बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ ऐसे सुपरस्टार्स हैं जिनके स्ट्रगल्स की कहानियां बहुत इंस्पायर करती है। इसमें मिथुन दा के स्ट्रगल की कहानी शामिल है। इसमें गोविंदा के स्ट्रगल की कहानी शामिल है। लेकिन अब एक्टर रघुवीर यादव की स्ट्रगल की कहानी सुनकर सभी लोगों का दिल भर आया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो उन दिनों को मैं अपने स्ट्रगल के दिन नहीं मानता हूं। वो मैं अपने सीखने के दिन मानता हूं।
लेकिन उनका कहना था कि जब गांव छोड़ के वो बंबई शहर आए थे और यहां पर आकर एक थिएटर ने उन्हें हायर किया था। मदन लाल कपूर करके एक थिएटर ओनर थे और उन्हीं के थिएटर को इन्होंने जॉइ किया था। ₹5 उन्हें दिन का मिलता था। इस ₹2.5 से वो आटा लाते थे और टमाटर लाते थे। टमाटर की चटनी बनती थी, आटे की रोटियां बनती थी और वही वह खाते थे।
लेकिन ₹2.5 भी इतनी आसानी से उन्हें नहीं मिलता था। कई बार पैसे कम मिलते थे। कई बार पैसे चुरा लिए जाते थे और कई बार तो खाना चुरा लिया जाता था। लेकिन मैं उन दिनों को अपने स्ट्रगल के दिन नहीं मानता हूं। मैं उन दिनों को अपने फाउंडेशन के इयर्स मानता हूं। क्योंकि यही वो टाइम था जब मैंने अपने आप को स्ट्रांग बनाना शुरू किया। इस टाइम पर मैंने अपना दिल और दिमाग उर्दू में लगाया, एक्टिंग में लगाया, म्यूजिक में लगाया और अपनी आर्ट में सुधारता रहा।
रघुवीर यादव ने यह भी कहा कि जब वह बंबई शहर के लिए निकले थे तो बंबई पहुंचकर उन्होंने अपने पिताजी को एक चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि मैं कभी ऐसा काम नहीं करूंगा कि आप लोगों को शर्म आए। लेकिन ऐसा कुछ हुआ कि 6 महीने बाद ही उन्हें अपने गांव लौटना पड़ा और तब रघुवीर यादव को सबसे बड़ा शौक तब लगा जब परिवार वालों ने रिएक्ट किया और कहा कि तुम तो यहां आ गए। हमें तो लगा हम तुम्हें डायरेक्ट सिनेमा पर देखेंगे। रघुवीर यादव यह सुनकर वहां टिक नहीं पाए और उन्होंने उसी रात अपना घर छोड़ दिया और फिर मुंबई लौट आए और उसके बाद अगले 20 सालों तक वो अपने गांव नहीं गए। अपने काम पर अपने हुनर पर उन्होंने मेहनत करनी शुरू की।
नो डाउट रघुवीर यादव आज बहुत ही शानदार अभिनेता हैं। जो भी किरदार उन्हें दिया जाता है उसे वह बहुत नेचुरल तरीके से पर्दे पर उतारते हैं। फिर चाहे पंचायत हो या फिर कोई और फिल्म ही क्यों ना हो। रघुवीर यादव ने हाल ही में इसी वजह से कहा कि मैंने अपने आप पर इतना काम किया है और मैंने इतना खूबसूरत काम किया है। तो आज अगर कोई डायरेक्टर मुझे अपने प्रोजेक्ट में लेना चाहता है। कास्टिंग वाला मुझे अपने प्रोजेक्ट में लेना चाहता है तो मैं उसे ऑडिशन नहीं देता हूं और ना ही मैं ऑडिशन दूंगा। अगर आपको मेरा काम पसंद है तो आप मेरा पिछला काम देखो। वो काम देखकर मुझे अगला काम दो। लेकिन मैं ऑडिशंस तो नहीं देता हूं। यह कॉन्फिडेंस मुफसी के दौर में बिताए हुए भूखे प्यासे दिनों का ही