आज हम एक ऐसे एक्टर की बात करेंगे जो हर किसी से कहता है। जो मर्द होता है उसे दर्द नहीं होता मेम साहब। एक ऐसा आदमी जो अपनी ही बहू के साथ इस तरह के गाने गाता है। एक ऐसा एक्टर जो एक्टर कम और किराना स्टोर का दुकानदार ज्यादा लगता है। तेल, शैंपू, चड्डी, बनियान से लेकर घर बनाने का मटेरियल तक वो अकेले बेचता है। जाना तो काहे? काहे की अंदर की बात है। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के सबसे बड़े महानायक और बिग बी के नाम से जाने जाने वाले एक्टर अमिताभ बच्चन की। ये दुनिया बहुत बिगड़ी हुई है।
कैसे बॉलीवुड में कदम रखते ही उन्होंने लगभग 12 फिल्में फ्लॉप देकर कुछ ही सालों में अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया था। कैसे अपनी सबसे ज्यादा वफादार और सीधी साधी पत्नी को धोखा देकर उन्होंने कई हीरोइनों के साथ अफेयर चलाए।
मैंने तुम्हें यहां किसी और काम के लिए बुलाया था। अगर जिस्म दिखाने के लिए बुलवाया तो वो हमने देख लिया। क्या सच में आज भी रेखा अमिताभ बच्चन के नाम का सिंदूर लगाती है। वो भी शादीशुदा आदमी के लिए। मुझसे पूछिए ना। हां। ऐसा क्या हुआ कि बॉलीवुड का एंग्री यंग मैन और टॉप का एक्टर बनने के बाद अचानक अमिताभ बच्चन 90 करोड़ के कर्जे में चले गए। वो कौन लोग थे जिनकी जिंदगी अमिताभ बच्चन ने बर्बाद कर दी। क्यों अमिताभ बच्चन पैसों के लिए इतने पागल और लालची हो गए कि वो पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार होने लगे। नवरत्न आजमाए नवरत्न आजमाए। क्यों वो एक ना तो अच्छे पिता बन पाए और ना ही अच्छे पति और क्या सच में अमिताभ बच्चन सिर्फ पर्दे के सुपरस्टार हैं जानेंगे और भी बहुत कुछ तो चलिए शुरू करते हैं। के फान बनारस वाला खुल जाए बंद अकल का। अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 में इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम था हरिवंश राय बच्चन और मां का नाम तेजी बच्चन।
बच्चन नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी रही। बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि बच्चन इनका सरनेम नहीं है। हरिवंश राय का असली नाम था हरिवंश राय श्रीवास्तव। और अमिताभ का नाम था अमिताभ श्रीवास्तव। लेकिन हरिवंश राय कास्ट सिस्टम के खिलाफ थे। ऊपर से वह कवि थे तो दुनिया से हटकर कुछ अलग करने के चक्कर में उन्होंने अपना सरनेम ऐसा रखा जो किसी से ज्यादा ना मिले। और बच्चन सर नेम धारण कर लिया।
इस तरह श्रीवास्तव परिवार बन गया द बच्चन फैमिली। अच्छा। उनके पिता भारत के एक जाने-माने कवि थे। यह वो दौर था जब देश की आजादी की लड़ाई चल रही थी और पूरा देश जिस क्रांतिकारी का दीवाना था वह थे भगत सिंह और उनका नारा था इंकलाब। जिंदाबाद। हरिवंश राय बच्चन खुद तो क्रांतिकारी बनकर आजादी में भाग नहीं ले पाए इसलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम इंकलाब रख दिया। इस तरह अमिताभ बच्चन के बचपन का नाम था इंकलाब। लेकिन कुछ समय बाद ही आजादी मिल गई और इंकलाब के नारे बंद हो गए तो उनके पिता ने इंकलाब का नाम बदलकर अमिट आभा कर दिया। जिसका मतलब था कभी ना मिटने वाला उजाला। लेकिन स्कूल में एडमिशन के समय कविताएं तो नहीं चल सकती थी। तो उस समय के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत ने इन्हें नाम दिया अमिताभ और इस तरह से यह बने अमिताभ बच्चन।
