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“दूल्हे का सेहरा गाते हुए नुसरत फतेह अली खान 150 बार रोए”

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इस फिल्म गाने की क्या कहानी है? दूल्हे का चेहरा सुहाना लगता है। धड़कन के लिए लिखा गया। इसका हुआ क्या कि नदीम मियां नुसरत फतेह अली खान के बहुत बड़े फैन। यह हाल था उनका कि हम लोग जब गाना रोमांटिक बनाना होता था तो बोलते थे कि यार एक काम करो नुसरत भाई का पहले गाना लगाओ जरा हम लोग सुनते हैं तो उनके गाने सुन के तब हम उस माहौल में जाते थे कि यार अब अच्छा काम करना है तो चलो नुसरत फतेह अली खान को सुनते हैं मदन मोहन को सुनते हैं एस डी बर्मन को सुनते हैं खैर तो लकली ये मौका बना कि वो मुंबई आए और उस वक्त मैं धड़कन लिख रहा था दिल ने ये कहा है दिल से वो सारे गाने गाने रिकॉर्ड हो गए थे। तो उन्होंने कहा यार नुसरत भाई आए हैं। अगर एक गाना इस पिक्चर में आ जाए तो पहले तो यह उनको मनवाना क्योंकि वो बाहर का गाना गाते नहीं थे। मगर नदीम श्रवण के वो भी फैन थे तो हम लोग उनसे मिलने गए होटल में तो मिले बोले आओ आओ नदीम आओ।

तो बोले कि खान साहब मेरी बहुत दिली तमन्ना है कि आप मेरा एक गाना गाइए। हम तो बोले मगर शर्त यह है नदीम कि वो गाना मुझे पसंद आना चाहिए। अगर गाना मुझे पसंद आया तो मैं जरूर गाऊंगा। हम नदीम ने फिर गाना बनाया ये दूल्हे का सेहरा और हम लोग लेके उनके पास गए जी। उन्होंने जब गाना सुना ना तो उन्होंने बोला कि नहीं मैं गाऊंगा। मगर तुम जल्दी से जल्दी स्टूडियो बुक करो और सनी स्टूडियो जो है ना सनी देओल साहब का एक स्टूडियो है उसका नाम है सनी स्टूडियो उसमें रिकॉर्डिंग रखी गई है और लकली वो पहले पहली बार 100 ट्रैक्स की मशीन आई थी इंडिया उसके पहले उतने ट्रैक्स की मशीन हुआ नहीं करती तो वो अंग्रेज आया था वो सिखाने के लिए रिकॉर्डेश जो था और लकली उस अंग्रेज ने इनको बहुत बार लंदन में रिकॉर्ड किया हुआ है तो उनको पता था कि नुसरत फतेह अली खान को कैसे रिकॉर्ड करते हैं। अच्छा अब इन लोगों को आदत होती नहीं कि माइक पे खड़े होके गाएंगे। इनके लिए तो तख्ता लाओ और बिछाओ और सब तैयारी मूड माहौल बनाएंगे जैसे परफॉर्म करने जा रहे हैं। खैर वो सारा अरेंजमेंट किया गया बैठ गए। शुरू हुए गाना।

तो क्या होता है वो माइक की प्लेसिंग कभी हिले कभी-कभी क्योंकि वो सही जगह पे नहीं है ना। मगर वो आवाज इतनी पावरफुल थी कि माइक कहीं भी हो रख दो आवाज मशीन में आनी ही आनी है। खैर गातेगातेगाते जब वो लाइन जो तूने पहले ही इंटरव्यू में बोला कि मैं तेरी बाहों के झूले में पली बाबुल उस लाइन पे आए और रोने लगे गाना कट हो जाए। कम से कम 150 बार एक दो बार नहीं 150 बार उसी लाइन पे गाना कट हो। तो नदीम ने अंदर से बोला कि खान साहब एक काम करते हैं कल गा करते हैं। आप भी थक गए होंगे इसको कल करते हैं। बोले नदीम अगर आज ये गाना हुआ तो हुआ वरना यह गाना होगा ही नहीं मुझसे। यह जो बुखार आया है ना इस बुखार में ही ये निकलेगा। नहीं तो मैं फिर ये गाऊंगा नहीं। रुसत साहब की अपनी बेटियां थी। हां उन्होंने बोला तो हम लोगों ने जाके बोला खान साहब मगर क्यों आप ऐसा करते? बोले वो मैं जैसे वो लाइन आती है मुझे बेटी याद आ जाती

और थिएटर में तुम कभी जाकर देखना हो उसी लाइन पे लोग रोते हैं तो ये थे असली कलाकार जो यहां से काम करते थे मुश्किल अश्कों को छुपाना लगता मुश्किल अश्कों को छुपाना लगता है तो वो जब और जब फिर जब वो गा रहे थे और फिर जब मैं लिखने भी लगा तो मेरा भी था कि नहीं यार नुसरत साहब गा रहे हैं तो आज इस गाने में जितनी जान है डाल दो और गाने कंपोजीशन भी नदीम श की इतनी खूबसूरत थी कि मुझे मजा भी बहुत आया। पहले तो ये था

कि नुसरत साहब के ऊपर शूट भी होना था गाना बट उसके बाद वो गुजर गए तो फिर कादर खान को गेटअप देके फिर उन लुक छिपके मैं ढूंढूं गलीगली कहीं मिला नहीं मोरा पिया उसमें नुसरत साहब हैं। हां जो बॉबी देओल और ऐश्वर्या राय वो तो पहले उनका म्यूजिक भी उन्हीं का था। जी हां जी जी तो क्या होता है ये वही जब आजकल के बच्चे कभी पूछते हैं ना कि कल और आजकल के म्यूजिक का फर्क क्या है मैं एक ही बोलता हूं पहले यहां से काम होता था अब यहां से हो रहा है जब यहां से होता था तो यहां असर करता था अब यहां से हो रहा है तो यही असर करके निकल जा रहा है [संगीत]

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