70 के दशक में बॉलीवुड में एक गायिका आई शुरुआती दिनों में वह सिर्फ डबिंग किया करती थी डबिंग यानी वो गाने जो लता मंगेशकर या आशा भोंसले को गाने होते थे उन्हें वो रिकॉर्ड करती थी जिससे गाने के साथ फिल्म का सीन शूट किया जा सके बाद में संगीतकार को जब लता या आशा से डेट्स मिल जाती थी तो
वह उन गानों का फाइनल टेक रिकॉर्ड करती थी आंख मार को लड़का आख मार धीरे-धीरे ऐसा समय आया जब इस गायिका को ज्यादातर संगीतकारों ने इसी काम के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया आखिरकार एक दिन जब उन्होंने बड़ी विनम्रता से कह ही दिया कि वह इंडस्ट्री में सिर्फ डबिंग कलाकार बनने के लिए नहीं आई हैं आगे चलकर इस सिंगर को दुनिया भर में कविता कृष्ण मूर्ति नाम से बेशुमार शोहरत [संगीत] मिली इस सिंगर ने अपने इन्हीं मजबूत इरादों के साथ इंडस्ट्री में काम करना जारी रखा आखिरकार करीब एक दशक बीतने के बाद 1980 में फिल्म मांग भरो सजना में अपना पहला
प्लेबैक सॉन्ग काहे को ब्याही विदेश गाने का मौका [संगीत] मिला पा भरा मैंने साल 1985 में फिल्म प्यार झुकता नहीं के गाने तुमसे मिलकर ना जाने क्यों ने उन्हें प्लेबैक सिंगर के रूप में पहचान दिलाई इसके बाद फिल्म मिस्टर इंडिया के गाने हवा हवाई और करते हैं हम प्यार ने उन्हें जबरदस्त कामयाबी दिलाई करते हम प मि इसके बाद 90 के दशक में वो फिल्म इंडस्ट्री की सब से कामयाब प्लेबैक सिंगर बनी उन्हें 1995 से 1997 तक लगातार तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला उन्होंने एक बेहद मंझे हुए कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई सुरों के सागर में इस मेलोडी क्वीन की आवाज हैरान करने वाले अंदाज में अट खेलिया करती हैं दिल देके सनम आप 1942 स्टोरी फिल्म के गाने को याद कीजिए याद कीजिए प्यार हुआ चुपके से फिल्म याराना का गाना मेरा पिया घर आया या देवदास का डोला रे डोला इन सारे गानों को सुनकर लगता है
कि वाकई कविता कृष्णमूर्ति की आवाज का जवाब नहीं बोली पली आज भले ही उनकी पहचान दुनिया भर में एक बेहद कामयाब सिंगर की है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक वक्त कविता प्लेबैक सिंगर नहीं बनना चाहती थी वह अपने पिता और खुद की मर्जी के मुताबिक विदेश सेवा में अफसर बनना चाहती थी फिर कैसे पड़ोस की एक आंटी ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें कामयाब सिंगर बनाने के लिए जी जान लगा दिया यह जानेंगे इस पेशकश में आगे मत थाम थाम बदनाम है त बद मत साथ ही बताऊंगी कि अपने करियर से शुरुआती दौर में ही लता मंगेशकर मुकेश मन्नाडे और हेमंत कुमार जैसे दिग्गजों के साथ मंच पर प्रस्तुति देने के बावजूद आखिर क्यों प्लेबैक सिंगर बनने में उन्हें एक दशक लंबा समय लग गया और जानेंगे कि ताउम्र शादी ना करने का फैसला लेने के बाद आखिरकार किस वजह से कविता को तीन बच्चों के पिता से शादी करनी पड़ी तुमसे मिलक ना जाने क्यों अंत में बात होगी कि मीडिया में आकर किसलिए कविता को कहना पड़ा कि मेरे पति को मेरी नौकरानी से बचाओ इन सारी बातों पर आने से पहले जान लेते हैं