उन्होंने नैनीताल के शेरवुड स्कूल से अपनी पढ़ाई की और दिल्ली से अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। अमिताभ बच्चन बचपन से एक्टर नहीं बनना चाहते थे बल्कि वह भी लगभग आधे से ज्यादा निठल्ले लड़कों की तरह सोचते थे कि कुछ ना कुछ तो हो ही जाएगा। अरे दीवानों मुझे पहचानो जरा पहचानो। पिता कवि थे इसलिए बचपन से ही उनके संबंध बड़े-बड़े लोगों के साथ थे। राजीव गांधी और संजय गांधी उनके दोस्त हुआ करते थे और वह कह सकते थे कि प्रधानमंत्री मेरा दोस्त है। खाओ मां कसम। अपनी जिंदगी का मकसद ढूंढते हुए अमिताभ बच्चन ने सबसे पहले ऑल इंडिया रेडियो में न्यूज़ एंकर के लिए ऑडिशन दिया था। लेकिन वहां वो रिजेक्ट हो गए। इसके बाद बिजनेसमैन एग्जीक्यूटिव की नौकरी के लिए वो कोलकाता पहुंच गए और वहीं उन्होंने थिएटर ज्वॉइ कर लिया और यहीं उन्होंने पहली बार 1969 में आई एक फिल्म भुवन सोम में अपनी आवाज दी थी यानी कि इसे नरेट किया था जिसने नेशनल अवार्ड जीता यानी कि अमिताभ बच्चन की आवाज को पहली बार पूरे देश ने सुना और यह आवाज इतनी नेशनल हो गई कि इसने कोरोना काल में भी हमारा पीछा नहीं छोड़ा। नमस्कार। हमारा देश और पूरा विश्व आज कोविड-19 की चुनौती का सामना कर रहा है। पैसे कमाने का भूत अमिताभ बच्चन पर शुरू से सवार था। पैसों के लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते थे। जिसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि जब उन्हें मुंबई में काम नहीं मिल रहा था और वह नए थे। तो सिर्फ ₹500 के लिए वह शशि कपूर की एक फिल्म में भीड़ का हिस्सा बनने के लिए चली गई थी। लेकिन जब शशि कपूर ने यह सीन देखा तो उन्होंने अमिताभ बच्चन को डांटा कि अगर यह करोगे तो यही करते रह जाओगे। अगर हीरो बनना है तो यह टूच्चे मुच्चे रोल ना करो और इसके बाद अमिताभ बच्चन सीधे बड़े रोल ढूंढने लगे। अमिताभ बच्चन के लिए फिल्मों का स्ट्रगल उतना ही मुश्किल था जितना इस अंकल का बिजनेसमैन बनने का। फोफा जी के दिलवाए सिर्फ 10 करोड़ के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से गुजारा किया है मैंने। क्योंकि पृथ्वीराज कपूर उनके पिता हरिवंश राय के दोस्त थे। और शशि कपूर भी उन्हें अच्छे से जानते थे। तो ऐसा नहीं था कि स्ट्रगल के नाम पर उन्होंने धक्के खाए हो या भूखे पेट स्टेशन पर सोए हो और थोड़ी ही कोशिशों से उन्हें पहली फिल्म मिल गई थी।
फिल्म का नाम था सात हिंदुस्तानी। हां, यह अलग बात है कि उस समय पर उन्हें एक्टिंग नहीं आती थी और लोगों को उनकी एक्टिंग इतनी बकवास लगी कि फिल्म डिजास्टर हो गई। जिसमें ना तो अमिताभ का लोगों को काम पसंद आया और ना ही उनकी शक्ल सूरत। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों में काम किया लेकिन कोई भी फिल्म नहीं चली। अमिताभ बच्चन की एक के बाद एक लगभग 12 फिल्में फ्लॉप हो गई और वह एक फ्लॉप एक्टर बन गए।
कोई भी अमिताभ बच्चन को लेकर फिल्म नहीं बनाना चाहता था और कोई भी बड़ी हीरोइन अमिताभ बच्चन के साथ काम करने को तैयार नहीं होती थी। अमिताभ बच्चन यह सोचने लगे थे कि फिल्मों में वह सफल नहीं हो पाएंगे और उन्हें वापस प्रयागराज लौट जाना चाहिए। वह परेशान थे और बॉलीवुड से अपना बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी कर रहे थे। तभी उन्हें एक फिल्म मिली जंजीर। जब तक बैठने को ना कहा जाए शराफत से खड़े हो। और अमिताभ बच्चन ने सोच लिया कि यही उनकी किस्मत को तय करेगी।
