मधुबन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले कभी मुस्कान मन चुपके चुपके सारी दुनिया से छुपके तुमने कभी जागे सोए कभी हंसते आती कभी तन्हा 2000 के दशक की शुरुआत में एक ऐसी लड़की ने बॉलीवुड में कदम रखा जिसकी खूबसूरती और मासूमियत पर पूरा देश फिदा हो गया। जिसको दिल दिया है मैंने जिसको प्यार किया है। एक ऐसी एक्ट्रेस जिसकी पहली ही फिल्म ना सिर्फ सुपरहिट हुई बल्कि ऑस्कर तक जा पहुंची और देखते ही देखते
यह लड़की बन गई हर घर की चुलबुली गौरी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जिस एक्ट्रेस ने अपने करियर की शुरुआत में आमिर खान, अमिताभ बच्चन और संजय दत्त जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया जिसकी फिल्में नेशनल अवार्ड जीतती रहीं। वह अचानक बॉलीवुड से गायब हो गई। क्या वजह थी कि टॉप पर चल रहा करियर धीरे-धीरे बिखरता चला गया। अपनी तनाइयों का मुझे कोई गम नहीं। तुमने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।
चलो कोई वादा तो पूरा कर रहे हो। क्या एक गलत फिल्म या एक गलत फैसला बन गया इनके करियर के पतन की वजह। आप सही कह रहे हैं पापा। और सही कह रही थी मम्मी। मुझे ये समझना चाहिए था कि आज से 12 साल पहले आप दोनों ने मुझे डिसोन कर दिया था। पराया समझ लिया था। जिस एक्ट्रेस ने लगान जैसी फिल्म से इतिहास रचा उसी ने बाद में ऐसी फिल्मों में काम किया जिन्हें लोग बी ग्रेड तक कहने लगे। तू जान से प्यारा हो गया जीने का सहारा हो गया। तो आखिर क्या है ग्रेसी सिंह की असली कहानी और क्यों इन्होंने ग्लैमर की दुनिया छोड़कर अध्यात्म की राह चुन ली? हमने आपको अनेक अवसर दिए किंतु आज नहीं।
आज हम आपको बताएंगे और आज ग्रेसी कहां और किस हाल में है। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं श्वेता जया और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें। आज हम बात करेंगे उस एक्ट्रेस की जिन्होंने बहुत कम वक्त में सफलता की ऊंचाइयों को छुआ और फिर उतनी ही तेजी से इंडस्ट्री में गुमनाम हो गई। तू ही बता जिंदगी जो भी हुआ ग्रेसी सिंह का जन्म 20th जुलाई 1980 को दिल्ली में एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। इनके पापा का नाम स्वर्ण सिंह और मम्मी का नाम वजिंदर कौर था। पापा एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और मम्मी टीचर थी।
ग्रेसी के दो छोटे भाई-बहन भी थे। इनकी शुरुआती स्टडी दिल्ली से ही हुई और इन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही भरनाट्यम नृत्य सीखना भी शुरू कर दिया। आगे चलकर इन्होंने ओडीसी, मणिपुरी और कत्थक की भी बकायदा ट्रेनिंग ली। साथ ही एक डांस ग्रुप प्लेनेट के साथ भी जुड़ गई। ग्रेसी ने आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया और इन्हीं दिनों इनका डांस ग्रुप एक शो के लिए दिल्ली से मुंबई गया जिसके शो से पहले सभी डांसर्स का मेकअप हो रहा था। तभी इनके मेकअप आर्टिस्ट ने इनकी खूबसूरती को एप्रिशिएट करते हुए इन्हें फिल्मों में ट्राई करने की सलाह दी।
