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जब शाहरुख के एक स्टेटमेंट ने उन्हें 8 साल तक चुप कर दिया! जानिए अंदर की बात

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शाहरुख खान ने 2015 में बॉलीवुड का एक रूल तोड़ा। एक इंटरव्यू, एक बयान और उसके बाद जो हुआ उसने शाहरुख को 8 साल के लिए चुप कर दिया। लेकिन क्या वो सच में चुप थे या वो कुछ और कर रहे थे। आज मैं तुम्हें सबसे इंटरेस्टिंग कहानी सुनाऊंगी। शाहरुख खान के साइलेंस की जो स्ट्रेटजी थी जो कभी हथियार था और कभी-कभी उनके खिलाफ भी गया। शुरुआत करते हैं 2010 से। माय नेम इज खान। करण जौहर का डायरेक्शन। शाहरुख खान का करैक्टर इसमें मुस्लिम था और उसे एक बीमारी भी थी जो अमेरिका के प्रेसिडेंट से मिलना चाहता था। सिर्फ यह कहने के लिए कि माय नेम इज खान एंड आई एम नॉट अ टेररिस्ट। यह फिल्म 91 के बाद मुस्लिम आइडेंटिटी पर एक पावरफुल स्टेटमेंट थी।

रिज़वान खान का कैरेक्टर था। एक ऐसा कैरेक्टर जो शायद बहुत सारे सच कहना चाहता था। यह प्रूफ करना चाहता था कि इंसान दो तरीके के होते हैं। अच्छे और बुरे। रिलीजन से कोई फर्क नहीं पड़ता। साल 2010 और शाहरुख खान ने ये फिल्म तब बनाई जब कोई उप्पल ने इतना बात नहीं करता था इस बारे में। उस वक्त इंडिया का माहौल अलग था। फिल्म हिट हुई मैसेज अप्रिशिएट हुआ और शाहरुख को लगा कि ये तरीका काम कर रहा है। फिर 2015 में सब कुछ बदल गया। एक इंटरव्यू में शाहरुख ने देश में बढ़ती रिलीजियस इनटोलरेंस के बारे में बोला। कहा कि इंडिया में असहिष्णुता बढ़ रही है और यह सुनते ही जो हुआ वो शाहरुख ने एक्सपेक्ट नहीं किया था। इग्निशन वाइल्ड हेट कैंपेन शुरू हो गया। एंटी नेशनल पाकिस्तान जाओ देशद्रोही सोशल मीडिया पर बॉयकॉट चल रहा था। न्यूज़ चैनल पर डिबेट हो रहे थे। ट्रोलर्स ने मन्नत के बाहर प्रोटेस्ट शुरू कर दिए। उस इंटरव्यू के बाद शाहरुख खान ऑलमोस्ट सेल में चले गए थे। किसी भी पॉलिटिकल इशू पर कमेंट करना बंद कर दिया था। 8 साल 2015 से 2023 तक एक भी पब्लिक स्टेटमेंट नहीं। लेकिन क्या वो सच में चुप थे? नहीं।

शाहरुख ने नया तरीका चूज़ किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ दी, इंटरव्यूज छोड़ दिए और अपनी बात अपनी फिल्म्स के थ्रू कहने लगे। साल 2023 में पठान आती है पेट्रोटिज्म के तड़के वाली फिल्म है ना? याद करो बहुत सालों पहले एक फिल्म आई थी अमर अकबर एंथिन हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई। जब भी लव स्टोरी और ब्रदरहुड की बात आती है तो यह मूवी सबसे ऊपर आती है। इसका एग्जांपल क्यों दे रही हूं वो भी मैं तुम्हें समझाऊंगी। पहले [संगीत] यह सुनो पठान के बाद जवान आती है। जवान में शाहरुख खान ने एक अलग ही तरीके का वॉल तोड़ दिया। सीधा पॉलिटिशियन से सवाल पूछे है ना? 5 साल में क्या करोगे? अगर परिवार में कोई बीमार हो रहा है उसके इलाज के लिए तो क्या करोगे? मुझे नौकरी दिलाने के लिए क्या करोगे? शाहरुख खान ने दिल जीत लिया। एक एक्टर का मोनोलॉग नहीं था। यह एक सिटीजन का मेनिफेस्टो था। पठान में भी पेट्रोटिज्म का तड़का लगाया और जवान में उन्होंने पॉलिटिकल लर्निंग्स को फिल्म के थ्रू दिखाया। वो तरीका जो साउथ स्टार दशकों से करते हुए आ रहे हैं।

लेकिन यहां एक और ट्विस्ट है। 2021 में आर्यन खान केस हुआ। ट्रोलर्स ने फिर से शाहरुख खान को ट्रोल किया। स्टेटमेंट दिए। कोई चैनल नहीं था उस टाइम पर। भारत माता की जय के नारे लगा रहा था और शाहरुख खान को बुरा भला कह रहा था। लेकिन उस टाइम पर भी शाहरुख खान चुप रहे। और फिर पठान और जवान के थ्रू उन्होंने जवाब दिया। जवान एक ऐसे आदमी की कहानी जो सिस्टम को गलत ठहरा रहा था। उसने सिस्टम को चैलेंज किया। अपने बेटे के नाम पर इंसाफ मांगा। आर्यन खान केस का जवाब एक फिल्म थी और एक और इंटरेस्टिंग एंगल 2025 में नेशनल अवार्ड अनाउंस हुए। जवान के लिए इंडस्ट्री चौंक गई। एक फिल्म जो सिस्टम को डायरेक्टली चैलेंज करती है उसे उसी गवर्नमेंट ने अवार्ड दे दिया। एक एनालिस्ट ने लिखा जब किंग नहीं झुकता तो तुम उसे उसके साथ एडजस्ट करने की कोशिश करते हो।

गवर्नमेंट जानती है कि एसआर के एक ब्रांड है एक इमोशन है। उसे एन बनाना एक्सपेंसिव है। इसीलिए अवार्ड दो। एक बात ऑनेस्टली मुझे कहनी पड़ेगी। एसआरके की स्ट्रेटजी कंप्लीटली ऑनेस्ट है। एक तरफ जवान में सिस्टमेटिक करप्शन पर बात की फिल्म बनाते हैं। दूसरी तरफ पीएम मोदी को प्राइज करते हुए है ना कभी साइलेंस के थ्रू और कभी अपनी फिल्मों के थ्रू। [संगीत] लेकिन शायद ये रियलिटी है। तो शायद यही सबसे स्मार्ट मूव है साइलेंस। और फिर एक फिल्म बनाओ और सच कह दो। तुम कमेंट करके बताओ कि क्या एसआरके की पॉलिटिकल साइलेंस एक स्ट्रेटजी है या डर? मैं तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलूंगी। तब तक तुम चैनल को सब्सक्राइब कर लो। वीडियो को लाइक और शेयर करो। प्लीज बेल आइकॉन दबाओ।

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