कविता कृष्णमूर्ति के सिंगर बनने की कहानी है मेरा खुदा दिलो जान सेह कविता कृष्णमूर्ति का जन्म 25 जनवरी 1958 में दिल्ली में हुआ था इनके माता-पिता तमिल थे पिता एजुकेशन एंड कल्चर अफेयर्स मिनिस्ट्री में अधिकारी थे और दिल्ली में कालीबाड़ी के पास रहते थे कविता के पड़ोस में एक बंगाली फैमिली रहती थी दोनों परिवारों में कमाल की दोस्ती थी खास तौर पर कविता की मां और उनकी पड़ोसी आंटी में कविता प्यार से इस आंटी को मामनी यानी मां ही बुलाती थी एक वक्त तो ऐसा आया जब दोनों परिवार एक साथ एक ही घर में रहने लगा सिर्फ किचन अलग-अलग थे एक बंगाली किचन और दूसरा [संगीत] तमिल कविता के पिता और पड़ोसी भट्टाचार्य एक साथ नौकरी भी करते थे इन दो परिवारों के साथ रहने का असर यह हुआ कि सब एक दूसरे के बच्चों को अपने बच्चों से कहीं ज्यादा ध्यान रखते थे
कविता की मामनी यानी बंगाली आंटी को गीत संगीत से लगाव था सो उन्होंने कविता को भी सिखाना शुरू कर दिया और बाद में कालीबाड़ी में एक महिला ट्रेनर के पास सीखने के लिए भेजने लगी दिल का क्या कर साब उन दिनों दुर्गा पूजा से पहले एक रवींद्र संगीत का कंपटीशन हुआ करता था तब कविता करीब 7 साल की थी वहां सबसे छोटे बच्चों वाले ग्रुप में कविता को फर्स्ट प्राइज मिला इसी के बाद कविता को गंधर्व विद्यालय में बलरामपुरी नाम के शिक्षक ने शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण दिया अपने स्कूल में होने वाली प्रतियोगिताओं में कविता ने तीन बार खिताब जीते अब तक भले ही कविता संगीत का प्रशिक्षण ले रही थी लेकिन उनका सपना विदेश सेवा में सिलेक्ट होकर पोस्टिंग पाने का था लेकिन उनकी मामनी उन्हें हर हाल में बड़ी सिंगर बनाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही [संगीत] थी इसी बीच पड़ोसी भट्टाचार्य रिटायर हो गए और कविता की बवी की पढ़ाई खत्म होने के बाद सिंगर बनाने का ख्वाब लेकर कृष्णमूर्ति और भट्टाचार्य परिवार मुंबई आ गया यह भी एक संयोग ही था कि कविता कृष्णमूर्ति के परिवार से और हेमा मालिनी के परिवार में पुरानी जान पहचान थी हेमा मालिनी भी उन दिनों भरत नाट्यम सीखा करती थी और साथ में कविता कृष्णमूर्ति भी दोनों परिवार मुंबई में किसी को नहीं जानता था सिवाय हेमा मालिनी के परिवार को छोड़कर इसी बीच हेमा मालिनी ड्रीम गर्ल बन गई और उन्होंने बहुत नाम कमा लिया सौदा ग सौदा ग मुंबई पहुंचने के कुछ समय बाद कविता के पिता की पोस्टिंग स्विटजरलैंड हो गई जाने से
पहले उन्होंने परिवार के लिए मुंबई में एक घर खरीदा मुंबई आकर कविता ने यहां के नामी सेंट जेवियर्स कॉलेज में दाखिला ले लिया और इकोनॉमिक्स में बीए किया वह यहां हर म्यूजिक ग्रुप में काफी एक्टिव थी इस दौरान इनकी मुलाकात दिग्गज डायरेक्टर गुरुदत्त के छोटे भाई विजय से हुई उनके जरिए कविता को बहुत सारे जिंगल्स में अपनी आवाज देने का मौका मिला इसी दौरान उन्होंने गीता दत्त के साथ अमूल के एक जिंगल में अपनी आवाज दी थी जानी जानी चली का दिल तुम पे आया जानी तुझको ही माना मैंने अपना हानी सेंट जेवियर्स कॉलेज में होने वाले एनुअल फंक्शन मलहार के दौरान फिल्म इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज इसमें गेस्ट के तौर पर आते थे एक बार इसमें संगीतकार हेमंत कुमार आए थे जिनकी बेटी राणू मुखर्जी भी इस कॉलेज की छात्रा थी यहां जब हेमंत कुमार ने कविता को गाते हुए सुना तो बहुत प्रभावित हुए राणू ने कविता को अपने पिता से मिलवाया इस मुलाकात के बाद हेमंत दा ने कविता को अपने म्यूजिक शोज में डुएट गवाना शुरू किया इसी दौरान कॉलेज में सीनियर रहे नितिन मुकेश ने कविता को अपने पिता और दिग्गज गायक मुकेश से मिला दिया इसके बाद कविता मुकेश के शोज में भी गाने लगी भी जान पहचान बढ़ती गई तो कविता महेंद्र कपूर और तलत महमूद के साथ भी कार्यक्रमों में गाने लगी इसी बीच 1974 में कविता के पिता का निधन हो गया लेकिन हेमंत कुमार और मन्ना डे
ने कविता को अपनी बेटी की तरह संभाला दुनिया को दिखाने आ इसी तरह एक बार जाने माने आरजे अमीन सयानी ने कविता को दिग्गज संगीत निर्देशक सी रामचंद्र के पास भेजा उन दिनों रामचंद्र का नाम बहुत बड़ा था वह फिल्मों में ज्यादा सक्रिय तो नहीं थे लेकिन उनका नाम बहुत बड़ा था कविता उनसे मिलने गई तो उन्होंने बोला कि बेटा कुछ सुनाओ कविता को सुनने के बाद रामचंद्र ने कहा कि तुम गाती तो अच्छा हो लेकिन मेरे पास 10 साल बाद आना क्योंकि अभी तुम बहुत छोटी हो उनकी बात सुनकर कविता और उनकी मामनी उदास हो गए कविता के कॉलेज की पढ़ाई चलती रही इसी बीच हेमंत दा ने एक रोज मन्ना डे को फोन कर दिया और बोले कि एक लड़की है जिसे आपके पास भेज रहा हूं वह आपके साथ बहुत अच्छा डुएट सकती है मन्नाडे ने बुलाया और उनका ट्रायल लिया इसके बाद वह मन्नाडे के शोज में भी गाने [संगीत] लगी ठीक इसी दौरान एक रोज हेमंत दा ने कविता को फोन करके अगले दिन राज कमल स्टूडियो पहुंचने को कहा जब वह पहुंची तो देखा कि हेमंत दा पहले से मौजूद थे उन्होंने कविता को एक गाने के दो लाइन की रिहर्सल कराई इसके बाद सब लोग किसी का इंतज ार करने लगे थोड़ी देर बाद वहां स्टूडियो का दरवाजा खुला और उससे लता मंगेशकर की एंट्री हुई हेमंत दादा ने कहा
कि कविता आज तुम्हें लता जी के साथ गाना है वही दो लाइने जिसकी मैंने अभी रिहर्सल कराई थी यह सुनकर कविता चौक भी गई और डरने भी लगी मेरी माने लगान लता को अपना भगवान समझने वाली कविता के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था जब लता जी के साथ गाने की प्रैक्टिस शुरू हुई तो डर के मारे रिहर्सल में कविता अपनी लाइन तक भूल गई खैर फाइनली लता के साथ उनका पहला गाना एक टेक में हो गया बाद में कविता को पता चला कि वह एक बांगला फिल्म का गाना था इतना मुश्किल है देखो इस दुनिया में दिल लगाना यारा दिल लगा इसी बीच एक दिन हेमा मालिनी की मां ने कविता कृष्ण मूर्ति को लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से मिलवाया इसके दो-तीन साल बाद 1978 की बात है संगीतकार लक्ष्मीकांत के सेक्रेटरी चंद्रकांत ने एक दिन कविता को फोन कर उनके घर बुलाया जहां लता के गाने की डबिंग कराई गई इसके बाद संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारे लाल अक्सर कविता से लता और आशा के