लेकिन ग्रेसी ने बताया कि इन्हें तो एक्टिंग वगैरह बिल्कुल नहीं आती। इस पर उन मेकअप आर्टिस्ट ने इनकी मुलाकात संजीव भट्टाचार्य नाम के टीवी शो डायरेक्टर से करवाई और उन्हें भी ग्रेसी पसंद आ गई। संजीव उस दौरान एक टीवी शो अमानत बना रहे थे जिसमें ग्रेसी को कास्ट कर लिया। अमित मेरे साथ पढ़ता है। मैं उसे चाहती हूं। वो भी चाहता है मुझे। उसने वादा किया है। उनसे शादी करेगी। शुरुआत में इन्हें डायलॉग्स नहीं दिए जाते थे क्योंकि इन्हें डायलॉग डिलीवरी की ट्रेनिंग नहीं मिली थी। लेकिन धीरे-धीरे सेट पर दूसरे एक्टर्स को देखकर इन्होंने सीखना शुरू किया और ग्रेसी उस सीरियल की टीम से 150 एपिसोड तक जुड़ी रही। इसी दौरान यह फिल्मों के लिए भी ट्राई करती रही और अपने फ्री वक्त में ऑडिशन देने जाने लगी। इसी समय इन्होंने हुतू तू और हम आपके दिल में रहते हैं जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार भी किए। कितने जोर जुगाड़ करके तुम्हारी शादी करवाई थी और तीन ही महीने में तुम्हारे पतिदेव ने वापस यहां लाके पटक दिया। क्यों भाई तुम्हारे दिल के ऑपरेशन का खर्चा मैं क्यों करूं? एक बार जब यह रवि चोपड़ा के एक टीवी सीरियल मैं दिल्ली हूं की शूटिंग कर रही थी तभी इनकी मुलाकात एक बहुत ही सीनियर सेक्रेटरी रमेश जोशी जी से हुई।
उन्होंने ग्रेसी को कहा कि आपको फिल्मों में काम करना चाहिए और इन्हें आशुतोष गोवारीकर के पास मिलाने ले गए। उन दिनों आशुतोष जो फिल्म बना रहे थे उसके लिए उन्हें एक गांव की लड़की की तलाश थी जिसे अच्छा डांस भी आता हो। ग्रेसी अच्छी डांसर तो थी ही। इन्होंने उस रोल के लिए ऑडिशन दिया और कई नामी एक्ट्रेसेस को पछाड़ते हुए वह फिल्म हासिल कर ली। लेकिन जब इन्हें पता चला कि इनके इस फिल्म में आमिर खान हीरो हैं तो यह बेहद घबरा गई और शूटिंग से पहले तो वाकई कांप रही थी कि क्या होने वाला है। आमिर खान के सामने कैसे डायलॉग बोलेंगी। उन्होंने इतनी जरूर कही कि जिस घर में मैं जाऊंगी उसके आंगन में एक नीम का पेड़ होगा। घर के बगल में एक बड़ा खेत होगा। ग्रेसी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह सेट पर ज्यादा लोगों से बात नहीं करती थी और हर समय काफी नर्वस महसूस करती थी। खैर, आमिर तो मिस्टर परफेक्शनिस्ट है ही। उन्होंने ग्रेसी का भरपूर साथ दिया और शूटिंग पूरी हुई। साल 2001 में आई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और ग्रेसी रातोंरात स्टार और हार्ट थ्रोब सेंसेशन बन गई। मधुबन में जो कन्हैया किसी को पी से मिले कभी मुस्कान यह फिल्म बॉलीवुड में एपिक फिल्मों में शामिल हुई। कई नेशनल अवार्ड मिले और इसे ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट किया गया। तो इ बताने आई थी कि मैं तोहरे साथ हूं।
भरोसा है मोहे तुझ पे तोरी हिम्मत पे। अपनी पहली ही फिल्म से ग्रेसी सिंह बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार की जाने लगी। मैंने प्यार तुझसे है किया। हां, मैंने तुझे। इसके बाद इनके पास फिल्मों की बाढ़ लग गई और इसी दौरान इन्हें मौका मिला बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म में काम करने का। जी हां, वो वो यहां एक झरना है ना। वो अच्छा तो ये डॉक्टर की टीम झरना देखने गई थी। क्या बीमारी है झरने को? साल 2003 में आई फिल्म अरमान में इन्होंने अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर और प्रीति जिंटा जैसे इस्टैब्लिश्ड स्टार्स के साथ काम किया। जाने ये क्या हो गया। दिल तो जैसे इसी साल इनकी एक और शानदार फिल्म गंगाजल भी रिलीज हुई जिसमें यह अजय देवगन के अपोजिट नजर आई। इस फिल्म को भी नेशनल अवार्ड हासिल हुआ। अगर तुम