिया की नजरों से छुपाया? और सबसे बड़ा सवाल अगर शशि ने उस आखिरी इच्छा को पूरा कर दिया होता तो क्या वो खुद को बर्बाद होने से बचा पाते? 1984 बॉम्बे की बारिश जूहू के समंदर किनारे बसे उस भव्य बंगले में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ था। जेनिफर कैंडल वो अंग्रेज अभिनेत्री जिसने हिंदुस्तानी सिनेमा के सबसे रंगीन मिजाज वाले अभिनेता से शादी की थी। से जूझते हुए अपनी आखिरी सांसे गिन रही थी।
उनकी उम्र सिर्फ 50 साल थी। लेकिन बीमारी ने उन्हें इतना तोड़ दिया था कि वह अपनी परछाई जैसी लगने लगी थी। घर में डॉक्टरों का आना जाना लगा रहता था। लेकिन सबको पता था कि अब कुछ नहीं हो सकता। शशि कपूर जो पर्दे पर हमेशा मुस्कुराते नजर आते थे। अपनी पत्नी के बिस्तर के पास घंटों बैठे रहते और उनका हाथ थामे रोते रहते। लेकिन उस घर में एक और शख्स था जो चुपचाप सब कुछ देख रहा था। घर का पुराना नौकर रामू काका जो कपूर परिवार में 30 साल से काम कर रहा था। उसने बाद में एक पत्रकार को बताया कि जेनिफर की मौत से दो दिन पहले एक अजीब वाक्या हुआ था। देर रात जब सब सो गए थे।
तब जेनिफर ने रामू काका को बुलाया और कहा मुझे कागज और पेन चाहिए। उनकी आवाज इतनी कमजोर थी कि रामू काका को उनके बिल्कुल पास जाना पड़ा। उन्होंने कांपते हाथों से कुछ लिखा। लिफाफे में बंद किया और रामू काका से कहा यह शशि को देना। लेकिन मेरे जाने के बाद रामू काका ने पूछा मेम साहब यह क्या है? जेनिफर ने सिर्फ इतना कहा यह वह बात है जो मैं जिंदा रहते नहीं कह सकी। अब सिर्फ यही खत बचा है। अगले दिन सुबह जेनिफर की हालत और बिगड़ गई। उनकी सांसे उखड़ने लगी। शशि ने तुरंत डॉक्टरों को बुलाया। लेकिन सब जानते थे कि यह आखिरी वक्त है। दोपहर बाद 3:00 बजे जब बाहर बारिश तेज हो रही थी, जेनिफर कैंडल ने आखिरी सांस ली।
कमरे में मौजूद सभी लोग रो पड़े। शशि कपूर ने अपनी पत्नी के माथे को चूमा और फूट-फूट कर रोने लगे। उनकी आवाज पूरे घर में गूंज रही थी। जेनी तुम मुझे छोड़कर कैसे चली गई? मैं अकेला कैसे जिऊंगा? लेकिन उस वक्त किसी को नहीं पता था कि जेनिफर ने एक ऐसा खत छोड़ा है जो शशि की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा। रामू काका ने अंतिम संस्कार के तीन दिन बाद जब शशि थोड़ा संभल गए वो लिफाफा उन्हें दिया। शशि उस वक्त अपने कमरे में अकेले बैठे थे। खिड़की से बाहर समंदर को देख रहे थे। रामू काका ने कहा साहब मेम साहब ने यह आपके लिए छोड़ा था। मीम शशि ने लिफाफा हाथ में लिया और देखा कि उस पर जेनिफर की लिखावट में लिखा था शशि मेरे जाने के बाद खोलना। शशि के हाथ कांपने लगे। उन्होंने लिफाफा खोला और अंदर से तीन पन्नों का एक खत निकाला। जैसे-जैसे वह पढ़ते गए, उनका चेहरा पीला पड़ता गया। आंखों से आंसू बहने लगे। आखिरी पन्ना पढ़ने के बाद वह जमीन पर बैठ गए और सिर पकड़ कर रोने लगे। रामू काका ने पूछा साहब क्या हुआ? लेकिन शशि ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने बस इतना कहा रामू मुझे अकेला छोड़ दो और मुझसे वादा करो कि तुमने यह खत किसी को देखते नहीं देखा।
उस दिन के बाद शशि कपूर बदल गए। जो आदमी हमेशा पार्टियों में सबसे ज्यादा हंसता मुस्कुराता था, वह अचानक चुप रहने लगा। जो शख्स शराब को हाथ तक नहीं लगाता था, वह रोज रात को बोतल खाली करने लगा। करीबी दोस्तों ने देखा कि शशि अक्सर अपने कमरे में घंटों अकेले बैठे रहते और कुछ बुदबुदाते रहते। एक बार उनके बेटे कुणाल ने दरवाजे से झांक कर देखा कि पिता एक पुराना लिफाफा हाथ में लिए रो रहे हैं। कुणाल ने पूछा, पापा, यह क्या है? शशि ने तुरंत लिफाफा छुपा लिया और कहा कुछ नहीं बेटा बस पुरानी यादें हैं। लेकिन कुंडाल ने देखा कि उस लिफाफे पर उनकी मां की लिखावट थी। फिल्म इंडस्ट्री में अफवाहें फैलने लगी। कुछ लोग कहते थे कि जेनिफर ने मरने से पहले शशि को किसी और औरत के बारे में लिखा था।
कुछ कहते थे कि उस खत में परिवार की कोई गहरी राज की बात थी। लेकिन सच्चाई सिर्फ शशि जानते थे और वह किसी को नहीं बता रहे थे। उन्होंने उस खत को अपनी अलमारी की एक गुप्त दराज में छुपा दिया और चाबी हमेशा अपने पास रखी। रात को सोने से पहले वह उस दराज को खोलते, खत को देखते और फिर से बंद कर देते। यह सिलसिला 33 साल तक चलता रहा। लेकिन सवाल यह है उस खत में आखिर लिखा क्या था?
जेनिफर ने शशि से क्या मांगा था जो वह पूरा नहीं कर पाए और क्यों एक आदमी जो अपनी पत्नी से इतना प्यार करता था उसकी आखिरी इच्छा को पूरा नहीं कर सका 1960 का दशक लंदन का वेस्ट एंड थिएटर यहीं पर एक जवान हिंदुस्तानी लड़के की मुलाकात एक गोरी अंग्रेज लड़की से हुई थी और यह मुलाकात दोनों की जिंदगी बदल देने वाली थी शशि कपूर उस वक्त बॉम्बे के मशहूर कपूर खानदान के बागी बेटे थे। उन्होंने अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राज कपूर की परछाई से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लंदन का रुख किया था। वहां उन्होंने शेक्सपियर थिएटर में काम करना शुरू किया और वहीं मिली जेनफर कैंडल एक खूबसूरत पढ़ी लिखी अंग्रेज अभिनेत्री जो कैंडल परिवार से थी जो ब्रिटिश थिएटर की दुनिया में बेहद इज्जत वाला नाम था।
पहली मुलाकात में ही शशि को जेनिफर से प्यार हो गया। वह उनकी खूबसूरती, उनकी आवाज, उनके बोलने के तरीके पर पैदा हो गए। लेकिन जेनिफर को यकीन नहीं हो रहा था कि यह भारतीय लड़का जो हमेशा मुस्कुराता रहता था और जिसकी आंखों में शरारत थी, उनसे सच्चा प्यार करता है या बस टाइम पास कर रहा है। शशि ने महीनों तक जेनिफर को मनाया। उन्हें फूल भेजे, प्रेम पत्र लिखे। थिएटर के बाद डिनर पर ले गए। धीरे-धीरे जेनिफर का दिल पिघलने लगा। उन्हें एहसास हुआ कि यह आदमी सच में उनसे प्यार करता है।
लेकिन दोनों परिवारों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। जेनिफर के माता-पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी एक भारतीय से शादी करें। उस जमाने में अंग्रेज समाज में यह बहुत बड़ा स्कैंडल माना जाता था। दूसरी तरफ शशि के पिता पृथ्वीराज कपूर भी नाराज थे। वह चाहते थे कि उनका बेटा किसी पंजाबी खानदानी लड़की से शादी करें ना कि किसी विदेशी से।
लेकिन शशि और जेनिफर ने सबकी परवाह किए बगैर 1958 में शादी कर ली। यह शादी उस दौर में एक बड़ी खबर बनी। अखबारों में छपा कपूर खानदान के शहजादे ने अंग्रेज लड़की से की शादी। शादी के बाद जेनिफर भारत आ गई। बॉम्बे की गर्मी, भीड़भाड़, शोरशराबा यह सब उनके लिए बिल्कुल नया था।
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने हिंदी सीखी, भारतीय कपड़े पहनने लगी और शशि के परिवार में घुलने मिलने की कोशिश की। धीरे-धीरे कपूर परिवार ने भी उन्हें अपना लिया। जेनिफर ने हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया। उन्होंने शक्ति सामंत की फिल्म में काम किया। मर्चेंट आइवरी की फिल्मों में नजर आई। लेकिन उनकी असली पहचान शशि कपूर की पत्नी के रूप में ही बनी। बाहर से देखने पर यह एक परफेक्ट शादी लगती थी।