गानों को डब कराने लगे महीने मही का सा कविता कृष्णमूर्ति को लेकर आपको यहां एक और दिलचस्प बात बताना जरूरी है दरअसल उनका असली नाम शारदा था दरअसल परेशानी यह थी शारदा राजन नाम की एक और बड़ी गायिका हुआ करती थी फिल्म सूरज का उनका गाना तितली उड़ी बहुत लोकप्रिय हुआ था इसलिए कविता जहां भी स्टेज शो करने जाती लोग उन्हें वही शारदा समझ लेते और उनसे तितली उड़ी गाने की फरमाइश करते इसलिए एक दिन हेमंत दा ने उन्हें नाम बदलने की सलाह दी तो उनकी मामूनी ने नाम बदलकर कविता कर दिया ईरी किसने न त मुंबई आए करीब 10 साल हो गए थे
लेकिन अब तक प्लेबैक सिंगर के तौर पर कविता की शुरुआत नहीं हो पाई थी या तो वह बड़े सिंगर्स के शो में गाती थी या फिर डबिंग का काम करती थी इन परिस्थितियों से वह परेशान हो गई थी एक दिन उनकी मुलाकात आरडी बर्मन से हुई बर्मन ने उन्हें एक गाने की डबिंग का ऑफर दिया तो उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा कि दादा मैं अगर हर जगह लता जी के गाने डब ही करूंगी तो मेरे करियर के लिए आगे बहुत मुश्किल हो जाएगी प्यार का पहला गम पहली बार है आख पंचम दा ने उसके बाद कविता से कई गाने गवाए लेकिन उनका वक्त अच्छा नहीं चल रहा था उनकी सारी फिल्में फ्लॉप हो रही थी उनका काम कम होता चला गया उसके बाद उन्होंने कविता से वादा किया कि जिस दिन भी उन्हें कोई अच्छी और बड़ी फिल्म मिलेगी व उन्हें गाने के लिए जरूर बुलाएंगे खैर आगे चलकर पंचम दा ने अपना वादा पूरा भी किया मैया यशोदा य तेरा कन्हैया पनघट हैया एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर कविता को पहला मौका दिया संगीतकार विलायत खान ने 1976 की हिंदी फिल्म कादंबरी में जिसमें उन्होंने कविता से आएगा आने वाला गीत गवाया थाने वाला आएगा य ना 1949 की हिट फिल्म महल का रिमिक्स सॉन्ग था इसलिए आधिकारिक तौर पर 1980 की फिल्म मांग भरो सजना का गाना काहे को ब्याही विदेश को ही कविता का पहला बॉलीवुड सॉन्ग माना जाता है इसके बाद प्यार झुकता नहीं
फिल्म आई इस फिल्म के निर्देशक केसी बोकाडिया और संगीतकार एस एच बिहारी थे बिहारी ने कविता से लता जी के सारे गाने डब कराए और फिल्म के आखिरी गाने तुमसे मिलकर ना जाने क्यों मैं कविता को मौका दिया जो एक बच्चे पर फिल्माया जाना था संगीतकार एच एस बिहारी ने कविता से कहा था कि तुम यह गाना पूरी शिद्दत से गाओ अगर यह गाना बच्चे की आवाज में सूट कर गया तो यह हम तुम्हारी ही आवाज में रखेंगे इस गाने का डुएट तो लता ने गाया लेकिन बच्चे वाला पाठ कविता के हिस्से में आया आज का अपना प्यार नहीं है आज प नहीं है सही मायने में कविता कृष्णमूर्ति की 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया से चमकी इस फिल्म में उन्हें संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने मौका दिया और कविता को तीन गाने गाने का मौका मिला फिल्म में किशोर कुमार के साथ उन्होंने पहला डुएट करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया से गाया जो उस वक्त बच्चे बच्चे की जुबान पर चढ़ गया करते हम प्यार मिं इसके अलावा कविता की आवाज में इस