एक संजीवनी की तलाश वैज्ञानिक वर्षों से कर रहे हैं। यह संजीवनी एक दवा है। ऐसी दवा जो बुढ़ापे को रोक सकती है। ऐसी दवा जो मनुष्य को सदैव युवा बनाए रख सकती है। यह विश्लेषण [संगीत] उन लोगों के लिए है जो हमेशा जवान दिखना चाहते हैं। यूनान के मशहूर नाटककार सोफ्लेक्स ने कहा है कि जवान रहने की इच्छा हर इंसान के भीतर की सबसे गहरी और शाश्वत लालसा है। [संगीत] इंसान की इसी शाश्वत लालसा को पूरा करने के लिए वैज्ञानिक दशकों से प्रयोगशाला में टेस्ट कर रहे हैं और आज आपके लिए पूरी मानव प्रजाति के लिए शुभ समाचार यह है कि बुढ़ापा रोकने की दवा का इंसान पर पहला ट्रायल शुरू हो गया है। पहली बार उम्र के असर को उलटने वाला इंजेक्शन इंसान को लगाया गया है। अमेरिका में बोस्टन के बायोटेक स्टार्टअप लाइफ बायोससेस ने पहले मरीज को सेलुलर रीोग्रामिंग का इंजेक्शन दिया है। सेल्यूलर रिप्रोग्रामिंग के तहत उम्र के असर से नष्ट हो रही कोशिका को फिर से युवा बनाया जाता है।
सरल भाषा में कहें यह कोशिकाओं का आईययू रिसेट बटन दबाना है ताकि वह फिर से युवा और स्वस्थ कोशिका की तरह काम करने लगे। ऐसा ही सेल्यूलर रीोग्रामिंग वाला इंजेक्शन ग्लूकोमा यानी काला मोतिया से पीड़ित मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया है। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने के कारण कमजोर हो जा रही कोशिकाओं को फिर से युवा और स्वस्थ बनाना है। वैज्ञानिक अगले 6 महीने तक इस थेरेपी के असर और साइड इफेक्ट्स पर नजर रखेंगे। महात्मा बुद्ध ने कहा है यह शरीर तो जीर्ण क्षीण होगा ही यह प्रकृति का नियम है। प्रकृति के इसी अटल सत्य को प्रयोगशाला में चुनौती दी जा रही है। उसे बदलने की कोशिश हो रही है। मित्रों यहां एक फर्क भी आप समझिए। यह मृत्यु पर विजय वाली उपलब्धि नहीं है। यह जवान होकर लंबा जीवन जीने वाली कामयाबी होगी।
अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो 90 साल की उम्र में भी एक व्यक्ति के शारीरिक अंगों की कार्यक्षमता और ऊर्जा 30 साल के युवा जैसी हो सकती है। इसीलिए इस प्रयोग को मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज कहा जा रहा है। ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसे समझने के लिए हमें यह समझना होगा कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो हमारे आपके लिए क्या बदल सकता है। बहुत गौर से सुनिएगा और समझिएगा। पहले इसके फायदे को समझते हैं। प्रयोग के सफल होने पर बुढ़ापा बीमारी मुक्त होगा। यानी अल्जाइमर, [संगीत] गठिया, कमजोर नजर और दिल की बीमारी जैसे उम्र से जुड़े रोग जड़ से खत्म हो जाएंगे। मनुष्य लंबे समय तक युवा और सक्रिय रहेगा। हमारा हेल्थ स्पैन बढ़ जाएगा। उम्र बढ़ने पर भी शारीरिक और मानसिक क्षमता युवा उम्र जैसी ही होगी। बुढ़ापा रोकने वाले जिस इंजेक्शन का पहला डोज इंसान को दिया गया है, उसका पहले चूहों और बंदरों पर सफल टेस्ट हो चुका है। चूहे और बंदरों की आंख की रोशनी सफलतापूक वापस लौट चुकी है। अब आपके मन में यह जिज्ञासा होगी कि रिवर्स एजिंग वाली यह थेरेपी कैसे काम करेगी। [संगीत] कैसे यह मनुष्य के अंदर बुढ़ापे को रोकेगी? मित्रों, यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे हम आपको आसान शब्दों में बताने वाले हैं। आप चाहें तो इसे नोट भी कर सकते [संगीत] हैं। यह एंटीबायोटिक दवा शरीर के अंदर मौजूद तीन खास तरह की जीन को ऑन स्विच करेगी। यानी उन्हें एक्टिवेट करेगी। एक्टिव होने के बाद यह जीन उम्र के असर से बूढ़ी और क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं को रीप्रोग्राम करना शुरू करेंगे। सरल शब्दों में समझिए।