अगर फिल्म फ्लॉप हो गई तो वो एक्टिंग छोड़कर वापस लौट जाएंगे। लेकिन अभी भी समस्या यह थी कि इस फिल्म में कोई भी हीरोइन अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं करना चाहती थी। हर किसी ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था और तब उनकी जिंदगी में आई बॉलीवुड की गुड्डी कही जाने वाली हीरोइन जया भादुड़ी। पल्लू लटके रे मारो पल्लू लटके जया उस समय तक बॉलीवुड में अच्छा नाम बना चुकी थी और कई बड़ी हिट फिल्मों को सिर्फ अपनी एक्टिंग के दम पर हिट करा चुकी थी। जहां एक तरफ हर बड़ी हीरोइन ने अमिताभ बच्चन से मुंह मोड़ लिया तो वहीं जया भादुरी ने बिना कुछ सोचे और अपने करियर की परवाह ना करते हुए एक फ्लॉप एक्टर अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म साइन कर ली। जंजीर फिल्म अमिताभ बच्चन के लिए गेम चेंजर साबित हुई और इसने रातोंरात अमिताभ बच्चन की किस्मत बदल दी।
अमिताभ बच्चन ने जया भादुड़ी को अपने लिए इतना लकी मान लिया कि वह जया के ही पीछे पड़ गई। यह पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं। और पहली ही फिल्म में अमिताभ जया भादुड़ी के प्यार के समुंदर में गोते लगाने लगे थे और उन्हें जया भादुड़ी से जया बच्चन बनाने के लिए चक्कर काटने लगे और वह जया भादुड़ी के इतने पीछे पड़े कि मई में फिल्म रिलीज हुई और जून में उन्होंने जया भादुड़ी से शादी कर ली। दोनों की शादी भी एक शर्त पर हुई थी। फिल्म जंजीर में काम करते हुए अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी की नजदीकियां बढ़ गई थी और दोनों एक दूसरे के करीब आ गए। दोनों ने वादा किया कि अगर फिल्म हिट हुई तो लंदन घूमने जाएंगे।
फिल्म ब्लॉकबस्टर हो गई। लेकिन अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने लंदन जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर लंदन जाना है तो पहले शादी कर लो फिर जाओ। इसलिए जया को अमिताभ बच्चन से शादी करनी पड़ी। उस समय दोनों की शादी बहुत ही सिंपल तरीके से हुई थी। हालांकि शादी के समय अमिताभ बच्चन इतने सफल अभिनेता नहीं थे।
तलब अमिताभ बच्चन के अच्छे दिन जया ही लेकर आई थी और शादी के बाद जया बहादुड़ी जया बच्चन बन गई और दोनों लंदन घूमने गए। दोनों खुश थे क्योंकि अमिताभ बच्चन के दिन बदल चुके थे और इसके बाद उनकी फिल्में हिट होने लगी और इसके बाद अमिताभ बच्चन की ऐसी किस्मत चमकी कि वो एक्टर से स्टार स्टार से सुपरस्टार बन गई। । अमिताभ बच्चन की सबसे बुरी आदत यह रही कि उन्होंने हर उस आदमी को धोखा दिया जिसने उन पर भरोसा किया या जो उनकी टक्कर का एक्टर था। अमिताभ बच्चन की सक्सेस के पीछे भी एक मूल मंत्र था।
यह वो समय था जब फिल्मों का हीरो बड़ा सीधा साधा और सज्जन आदमी हुआ करता था। क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत चुपी रहे। हीरो का मतलब सच में हीरो ही होता था। उस समय तक जितनी भी फिल्में बनती थी उनमें हीरो वही होता था जो आदर्शवादी हो और सच्चाई पर चलने वाला हो। उस समय के जितने भी हीरो थे चाहे वो धर्मेंद्र हो, राजकुमार हो, दिलीप कुमार हो या राज कपूर या शशि कपूर सभी एक अच्छे इंसान को ही पर्दे पर दिखाते थे। और वो शायद जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं। और इसी समय पर बॉलीवुड में दो ऐसे राइटर आए जिन्होंने हीरो की छवि को ही बदल दिया। और वह राइटर थे सलीम खान यानी कि सलमान खान के पिता और सलीम जावेद।
