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दीपिका के आरोपी को बचा रहा नेता ?अब नए खुलासे से मच गई सनसनी !

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उसकी नहीं है। उसकी तो बहुत निर्दई तरीके से हुई है। दीपिका यह नाम अब सिर्फ एक बेटी का नहीं बल्कि उन सवालों का बन चुका है जो हर गुजरते दिन के साथ और गहरे होते जा रहे हैं। आखिर एक 24 साल की महिला की मौत के पीछे सच क्या है? क्या यह सिर्फ एक हादसा था या फिर उससे पहले कुछ ऐसा हुआ जिसे हमेशा के लिए छिपा देने की कोशिश की गई? क्योंकि ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव से सामने आए इस मामले में अब रिपोर्ट, परिवार के आरोप, राजनीतिक पहुंच की चर्चा और पुलिस कार्यवाही पर उठते सवाल सब कुछ मिलकर कमोबेश एक ही कहानी को पेश कर रहे हैं और इसे पेचीदा बना रहे हैं।

दीपिका अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसके शरीर पर मिले निशान अब भी जवाब मांग रहे हैं। सवाल है कि क्या जांच उन जवाबों तक पहुंच पाएगी या सच फिर कहीं दब जाएगा? ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव की रहने वाली दीपिका नागर की संदिग्ध के बाद अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई सारे नए सवाल खड़े कर दिए। रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका के शरीर पर कुछ 10 गंभीर बाहरी और अंदरूनी चोटों का जिक्र है।

दाहिने चेहरे पर करीब 12 सें.मी. लंबी और 9 सें.मी. चौड़ी गंभीर चोट। बाएं हाथ की कलाई और कोहनी पर चोट के निशान, बाएं कान से निकलने की पुष्टि और सबसे ज्यादा चर्चा में दाहिनी जांघ पर लगभग 38 सें.मी. लंबा और 14 सें.मी. चौड़ा नीला निशान। ये चोटें आखिर कैसे आई? परिवार का दावा है कि दीपिका के साथ पहले बेरहमी से मारपीट की गई और फिर उसे तीसरी मंजिल से नीचे फेंका गया। हालांकि इस आरोप की पुष्टि जांच के बाद होगी। लेकिन रिपोर्ट ने की आशंका को लेकर सवाल जरूर बढ़ा दिए।

परिवार पूछ रहा है क्या कोई सिर्फ गिरने से इतनी अलग-अलग गंभीर चोटें झेल सकता है या फिर मौत से पहले हिंसा हुई? यह वह सवाल है जो अब जांच के केंद्र में है। लेकिन मामला सिर्फ चोटों तक सीमित नहीं रहा। अब इसमें राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी जुड़ चुके हैं। दीपिका के परिजनों का दावा है कि आरोपी ससुर के जिले के एक वरिष्ठ नेता से करीबी संबंध हैं। परिवार का आरोप है कि इसी प्रभाव के कारण आरोपी पक्ष को लंबे समय से संरक्षण मिलता रहा और पहले भी सख्त कारवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं परिवार का कहना है कि आरोपी परिवार पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन इसके बावजूद कठोर कारवाई नहीं हुई।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी तक नहीं हो पाई। लेकिन गांव में चर्चा तेज है कि क्या प्रभावशाली संपर्कों ने आरोपी परिवार को बचाए रखा है? क्या किसी की राजनीतिक पहुंच जांच की दिशा को प्रभावित कर सकती है? यह सवाल अब सिर्फ परिवार नहीं बल्कि गांव के लोग भी पूछने लगे हैं। उधर पुलिस की कार्यवाही पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी वाले दिन आरोपी को लॉकअप में रखने की बजाय लेखाजोखा रूम में बैठाया गया और विरोध के बावजूद ही लॉकअप भेजा गया।

अगर यह आरोप सही है तो सवाल खड़े होते हैं। ऐसा क्यों किया गया? इसके अलावा परिवार का कहना है कि अब तक आरोपी का मोबाइल फोन ज्त नहीं किया गया। जबकि ऐसे मामलों में मोबाइल डाटा जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। कॉल रिकॉर्ड, चैट, लोकेशन कई बार यह चीजें पूरी कहानी को बदल देती हैं। दूसरी तरफ जिस जगह दीपिका गिरी थी, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं होने की बात सामने आई है। यानी घटना के प्रत्यक्ष दृश्य सबूत मौजूद नहीं। मंगलवार को पुलिस ने परिजनों को मौके पर बुलाकर दोबारा जांच की। लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं। गांव में दीपिका के प्रेग्नेंट होने की चर्चा हुई। हालांकि रिपोर्ट में इसकी कोई पुष्टि नहीं मिली।

