आज एक ऐसा सवाल जो कानपुर से लेकर लखनऊ तक की गलियों में गूंज रहा है। क्या प्रतीक यादव की मौत सिर्फ एक हादसा था या फिर यह एक प्लान किया गया कत्ल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जो खुलासा किया है, उसने इस पूरे केस को एक भयानक मोड़ दे दिया है। सवाल यह है कि मौत से पहले आखिर प्रतीक यादव के साथ क्या हुआ था? किसने उसे बेरहमी से पीटा?
और वो छह निशान वो छह निशान क्या गवाही दे रहे हैं आज इस वीडियो में हम प्रतीक यादव की उस दर्दनाक सच्चाई को डिकोड करेंगे जो शायद अब तक पर्दे के पीछे छुपी हुई थी। दोस्तों प्रतीक यादव की मौत की खबर जब सामने आई थी तो कई तरह की बातें हो रही थी। लेकिन अब जब ऑफिशियल पोस्टमार्टम रिपोर्ट की डिटेल्स निकल कर आई हैं तो उन्होंने पुलिस और परिवार दोनों के होश उड़ा दिए हैं। रिपोर्ट साफ-साफ कह रही हैं कि प्रतीक के शरीर पर एक नहीं दो नहीं बल्कि पूरे छह गहरी चोट के निशान मिले हैं। अब यहां से कहानी दो हिस्सों में बट जाती है
और यही वो पॉइंट है जहां एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट की नजर जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन छह निशानों में से तीन निशान पुराने हैं और तीन निशान, तीन जख्म तो बिल्कुल ताजा हैं। पहले बात करते हैं उन तीन पुराने निशानों की। डॉक्टर्स का कहना है कि यह चोटें लगभग एक हफ्ते पुरानी है। इसका मतलब यह निकलता है कि प्रतीक पिछले कई दिनों से किसी के निशाने पर थे। उन्हें पहले भी डराया गया, धमकाया गया था या फिर उनके साथ मारपीट की गई थी। क्या प्रतीक ने यह बात किसी को बताई थी? क्या वह किसी बड़े खतरे को महसूस कर रहे थे? एक हफ्ते पहले उन पर हुए उस हमले का सच अगर सामने आ जाए तो शायद कातिल तक पहुंचा जा सके। लेकिन जो सबसे ज्यादा डराने वाली बात है वो है बाकी तीन ताजा निशान। यह निशान बताते हैं कि मौत से ठीक पहले प्रतीक के साथ जद्दोजहद हुई है। उन्हें बेरहमी से पीटा गया था।
यह कोई नॉर्मल चोट नहीं है। यह एंटम इंजरीज है। यानी वो चोटें जो मरने से पहले शरीर पर दी गई हैं। तो दर्शकों अगर इसे एक पत्रकार की नजर से देखें जब किसी बॉडी पर पुराने और नए दोनों निशान मिलते हैं तो या तो यह स्लो टॉर्चर या कंटीन्यूअस हरासमेंट की तरफ इशारा करता है। यह निशान चीख-चीख कर कह रहे हैं कि प्रतीक की मौत कोई सडन इवेंट नहीं था। बल्कि एक सिलसिला था जो पिछले सात आठ दिनों से चल रहा था। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है वो कौन लोग हैं जो प्रतीक के इतने करीब थे कि उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस अब उन तीन पुराने निशानों की टाइमलाइन मैच कर रही है। एक हफ्ते पहले प्रतीक कहां थे? किस-किस से मिले थे, और वो कौन सा विवाद हो सकता है जो उन्हें मौत की दहलीज तक ले गया? परिवार का रोना और उनका गुस्सा जायज है। उनका कहना है कि अगर रिपोर्ट में चोटें हैं तो फिर यह हादसा कैसे हो सकता है?
क्या यह किसी फिजिकल असॉल्ट का केस छुपाने वाली बात है? पोस्टमार्टम की एक-एक लाइन अब इस केस की बड़ी विटनेस बन चुकी है। दोस्तों, प्रतीक यादव सिर्फ एक नाम नहीं है। यह एक सिस्टम की परीक्षा है। अगर शरीर पर मिले यह छह निशान सही वक्त पर पहचान लिए जाते, अगर एक हफ्ते पहले हुई मारपीट पर एक्शन लिया गया होता, तो शायद प्रतीक जिंदा होते। पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अब इन्हीं छह निशानों के इर्द-गिर्द घूम रही है। कौन था वो जो प्रतीक को थोड़ा-थोड़ा करके खत्म कर रहा था? या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी खेल हम इस केस पर नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई नया खुलासा होता है हम आप तक पहुंच जाएंगे। आप देख रहे हैं वन इंडिया। मैं हूं आकर्ष कौशिक। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।