इन्होंने हीरो के किरदार को गुस्सैल, अकड़ू और अपनी मनमानी करने वाला लिखना शुरू किया। सलीम जावेद की ही कहानी थी फिल्म दीवार की। मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता। उन्होंने इस फिल्म को ऐसे दिखाया कि सच्चाई की राह पर चलने वाला शशि कपूर फिल्म में विलिन लगने लगा और बेईमानी और गलत रास्ते पर चलने वाला अमिताभ बच्चन लोगों को हीरो लगा। और यहीं से बॉलीवुड के हीरो की इमेज बदल गई। [संगीत] अब फिल्म का हीरो वो होता था जो भगवान के मंदिर में खड़े होकर उनसे सवाल पूछता था।
आज कुछ तो बात हो गई ना। जो गुस्से में एक साथ 10 से 20 लोगों को मारता था। देखो घर जोड़ के वो या तो चोर होता था या स्मगलर और जो एक क्रिमिनल होकर भी अपने भाई से कहता था आज मेरे पास बिल्डिंग है बैंक बैलेंस है बंगला है गाड़ी है क्या है तुम्हारे पास मेरे पास मां है और इन सभी किरदारों को निभाकर अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के एंग्री यंग मैन बन गए लोगों ने इससे पहले पर्दे पर ऐसे किसी हीरो को नहीं देखा था बहुत से लोगों के अंदर गुस्सा होता है लेकिन वह उसे कहीं निकाल नहीं सकता। तो पर्दे पर अमिताभ बच्चन को देखकर सभी ने उससे रिलेट किया और देखते ही देखते अमिताभ बच्चन नंबर वन बन गए। पर कबीर सिंह और एनिमल जैसे हीरो हैं। टच किया उसका। 1974 में अमिताभ बच्चन के घर एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया था श्वेता बच्चन और फिल्म 16 में काम करते हुए जया बच्चन एक बार फिर प्रेग्नेंट हो गई और 1976 में उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया अभिषेक बच्चन।
घर में खूब खुशियां मनाई गई कि जूनियर बच्चन आ गया है और अमिताभ बच्चन भी गाने लगे। मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। इस तरह जया बच्चन दो बच्चों की मां बन गई और उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों में काम करना कम कर दिया। यह वो दौर था जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के नंबर वन हीरो बन चुके थे और हर कोई उन्हें सुपरस्टार मान चुका था। मेरी जानेमन बाहर निकल आज झुम्मा है। आज अरे कौन भौंक रहा है? अमिताभ बच्चन ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया।
जिनमें नसीब, लावारिस, मुकद्दर का सिकंदर, कुली, तूफान, मिस्टर नटवर लाल, द ग्रेट गैंबलर, अग्निपथ, अजूबा, आज का अर्जुन और खुदा गवाह जैसी फिल्में शामिल रहीं। जिनमें काम करके वह महानायक बन चुके थे। और अब उन्हें हर कोई इतना छोटा लगने लगा कि वह किसी की भी कभी भी इंसल्ट कर देते थे। बॉलीवुड के बड़े सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना को भी अमिताभ बच्चन पछाड़ चुके थे। बातें करो मुझसे, बातें करो मुझसे। लेकिन इस नंबर वन की पोजीशन पर आने के लिए अमिताभ बच्चन ने सिर्फ मेहनत नहीं की थी बल्कि चालाकी और अपने ऊपर भरोसा करने वालों का भी अमिताभ बच्चन ने खूब फायदा उठाया। उन्होंने लगभग हर उस आदमी के साथ धोखा किया जिसने उनका बुरे समय पर साथ दिया था।
