नवविवाहित पत्नी संग बाबा केदारनाथ के दर्शन कर लौट रहे पति की खुशियां उस समय काफुर हो गई जब उसे पता चला कि उसकी पत्नी चलती ट्रेन से गायब हो गई। नंदा देवी एक्सप्रेस रात का सन्नाटा और अचानक एक महिला का गायब हो जाना। पांच दिनों तक उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा रहा। पुलिस पटरिया झानती रही और सीसीटीवी कैमरे सफेद हाथी सबूत हुए। लेकिन अब इस मिस्ट्री से पर्दा उठ गया है। प्रज्ञा सिंह मिल गई हैं। लेकिन उनके गायब होने की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं। आखिर लक्सर से लापता हुई प्रज्ञा सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार के बेगूसराय कैसे पहुंच गई?
पूरा मामला आपको तफसील से समझाते हैं। 5 मई की वो रात कानपुर के रहने वाले मनीष अग्रिहर और उनकी पत्नी प्रज्ञा सिंह नंदा देवी एक्सप्रेस में सवार थे। केदारनाथ के दर्शन की थकान और घर लौटने की जल्दी। ट्रेन देहरादून से गाजियाबाद की ओर दौड़ रही थी। हरिद्वार तक सब कुछ सामान्य भी था। थोड़ी देर में मनीष की आंख लग गई। लेकिन जब मुजफ्फरनगर के पास उनकी नींद खुली तो बगल की सीट खाली थी। प्रज्ञा वहां नहीं थी। मनीष को एक बार को तो यकीन नहीं हुआ। अलग-अलग बोगी में खोजा लेकिन प्रज्ञा कहीं नहीं मिली। मनीष ने रेलवे पुलिस से संपर्क किया तब जाकर प्रज्ञा की आखिरी मोबाइल लोकेशन मिली और उसके बाद गहरा गया सन्नाटा।
जैसे दर्शन कर उसके बाद ये जो पता चला रुड़की से कैसे ये लापता हुई कैसे ट्रेन से उतरी अगर आज ये सीसीटीवी कैमरे रेलवे रेलवे में लगे होते तो आज हम पांच दिन से जो छान छान रहे थे इधर-उधर तो वो हमको ना करना पड़ता। मामला पुलिस तक पहुंचा तो सिस्टम की पोल खुल गई। जिस लक्सर और मुजफ्फरनगर स्टेशन के भरोसे सुराग मिलने की उम्मीद थी, वहां के सीसीटीवी कैमरे खराब निकले। रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर कैमरे ठीक होते तो शायद प्रज्ञा का पता पहले ही चल जाता। यह तो एक लड़की का मुद्दा है। लाखों जनता आती है चारधाम यात्रा करने। उसके बाद भी रेलवे में कैमरे नहीं और रही लड़की की बात।
आज यह बेगूसराय से लश्कर पुलिस ने सकुशलता बरामद कर लिया है और लड़की आ गई है। पूछताछ चल रही है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, अनहोनी की आशंका गहरा रही थी। मनीष ने मुख्यमंत्री और डीजीपी से गुहार लगाई। पुलिस के लिए यह एक ब्लाइंड केस बन चुका था। ट्रैक पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। लेकिन ना तो कोई चश्मदीद मिला और ना ही कोई सुराग। हालांकि उत्तराखंड पुलिस ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया। साफ बता दिया कि लड़की अपनी नाराजगी की वजह से ट्रेन से उतर कर गई थी। तो कल शाम फाइनली वह बच्ची जो मिसिंग थी
उसने अपने परिजनों को संपर्क किया किसी नए नंबर से। परिजनों को संपर्क करने के बाद हमने उसकी लोकेशन ट्रेस करी तो फाइनली वो बेगूसराय में ट्रेस हुई। तो पुलिस ने भी वहां तक अप्रोच करी। तो अप्रोच करने के बाद उसका प्रथम दृष्ट्या ये कहना था कि मैं थोड़ा मेरी नाराजगी हो गई थी और मैं अपनी मर्जी से ही बिना किसी के दबाव में घर वहां से निकल गई थी। छ दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खबर आई बिहार के बेगूसराय से। प्रज्ञा सिंह सुरक्षित मिल गई। लेकिन सवाल वही था वो वहां कैसे पहुंची? जांच में जो सच सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ट्रेन में सफर के दौरान प्रज्ञा और मनीष के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। यह झगड़ा इतना बढ़ा कि प्रज्ञा ने गुस्से में आकर ट्रेन से उतरने का फैसला कर लिया। यहां पे लक्सर कोतवाली में उन्होंने एक गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। उस संबंध में पुलिस जांच पड़ताल कर रही इलेक्ट्रॉनिक्स का भी उसमें सहायता ली थी।
तो कल यह बेगूसराय में वो मिल गई हैं। सकुशल मिल गई है महिला और अब उनके जो बयान होंगे उस संबंध में वो बयान लेने के बाद उनकी आगे विस्तृत कारवाई की जाएगी। बिल्कुल सकुशल हैं। कल वो मिल गई है। उसके पहले उनकी मदर से फोन पे बात भी हो गई थी और जैसे ही वो यहां पे आएंगी और जो वो बयान देंगी उस हिसाब से आगे कारवाई की जाएगी। मर्जी से गई थी। लेकिन अभी जो उनकी बयान मजिस्ट्रेट के सामने होंगे उसके उसके ही हिसाब से आगे की तफ्तीश की जाएगी। प्रज्ञा अब सुरक्षित हैं और अपने परिवार के पास कानपुर पहुंच चुकी हैं। लेकिन इस घटना ने कई सबक छोड़ दिए। क्या एक आपसी झगड़े का अंजाम इतना खौफनाक होना चाहिए था कि पूरा प्रशासन और परिवार छ दिन तक खौफ के साए में जिए। और दूसरा बड़ा सवाल रेलवे पर क्या यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। अगर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे तो अपराधी और संदिग्ध परिस्थितियों का पता कैसे चलेगा? एबीपी गंगा खबर आपकी जुबां आपकी