शशि और जेनिफर दो अलग दुनिया के लोग जो प्यार की ताकत से एक हो गए थे। उनके तीन बच्चे हुए कुणाल, करण और संजना। शशि उस वक्त हिंदी सिनेमा के सबसे स्टाइलिश और रोमांटिक हीरो बन चुके थे। दीवार कभी-कभी सिलसिला जैसी फिल्मों में उनकी परफॉर्मेंस ने उन्हें लीजेंड बना दिया। जेनफर घर संभालती थी, बच्चों की परवरिश करती थी और कभी कभार फिल्मों में काम भी करती थी। लेकिन इस चमकदार जिंदगी के पीछे एक अंधेरा था जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था।
शशि कपूर की जिंदगी में एक और औरत का साया था। ऐसा फिल्म इंडस्ट्री में फुसफुसाया जाता था। कुछ लोग कहते थे कि शशि का किसी और औरत से लंबा रिश्ता है। वह औरत भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी थी। शशि उसके साथ वक्त बिताते थे। पार्टियों में उसके साथ नजर आते थे। जेनिफर को सब पता था लेकिन वह चुप रहती थी। उन्होंने कभी शशि से इस बारे में कोई सवाल नहीं किया।
कभी कोई शिकायत नहीं की। क्यों? क्योंकि वह शशि से बेइंतहा प्यार करती थी और उन्हें डर था कि अगर उन्होंने कुछ कहा तो शशि उन्हें छोड़ देंगे। करीबी दोस्तों ने बताया कि जेनिफर अक्सर रात को अकेले रोती थी। जब शशि देर रात घर लौटते शराब के नशे में तो जेनिफर उनका इंतजार करती रहती थी। वो उनके कपड़े बदलती, उन्हें बिस्तर पर लिटाती और चुपचाप उनके माथे पर हाथ फेरती रहती। शशि सो जाते और जेनिफर जागती रहती। आंखों में आंसू लिए।
एक बार शशि की बहन ने जेनिफर से पूछा, तुम शशि को छोड़ क्यों नहीं देती? तुम्हारे साथ इतना अन्याय हो रहा है। जेनिफर ने जवाब दिया, क्योंकि मैं उनसे प्यार करती हूं और प्यार में सब कुछ सहा जाता है। लेकिन 80 के दशक की शुरुआत में जेनिफर की जिंदगी में एक और तूफान आया। उन्हें कैंसर हो गया। शुरुआत में डॉक्टरों ने कहा कि इलाज से ठीक हो सकता है।
लेकिन बीमारी तेजी से फैलती गई। जेनिफर की तबीयत बिगड़ती गई। शशि ने सबसे अच्छे डॉक्टरों को बुलाया। विदेश से दवाइयां मंगवाई लेकिन कुछ काम नहीं आया। जेनिफर जानती थी कि उनका वक्त अब कम है और तभी उन्होंने फैसला किया कि वह शशि को एक आखिरी खत लिखेंगी जिसमें वह अपने दिल की बात कहेंगी जो वह जिंदगी भर नहीं कह पाई। उस खत में क्या था? जेनिफर ने शशि से क्या मांगा था? और क्यों शशि उस वादे को पूरा नहीं कर पाए? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। 1984 के बाद शशि कपूर की जिंदगी एक धीमी में बदल गई।
जेनिफर के जाने के बाद वह टूट चुके थे। दोस्तों ने देखा कि शशि अब पहले जैसे नहीं रहे। वह हंसते तो थे लेकिन उनकी हंसी में दर्द छुपा होता था। वो फिल्मों में काम करते रहे लेकिन उनकी आंखों में वह चमक नहीं रही जो पहले थी। रात को वह अकेले अपने कमरे में बैठे रहते और उस पीले लिफाफे को देखते रहते। कभी-कभी वह लिफाफा खोलते, खत को पढ़ते और फिर रोने लगते। एक बार उनके करीबी दोस्त ने पूछा शशि तुम इतने उदास क्यों रहते हो? जेनिफर तो चली गई लेकिन जिंदगी तो चलती रहती है
फिरकी समस्या शुरू हुई। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अपना ख्याल रखना होगा। लेकिन शशि ने कभी परवाह नहीं की। वह पीते रहे। खाने-पीने का ध्यान नहीं रखते थे। ऐसा लगता था जैसे वह जिंदगी से हार चुके हैं। उनके बच्चों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन शशि किसी की नहीं सुनते थे। वह बस इतना कहते थे मुझे अकेला छोड़ दो।
मैं अपनी जिंदगी जी रहा हूं। लेकिन सच्चाई यह थी कि शशि अपनी जिंदगी नहीं जी रहे थे। वह सिर्फ वक्त काट रहे थे। वह इंतजार कर रहे थे उस दिन का जब वह जेनिफर से मिलेंगे और उनसे माफी मांगेंगे। रात को सोने से पहले वह जेनिफर की तस्वीर को देखते और कहते जेनी मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हारा वादा पूरा नहीं कर पाया। मैं कमजोर निकला। मैं तुम्हें धोखा दे गया। 1990 के दशक में शशि ने अपना एक थिएटर ग्रुप शुरू किया। पृथ्वी थिएटर जो उनके पिता की याद में था। वह इस थिएटर में पूरा वक्त बिताने लगे। लोग कहते थे कि शशि थिएटर में इसलिए इतना वक्त बिताते हैं क्योंकि वहां उन्हें जेनिफर की यादें आती हैं।
जेनिफर भी थिएटर से जुड़ी थी और शशि को लगता था कि थिएटर में काम करके वह जेनिफर के करीब हैं। लेकिन असलियत में शशि थिएटर में इसलिए वक्त बिताते थे क्योंकि वह घर जाने से डरते थे। उस कमरे में जाने से डरते थे जहां वह पीला लिफाफा रखा था। 2000 के दशक में शशि की सेहत और बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी किडनी फेल हो रही है और उन्हें डायलिसिस की जरूरत है। शशि ने इलाज करवाया लेकिन उनका मन नहीं लग रहा था। वह अक्सर अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे छत को देखते रहते और कुछ बुदबुदाते रहते। नर्सों ने बताया कि शशि अक्सर नींद में जेनिफर का नाम लेते थे और कहते थे जेनी मैं आ रहा हूं। अब ज्यादा देर नहीं है। 2017 दिसंबर का महीना।
शशि कपूर अस्पताल में आखिरी सांसे गिन रहे थे। उनके बच्चे, रिश्तेदार, दोस्त सब उनके पास थे। डॉक्टरों ने कह दिया था कि अब कुछ घंटों की बात है। शशि बेहोशी की हालत में थे। लेकिन कभी-कभी होश आता तो वह कुछ बुदबुदाते। एक नर्स ने बाद में बताया कि शशि ने अपने आखिरी घंटों में बार-बार कहा जेनिफर मुझे माफ कर दो। मैं वादा पूरा नहीं कर पाया। मैं कमजोर था। मुझे माफ कर दो। 4 दिसंबर 2017 की शाम को शशि कपूर ने आखिरी सांस ली। उनकी उम्र 79 साल थी। पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। अखबारों में छपा हिंदी सिनेमा के महानायक शशि कपूर का निधन।
लेकिन किसी को नहीं पता था कि शशि अपने साथ एक राज लेकर गए थे। एक ऐसा राज जो उन्होंने 33 साल तक छुपाया था। शशि की मौत के बाद जब उनके बच्चों ने घर की सफाई शुरू की तो उन्हें शशि की अलमारी में एक गुप्त दराज मिली। उस दराज में वो पीला लिफाफा रखा था। जिस पर लिखा था मत खोलना। बच्चों ने लिफाफा खोला और अंदर जेनिफर का वो आखिरी खत मिला। जब उन्होंने खत पढ़ा तो सब रो पड़े।
उस खत में जेनिफर ने शशि से एक आखिरी गुजारिश की थी। एक ऐसी गुजारिश जो शशि कभी पूरी नहीं कर पाए। लेकिन वो गुजारिश क्या थी? जेनिफर ने शशि से क्या मांगा था? और क्यों शशि जो अपनी पत्नी से इतना प्यार करते थे उस आखिरी इच्छा को पूरा नहीं कर पाए? क्या वह गुजारिश इतनी मुश्किल थी या फिर शशि के पास कोई और वजह थी? और सबसे बड़ा सवाल अगर शशि ने वह वादा पूरा कर दिया होता तो क्या उनकी जिंदगी अलग होती? क्या वह इतने टूटे हुए नहीं होते?