उनके खुद के भाई अमिताभ जिसने हर समय पर उनका साथ दिया। जब अमिताभ बच्चन हिट हो गए तो उन्होंने अपने ही भाई को लात मारकर भगा दिया। इम्तहान लेती है। चाहे वह शत्रुघ्न सिन्हा हो, धर्मेंद्र हो, शशि कपूर या विनोद खन्ना। जब इन सबको अमिताभ बच्चन की मदद की जरूरत थी तो अमिताभ बच्चन ने अपने हाथ खड़े कर लिए और मतलबी हो गए। कादर खान जिसने अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों की कहानी से लेकर डायलॉग तक लिखे थे। उन्हें सिर्फ अमिताभ बच्चन ने इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह अमिताभ बच्चन को कभी सर नहीं कह पाए। मैंने कहा यार वो तो अमित है। सर जी कब से हो गया? मेरे मुंह से निकला नहीं सर जी वो सर जी का ना निकलना मैं निकल गया उस ग्रुप में से और इस तरह अमिताभ बच्चन सबसे बड़े एहसान फरामोश बन गए और सफलता अमिताभ बच्चन के सर चढ़कर बोलने लगी थी और यही कारण रहा कि सबको धोखा देने के बाद अमिताभ बच्चन ने अपनी ही पत्नी जया बच्चन को भी धोखा देना शुरू कर दिया था। अमिताभ बच्चन के दो बच्चे हुए।
श्वेता बच्चन और अभिषेक बच्चन। श्वेता बच्चन का जन्म 1974 में हुआ और अभिषेक बच्चन का जन्म 1976 में और यहीं से जया बच्चन की जिंदगी भी पूरी तरह से बदल गई। मैंने कहा फूलों से हंसो तो खिलखिला के हंसिए। ये वो समय था जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के शिखर पर बैठे थे और जया बच्चन ने अपने बच्चों के लिए अपना फिल्मी करियर पूरी तरह से छोड़ दिया और वह सिर्फ अपने बच्चों की परवरिश करने में लग गई। सब कुछ ठीक चल रहा था। अमिताभ बच्चन धड़ाधड़ काम कर रहे थे और जया बच्चन भी अपने बच्चों का पालन पोषण करने में लगी हुई थी।
जया बच्चन ने अपने बच्चों के लिए अपना करियर तक छोड़ दिया था और पूरी तरह से अपने आप को परिवार के लिए कुर्बान कर दिया। लेकिन जया के लिए यह शादी ज्यादा दिन खुशी का कारण नहीं रही। जया ने धीरे-धीरे फिल्मों में काम करना कम कर दिया और अमिताभ धड़ाधड़ काम करने लगे। सब कुछ अच्छा चल रहा था और दोनों खुश थे और तभी अमिताभ बच्चन के जीवन में आई एक नई रेखा। इन आंखों की मस्ती मस्ताने हजारों अमिताभ बच्चन का रेखा के साथ अफेयर बॉलीवुड का सबसे चर्चित अफेयर बन गया और बॉलीवुड के गलियारों में रेखा और अमिताभ के चर्चे होने लगे। जहां जया बच्चन पूरी ईमानदारी से अमिताभ बच्चन पर भरोसा करके घर संभाल रही थी तो वहीं अमिताभ बच्चन रेखा के साथ प्यार के समंदर में गोते लगा रहे थे। मैं कहती हूं तूने मेरा दिल ले लिया।
अमिताभ बच्चन और रेखा का अफेयर खूब सुर्खियां बटोर रहा था और बॉलीवुड के गलियारों में अमिताभ और रेखा की प्रेम कहानियों के पर्चे बट रहे थे। अमिताभ बच्चन अपने दो बच्चे और पत्नी को छोड़कर रेखा के प्यार में पागल हो गए थे। उनकी कहानी इतनी चर्चित हो रही थी कि यश चोपड़ा ने उनकी इस सिचुएशन को लेकर एक फिल्म भी बना डाली थी जिसका नाम था सिलसिला। देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए। फिल्म में अमिताभ बच्चन की असलियत में चल रही कहानी को दिखाया गया था।
इस फिल्म में कुछ सीन ऐसे थे जहां लगा कि यह एक्टिंग नहीं बल्कि इनके दिल की आवाज है। उनका दामन छोड़ दीजिए। ये मेरे बस में नहीं। अमित मेरे पति हैं। मेरा धर्म है, वो मेरा प्यार है। अमिताभ बच्चन पूरी तरह से रेखा के दीवाने हो चुके थे और जया बच्चन अपना घर टूटते हुए देख रही थी। लेकिन इसी समय पर अमिताभ बच्चन की एक और फिल्म आई जिसका नाम था कुली। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक कुली का किरदार निभाया था। अब कुली का मतलब होता है एक गरीब मजदूर और लेबर। लेकिन अमिताभ बच्चन ऐसा कुली था जो सीधे मुंह किसी से बात ही नहीं करता।
