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ईरान से गद्दा!री कर UAE के साथ मिला पाकिस्तान!

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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सिर्फ ईरान, अमेरिका और इजराइल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इस आग में कई दूसरे देश भी सीधे तौर पर शामिल होते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच पीस मिडिएटर यानीशांति वार्ता कराने वाला देश बता रहा है तो दूसरी तरफ उसी पाकिस्तान ऐसा कदम उठा दिया है जिसने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने 8000 सैनिक, JF70 फाइटर्स, और HQ9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है।

यानी एक तरफ पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ वो उसी खेमे को सैन्य ताकत दे रहा है जिसे ईरान अपना सबसे बड़ा विरोधी मानता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यूएई और सऊदी अरब दोनों लंबे समय से ईरान के साथ टकराव की स्थिति में रह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या अब पाकिस्तान खुलकर गल्फ ब्लॉक के साथ खड़ा हो गया है? क्या इस कदम से ईरान और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है और क्या पाकिस्तान की न्यूट्रल मिडिएटर वाली छवि अब खतरे में पड़ गई है?

दरअसल पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी इजराइल के साथ टकराव और हॉर्मज स्टेट में जारी सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है।

इसी बीच पाकिस्तान लगातार खुद को एक ऐसे देश के तौर पर पेश कर रहा था जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। यहां तक कि इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का पहला दौर भी आयोजितहोने की खबरें सामने आई थी। लेकिन अब पाकिस्तान की नई सैन्य तैनाती ने उसके इरादों को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि जिस समय पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है, उसी समय वो सऊदी अरब को सैन्य ताकत और सुरक्षा कवच भी दे रहा है। और यही वजह है कि अब मिडिल ईस्ट की राजनीति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

रॉयटर समेत कई रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब में लगभग 8000 सैनिक तैनात किए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान ने अपने JF70 लड़ाकू विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन यानी करीब 16 फाइटर जेट्स सऊदी अरब भेजे हैं। इतना ही नहीं चीन निर्मित एचक्यू एयर डिफेंस सिस्टम और भी सऊदी अरब में तैनात किए गए हैं। जिन्हें पाकिस्तानी सैनिक ही ऑपरेट कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह तैनाती पिछले साल हुए एक गोपनीय रक्षा समझौते के तहत की गई है।

जिसके अनुसार किसी भी हमले की स्थिति में पाकिस्तान और सऊदी अरब एक दूसरे की रक्षा करेंगे। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही यह बयान दे चुके हैं कि इस समझौते के तहत सऊदी अरब पाकिस्तान की न्यूक्लियर सिक्योरिटी छतरी के दायरे में आएगा। यानी अगर मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान सिर्फ कूटनीति नहीं बल्कि सैन्य स्तर पर भी गल्फ ब्लॉक के साथ खड़ा दिखाई देगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान सऊदी अरब में अपने 80 हजार तक सैनिक भेज सकता है। अब यही कदम पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ वाली छवि पर सवाल खड़े कर रहा है।

क्योंकि ईरान लंबे समय से सऊदी अरब और यूएई को अपने सबसे बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंदियों के तौर पर देखता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की ये सैन्य तैनाती ईरान को बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है। फिलहाल मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान का यह कदम नई भू राजनीतिक हलचल पैदा कर चुका है। एक तरफ पाकिस्तान खुद को शांति वार्ता कराने वाला देश बता रहा है तो दूसरी तरफ उसकी सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि वो गल्फ देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर रहा है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रख पाएगा या फिर उसकी यह रणनीति उसे सीधे मिडिल ईस्ट पावर पॉलिसीज का हिस्सा बना देगी क्योंकि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान के रिश्ते पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरण तय कर सकते हैं।

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