क्या वह खुश रह पाते? इन सवालों के जवाब उस पीले लिफाफे में दफन थे जिसे शशि कपूर ने 33 साल तक अपनी छाती से लगाए रखा। और अब जब वह खत दुनिया के सामने आया तो सबको पता चला कि हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक हीरो की असली जिंदगी में कितना गहरा दर्द छुपा था। जेनिफर के जाने के बाद शशि के घर में एक शख्स था जो हर रोज उनकी टूटती हालत देखता था। उनकी एक नर्स जिसे हम सिस्टर मार्गेट कहेंगे। कई सालों तक शशि कपूर के घर में काम करती थी। वो जेनिफर की आखिरी बीमारी के दौरान आई थी और फिर शशि की सेहत संभालने के लिए रुक गई। कहा जाता है कि शशि की के बाद एक नर्स ने बताया। मैंने वह सब देखा जो किसी ने नहीं देखा। मैं उस घर की दीवारों की तरह थी। मौजूद थी लेकिन किसी को दिखाई नहीं देती थी। और मैंने देखा कि शशि साहब हर रात उस पीले लिफाफे को निकालते थे।
उसे सीने से लगाते थे और रोते थे। सिस्टर मारगेट ने बताया कि जेनिफर की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद शशि ने उन्हें अपने कमरे में बुलाया था। उस वक्त शशि की आंखें सूझी हुई थी और चेहरा पीला पड़ा हुआ था। उन्होंने सिस्टर मारगेट से कहा, “मुझे एक बात बतानी है, लेकिन यह किसी को नहीं बतानी।” सिस्टर मार्गेट ने कहा, “साह, मैं नर्स हूं।” मरीजों के राज रखना मेरा फर्ज है।” शशि ने अपनी अलमारी से वह पीला लिफाफा निकाला और कहा, जेनिफर ने मरने से पहले यह खत लिखा था। इसमें उन्होंने मुझसे एक वादा मांगा है। लेकिन मैं यह वादा पूरा नहीं कर सकता। मैं कमजोर हूं। मैं डरपोक हूं। सिस्टर मारगेट ने पूछा साहब खत में क्या लिखा है? शशि ने जवाब दिया यह मैं किसी को नहीं बता सकता। लेकिन इतना जान लो कि यह वादा मेरी जान ले लेगा। उस दिन के बाद सिस्टर मार्गेट ने शशि को बदलते देखा। वह रात को सोते नहीं थे।
2:00 बजे, 3:00 बजे, 4:00 बजे वह अपने कमरे में टहलते रहते थे। कभी-कभी वह उस लिफाफे को निकालते, खत को पढ़ते और फिर जोरजोर से रोने लगते। सिस्टर मार्गेट दरवाजे के बाहर खड़ी होकर सुनती थी। शशि बार-बार कहते थे, जेनी, मैं यह नहीं कर सकता। तुम जानती हो मैं यह नहीं कर सकता। तुमने मुझसे ऐसा वादा क्यों मांगा? एक बार सिस्टर मार्गेट ने हिम्मत करके पूछा, साहब क्या मैं कुछ मदद कर सकती हूं? शशि ने सिर हिलाया और कहा, नहीं बहन यह बोझ सिर्फ मैं ही उठा सकता हूं और मैं इसे मरते दम तक उठाऊंगा। सिस्टर मार्गेट ने यह भी बताया कि शशि के घर में एक और शख्स था जो उस खत के बारे में जानता था। उनके करीबी सहयोगी जिन्हें हम हरिबाबू कहेंगे। कई दशकों से शशि के साथ थे। वह शशि की हर शूटिंग पर जाते थे। हर पार्टी में साथ होते थे। हर मुसीबत में खड़े रहते थे। जेनिफर की मौत के बाद हरी बाबू रोज शाम को शशि से मिलने आते थे।
दोनों घंटों बैठकर बातें करते थे। कभी पुरानी यादों के बारे में कभी फिल्मों के बारे में। लेकिन एक दिन सिस्टर मार्गेट ने दरवाजे से सुना कि शशि और हरिबाबू उस खत के बारे में बात कर रहे थे। हरी बाबू ने कहा शशि तुम इस खत को जला क्यों नहीं देते? यह तुम्हें तबाह कर रहा है। शशि ने जवाब दिया नहीं हरी यह खत जेनिफर की आखिरी निशानी है। मैं इसे जला नहीं सकता। हरी बाबू ने कहा तो फिर उस वादे को पूरा कर दो। जो भी लिखा है उसमें कर दो। शशि चुप रहे।
फिर धीरे से बोले मैं नहीं कर सकता। हरी अगर मैंने वह किया तो मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। मेरे बच्चे मुझसे नफरत करने लगेंगे। समाज मुझे थूक देगा। मैं यह नहीं कर सकता। हरिबाबू ने पूछा तो फिर तुम क्या करोगे? शशि ने कहा मैं इस बोझ को ढोता रहूंगा। जब तक मर नहीं जाता। सिस्टर मार्गेट ने यह भी बताया कि शशि के तीन बच्चों में से सिर्फ एक को उस खत के बारे में शक था। उनकी बेटी संजना कपूर। संजना सबसे छोटी थी, लेकिन सबसे तेज दिमाग वाली थी। उन्होंने देखा था कि पिता हर रात अपने कमरे में अकेले बैठे रहते हैं और कुछ पढ़ते रहते हैं। एक बार संजना ने सिस्टर मार्गेट से पूछा, बहन, पापा रात को क्या पढ़ते रहते हैं? क्या वो कोई किताब है?
सिस्टर मार्गेट ने झूठ बोला। हां बेटी, वो पुरानी डायरी पढ़ते हैं। लेकिन संजना को यकीन नहीं हुआ। उन्होंने एक दिन पिता के कमरे में छुप कर देखा। शशि ने अलमारी से एक पीला लिफाफा निकाला। उसे खोला और रोने लगे। संजना समझ गई कि यह कोई साधारण चीज नहीं है। लेकिन संजना ने कभी पिता से इस बारे में नहीं पूछा। क्यों? क्योंकि उन्हें डर था कि अगर उन्होंने पूछा तो पिता और टूट जाएंगे। सिस्टर मारगेट ने बताया संजना बेटी बहुत समझदार थी। वह जानती थी कि उनके पिता किसी गहरे दर्द से गुजर रहे हैं और उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए।
लेकिन शशि साहब की के बाद जब वह खत मिला तो संजना बेटी सबसे ज्यादा रोई। उन्होंने कहा काश मैंने पापा से पूछ लिया होता। काश मैंने उनकी मदद की होती। सिस्टर मार्गेट की गवाही से एक बात साफ हो गई। शशि कपूर उस खत के बोझ तले दबे हुए थे। वह चाहते थे कि कोई उन्हें इस बोझ से मुक्त कर दे। लेकिन साथ ही वह उस खत को छोड़ भी नहीं सकते थे। क्योंकि वह खत जेनिफर की आखिरी निशानी था और शशि जेनिफर से इतना प्यार करते थे कि उनकी हर चीज उनके लिए पवित्र थी। लेकिन सवाल यह है उस खत में आखिर क्या लिखा था? जेनिफर ने शशि से क्या मांगा था जो वह पूरा नहीं कर पाए? और क्यों शशि को लगता था कि अगर उन्होंने वह वादा पूरा किया तो उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
शशि कपूर के करीबी दोस्तों में से पांच लोग थे जो उनकी असली हालत जानते थे। लेकिन सब ने मिलकर एक चुप्पी की दीवार खड़ी कर दी थी। यह पांच लोग थे। उनके करीबी सहयोगी जिन्हें हम हरीबाबू कहेंगे। उनके एक डॉक्टर जिन्हें हम डॉक्टर खन्ना कहेंगे। उनके भाई शम्मी कपूर, उनकी बहन रीमा जैन और उनके सबसे पुराने दोस्त शेखर कपूर। इन पांचों ने मिलकर एक अनकहा समझौता किया था शशि की असली हालत को दुनिया से छुपाना। क्यों? क्योंकि अगर सच्चाई बाहर आ जाती तो शशि कपूर की छवि हमेशा के लिए धूमिल हो जाती। करीबी सूत्रों के अनुसार शशि के दोस्तों ने बाद में इस गुप्त समझौते के बारे में बताया
उन्होंने कहा हम पांचों जानते थे कि शशि टूट चुके हैं। जेनिफर के जाने के बाद वह सिर्फ एक खोखला ढांचा रह गए थे। लेकिन हमने फैसला किया कि हम दुनिया को यह नहीं दिखाएंगे। हम शशि को मुस्कुराता हुआ दिखाएंगे। भले ही अंदर से वह रो रहे हो। शेखर कपूर ने यह भी बताया कि शशि ने एक बार उन पांचों को अपने घर बुलाया था और कहा था दोस्तों मैं तुम सबसे एक वादा चाहता हूं जब मैं मर जाऊं तो मेरी अलमारी में एक पीला लिफाफा है उसे जला देना किसी को मत दिखाना लेकिन हरी बाबू ने उस वक्त शशि से सवाल किया था शशि अगर यह खत इतना खतरनाक है तो तुम खुद ही इसे जला क्यों नहीं देते शशि ने जवाब दिया क्योंकि यह जेनफर की आखिरी निशानी है। मैं इसे जलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं।
इसलिए मैं चाहता हूं कि मेरी मौत के बाद तुम लोग इसे जला दो। शम्मी कपूर ने कहा भाई हम ऐसा नहीं कर सकते। यह तुम्हारी निजी चीज है। शशि ने जिद की। नहीं तुम्हें करना होगा। मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे यह खत पढ़ें। मैं नहीं चाहता कि दुनिया को पता चले कि मैं कितना कमजोर था। लेकिन शशि की मौत के बाद उन पांचों में से किसी ने भी वह खत नहीं जलाया। क्यों? क्योंकि जब शशि के बच्चों ने घर की सफाई शुरू की तो उन्हें वह लिफाफा पहले ही मिल गया। और जब बच्चों ने खत पढ़ा तो उन्होंने फैसला किया कि इसे जलाया नहीं जाएगा बल्कि संभाल कर रखा जाएगा। क्योंकि यह खत उनकी मां की आखिरी निशानी था। शेखर कपूर ने कहा, जब मुझे पता चला कि बच्चों ने खत पढ़ लिया है तो मैं डर गया। मुझे लगा कि अब शशि की सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।
