संजीव कुमार बॉलीवुड के एक जानेमाने अभिनेता जो बड़ी गहराई के साथ पुराने किरदारों को निभाने के लिए जाने जाते थे भले ही फिल्मी दुनिया में उन्होंने अपार सफलता हासिल की हो लेकिन उनके निजी जीवन में दुख रहे क्योंकि उन्होंने कभी शादी नहीं की इसके पीछे एक बड़ा ही अनोखा किस्सा भी है यह बात शोले फिल्म की शूटिंग के दौरान की है जब संजीव कुमार ने अभिनेत्री हेमा मालिनी को प्रपोज किया
लेकिन हेमा मालिनी ने उसे ठुकरा दिया जिसके कारण उन्हें जीवन भर अकेले ही रहना पड़ा इतना ही नहीं संजीव कुमार ने खुद ही अपनी जल्दी की भविष्यवाणी तक कर डाली थी उन्होंने कहा था कि वे अपने परिवार के दूसरे पुरुषों की तरह 50 साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे दुखद यह है कि यह तब सच साबित हुआ जब 1985 में दिल का दौरा पड़ने से 47 साल की उम्र में उनका निधन हो गया और वे अपने पीछे एक सिनेमाई विरासत छोड़ गए ।
9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में जन्मे संजीव कुमार का असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था बाद में वे अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए उनके शुरुआती सालों में अभिनय के प्रति जुनून था जिसके कारण उन्होंने फिल्म स्कूल में दाखिला लिया गुजराती हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में निपुण कुमार के दो छोटे भाई और एक बहन थी कुमार ने मंच पर अपनी अभिनय यात्रा आईपीटीए और इंडियन नेशनल थिएटर के साथ नाटकों के प्रदर्शन करके शुरू की उनके फिल्मी कैरियर की शुरुआत 1960 में हम हिंदुस्तानी से हुई लेकिन 1965 में आई निशान में उनके रोल के बाद ही उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई उनके कैरियर में महत्त्वपूर्ण मोड़ 1970 में खिलौना की सफलता के साथ आया जिसने उन्हें स्टारडम की ओर बढ़ा दिया और उन्हें अपनी पीढ़ी के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बना दिया संजीव कुमार की अभिनय क्षमता सचमुच अद्वित थी।
अपने जमाने के दूसरे एक्टर्स के उलट वे ऐसी भूमिकाएं चुनने के लिए जाने जाते थे जिनमें वह अपने से ज्यादा उम्र के किसी शख्स का किरदार निभाते थे डायरेक्टर गुलजार के साथ उनके सहयोग से 1972 में परिचय कोशिश और आंधी जैसी फिल्मों में उनका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन सामने आया कोशिश में एक गूंगे बहरे व्यक्ति के कुमार के किरदार को देख आलोचक भी उनकी तारीफ करने को मजबूर हो गए जिससे एक वर्सेटाइल और डेडिकेटेड एक्टर के रूप में उनकी इमेज और मजबूत हो गई उन्होंने अपने समय की कई बड़ी अभिनेत्रियों के साथ स्क्रीन शेयर की जिनमें हेमा मालिनी राखी और मौसमी चैटर्जी शामिल है उमर दराज और युवा दोनों किरदारों की बड़ी ही सहजता से निभाने की संजीव कुमार की क्षमता उनके कैरियर की एक निर्णायक विशेषता बन गई।
संजीव कुमार का निजी जीवन अक्सर उनकी फिल्मी भूमिकाओं की तरह ही नाट किए था सबसे दिलचस्प था बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के लिए उनका एक तरफा प्यार शोले की शूटिंग के दौरान संजीव कुमार ने कथित तौर पर मालिनी के सामने ने शादी का प्रस्ताव रखा इस बात से अनजान कि वे पहले से ही उसी फिल्म के एक और स्टार धर्मेंद्र को डेट कर रही थी लेकिन हेमा मालिनी ने उनका प्रपोजल ठुकरा दिया जिससे उनका दिल टूट गया इसके बाद संजीव कुमार ने जीवन भर शादी नहीं करने का फैसला किया हेमा बालली के साथ उनकी अधूरी प्रेम कहानी बहुत अटकलों का विषय बन गई।
हालांकि कुमार ने खुद सार्वजनिक रूप से शायद ही कभी इस पर चर्चा की हो अकेले रहने के उनके फैसले ने उनके निजी जीवन को और भी रहस्यमई बना दिया संजीव कुमार कुमार के जीवन के सबसे भयावह पहलुओं में से एक उनकी अपनी ही को लेकर की गई भविष्यवाणी थी उमर दरात किरदार निभाने के लिए जाने जाने वाले कुमार ने एक बार ऐसी भूमिकाओं के प्रति अपनी पसंद के बारे में मजाक करते हुए कहा था मैं बूढ़ा नहीं होने वाला हूं क्योंकि मैं अपने परिवार के पुरुषों की तरह 50 से ज्यादा नहीं जी पाऊंगा इसलिए मैं स्क्रीन पर बुढ़ापे का अनुभव भी कर सकता हूं लेकिन किसे पता था कि उनकी मजाक में कही गई यह बात सच साबित हो जाएगी।
सजीव कुमार को दिल की ऐसी बीमारी थी जो उन्हें अपने बुजुर्गों से मिली थी जिसने उनके परिवार के कई पुरुषों की 50 साल की उम्र से पहले ही जान ले ली थी अमेरिका में कराने के बावजूद उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता गया जैसा कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी 6 नवंबर 1985 को 47 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया उनके असामाजिक निधन के बाद भी भारतीय सिनेमा में संजीव कुमार की विरासत जिंदा रही उनकी कई फिल्में उनके निधन के बाद रिलीज हुई और डायरेक्टरों को उनके बाद स्क्रिप्ट को एडजस्ट करना पड़ा।
उनकी आखिरी अधूरी फिल्म प्रोफेसर की पड़ोसन थी कुमार के निधन के बाद फिल्म में उनके किरदार में बदलाव किया गया अपने करियर के दौरान कुमार ने 10 से ज्यादा भाषाओं में काम किया और ऐसे प्रदर्शन दिए जो पीढ़ियों से दशकों को पसंद आए वे अलग-अलग तरह के किरदारों को निभाने की अपनी क्षमताओं के लिए जाने गए उनकी से बॉलीवुड में एक युग का अंत हो गया लेकिन भारतीय सिनेमा में उनका योगदान बेजोड़ है