फिलहाल पुलिस ने पति और ससुर को गिरफ्तार कर लिया लेकिन परिवार कह रहा है गिरफ्तारी काफी नहीं है बल्कि सख्त धाराओं में कारवाई हो। गांव के कुछ लोग गैंगस्टर एक्ट जैसी कार्रवाही की मांग भी उठा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल क्या दीपिका को न्याय मिलेगा? क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच और फॉरेंसिक सबूत मिलकर पूरा सच सामने ला पाएंगे या फिर से यह मामला भी आरोपों और इंतजार के बीच उलझ जाएगा? क्योंकि दीपिका अब बोल नहीं सकती।

लेकिन उसके शरीर पर मिले निशान और परिवार के आरोप अब एक-एक करके जवाब मांग रहे हैं। उसकी हत्या हत्या नहीं है। उसकी तो बहुत निर्दई तरीके से हुई है। मेरी मेरी बहन को उन्होंने राक्षसों ने नोच डाला। मेरी बहन के इतने निशान है ना इतने निशान है कि मतलब मेरी बहन के क्या ही घुसाया है पेट में मेरी बहन पे क्या ही बिजी होएगी मेरी रात 11:00 बजे ही बात हुई थी उससे बस यही कह रही थी मैं बहुत परेशान हूं मैंने कही कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा उसके बाद मेरी उससे कोई बात नहीं हुई। कोई परेशानी थी तो हम ले आते अपनी बेटी को। हमें बता देते हम अपने घर में रख लेते। मेरी बहन को मारा ना है।

मेरी बहन को तो उन जल्लादों ने बिल्कुल बुरी तरीके से तहसनहस कर दिया। बहन अपनी बड़ी बहन से सारी बातें करती थी। कब से बताने लगी? वो करवा चौथ से पहले से ही बताती थी कि अब ये लोग मुझे टोंटिंग बाजी करते रहते हैं कि यह ऐसा नहीं है। ये अच्छा नहीं है। ये चीज नहीं आई। ये चीज नहीं लेके आई। शादी में ये नहीं किया वो नहीं किया। ये कहते थे अरे हमने तो लड़की देखी थी वरना वो हमारी औकात के नहीं थे। अरे हमने तो ये देखा था। अरे लड़की देखी थी तो उसे रखते तो सही।

अरे मेरा फूल सी बहन को मार दिया। मेरी बहन कहां से वापस आएगी? कई लोग के नाम है उसे एफआईआर में दो किस तरीके की अभी कोई बहुत बहुत ये कोई कारवाई नहीं है। ये ये क्या गिरफ्तार करके क्या ही कर लिया। भेज दिया।

उनसे कोई रिमांड नहीं करी ना कुछ वो थोड़े दिन में जमानत करके बाहर आ जाएंगे। फिर यही दरिंदे यहीं घूमेंगे ना किसी सासु को पकड़ा है ना नंद को पकड़ा है। कहां है सब सब पूरे उसमें सब पूरे मुजरिम है। जो है बात होती होगी कि किस टाइप का लड़का क्या था? लड़का वो पहले ठीक था लेकिन अब उसकी भी हरकतें दिन बदलती जा रही थी। वो भी अपने परिवार के साथ कि मुझे तो Fortuner के रिश्ते आते थे। यहां से यह नहीं मिला वो नहीं मिला। अरे Fortuner ही चाहिए थी। कहीं और से शादी कर लेते हमारे यहां रिश्ता क्यों मांगा था? हमारी अपनी घर में रहती कम से कम जिंदा तो होती हमारे बीच में आज। मुझे उसका चाहिए। चाहिए। बिल्कुल। चाहिए मुझे भी। भाई मम्मी मैं बहुत दुखी हूं। बेटी मैं का करूं भेजते भी है तो है मम्मी मोहे बहुत दुखी राख है मेरी लाडो अरे मेरी सारे दिन कौन करवावे मेरी लाडो दोद परिवारन की रोटी बनवावे दूसरे घर की भी और अपनी भी मेरी लाडो ओ मेरे मेरे लाड मेरी ये बड़ी दुख क्या मेरे तो दुख है बेटी क्या कह रही है क्या मांग न्यू कह रही मम्मी Fortuner मांग रही है बेटी मैं कहूं तो दे दूंगी अब तो मैंने तेरो ब्याह करो फिर न्यू कह रही मम्मी उन्हें तो Fortuner चाहिए मेरी बेटी मैं कैसे करूं देखूंगी मैं कुछ ना कुछ तो करूंगी। देखूंगी तो देगी।