लेकिन बच्चों ने फैसला किया कि वह इस खत को सार्वजनिक नहीं करेंगे। वो इसे अपने पास रखेंगे एक पारिवारिक राज्य की तरह। उनके डॉक्टरों ने बाद में बताया शशि साहब को गहरा डिप्रेशन था। वह अंदर से टूट चुके थे। मैंने उन्हें कई बार एंटी डिप्रेसेंट दवाइयां दी लेकिन वह कभी नियमित रूप से नहीं लेते थे। एक बार मैंने उनसे पूछा साहब आप इतने उदास क्यों रहते हैं? क्या कोई ऐसी बात है जो आपको परेशान कर रही है? शशि ने जवाब दिया डॉक्टर कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो दवाइयों से नहीं भरते। मेरे दिल में एक ऐसा जख्म है जो मरते दम तक रहेगा। डॉक्टर खन्ना ने यह भी बताया कि शशि को अक्सर पैनिकिक अटैक आते थे। रात को अचानक उनकी सांस फूलने लगती थी। दिल की धड़कन तेज हो जाती थी और वह घबरा जाते थे।
एक बार डॉक्टर खन्ना को रात के 2:00 बजे फोन आया। शशि साहब को अटैक आया है। जब डॉक्टर पहुंचे तो देखा कि शशि फर्श पर बैठे हुए हैं। हाथों में एक पीला लिफाफा है और वह जोर-जोर से रो रहे हैं। डॉक्टर ने उन्हें इंजेक्शन दिया। शांत किया और पूछा साहब यह क्या है? शशि ने कहा यह मेरी मौत का वारंट है डॉक्टर। यह वो चीज है जो मुझे जिंदा भी रखती है और मार भी रही है। रीमा जैन शशि की बहन ने भी एक बार अपनी बेटी को बताया था कि शशि भाई जेनिफर के जाने के बाद कभी नहीं संभल पाए। रीमा ने कहा मैंने अपने भाई को इतना टूटा हुआ कभी नहीं देखा था।
वो हमेशा मजबूत थे। हमेशा हंसते मुस्कुराते थे। लेकिन जेनिफर के जाने के बाद वह एक जिंदा लाश बन गए। मैंने उनसे कई बार पूछा भाई तुम इतने उदास क्यों हो? क्या मैं कुछ मदद कर सकती हूं? लेकिन वो हमेशा यही कहते नहीं रीमा। यह बोझ सिर्फ मैं ही उठा सकता हूं। इन पांच लोगों ने मिलकर शशि कपूर की असली हालत को दुनिया से छुपाया। उन्होंने मीडिया को बताया कि शशि साहब बिल्कुल ठीक हैं। बस उम्र का असर है। लेकिन अंदर की सच्चाई यह थी कि शशि टूट चुके थे और वह पीला लिफाफा उनकी टूटन की सबसे बड़ी वजह था। लेकिन सवाल यह है अगर यह पांच लोग शशि की इतनी परवाह करते थे तो उन्होंने शशि को उस बोझ से मुक्त करने की कोशिश क्यों नहीं की?
क्यों उन्होंने शशि को अकेले उस दर्द से जूझने दिया? और सबसे बड़ा सवाल क्या इन पांचों को पता था कि उस खत में क्या लिखा है? 1990 के दशक के आखिर में शशि कपूर की सेहत तेजी से बिगड़ने लगी। पहले उन्हें डायबिटीज हुई, फिर ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हुई और फिर किडनी फेल होने लगी। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत है। वरना जान को खतरा हो सकता है। लेकिन शशि ने इलाज में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। वह डॉक्टरों की बात नहीं सुनते थे। दवाइयां समय पर नहीं लेते थे और खानेपीने का कोई ध्यान नहीं रखते थे। ऐसा लगता था जैसे वह जानबूझकर अपनी सेहत बिगाड़ रहे हैं।
जैसे वह मरना चाहते हैं। डॉक्टर खन्ना ने बताया कि शशि साहब को जब पहली बार किडनी की समस्या का पता चला तो उन्होंने कहा डॉक्टर मुझे इलाज नहीं करवाना मुझे मरने दो। डॉक्टर खन्ना ने कहा साहब आप क्या कह रहे हैं? आपके बच्चे हैं, परिवार है, दोस्त हैं। आप ऐसे हार नहीं मान सकते। शशि ने जवाब दिया, डॉक्टर, मैं बहुत थक गया हूं। मैं जीना नहीं चाहता। मैं बस जेनिफर के पास जाना चाहता हूं। डॉक्टर खन्ना ने उन्हें समझाया लेकिन शशि ने एक शर्त रखी। ठीक है, मैं इलाज करवाऊंगा। लेकिन सिर्फ इसलिए कि मेरे बच्चे परेशान ना हो। वरना मुझे जीने में कोई दिलचस्पी नहीं है। 2000 के दशक में शशि को कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया। हर बार डॉक्टर कहते साहब आप अपना ख्याल रखिए वरना हालत और बिगड़ जाएगी। लेकिन शशि कभी नहीं सुनते थे।
अस्पताल से छुट्टी मिलते ही वह फिर से अपनी पुरानी आदतों में लौट जाते। देर रात तक जागना, खाना, ठीक से ना खाना और उस पीले लिफाफे को देखकर रोते रहना। नर्सों ने बताया कि शशि साहब अस्पताल में भी वह लिफाफा अपने साथ रखते थे। वह उसे अपने तकिए के नीचे छुपा कर रखते थे और रात को जब सब सो जाते थे तो वह उसे निकाल कर पढ़ते थे। एक बार एक नर्स ने देखा कि शशि साहब रात के 3:00 बजे अपने बिस्तर पर बैठे हुए हैं। हाथ में एक पुराना खत है और वह धीरे-धीरे रो रहे हैं। नर्स ने पूछा साहब क्या हुआ? क्या दर्द हो रहा है? शशि ने सिर हिलाया और कहा हां बेटी बहुत दर्द हो रहा है लेकिन यह दर्द शरीर का नहीं है यह दिल का दर्द है और इसकी कोई दवाई नहीं है नर्स ने पूछा साहब यह खत क्या है शशि ने कहा यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती है बेटी यह वो चीज है जो मुझे हर रोज याद दिलाती है कि मैं कितना कमजोर इंसान हूं।
डॉक्टर खन्ना ने यह भी बताया कि शशि साहब को अक्सर मतिभ्रम होने लगा था। कभी-कभी वह अचानक जेनिफर का नाम लेने लगते थे और कहते थे जेनी तुम कहां हो? मुझे अकेला मत छोड़ो। एक बार अस्पताल में उन्हें इतना तेज मतिभ्रम हुआ कि उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया। जेनी मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हारा वादा पूरा नहीं कर पाया। मैं कमजोर हूं। मैं डरपोक हूं। डॉक्टरों ने उन्हें शांत करने के लिए इंजेक्शन दिया। लेकिन शशि बेहोशी में भी जेनिफर का नाम बुदबुदाते रहे। 2017 के शुरुआत में शशि की हालत बहुत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने परिवार को बुलाया और कहा, अब ज्यादा वक्त नहीं है। आप सबको तैयार रहना चाहिए। शशि के बच्चों ने पिता के पास ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना शुरू किया। लेकिन शशि अक्सर अकेले रहना चाहते थे। वह कहते थे मुझे थोड़ा अकेला छोड़ दो। मुझे सोचना है। और जब सब चले जाते तो शशि उस पीले लिफाफे को निकालते और घंटों उसे देखते रहते।
नवंबर 2017 में शशि को आखिरी बार अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने कहा, अब बस कुछ दिनों की बात है। शशि की सांसे कमजोर पड़ती जा रही थी। दिल की धड़कन धीमी हो रही थी। लेकिन उनके हाथ में वह पीला लिफाफा था जिसे वह छाती से लगाए हुए थे। नर्सों ने कहा साहब यह लिफाफा हटा दें। आपको तकलीफ हो रही है। लेकिन शशि ने मना कर दिया। उन्होंने कहा नहीं यह मेरे साथ रहेगा। यह जेनिफर की आखिरी निशानी है। दिसंबर के पहले हफ्ते में शशि की हालत और बिगड़ गई। वह ज्यादातर बेहोश रहने लगे। लेकिन जब कभी होश आता तो वह जेनिफर का नाम लेते और रोने लगते। 3 दिसंबर की रात को नर्सों ने सुना कि शशि कुछ बुदबुदा रहे हैं। जब नर्स पास गई तो सुना शशि कह रहे थे जैनी मैं आ रहा हूं। अब मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हारा वादा पूरा नहीं कर पाया।