फिल्म का गाना हवा हवाई सुपर डुपर हिट हिट हुआ यही वह गाना था जिसके जरिए कविता कृष्णमूर्ति की शोहरत फिल्म जगत में बहुत तेजी से बढ़ी शहदी हर छई हवाहवाई गाने को लेकर कविता ने बताया था कि इस गाने को आशा भोसले गाने वाली थी उनसे सिर्फ शूटिंग के लिए गाना डब कराया गया था लेकिन कविता ने इसे इतनी खूबसूरती से गाया कि फाइनली उनकी आवाज में ही गाने को फिल्म में शामिल कर लिया गया मिस्टर इंडिया फिल्म की कामयाबी के बाद कविता की किस्मत का सितारा बहुत तेजी से चमका अब उनके पास कई सारी फिल्मों में गाने के ऑफर आने [संगीत] लगे संगीतकार आरडी बर्मन को कविता से किया अपना वादा याद रहा उन्होंने अपनी फिल्म 1942 ए लव स्टोरी में कविता को मौका दिया तो उन्होंने भी अपनी प्रतिभा के मुताबिक पूरी शिद्दत से फिल्म का एक गाना प्यार हुआ चुपके से रिकॉर्ड किया उनकी गायकी ने अपना असर छोड़ा और और इस गाने के लिए उन्हें 1995 में पहली बार बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्म फेयर अवार्ड मिला प्यार हुआ
चुपके से इस सम्मान के लिए कविता को करीब एक दशक लंबा इंतजार करना पड़ा अवार्ड से हौसला अफजाई हुआ तो कविता ने ना सिर्फ हिट गानों की झड़ी लगा दी बल्कि लगातार तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड अपने नाम कर कई बड़ी सिंगर्स की नींदें भी उड़ा दी 1995 के बाद साल 1996 में फिल्म याराना के गाने मेरा पिया घर आया और 1997 फिल्म खामोशी द म्यूजिकल के गीत आज मैं ऊपर के लिए कविता को फिल्म फेयर अवार्ड दिया गया इस तरह 1995 96 और 97 3 साल लगातार उन्होंने यह सम्मान अपने नाम किया मेरा पिया घर आया होरा आज मैं ऊपर आसमा नीचे 90 के दशक में कविता कृष्णमूर्ति का करियर बहुत तेजी से चमका इस दौर में वह अल्का और अनुराधा पौडवाल को कड़ी टक्कर देने लगी थी अनुराधा टी सीरीज के लिए जब सिर्फ भक्ति गीत गाने लगी इसका फायदा कविता को भी मिला 90 और साल 2000 के शुरुआती दौर की ज्यादातर बड़ी फिल्मों में या तो उन्हें मौका मिलता या फिर अल्का को इस दौर में वह सबसे कामयाब सिंगर रही तेरे सजना न रे रे इसके साथ ही वह तमाम बड़े संगीतकारों की पसंद बन गई अपने करियर में उन्होंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल बप्पी लाहिड़ी आनंद मिलिंद रहमान राजेश रोशन नदीम श्रवण जतिन ललित अन्नू मलिक और इस्माइल दरबार जैसे संगीतकारों के साथ तमाम हिट गाने रिकॉर्ड किए छो छो 1987 की फिल्म मिस्टर इंडिया में अपने गानों की कामयाबी के बाद कविता ने तय कर लिया था कि वह शादी नहीं करेंगी अपनी गायकी और इस पेशे से उन्हें ऐसा प्यार हुआ कि उन्हें जिंदगी में किसी हमसफर की जरूरत नहीं मालूम पड़ती थी उन्हें कुत्तों से बहुत प्यार है घर आती थी तो कुत्तों के साथ खेलती थी फिर एक दिन ऐसा आया कि कविता को अपना फैसला बदलना पड़ा दरअसल एक बार उन्हें मशहूर वायलिन वादक डॉक्ट एल सुब्रमण्यम का फोन आया और उन्होंने बताया कि वह एक फिल्म कर रहे हैं और उसमें उन्हें