तू चुप लगाई जा। मम्मी मोह बहुत दुखी कर रहे हैं। अरे मैं तो जग मंगा लेती। ऐसी पता होती तो कि ये मारंगे तो है मेरी लाडू तू तो जब आई यहां पे बेटी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी उसमें बताया गया है कि उसके 141 जगह चोट के निशान है और यह हाथ जो है उसका नीला पड़ा हुआ है जिसे कोई पकड़ने से ही यह नील के निशान आ सकते हैं और वैसे किसी तरह से नहीं आ सकते। बहुत ज्यादा लड़की के साथ में खींचाताणी करके उसे मारा गया है और मारने के बाद ही उसे छत से नीचे लटकाया गया। नीचे डाल दिया गया तुरंत। कितने महीने हो चुके हैं? कितनी देर बाद ये सब बातें आना शुरू हुई? शादी 11 दिसंबर 2024 को हमने अपनी बेटी की शादी की थी। जिसके दो-ती महीने बाद ही उन्होंने हमें टॉर्चर करना शुरू कर दिया कि हमें तो इतनी बड़ी गाड़ी मिलनी थी। हमें Fortuner मिलनी थी। हमारी तो शादी तुमने जो हल्की करी है हमारे लेवल की शादी नहीं करी है। और बच्ची को टॉर्चर करना शुरू कर दिया उन्होंने और जिसका अंत ये हुआ कि उन्होंने उसे मार दिया लड़की को। मैं कई बार समझाने की कोशिश भी करी है कि भाई समझ हो जाए और सुलझ जाए ये केस हमारी ये बच जाए ऐसा ना हो। बाकी उसका लास्ट ये हुआ कि उन्होंने लड़की को मार दिया और आपके सामने ही है जो भी है। जी आप लास्ट गए मैं उस दिन उस दिन घर गया था। बातचीत बातचीत में उन्हें समझा के आया था भाई ऐसा मत करो ऐसा नहीं है। ठीक है। उन्हें समझा के चला भी आया वहां से। उसके जाने के बाद मुझे आधे घंटे बाद ही फोन आता है कि आपकी बेटी गिर गई है। तो मैंने उनसे पूछा कि भाई कहां से गिर गई है मेरी बेटी? तो तो मैंने उनसे पूछा भाई कहां से गिर गई है? सीढ़ी से गिरी है या बाथरूम में गिर गई है?

तो उन्होंने कहा छत से गिरी है आपकी बेटी जो है और तो उसके बाद ही मैंने अपने छोटे भाई को फोन किया और अपने बेटे और अपनी घरवाली के साथ में वहां पे चला गया। हॉस्पिटल में जाके देखा तो हमारी बेटी हमें मृत मिली। उसमें कुछ नहीं था। उस टाइम पे जब आप मिलने गए थे शाम को तो क्या चोट के साथ उसके शरीर पे थे? नहीं नहीं कोई चोट नहीं थी। बिल्कुल ठीक। मेरे आने के बाद ही उन्होंने ये काम किया है जो भी किया है। कई जगह कत्ल के नहीं वो उन्होंने मारपीट के उसे नीचे डाला है उसे जो उसे मार मार मार ही दिया था उसे। मारने के बाद ही उसे नीचे गिरा है।

और बिटिया से आपकी बात होती रहती है। बिटिया से मेरी बराबर बात होती लेकिन हम भी यह सोचते रहे कि यह घर बस जाए। कोई भी बाप ऐसा नहीं है कि एकदम तुरंत उसे तोड़ देगा। हर कोई यह सोचता है भाई यह रिशेदारी हमारी बन जाए चल जाए। कोई ये तो है एनीवे गुड्ड गुड़िया का खेल है। लड़का क्या करता है? लड़का फॉर्मेलिटी के लिए तो वैसे तो बीए बीएड वो बीए एलएलबी कर रहा है। बाकी उसका बाप जो एक भूमाफिया है और बहुत ज्यादा दबंग टाइप का वो भी है। उस पे केस भी हैं उस पे जो कम से कम भी 20 केस चले हुए हैं।

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