जनाब सनिक खिड़की तो खोलिए। हमारी तारीफ जरा लंबी। और उसकी इन्हीं हरकतों के कारण एक गुंडा उन्हें ऐसा पीटता है कि वो सीधे अस्पताल पहुंच जाते हैं। मतलब फिल्म में नहीं बल्कि असलियत में। इस फिल्म में एक फाइट सीन की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को चोट लग जाती है और शूटिंग बंद हो जाती है। अमिताभ की हड्डी टूट गई और अमिताभ ने बिस्तर पकड़ लिया। जया बच्चन ने दिन रात अमिताभ बच्चन की सेवा की और बिना किसी शिकायत के अमिताभ के लिए पूरी तरह से पागल सी हो गई थी। और यह सब देखने के बाद अमिताभ बच्चन को समझ में आ गया कि रेखा की रेखा उनके जीवन में ज्यादा लंबी नहीं है।
उनका जीवन साथी अगर कोई है तो वह जया बच्चन ही है। और दूसरी तरफ जया बच्चन ने रेखा को भी घर बुलाकर यह समझा दिया था कि तुम कितनी भी कोशिश कर लो कहलाओगी बाहर वाली ही और उनकी पत्नी हमेशा मैं ही रहूंगी। इसके बाद अमिताभ बच्चन और रेखा के बीच की रेखा टूट गई। क्या बात है सर। क्या बात है सर। क्या? और अमिताभ बच्चन ने रेखा की तरफ से अपना ध्यान हटा लिया। लेकिन आज भी रेखा अमिताभ बच्चन को अपना सब कुछ मानती है। और मीडिया में यह खबरें चलती रहती हैं कि आज भी रेखा अमिताभ बच्चन के नाम का सिंदूर लगाती है।
अमिताभ बच्चन रेखा को भूलकर एक बार फिर से अपने काम पर ध्यान देने लगे थे। इसके बाद एक बार फिर बच्चन परिवार में सब कुछ अच्छा चलने लगा और बच्चे पढ़ने के लिए विदेश चले गए। जया घर संभालने लगी। लेकिन अमिताभ बच्चन अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और इस बार कई हीरोइनों के साथ उनके नाम जुड़ने लगे जिनमें परवीन बॉबी और जीनत अमान जैसी हीरोइन रहीं और अमिताभ बच्चन जया को धोखा देकर दूसरी हीरोइनों के साथ यह गाने लगे। अपने पति की बेवफा बेवफाई और रेखा का अमिताभ के लिए पागल हो जाना जया को रास नहीं आया और वह चिड़चिड़ी हो गई। लेकिन किसे पता था कि वो इतनी चिड़चिड़ी हो जाएगी। यह जगह है यह सवाल पूछने का? मोबाइल से क्यों ले रहे हो? व्हाट इज गोइंग ऑन? और इस समय तक अमिताभ बच्चन में घमंड भी सर चढ़कर बोलने लगा था और कई हीरोइन के साथ उनकी सुर्खियां भी उड़ने लगी थी और वह किसी से भी कहने लगी।
वो बॉलीवुड के टॉप पर जाकर बैठे थे और यहीं से उनके अंदर नेता बनने का कीड़ा भी जागने लगा क्योंकि हर एक्टर लास्ट में यही तो करता है। तो अमिताभ बच्चन ने भी सोचा कि अब एक्टिंग से ब्रेकअप करते हैं और नेता बनकर ज्यादा देश को लूटते हैं। देखता हूं कि कुर्सी पर बैठने के बाद ये लोग जितनी जल्दी अपना लगाया हुआ माल सूत समेत वसूल कर लेंगे उतनी ही जल्दी इस देश से गरीबी हट जाएगी। बात तो सही है। इसलिए 1984 में अमिताभ बच्चन ने एक्टिंग को छोड़कर पॉलिटिक्स में अपना हाथ आजमाया और पहली ही बार में इलाहाबाद से भारी बहुमतों से चुनाव जीता और खूब चर्चित हुए। लेकिन ज्यादा दिनों तक अमिताभ बच्चन को नेता वाला फील नहीं हुआ और उन्हें समझ में आ गया कि फिल्म में नेता बनना और असलियत में नेता बनने में बहुत फर्क है। इसलिए राजनीति से बहुत जल्द उनका मुंह भंग हो गया और वो वापस अपनी एक्टिंग में लौट गए। क्यों फिर का बात करता है?