लेकिन अब मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं। मुझे अपने पास रख लेना। 4 दिसंबर 2017 की शाम को शशि कपूर ने आखिरी सांस ली। उनके हाथ में वह पीला लिफाफा था जिसे उन्होंने 33 साल तक अपनी छाती से लगाए रखा। नर्सों ने बताया कि शशि साहब के चेहरे पर मौत के वक्त एक अजीब सी शांति थी जैसे उन्हें आखिरकार वो चीज मिल गई जो वह तलाश रहे थे। जैसे वह आखिरकार जेनिफर के पास पहुंच गए। लेकिन सवाल यह है उस खत में आखिर क्या लिखा था? जेनिफर ने शशि से क्या मांगा था जो वह पूरा नहीं कर पाए? और क्यों शशि को लगता था कि अगर उन्होंने वह वादा पूरा किया तो उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
शशि कपूर की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद जब परिवार अभी भी सदमे में था। एक औरत ने मुंबई के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। यह औरत 25 साल से छुपी हुई थी। लेकिन अब वह बोलने के लिए तैयार थी। उसका नाम था नीलिमा देश पांडे। एक पूर्व फिल्म अभिनेत्री जिसे फिल्म इंडस्ट्री ने भुला दिया था। जब पत्रकारों ने पूछा कि वह इतने सालों बाद क्यों सामने आई है तो नीलिमा ने जवाब दिया क्योंकि अब शशि जी नहीं रहे। अब मैं सच बोल सकती हूं बिना किसी को तकलीफ पहुंचाए। पत्रकारों ने पूछा आपका शशि कपूर से क्या रिश्ता था? नीलिमा ने एक लंबी सांस ली और कहा, “मैं वह औरत हूं जिसे सब लोग विलेन समझते थे। मैं वह औरत हूं जिसके कारण जेनिफर जी को तकलीफ हुई। लेकिन सच्चाई यह है कि मैं भी एक शिकार थी। शशि जी के प्यार की शिकार।
नीलिमा ने बताया कि उनकी मुलाकात शशि से 1970 के दशक में हुई थी। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान। उस वक्त नीलिमा एक नई अभिनेत्री थी और शशि उनके हीरो थे। शशि ने नीलिमा पर ध्यान दिया। उनसे दोस्ती की और धीरे-धीरे दोनों करीब आ गए। नीलिमा ने कहा, “मुझे पता था कि शशि जी की शादी हो चुकी है। मुझे पता था कि जेनिफर जी एक अच्छी इंसान हैं। लेकिन मैं शशि जी से प्यार कर बैठी थी और शशि जी ने मुझसे कहा था कि वह भी मुझसे प्यार करते हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी शादी एक गलती थी कि वह जेनिफर से खुश नहीं है। मैंने उन पर यकीन कर लिया। नीलिमा और शशि का रिश्ता कई सालों तक चला। दोनों छुप कर मिलते थे। होटलों में, फार्म हाउस में, विदेशी दौरों पर फिल्म इंडस्ट्री में सब जानते थे, लेकिन किसी ने खुलकर कुछ नहीं कहा। जेनिफर को भी पता था लेकिन वह चुप रही। नीलिमा ने कहा, एक बार मैंने शशि जी से पूछा था कि क्या वह जेनिफर जी को छोड़कर मुझसे शादी करेंगे? शशि जी ने कहा था, नीलिमा, मैं तुमसे प्यार करता हूं। लेकिन मैं जेनिफर को छोड़ नहीं सकता। वह मेरी पत्नी है। मेरे बच्चों की मां है। मैं उन्हें तकलीफ नहीं दे सकता।
मैंने पूछा तो फिर मेरा क्या? शशि जी ने कहा तुम मेरी प्रेमिका हो। तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी। लेकिन मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। नीलिमा ने बताया कि जब जेनिफर को कैंसर हुआ तो शशि ने नीलिमा से रिश्ता तोड़ लिया। शशि ने कहा नीलिमा अब मुझे जेनिफर के साथ रहना है। वह बीमार हैं। मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकता। नीलिमा ने कहा मैं समझ गई कि शशि जी ने अपनी पसंद बना ली है। उन्होंने जेनिफर जी को चुना मुझे नहीं। मैं दिल टूट कर चली गई। मैंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और एक साधारण जिंदगी जीने लगी। लेकिन शशि जी को मैं कभी भूल नहीं पाई। और जब मुझे पता चला कि जेनिफर जी ने मरने से पहले शशि जी को एक खत लिखा था तो मुझे लगा कि शायद उस खत में मेरा जिक्र होगा। पत्रकारों ने पूछा आपको कैसे पता चला कि जेनिफर ने खत लिखा था? नीलिमा ने कहा शशि जी के एक करीबी दोस्त ने मुझे बताया था। उन्होंने कहा था कि जेनिफर जी ने मरने से पहले शशि जी से एक वादा मांगा था और शशि जी उस वादे को पूरा नहीं कर पाए।
मुझे लगा कि शायद जेनिफर जी ने शशि जी से कहा होगा कि वह मुझसे दूर रह। शायद उन्होंने शशि जी से कहा होगा कि वह मुझे भूल जाएं और शशि जी ने वैसा ही किया। उन्होंने मुझे अपनी जिंदगी से निकाल दिया। लेकिन शायद इसी बात का उन्हें पछतावा था। शायद इसीलिए वह इतने टूटे हुए थे। नीलिमा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरे देश में टहलका मचा दिया। अखबारों में बड़ी-बड़ी सुर्खियां छपी। शशि कपूर की गुप्त प्रेमिका ने तोड़ी चुप्पी। टीवी चैनलों पर बहस शुरू हो गई। क्या नीलिमा सच बोल रही है या वह सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहती है? शशि के परिवार ने कोई बयान नहीं दिया। लेकिन करीबी सूत्रों ने बताया कि परिवार बहुत नाराज था। उन्हें लगा कि नीलिमा शशि की मौत का फायदा उठा रही है। लेकिन नीलिमा ने अपनी बात पर अड़ी रही। उन्होंने कहा मैं झूठ नहीं बोल रही। मैं सिर्फ अपनी कहानी बता रही हूं। लोग जो चाहे सोचें। लेकिन नीलिमा की कहानी में एक बड़ा सवाल था। अगर जेनिफर ने सच में शशि से नीलिमा को छोड़ने के लिए कहा था तो शशि इतने टूटे क्यों थे? आखिर उन्होंने तो वह वादा पूरा कर दिया था। उन्होंने नीलिमा को छोड़ दिया था।
फिर उन्हें किस बात का पछतावा था? क्या जेनिफर ने कुछ और मांगा था? कुछ ऐसा जो शशि नहीं कर पाए? और अगर नीलिमा सच बोल रही थी तो क्या वह खत में सच में उनका जिक्र था? शशि कपूर की जिंदगी में एक और काला अध्याय था जो बहुत कम लोग जानते थे और वह था फिल्म इंडस्ट्री की गुप्त सत्ता का खेल। 1980 के दशक में बॉलीवुड सिर्फ फिल्में बनाने की जगह नहीं थी। यह एक ऐसा साम्राज्य था जहां कुछ ताकतवर लोग तय करते थे कि किसका करियर चलेगा और किसका खत्म होगा और शशि कपूर जो उस वक्त अपने करियर के शिखर पर थे इस खेल के शिकार बन गए। फिल्म इंडस्ट्री के पुराने सूत्रों ने बताया कि 1983 में एक गुप्त बैठक हुई थी। मुंबई के एक पांच सितारा होटल के बंद कमरे में। अफवाहों के मुताबिक इस बैठक में मौजूद थे तीन बड़े फिल्म प्रोड्यूसर। दो वितरक, एक मंत्री का करीबी सहयोगी और कहा जाता है कि एक अंडरवर का प्रतिनिधि भी था। कुछ लोगों का मानना है कि इस बैठक का एजेंडा था शशि कपूर को सबक सिखाना। क्यों? क्योंकि शशि ने एक बड़े प्रोड्यूसर की फिल्म से मना कर दिया था। उस प्रोड्यूसर ने शशि को धमकी दी थी। अगर तुमने मेरी फिल्म नहीं की तो मैं तुम्हारा करियर बर्बाद कर दूंगा। शशि ने जवाब दिया था, मैं डरने वाला नहीं हूं। मैं वह फिल्में करूंगा जो मुझे पसंद है। तुम्हारी मर्जी से नहीं।
ऐसी अफवाहें थी कि उस गुप्त बैठक में फैसला लिया गया कि शशि कपूर को इंडस्ट्री से बाहर किया जाएगा। कहा जाता है कि एक योजना बनाई गई। शशि को नई फिल्में नहीं मिलेंगी। उनकी चल रही फिल्मों को रोका जाएगा और मीडिया में उनके खिलाफ अफवाहें फैलाई जाएंगी। एक पुराने पत्रकार ने बताया मुझे उस वक्त एक फोन आया था एक अनजान नंबर से आवाज ने कहा शशि कपूर के बारे में नकारात्मक खबरें छापो उनकी निजी जिंदगी के बारे में लिखो उनकी छवि खराब करो और बदले में तुम्हें अच्छा पैसा मिलेगा मैंने मना कर दिया लेकिन कहा जाता है कि कुछ पत्रकारों ने पैसे लेकर शशि के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया अचानक अखबारों में शशि के बारे में अजीब खबरें छपने लगी शशि कपूर शराब के आदि हो गए हैं। शशि कपूर की शादी टूटने वाली है। शशि कपूर का करियर खत्म हो रहा है। शशि को समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो रहा है? उन्होंने अपने दोस्तों से पूछा मैंने क्या गलती की? मैंने किसी का बुरा नहीं किया। फिर मेरे साथ यह सब क्यों हो रहा है? दोस्तों ने कहा शशि तुमने उस प्रोड्यूसर को ना कहकर गलती कर दी। अब वह तुम्हें बर्बाद करने पर तुला है। शशि ने उस प्रोड्यूसर से मिलने की कोशिश की लेकिन प्रोड्यूसर ने मिलने से मना कर दिया। शशि ने उसे फोन किया लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