यह बूढ़ी हो चुकी कोशिकाओं को युवा बनाना शुरू करेंगे। री प्रोग्राम होने के बाद कोशिकाएं फिर युवाजो हो जाएंगी और हमें बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा। ऐसी दवाओं के परीक्षण की एक तय प्रक्रिया होती है। चूहों और बंदर पर सफलता से टेस्ट के बाद इंसान की आंख में इसका परीक्षण इसलिए किया गया क्योंकि आंख शरीर के बाकी हिस्सों से अलग और सुरक्षित होती है। इससे साइड इफेक्ट्स पर नजर रखना भी आसान होता है। क्योंकि अगर कोशिकाएं री प्रोग्रामिंग के दौरान बहुत अधिक रिसेट हो गई तो वह स्टेम सेल बनकर अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगेंगी। इससे शरीर के अंदर घातक ट्यूमर बन सकता है। कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे प्रयोग बहुत खर्चीले होते हैं। अमेरिका में बुढ़ापा रोकने वाले जिस थेरेपी की टेस्टिंग हो रही है उसमें Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपन एआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। समझिए अगर यह प्रयोग कामयाब भी रहा तो शुरुआती कई सालों तक यह तकनीक करोड़ों की होगी। यानी शुरुआत में इसे सिर्फ दुनिया के अरबपति ही खरीद पाएंगे। रोम के दार्शनिक सिसेरों ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति इतना बूढ़ा नहीं होता कि वो एक और वर्ष जीने की आशा ना कर सके। कुछ समय और जीने और नौजवान दिखने की इसी लालसा ने रिवर्स एजिंग को बड़ी इंडस्ट्री बना दिया है। यह इंडस्ट्री एक दो या कुछ 100 करोड़ की नहीं है। मित्रों, जवान रहने की लालसा कितनी बड़ी इंडस्ट्री है, अब आप इसे भी समझिए। [संगीत] दुनिया में एंटी एजिंग क्रीम, सीरम, सप्लीमेंट्स और डिवाइस का मौजूदा मार्केट करीब 83 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹8 लाख करोड़ का है। यह बाजार साल 2035 तक बढ़कर 150 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹15 लाख करोड़ का हो जाएगा।
मित्रों, अभी यह बाजार सिर्फ चेहरे को नौजवान दिखाने वाला कारोबार है। इसे तकनीकी भाषा में मेडिकल एस्थेटिक मार्केट कहते हैं। इस कारोबार में बोटोक्स, डर्मल फिलर्स, लेजर ट्रीटमेंट और प्लास्टिक सर्जरी शामिल है। लोग सिर्फ चेहरे को जवान दिखाने के लिए इंजेक्शन ले रहे हैं। 2026 में यह बाजार 31 बिलियन यानी करीब $3 लाख करोड़ का है। यह सालाना 13% की रफ्तार से बढ़ रहा है। साल 2034 तक यह ₹90 बिलियन डॉलर यानी ₹9 लाख करोड़ के पार हो जाएगा। यह कितनी बड़ी इंडस्ट्री है? इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अज़र-बजान जैसे देश की जीडीपी 150 बिलियन से कम है। 2025 में आईबीएम जैसी कंपनी ने 5 साल में एi और दूसरी रिसर्च पर 150 बिलियन खर्च करने का ऐलान किया था। जनरेटिव एआई के पूरे सॉफ्टवेयर मार्केट का अनुमानित प्राइस $50 बिलियन के आसपास है। एंटी एजिंग का कारोबार फिलहाल इतना बड़ा है। अगर इंजेक्शन वाला प्रयोग सफल रहा तो सोचिए यह कितना बड़ा [संगीत] कारोबार बन जाएगा।