लेकिन अब उनकी इमेज बिगड़ चुकी थी। इसलिए उनकी फिल्मों पर भी वह नंबर वन वाली पकड़ ढीली हो चुकी थी और उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगी और अमिताभ बच्चन को यह महसूस होने लगा कि अब उनका एंग्री यंग मैन वाला इंपैक्ट खत्म हो चुका है और हीरोइन के साथ अब इस तरह के गाने गाते हुए देखना लोग उन्हें पसंद नहीं करेंगे। जिसका कारण यह था कि अमिताभ बच्चन की उम्र लगभग 54 साल की हो चुकी थी। लेकिन आज भी हीरोइन के साथ वो इस तरह की फिल्में कर रहे थे। तूने कह दिया गवाह खुदा खुदा गवाह यही कारण रहा कि पब्लिक ने उनकी फिल्मों को नकारना शुरू कर दिया था।
इसलिए अमिताभ बच्चन ने अपने रिटायरमेंट की तैयारी शुरू कर दी और 1995 में अपनी खुद की एबीसीएल नाम से कंपनी खोल दी जिसका पूरा नाम था अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड। उन्होंने सोच लिया था कि जो भी फिल्में बनेंगी उन्हें अपनी ही प्रोडक्शन हाउस यानी कि एबीसीबीएल से बनाएंगे और 56 करोड़ की लागत से बनाई गई कंपनी एबीसीएल अमिताभ बच्चन ने टारगेट रखा कि इसे 1000 करोड़ की कंपनी बनाएंगे।
पहले साल अच्छा काम किया और उन्होंने कुछ टीवी सीरियल भी बनाए और कुछ फिल्में भी बनाई। कंपनी फायदे में रही लेकिन फिर अमिताभ बच्चन का लालच बढ़ गया और उन्होंने एक बड़ी गलती की। थोड़ी पटाखा दिल चुरा के ले गई। उन्होंने भारत के लोगों को अपनी कंपनी के द्वारा पहली बार भारत में मिस वर्ल्ड दिखाने का निर्णय लिया और खूब सारा कर्जा लेकर भारत में मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट का आयोजन करवाया। उन्हें लगा कि इसे देखकर लोग पागल हो जाएंगे और वह करोड़ों में खेलने लगेंगे। लोग पागल जरूर हुए लेकिन उनके खिलाफ कैसे-कैसे लोग रहते हैं यार।
लोगों ने इसे पश्चिमी सभ्यता का प्रचार और भारतीय संस्कृति का अपमान बताया और इसके विरोध में आंदोलन छेड़ दिया। अमिताभ बच्चन की कंपनी को खूब नुकसान हुआ और अमिताभ बच्चन की कंपनी कर्जे में डूब गई। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने सोचा कि एक अच्छी सी फिल्म बनाते हैं और इस कर्जे से बाहर आ जाएंगे। उन्होंने फिल्म बनाई मृत्युदाता और यह फिल्म सच में अमिताभ बच्चन को मृत्यु के मुंह में ही ले गई। फिल्म डिजास्टर साबित हुई और अमिताभ बच्चन लगातार कर्जे में धंसते चले गए। पैसों की कमी नहीं है मुझे। किसी से भी उधार ले लूंगा।
इसके बाद उन्होंने और भी कई फिल्में बनाई लेकिन सब की सब बेकार रही और उन पर कुल 90 करोड़ का कर्जा हो गया और इस तरह एबीसीबीएल कंपनी दिवालिया हो गई और इसके बाद अमिताभ बच्चन की हालत और भी ज्यादा बुरी हो गई। हालात ऐसे हो गए कि उन्हें अपना बंगला भी गिरवी रखना पड़ा था। वह पूरी तरह से रोड पर आ गए थे। लेकिन अमिताभ बच्चन ने इसे सबसे छुपाने के लिए उल्टा अपने खर्चे कम करने की बजाय बढ़ा दिए ताकि लोगों को ऐसा ना लगे कि अमिताभ बच्चन बर्बाद हो चुके हैं और वह रोड पर आ चुके हैं। मतलब फटे तो फटे नवाबी ना घटे। और इसी समय उन्होंने अपनी बेटी श्वेता बच्चन की शादी कर दी और इसमें भी खूब पैसा खर्च किया। अपनी झूठी शान बनाने के चक्कर में अमिताभ बच्चन की हालत और भी ज्यादा बदतर हो गई और फिर अमिताभ बच्चन को हारकर एक्टिंग में वापसी करनी पड़ी और उन्होंने यशराज का दरवाजा खटखटाया।