हरि हरण के साथ एक गाना गवाना चाहते हैं तय तारीख पर कविता गाने की रिकॉर्डिंग के लिए बेंगलोर पहुंच गई डॉक्टर सुब्रह्मण्यम के परिवार से कविता पहले से परिचित थी पत्नी विजी शंकर की कैंसर के चलते मौत के बाद सुब्रमण्यम अपने तीन बच्चों की परवरिश कर रहे थे कविता ने उनसे मिलकर सहानुभूति प्रकट की और उनका हालचाल जाना सुब्रमण्यम ने कहा कि बस किसी तरह जिंदगी कट रही है इसके बाद रिकॉर्डिंग के सिलसिले में कविता का अक्सर बेंगलोर जाना होता था जहां सुब्रमण्यम और उनके बच्चों से भी मुलाकात होती थी सुब्रमण्यम एक बेहद सुलझे और शरीफ इंसान है यही वजह रही कि कविता उनकी तरफ कुछ आकर्षित भी हुई और कुछ सिंपैथी फैक्टर ने भी काम किया एक वक्त आया जब दोनों को लगने लगा कि वह एक दूसरे की जरूरत [संगीत] हैप क्या जब दोनों ने शादी का फैसला किया तो कविता की मां और मामनी डर गई उनको लगा कि कविता का कामयाब प्लेबैक सिंगर का सफर कहीं बीच में ही ना रुक जाए साथ ही तीन बच्चों के पिता से शादी करने का फैसला उन्हें ज्यादा अटपटा लग रहा था खैर कविता ने उन्हें भरोसे में लेकर करीब 40 साल की उम्र में साल 1999 में सुब्रह्मण्यम से शादी कर ली तब सुब्रह्मण्यम की बड़ी बेटी 13 साल और दो बेटे सात और करीब 5 साल के थे कविता कहती हैं कि शादी के तुरंत बाद उन्हें मां बुलाने वाले बच्चे मिल गए और एक रेडीमेड फैमिली [संगीत] भीरे ली नाम साल 2010 में कविता की शादीशुदा जिंदगी में तब एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई जब उनकी नौकरानी ने उनके पति पर छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया दरअसल हुआ यूं था कि कविता के घर से 000 और
उनकी बेटी की सोने की चेन गायब हो गई थी नौकरानी पर चोरी का शक जाहिर करते हुए सुब्रह्मण्यम ने थाने में शिकायत दर्ज करा दी इसके बाद वह किसी काम से भुवनेश्वर चले गए दो दिन बाद उन्हें पता चला कि नौकरानी ने उनके खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज करा दिया है दरअसल 2009 में शाइनी आहूजा केस के बाद घरेलू नौकरा नियों द्वारा ब्लैकमेल करने के कई मामले सामने आ रहे थे सुब्रह्मण्यम की नौकरानी ने भी ऐसा ही किया वह मीडिया में जाकर बयान देने लगी इसके बाद कविता कृष्ण मूर्ति को अपने पति के बचाव में उतरना पड़ा और यह मामला बाद में सुलझ गया सारा सारा दिन तुम काम करोगे प्यार कब करोगे आज कविता कृष्ण मूर्ति फिल्मों में गाने से दूरी बना चुकी है वह ब्रोंकलर हैं जिससे साइनस की बहुत सारी समस्याएं होती हैं साथ ही अस्थमा का भी असर है फिर भी उन्होंने गाना पूरी तरह से नहीं छोड़ा है आज भी वह स्टेज शो करती [संगीत] हैं अपने करियर में उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़ समेत करीब 45 क्षेत्रीय भाषाओं में गाने गाए हैं वह अब तक करीब 25000 गाने गा चुकी हैं चार बार फिल्म फेयर के अलावा साल 2005 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया दिल फूल जैसा ला कविता आजकल तमाम रियलिटी शोज में बतौर गेस्ट जज नजर आ जाती हैं तो इस पेशकश में आज बस इतना ही कविता की सेहतमंद और लंबी उम्र की कामना करते हुए मैं आपसे विदा लेती हूं कार्यक्रम पसंद आया हो तो चैनल को सब्सक्राइब करिएगा आपसे फिर होगी मुलाकात नमस्कार