आखिरकार शशि ने एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने माफी मांगी और कहा कि वह उस फिल्म में काम करने के लिए तैयार हैं। लेकिन प्रोड्यूसर ने जवाब भेजा अब बहुत देर हो चुकी है शशि तुमने मेरी बेइज्जती की है। अब मैं तुम्हें माफ नहीं करूंगा। तुम्हारा करियर खत्म हो जाएगा और सच में शशि का करियर धीरे-धीरे खत्म होने लगा। नई फिल्में मिलनी बंद हो गई। जो प्रोड्यूसर पहले शशि को साइन करने के लिए लाइन में लगे रहते थे, वह अब उनसे बात तक नहीं करते थे। शशि को समझ आ गया कि उन्हें काली सूची में डाल दिया गया है। उन्होंने अपने भाई शम्मी कपूर से कहा, भाई मुझे इंडस्ट्री से निकाला जा रहा है। मैं क्या करूं? शम्मी ने कहा, शशि तुम्हें झुकना पड़ेगा। तुम्हें उन लोगों से माफी मांगनी पड़ेगी। वरना तुम्हारा करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन शशि ने झुकने से मना कर दिया। उन्होंने कहा मैं किसी के आगे नहीं झुकूंगा। मैं अपनी इज्जत से जिऊंगा।
अगर इंडस्ट्री मुझे नहीं चाहती तो मैं थिएटर में काम करूंगा। और शशि ने वैसा ही किया। उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप शुरू किया पृथ्वी थिएटर और वहां काम करने लगे। लेकिन अंदर से वह टूट चुके थे। उन्हें लगता था कि उन्होंने अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली है और इसी दौरान जेनिफर बीमार पड़ गई। करीबी सूत्रों ने बताया कि जेनिफर ने शशि से कहा था तुमने उस प्रोड्यूसर को ना क्यों कहा? तुम्हें पता था कि इसका नतीजा क्या होगा। शशि ने जवाब दिया जेनी मैं अपनी आत्मा नहीं बेच सकता। मैं वह फिल्में नहीं कर सकता जो मुझे पसंद नहीं है। जेनिफर ने कहा लेकिन अब हमारे बच्चों का क्या होगा? हमारे पास पैसे नहीं है। तुम्हारा करियर खत्म हो रहा है। शशि ने कहा मैं कुछ करूंगा जेनी। मैं तुम्हें और बच्चों को तकलीफ नहीं होने दूंगा। लेकिन शशि कुछ नहीं कर पाए। उनका करियर लगातार गिरता गया। पैसों की तंगी होने लगी और फिर जेनिफर की मौत हो गई। शशि को लगा कि उन्होंने सब कुछ खो दिया है। अपना करियर, अपनी पत्नी, अपनी खुशी। और शायद इसीलिए जेनिफर ने उस खत में शशि से कुछ ऐसा मांगा था जो उनके करियर से जुड़ा था। शायद जेनिफर ने कहा था शशि अपनी इज्जत छोड़ो और उन लोगों से माफी मांगो। अपना करियर बचाओ बच्चों के लिए। लेकिन शशि नहीं कर पाए। वो अपनी इज्जत नहीं छोड़ पाए। और इसी बात का उन्हें पछतावा था। लेकिन क्या सच में जेनिफर ने यही मांगा था या फिर उस खत में कुछ और लिखा था। कुछ ऐसा जो शशि के करियर से भी बड़ा था। कुछ ऐसा जो शशि की पूरी जिंदगी बदल सकता था। 2017 में शशि कपूर की मौत के बाद जब उनके बच्चों ने वह पीला लिफाफा खोला तो उन्हें अंदर तीन पन्नों का एक खत मिला। खत जेनिफर की कांपती हुई लिखावट में था। जिसमें हर शब्द दर्द से भरा हुआ था। खत की शुरुआत इस तरह थी।
मेरे सबसे प्यारे शशि जब तुम यह खत पढ़ रहेगे तब मैं इस दुनिया में नहीं रहूंगी। मैं जानती हूं कि मेरा वक्त आ गया है। डॉक्टर कहते हैं कि अब कुछ दिनों की बात है लेकिन मरने से पहले मुझे तुमसे कुछ कहना है। कुछ ऐसा जो मैं जिंदगी भर नहीं कह पाई। जेनिफर ने खत में लिखा था शशि मुझे सब पता है। मुझे पता है कि तुम नीलिमा से प्यार करते हो। मुझे पता है कि तुम उसके साथ वक्त बिताते हो। मुझे पता है कि तुम्हारी शादी मुझसे एक गलती थी। लेकिन मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि मैं तुमसे बहुत प्यार करती थी। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी। मैंने सोचा कि शायद एक दिन तुम मेरे पास लौट आओगे। लेकिन अब मुझे पता है कि वह दिन कभी नहीं आएगा। अगले पन्ने पर जेनिफर ने लिखा था, शशि मैं तुमसे नाराज नहीं हूं। मैं तुम्हें माफ करती हूं। लेकिन मरने से पहले मैं तुमसे एक आखिरी गुजारिश करना चाहती हूं। यह गुजारिश सिर्फ मेरे लिए नहीं है। यह हमारे बच्चों के लिए है। शशि मैं चाहती हूं कि तुम नीलिमा से शादी कर लो।
हां, तुमने सही पढ़ा। मैं चाहती हूं कि मेरे जाने के बाद तुम मुझसे शादी करो क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम उससे सच्चा प्यार करते हो और मैं नहीं चाहती कि तुम अकेले रहो। मैं नहीं चाहती कि तुम अपनी जिंदगी बर्बाद करो। जेनिफर ने लिखा था लेकिन शशि मेरी एक शर्त है। अगर तुम नीलिमा से शादी करते हो तो तुम्हें हमारे बच्चों को सच बताना होगा। तुम्हें उन्हें बताना होगा कि तुम मुझसे नहीं नीलिमा से प्यार करते थे। तुम्हें उन्हें बताना होगा कि हमारी शादी एक गलती थी। मैं नहीं चाहती कि तुम झूठ के साथ जियो। मैं चाहती हूं कि तुम सच के साथ जियो। भले ही वह सच कितना भी दर्दनाक क्यों ना हो क्योंकि मैं नहीं चाहती कि तुम अपनी पूरी जिंदगी एक झूठ के बोझ तले दबे रहो। मैं चाहती हूं कि तुम आजाद हो जाओ सच्चाई के साथ। खत के सबसे दर्दनाक शब्द आखिर में थे। शशि मुझे पता है कि यह गुजारिश तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल है।
मुझे पता है कि तुम बच्चों को सच नहीं बताना चाहोगे। लेकिन मैं तुमसे यही चाहती हूं क्योंकि मैं नहीं चाहती कि तुम अपनी पूरी जिंदगी एक झूठ के साथ जियो। मैं चाहती हूं कि तुम खुश रहो सच्चाई के साथ। कृपया शशि मेरी यह आखिरी इच्छा पूरी करो। मुझसे यह वादा करो। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। जेनफर जब शशि के बच्चों ने यह खत पढ़ा तो वह सब रो पड़े। उन्हें समझ आ गया कि उनके पिता इतने टूटे क्यों थे। उन्हें समझ आ गया कि शशि क्यों नीलिमा से शादी नहीं कर पाए। क्योंकि अगर शशि ने नीलिमा से शादी की होती तो उन्हें अपने बच्चों को सच बताना पड़ता कि वह उनकी मां से नहीं किसी और से प्यार करते थे। और शशि यह नहीं कर पाए। वह अपने बच्चों को यह सच नहीं बता पाए। वह अपने बच्चों को यह तकलीफ नहीं दे पाए। शशि के बेटे कुणाल ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा, जब मैंने मां का वह खत पढ़ा, तो मुझे अपने पिता पर गुस्सा आया। मुझे लगा कि उन्होंने मां को धोखा दिया। लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि पिता भी एक इंसान थे।
उन्होंने भी गलतियां की और उन्होंने अपनी गलतियों की कीमत चुकाई। अपनी पूरी जिंदगी उस बोझ को ढोकर मुझे अब पिता पर गुस्सा नहीं है। मुझे उन पर तरस आता है। काश वो मां की आखिरी इच्छा पूरी कर पाते। काश वो खुश रह पाते। शशि की बेटी संजना ने कहा, मां ने जो किया वह बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने अपने प्यार से बड़ा अपने पति की खुशी को रखा। उन्होंने पिता को माफ कर दिया और उन्हें खुश रहने की इजाजत दी। लेकिन पिता यह नहीं कर पाए। वह हमें सच नहीं बता पाए और इसी बात ने उन्हें तबाह कर दिया। मुझे लगता है कि अगर पिता ने हमें सच बता दिया होता तो शायद हम समझ जाते। शायद हम उन्हें माफ कर देते और शायद पिता खुश रह पाते। लेकिन शशि ने वह रास्ता नहीं चुना। उन्होंने अपने बच्चों को सच नहीं बताया। उन्होंने नीलिमा से शादी नहीं की। उन्होंने जेनिफर की आखिरी इच्छा पूरी नहीं की और इसी बात का उन्हें 33 साल तक पछतावा रहा। वह हर रात उस पीले लिफाफे को देखते और रोते रहे। वह हर रात जेनिफर से माफी मांगते रहे। और आखिरकार वह उसी पछतावे के साथ मर गए। क्या शशि ने सही किया?