फिल्म मोहब्बतें में एक सपोर्टिंग किरदार निभाकर वह लोगों को तीन बातें समझाने लगे। परंपरा, प्रतिष्ठान, अनुशासन। लेकिन कर्जा ज्यादा था तो फिल्मों में प्रिंसिपल बनकर तो नहीं उतरने वाला था। इसलिए अमिताभ बच्चन ने टीवी का भी रुख किया और कौन बनेगा करोड़पति में लोगों को पैसे बांटने लगे और वह भी थोड़े बहुत नहीं करो। उन्होंने अपने बेटे अभिषेक बच्चन को भी फिल्मों में लॉन्च किया लेकिन अभिषेक बच्चन कभी भी एक बड़े एक्टर नहीं बन पाए और सालों से आज तक संघर्ष ही कर रहे हैं।
उन्होंने अमिताभ बच्चन के सपनों के साथ-साथ उनकी एंग्री एंग मैन की छवि पर भी मूत दिया। मार डाला मार डाला। धिक्कार है हम पर। और इसके बाद जो अमिताभ बच्चन पैसों के पीछे पड़े तो ऐसे पड़े कि किसी भी काम को करने के लिए वह तैयार होने लगे। वह निचले स्तर की फिल्में करने लगे। पैसों के लिए वह यह भी भूल गए कि अब वो महानायक की छवि बना चुके थे और उनका काम लोगों को कितना प्रभावित करेगा। इसके बाद भी वह इस तरह के सीन देने लगे। अपनी से कई साल छोटी और अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ वो किसिंग सीन देने लगे और ऐसे-ऐसे सीन देने लगे जिसने उनकी महानायक की इमेज पर ही दाग लगा दिया।
आजा गुना कर ले बंद करो हाथ जोड़ के मैं लेकिन तब भी अमिताभ बच्चन का लालच पूरा नहीं हुआ तो वो तेल शैंपू बेचते-बेचते पूरे किराना स्टोर वाले बन गए। वो साबुन, तेल, चड्डी, बनियान, सोना, चांदी और यहां तक कि घर बनाने का सामान भी बेचने लगी थी। देखा एकदम छेद छेद हो गया। एक नाम तो छेदी लालू है जी 104 क्यों है? अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में काम करना जारी रखा और आज भी वह फिल्मों में एक्टिव बने हुए हैं और हर तरह का रोल करने के लिए तैयार हो जाते हैं। वो ऐसे भारत के पहले एक्टर हैं जो 82 साल की उम्र में भी अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीत लेते हैं और आज भी बॉलीवुड के सबसे महंगे एक्टर्स की लिस्ट में शामिल हैं। उन्होंने कई अवार्ड जीते।
उन्हें कई नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। अमिताभ बच्चन के पास आज के समय में लगभग ₹3400 करोड़ की संपत्ति है। लेकिन बड़ी बात यह है कि आज वह सिर्फ पर्दे के ही महानायक बनकर रह गए हैं और अपनी पर्सनल लाइफ में पूरी तरह से फ्लॉप हो चुके हैं। उनका लड़का एक बड़ा एक्टर नहीं बन पाया और बॉलीवुड में आज तक कोई बड़ा नाम नहीं कमा पाया। उनकी लड़की का पारिवारिक जीवन बर्बाद हो गया और उनकी खुद की पत्नी उनके साथ नहीं रहना चाहती और अमिताभ बच्चन से जुड़ी हुई रहने पर भी उसे आपत्ति होने लगी है। सर सिर्फ जया बच्चन बोलते तो काफी हो जाता। इकलौते बेटे बहू का गृहस्थ जीवन भी बर्बाद हो चुका है और सालों से उनके घर में क्लेश चल रहा है। लेकिन अमिताभ बच्चन इस पर ध्यान ना देकर लोगों को सर दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए तेल।
तेल नहीं सर नवरत्न तेल। अरे हां वही नवरत्न तेल बेचने में लगे हुए हैं और आज उनके पास आज मेरे पास बिल्डिंग हैं, प्रॉपर्टी है, बैंक बैलेंस है, बंगला है, गाड़ी है। हां, सिर्फ यही बचा है। और आज उनका ही यह गाना उन्हीं के जीवन पर लागू होने लगा है। काहे पैसे पे इतना गुरूर कर है। यही पैसा।