[संगीत] [संगीत] विमान हादसों के इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनकी तस्वीरें और कहानियां सालों तक लोगों के दिलों में डर और दर्द छोड़ जाती है। एयर इंडिया फ्लाइट एआई 171 का अहमदाबाद क्रैश भी ऐसे ही एक हादसा था। जिससे पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। देखते ही देखते 260 लोगों की जिंदगी खत्म हो गई और कई परिवार हमेशा के लिए बिखर गए।
12 जून को अहमदाबाद से लंदन गेटवी के [संगीत] लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीम लाइनर टेक ऑफ सिर्फ 32 सेकंड बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में 241 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। शुरुआत में जांच की दिशा पायलटों की ओर मोड़ दी गई थी और सवाल उठने लगे कि कहीं यह हादसा मानवीय भूल का नतीजा तो नहीं था।
लेकिन अब हादसे के लगभग 1 साल बाद सामने आए कुछ दावे पूरी कहानी को बदलते नजर आ रहे हैं। यह विमान अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे [संगीत] से उड़ान भरकर आसमान की ओर बढ़ा ही था कि अचानक दोनों इंजन एक के बाद एक [संगीत] बंद पड़ गए। विमान हवा में लड़खड़ाने लगा और रनवे से करीब 1.5 कि.मी. दूर स्थित विजय मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से जा [संगीत] टकराया। टक्कर इतनी भयावत थी कि पूरा इलाका आग और मलवे में बदल गया।
इस हादसे में विमान में सवार 271 लोगों के अलावा जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी मौत हो गई। कुल 260 जिंदगियां एक पल में खत्म हो गई। इस दर्दनाक हादसे में सिर्फ एक यात्री चमत्कारी रूप से जिंदा बचा। सीट नंबर 11 ए पर बैठे विश्वास कुमार रमेश मौत के इस मंजर से बाहर निकलने वाले अकेले शख्स थे। अब इस हादसे से जुड़ा एक नया दावा सामने आया है जिसने जांच एजेंसियों की शुरुआती [संगीत] रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुजरात के खेड़ा जिले के रहने वाले रोमिन बोहरा जिन्होंने इस हादसे में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोया था। एक चौंकाने वाला दावा किया है
कि रोमिन पहले पैथोलॉजी लैब असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। हादसे के अगले दिन उन्हें अस्पताल के मुर्दाबाद में जाने की अनुमति मिली थी। जहां वह अपने परिजनों के शवों को पहचानने [संगीत] गए थे। रोमिन के मुताबिक मुर्दा घर का दृश्य बेहद भयावत था। चारों तरफ छत विषत शव पड़े हुए थे। लेकिन इसी दौरान उनकी नजर विमान के कैप्टन सुमित अग्रवाल के शव पर पड़ी। उनका दावा है कि कैप्टन का शव बाकी मृतकों से अलग रखा गया था। और उनकी बॉडी की स्थिति बेहद अलग थी। रोमिन के अनुसार कैप्टन सुमित अग्रवाल का शव उसी मुद्रा में था जैसे कोई पायलट कारकपिट में बैठा हो।
उनके घुटने मुड़े हुए थे, पैर ऊपर की तरफ थे और सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उनके दोनों हाथ आगे की ओर फैले हुए थे। मानो वो अब भी विमान के कंट्रोल को मजबूती से पकड़े हुए हैं। इस दावे ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी एएआईबी के शुरुआत रिपोर्ट [संगीत] पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 जुलाई को जारी शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक ऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों की फ्लू सप्लाई बंद हो गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि शायद पायलटों की गलती इसी हादसे की वजह बनी। लेकिन अब सामने आई गवाही एक अलग तस्वीर पेश कर रही है। यह दावा बताता है शायद कैप्टन सुमित सवरवाल आखिरी सांस तक विमान को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है बल्कि उस पायलट की कर्तव्य, निष्ठा और साहस की कहानी भी है जिसने आखिरी पल तक सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने के लिए मौत से लड़ाई लड़ी।