क्या उन्हें अपने बच्चों को सच बताना चाहिए था? क्या उन्हें नीलिमा से शादी करनी चाहिए थी? या फिर उन्होंने जो किया वह सही था? अपने बच्चों को तकलीफ से बचाना। यह रहस्य आज भी बना हुआ है। कोई नहीं जानता कि सही क्या था। लेकिन एक बात तय है शशि कपूर ने अपनी खुशी को अपने बच्चों की खुशी के लिए कुर्बान कर दिया। और शायद यही एक पिता का सबसे बड़ा प्यार है। जेनिफर के उस खत को पढ़ने के बाद शशि के बच्चों ने एक फैसला किया। वह नीलिमा देश पांडे से मिलेंगे। उन्हें जानना था कि क्या सच में उनके पिता नीलिमा से प्यार करते थे? क्या सच में जेनिफर की आखिरी इच्छा थी कि शशि नीलिमा से शादी करें? शशि की मौत के कुछ महीनों बाद कुणाल और संजना कपूर मुंबई के एक छोटे से फ्लैट में पहुंचे। जहां नीलिमा अकेली रहती थी। जब नीलिमा ने दरवाजा खोला तो उन्हें देखकर चौंक गई। उन्होंने पूछा आप लोग यहां कुंडाल ने कहा हमें आपसे बात करनी है। हमें सच जानना है। नीलिमा ने उन्हें अंदर बुलाया।
तीनों बैठ गए। संजना ने अपने बैग से वह पीला लिफाफा निकाला और नीलिमा के सामने रख दिया। नीलिमा ने लिफाफा देखा और उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा यह वह खत है ना। जेनिफर जी का आखिरी खत। कुणाल ने कहा हां और इस खत में मां ने पिता से कहा था कि वह आपसे शादी करें। क्या यह सच है? क्या सच में पिता आपसे प्यार करते थे? नीलिमा चुप रही। फिर धीरे से बोली, हां, शशि जी मुझसे प्यार करते थे। लेकिन वह आप लोगों से भी बहुत प्यार करते थे। और इसीलिए वह कभी फैसला नहीं कर पाए। संजना ने पूछा तो फिर आपने पिता से शादी क्यों नहीं की? जेनिफर मां ने तो इजाजत दे दी थी। नीलिमा ने जवाब दिया क्योंकि शशि जी नहीं चाहते थे। जेनिफर जी के जाने के बाद मैं एक बार उनसे मिली थी। मैंने उनसे पूछा था अब हम शादी कर सकते हैं। शशि जी ने कहा था नहीं नीलिमा मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। क्योंकि अगर मैंने तुमसे शादी की तो मुझे अपने बच्चों को सच बताना पड़ेगा और मैं यह नहीं कर सकता। मैं अपने बच्चों को यह तकलीफ नहीं दे सकता कि उनके पिता ने उनकी मां को धोखा दिया था। नीलिमा ने बताया मैंने शशि जी से कहा था कि हम बच्चों को सच नहीं बताएंगे। हम चुपचाप शादी कर लेंगे। लेकिन शशि जी ने मना कर दिया।
उन्होंने कहा नहीं नीलिमा। जेनिफर ने मुझसे वादा मांगा था कि अगर मैं तुमसे शादी करूंगा तो बच्चों को सच बताऊंगा और मैं जेनिफर से किया हुआ वादा नहीं तोड़ सकता लेकिन मैं बच्चों को सच भी नहीं बता सकता इसलिए मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता मुझे माफ कर दो नीलिमा मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर रहा हूं नीलिमा ने आंसू पोंछे और कहा उस दिन के बाद मैंने शशि जी को कभी नहीं देखा मैं उनकी उनकी जिंदगी से हमेशा के लिए चली गई। लेकिन मैं उन्हें कभी भूल नहीं पाई। और जब मुझे उनकी मौत की खबर मिली तो मुझे लगा कि मेरी दुनिया खत्म हो गई। कुणाल और संजना ने एक दूसरे की तरफ देखा। उन्हें समझ आ गया कि उनके पिता ने कितनी बड़ी कुर्बानी दी थी। उन्होंने अपनी खुशी को अपने बच्चों की खुशी के लिए छोड़ दिया था। संजना ने नीलिमा से कहा आपको पता है अगर पिता ने हमें सच बता दिया होता तो शायद हम समझ जाते शायद हम उन्हें माफ कर देते और शायद पिता खुश रह पाते। नीलिमा ने कहा लेकिन शशि जी को यकीन नहीं था कि आप लोग समझेंगे। उन्हें डर था कि आप लोग उनसे नफरत करने लगेंगे और वह यह जोखिम नहीं ले सकते थे। कुणाल ने कहा काश पिता को पता होता कि हम उन्हें कितना प्यार करते थे। काश उन्हें पता होता कि हम उन्हें हर हाल में माफ कर देते। नीलिमा से मिलने के बाद शशि के बच्चों ने एक और फैसला किया।
वह उन पांच लोगों से मिलेंगे जो शशि के सबसे करीबी थे। वह जानना चाहते थे कि क्या उन लोगों को भी जेनिफर के खत के बारे में पता था। सबसे पहले वह हरिबाबू से मिले जो शशि के सबसे पुराने सहयोगी थे। हरिबाबू ने बताया हां मुझे पता था कि शशि साहब के पास जेनिफर जी का एक खत है। एक बार उन्होंने मुझे दिखाया भी था लेकिन उन्होंने मुझे पूरा खत नहीं पढ़ने दिया। उन्होंने बस इतना कहा था कि जेनिफर जी ने उनसे एक ऐसा वादा मांगा है जो वह पूरा नहीं कर सकते। मैंने पूछा था क्या वादा? लेकिन शशि साहब ने नहीं बताया। उन्होंने बस इतना कहा यह मेरे और जेनिफर के बीच की बात है। फिर वह डॉक्टर खन्ना से मिले। डॉक्टर ने बताया शशि साहब को गहरा डिप्रेशन था। वह अंदर से टूट चुके थे। मैंने उन्हें कई बार समझाया कि वह किसी मनोचिकित्सक से मिले। लेकिन वह मानते नहीं थे। एक बार मैंने उनसे पूछा था साहब आप इतने परेशान क्यों रहते हैं? क्या कोई ऐसी बात है जो आपको सता रही है? शशि साहब ने कहा था डॉक्टर मैंने अपनी पत्नी से एक वादा किया था जो मैं पूरा नहीं कर पाया और अब यह वादा मेरी जान ले रहा है। मैंने पूछा कौन सा वादा? लेकिन उन्होंने नहीं बताया। शम्मी कपूर शशि के भाई ने भी बताया कि उन्हें जेनिफर के खत के बारे में पता था। शम्मी ने कहा, शशि ने एक बार मुझे बताया था कि जेनिफर ने उनसे कहा था कि वह नीलिमा से शादी करें। लेकिन शर्त यह थी कि उन्हें बच्चों को सच बताना होगा। शशि नहीं कर पाए। मैंने उनसे कहा था भाई तुम बच्चों को सच बता दो। वो समझ जाएंगे।
लेकिन शशि ने कहा नहीं भाई मैं अपने बच्चों को यह तकलीफ नहीं दे सकता। मैं उन्हें यह नहीं बता सकता कि मैंने उनकी मां को धोखा दिया था। मैंने कहा तो फिर तुम क्या करोगे? शशि ने कहा मैं इस बोझ को ढोता रहूंगा जब तक मर नहीं जाता। रीमा जैन शशि की बहन ने भी बताया कि शशि बहुत परेशान रहते थे। रीमा ने कहा मैंने अपने भाई को कभी इतना टूटा हुआ नहीं देखा था। वो हमेशा मुस्कुराते रहते थे। लेकिन उनकी आंखों में दर्द साफ दिखता था। एक बार मैंने उनसे पूछा था भाई तुम इतने उदास क्यों हो? शशि ने कहा था रीमा कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। बस उनके साथ जीना पड़ता है। मैं भी अपनी गलतियों के साथ जी रहा हूं। शेखर कपूर शशि के सबसे पुराने दोस्त ने बताया कि शशि ने एक बार उनसे कहा था कि वह मरने के बाद उस पीले लिफाफे को जला दें। शेखर ने कहा मैंने पूछा था। क्यों? शशि ने कहा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे यह खत पढ़ें। मैं नहीं चाहता कि उन्हें पता चले कि मैं कितना कमजोर था।
लेकिन शशि की मौत के बाद जब बच्चों ने खत पहले ही पढ़ लिया तो मुझे बहुत बुरा लगा। मुझे लगा कि मैं शशि का वादा नहीं निभा पाया। इन सब लोगों से मिलने के बाद शशि के बच्चों को एक बात समझ आ गई। उनके पिता ने अपनी पूरी जिंदगी एक झूठ के साथ जी। वह अपने बच्चों को सच नहीं बता पाए और इसी बात ने उन्हें तबाह कर दिया। लेकिन सवाल यह था क्या शशि ने सही किया? क्या उन्हें अपने बच्चों को सच बताना चाहिए था? शशि कपूर की मौत के कुछ समय बाद एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई। एक पुराने होटल के मैनेजर ने दावा किया कि 1983 में जेनिफर की बीमारी के ठीक पहले शशि कपूर एक रहस्यमय आदमी से मिले थे। यह मुलाकात एक पांच सितारा होटल के बंद कमरे में हुई थी। मैनेजर ने बताया, “मुझे याद है कि उस दिन शशि साहब बहुत परेशान लग रहे थे। वह होटल में अकेले आए थे। उन्होंने एक कमरा बुक किया और कहा कि कोई उन्हें डिस्टर्ब ना करें। करीब 1 घंटे बाद एक आदमी आया। जिसका चेहरा मुझे याद नहीं है। वह सीधे शशि साहब के कमरे में गया। दोनों करीब 2 घंटे तक कमरे में रहे। फिर वह आदमी बाहर निकला और चला गया। जब मैं कमरे में सफाई के लिए गया तो देखा कि शशि साहब फर्श पर बैठे हुए हैं और रो रहे हैं। मैनेजर ने यह भी बताया कि उस कमरे की मेज पर एक कागज पड़ा था जिस पर कुछ लिखा हुआ था।
मैनेजर ने वह कागज उठाया और पढ़ा। उस पर लिखा था अगर तुमने हमारी बात नहीं मानी तो तुम्हारी पत्नी और बच्चों को खतरा हो सकता है। यह धमकी थी। मैनेजर ने कहा, मैं डर गया। मैंने वह कागज शशि साहब को दिया। उन्होंने कागज लिया और फाड़ दिया। फिर उन्होंने मुझसे कहा, तुमने यह कागज नहीं देखा। समझे? मैंने हां में सिर हिलाया। उस दिन के बाद मैंने कभी इस बारे में किसी से बात नहीं की। लेकिन अब जब शशि साहब नहीं रहे तो मैंने सोचा कि सच बताना चाहिए। यह खबर सुनकर शशि के बच्चे हैरान रह गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि यह रहस्यमय आदमी कौन था और उसने शशि को क्यों धमकी दी थी। कुणाल ने उस मैनेजर से पूछा, क्या आपको उस आदमी का चेहरा याद है?
मैनेजर ने कहा, नहीं साहब, बहुत साल हो गए हैं। लेकिन मुझे इतना याद है कि वह आदमी बहुत ताकतवर लग रहा था। उसके बोलने के तरीके से लगता था कि वह किसी बड़े आदमी का प्रतिनिधि है। शशि के बच्चों ने इस मामले की जांच शुरू की। उन्होंने पुराने पत्रकारों से बात की, फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से पूछा और धीरे-धीरे एक तस्वीर उभरने लगी। पता चला कि 1983 में शशि को फिल्म इंडस्ट्री की गुप्त सत्ता ने दी थी। उन्हें कहा गया था कि अगर उन्होंने एक खास प्रोड्यूसर की फिल्म नहीं की तो उनके परिवार को खतरा हो सकता है। शशि ने मना कर दिया था और इसके बाद उनका करियर धीरे-धीरे खत्म होने लगा था। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जेनिफर को इस सब के बारे में पता था। एक पुराने पत्रकार ने बताया कि जेनिफर ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था शशि बहुत ईमानदार इंसान हैं। वह अपनी आत्मा नहीं भेजते और इसीलिए फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग उनसे नाराज हैं। लेकिन मुझे अपने पति पर गर्व है। वह जो सही समझते हैं वही करते हैं। भले ही इसकी कीमत उन्हें अपना करियर खोकर चुकानी पड़े। अब शशि के बच्चों को समझ आया कि उनके पिता ने कितनी बड़ी कुर्बानी दी थी। उन्होंने अपना करियर खोया, अपनी खुशी खोई लेकिन अपनी ईमानदारी नहीं खोई। और शायद जेनिफर ने अपने खत में यही कहा था। शशि तुमने अपनी ईमानदारी के लिए बहुत कुछ खोया। अब अपनी खुशी के लिए कुछ पाओ। नीलिमा से शादी करो। खुश रहो। लेकिन शशि नहीं कर पाए। वह अपने बच्चों को सच नहीं बता पाए। और इसी बात ने उन्हें तबाह कर दिया। संजना ने कहा, अब मुझे समझ आया कि पिता इतने टूटे क्यों थे। उन्होंने अपना करियर खोया, अपनी पत्नी खोई, अपना प्यार खोया। और सबसे बड़ी बात उन्होंने अपनी पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी नहीं की। यह बोझ उन्हें 33 साल तक ढोना पड़ा। काश हम पहले जान पाते। काश हम पिता की मदद कर पाते। शशि कपूर की मौत के कुछ समय बाद नीलिमा देश पांडे की भी मौत हो गई। वह अकेली थी, बीमार थी और किसी ने उनकी देखभाल नहीं की। जब शशि के बच्चों को इसकी खबर मिली तो वह बहुत दुखी हुए। संजना ने कहा, काश हम नीलिमा जी से पहले मिल पाते।
काश हम उनकी मदद कर पाते। वह भी तो पिता की तरह अकेली थी। वह भी तो प्यार की शिकार थी। नीलिमा की मौत के बाद उनके फ्लैट की सफाई के दौरान एक डायरी मिली। उस डायरी में नीलिमा ने अपनी जिंदगी की कहानी लिखी थी। उन्होंने लिखा था मैं शशि जी से बहुत प्यार करती थी। लेकिन मैं जानती थी कि वह कभी मुझसे शादी नहीं करेंगे क्योंकि वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करते थे। और वह अपने बच्चों को तकलीफ नहीं देना चाहते थे। मैं उन्हें दोष नहीं देती। वो एक अच्छे पिता थे। लेकिन मैं अकेली रह गई। मैंने कभी शादी नहीं की क्योंकि मैं शशि जी को कभी भूल नहीं पाई। मैं आज भी उनसे प्यार करती हूं और मैं जानती हूं कि जब मैं मरूंगी तो शशि जी मुझे वहां मिलेंगे और तब हम हमेशा के लिए साथ रहेंगे। नीलिमा की डायरी पढ़कर शशि के बच्चे रो पड़े। उन्हें एहसास हुआ कि उनके पिता और नीलिमा दोनों ने अपनी जिंदगी प्यार के लिए कुर्बान कर दी। दोनों अकेले रहे। दोनों दुखी रहे और दोनों एक दूसरे को याद करते हुए मर गए। कुणाल ने कहा, यह कितनी दुखद कहानी है। दो लोग जो एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन कभी साथ नहीं रह पाए क्योंकि समाज ने, परिवार ने और खुद उनकी अपनी सोच ने उन्हें अलग रखा।
शशि के बच्चों ने फैसला किया कि वह नीलिमा का अंतिम संस्कार करेंगे। उन्होंने नीलिमा को शशि के बगल में दफनाया। उन्होंने कहा अगर पिता और नीलिमा जी जिंदगी में साथ नहीं रह पाए तो कम से कम मौत के बाद तो साथ रह। यह हमारी तरफ से उन दोनों को एक छोटा सा तोहफा है। नीलिमा के अंतिम संस्कार के बाद शशि के बच्चों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने पूरी दुनिया को बताया कि उनके पिता और नीलिमा की क्या कहानी थी। उन्होंने जेनिफर के खत के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा हमारी मां एक महान इंसान थी। उन्होंने अपने पति को माफ कर दिया और उन्हें खुश रहने की इजाजत दी।
लेकिन हमारे पिता अपने बच्चों को सच नहीं बता पाए और इसी बात ने उन्हें तबाह कर दिया। हम चाहते हैं कि दुनिया जाने कि प्यार कितना जटिल होता है और कभी-कभी सही फैसला लेना बहुत मुश्किल होता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे देश में बहस शुरू हो गई। कुछ लोग कहते थे कि शशि ने सही किया। उन्होंने अपने बच्चों को तकलीफ से बचाया। कुछ लोग कहते थे कि शशि ने गलत किया। उन्हें सच बताना चाहिए था। कुछ लोग कहते थे कि जेनिफर ने गलत किया। उन्हें शशि से ऐसा वादा नहीं मांगना चाहिए था। लेकिन सबसे ज्यादा लोग यही कहते थे। यह एक दुखद प्रेम कहानी है। तीन लोग शशि, जेनिफर और नीलिमा तीनों ने प्यार के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी। आज शशि कपूर की कब्र पर हर साल उनके जन्मदिन पर फूल रखे जाते हैं। और उनके बगल में नीलिमा की कब्र पर भी फूल रखे जाते हैं। दोनों की कब्रों पर एक ही संदेश लिखा है। प्यार कभी नहीं मरता। वह हमेशा जिंदा रहता है। दिलों में, यादों में और कहानियों में। शशि के बच्चों ने अपने पिता को माफ कर दिया है। उन्होंने कहा, हम समझते हैं कि पिता ने जो किया वह उन्हें सही लगा। वह हमें तकलीफ नहीं देना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने अपनी खुशी कुर्बान कर दी। हम उन पर गुस्सा नहीं हैं। हम उनसे प्यार करते हैं और हम हमेशा उन्हें याद रखेंगे। एक