जानते हो कि वो गलत है तो कोई एक्शन क्यों नहीं लेते? एक रिस्क ले रहा हूं। मुझे लगता है कि बच्चा यादव अंदर से गलत आदमी नहीं है। भरोसा कर सकते हो उस पर। इसी साल के एंड में आई फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस जिसने ग्रेसी सिंह के करियर को आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। छन छन छन ना छन छन छन मन गाए। ग्रेसी सिंह को फिल्मों के खूब ऑफर्स आ रहे थे। लेकिन इन्होंने सबको यह कह रखा था कि यह कोई भी ऐसा रोल नहीं करेंगी जिसमें इन्हें एक्सपोज करना पड़े या किसिंग सीन या बोल्ड सीन देने हो। इस वजह से कई डायरेक्टर्स इनसे नाराज हो गए कि तुम में कौन से सुर्खाब के पर लगे हैं जो इतने नखरे दिखा रही हो। बॉलीवुड के लिए यह नखरा, ईगो और घमंड ही होता है। जब कोई एक्ट्रेस अपनी शर्तों पर काम करने की कोशिश करती है। जिस इंडस्ट्री में कंप्रोमाइज और कास्टिंग काउच आम बात हो, वहां किसी आउटसाइडर लड़की का ऐसे ना बोलना, फिल्म मेकर्स को डाइजेस्ट नहीं हो रहा था और धीरे-धीरे इन्हें लेकर गसिप का दौर भी शुरू हो गया कि उसे कास्ट मत करो।
उसके बड़े ट्रम्स हैं। ग्रेसी को फिल्मी पार्टियों और अवार्ड शोज़ वगैरह से भी इनवाइट आने बंद हो गए और बॉलीवुड का एक तबका इनको बॉयकॉट करने लगा। इसी दौरान इन्होंने जिन फिल्मों को ठुकराया उनमें से एक थी कयामत। इस फिल्म में इन्हें नेहा धूपिया वाला रोल ऑफर हुआ था। लेकिन यह किरदार थोड़ा बोल्ड था तो ग्रेसी ने करने से मना कर दिया था। इसका रिजल्ट यह हुआ कि धीरे-धीरे इनके पास बड़े बैनर की फिल्मों के ऑफर आने बंद हो गए। साल 2004 तक जो ग्रेसी सिंह डायरेक्टर प्रोड्यूसर की पहली पसंद हुआ करती थी, अब इनसे सभी कन्नी काटने लगे थे। इस दौरान इन्होंने बाकी जिन फिल्मों में काम किया वो या तो पूरी नहीं हो पाई या फिर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं। यह फिल्में थी मुस्कान, शर्त द चैलेंज, वजह द रीज़न, यही है जिंदगी, चंचल आदि। मैंने जिसको दिल दिया है, मैंने जिसको प्यार किया है। भूलते हैं तो भूलने दो। एक तो गलती करते हैं, ऊपर से अकड़ते भी हैं। देख दादी, जब तक लड़का तुझे पसंद नहीं आता ना, शादी मत करना। जानकारों की मानें तो इनके पर्सनल सेक्रेटरी रमेश जोशी जी का इसी दौरान निधन हो गया और इससे भी इनके करियर पर बुरा इफेक्ट पड़ा क्योंकि ग्रेसी के पीआर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। इस दौरान इन्होंने कई रीजनल फिल्मों में भी काम किया जिनमें मराठी, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, बंगाली और भोजपुरी वगैरह फिल्में भी शामिल रही। अंदर रूम लोली इसके साथ ही ग्रेसी ने तब कई गलतियां भी की और उन फिल्मों को भी साइन किया जो इनके लायक नहीं थी या जो इनके प्रोफाइल और कद को डाउन कर रही थी जिनमें कुछ बी और सी ग्रेड की फिल्में भी शामिल रहीं। मेरा वादा रहा हो ये वादा कहते हैं कोई भी फैसला करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए हमारे पास रात भर का वक्त है
अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हें वाकई अपने आप को पुलिस के हवाले करना चाहिए ग्रेसी ने तभी एक फिल्म साइन की जिसे कमाल आर खान प्रोड्यूस कर रहे थे। यह फिल्म थी साल 208 में आई देशद्रोह। बचपन से लेकर आज तक आपने हमेशा मेरी मदद की है। आज मैं जो कुछ भी हूं आपकी वजह से हूं। और इसी फिल्म को करने के बाद बॉलीवुड में ग्रेसी सिंह के करियर का द एंड हो गया। ग्रेसी सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म देशद्रोही में मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ था। मुझे जब इस फिल्म की स्टोरी सुनाई गई थी तब मुझे यह बहुत पसंद आई। इसलिए मैंने इसे साइन किया। लेकिन जिस दिन मैं फिल्म के शूट पर पहुंची तब मुझे पता चला कि मेरी फिल्म के हीरो तो कमाल आर खान ही हैं। उसी समय मुझे लग गया था कि मुझे यह फिल्म नहीं करनी चाहिए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सारी फॉर्मेलिटीज पूरी हो चुकी थी। इसलिए मुझे ना चाहते हुए भी इस फिल्म को करना पड़ा। जानकारों की मानें तो इस फिल्म ने ग्रेसी सिंह के पहले से ही खराब चल रहे करियर को और तबाह कर दिया। इसके बाद ग्रेसी को बॉलीवुड से फिल्मों के ऑफर लगभग बंद ही हो गए और बस कभी कबभार छोटे-मोटे रोल ही ऑफर होते रहे। इसके बाद इनकी कुछ और फिल्में आई लेकिन कोई भी बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और इन फिल्मों में इनका रोल भी कुछ खास नहीं था। यह फिल्में रही देख भाई देख मिलते हैं चांस बाय चांस डेंजरस इश्क, ब्लू माउंटेंस आदि। मैं अपनी जिंदगी अपने ढंग से जिऊंगी। मैंने फैसला किया है कि मैं शहर जाऊंगी सबसे दूर। एक नई जिंदगी की शुरुआत करूंगी। फिर परेशान ग्रेसी सिंह ने छोटे पर्दे का रुख किया और एक माइथोलॉजिकल सीरियल जय संतोषी मां साइन किया जिसमें इनका देवी का ही अच्छा सा किरदार था।
माता सरस्वती, माता पार्वती और माता लक्ष्मी आप तीनों ने ही हमें शस्त्र दिए थे। हालांकि इस सीरियल में ग्रेसी के ग्रेसफुल रोल को काफी पसंद किया गया और उस किरदार का असर इनकी जिंदगी पर भी पड़ा। प्रत्येक देवी की अपनी सीमाएं होती हैं। किंतु आपने अपनी समस्त सीमाओं को पार कर लिया है। ग्रेसी सिंह बॉलीवुड की उन कुछ एक्ट्रेसेस में हैं जिनका नाम कभी भी किसी कोस्टार के साथ नहीं जुड़ा। इन्होंने शादी नहीं की और आगे भी नहीं करना चाहती। क्योंकि इनका कहना है शादी इतनी इजी नहीं है जितना हम सोचते हैं क्योंकि उसमें इमोशनल बहुत बातें आ जाती हैं। फिर घर का भी ध्यान। तो अभी मैं थोड़ा फ्री रहूंगी तो इसमें कंसंट्रेट कर सकती हूं। अभी आगे बहुत कुछ करना है। आगे चलकर धीरे-धीरे ग्रेसी सिंह का मन फिल्म इंडस्ट्री की चमकदमक से उठने लगा और इन्होंने खुद को ग्लैमर वर्ल्ड से भी दूर रखना शुरू कर दिया। ग्रेसी ने फिर साल 2012 में ब्रह्मकुमारी आश्रम ज्वॉइ कर लिया और स्पिरिचुअलिटी की तरफ चली गई। इसी दौरान इन्होंने अपना एक ड्रामा ग्रुप बनाया जिसके साथ इन्होंने जगह-जगह माइथोलॉजिकल सब्जेक्ट्स पर परफॉर्म करना शुरू किया। इस दौरान इन्होंने एक माइथोलॉजिकल सीरियल संतोषी मां सुनाएं व्रत कथाएं भी किया। वैसे तो यह व्रत वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के अष्टमी को करना अच्छा होता है। फिलहाल भी ग्रेसी अपने ड्रामा ग्रुप के साथ परफॉर्म करती हैं और राजस्थान के माउंट आबू में स्थित ब्रह्मकुमारी आश्रम जाकर समय भी बिताती हैं और वहां की धार्मिक गतिविधियों में शामिल होती हैं। ब्रह्मकुमारी के सदस्य गृहस्थ जीवन नहीं जीते। इसी चलती ग्रेसी सिंह भी अपना जीवन सामाजिक कार्यों में ही बिताती हैं। एक समय पर टॉप की एक्ट्रेस में गिनी जाने वाली ग्रेसी ऐसे अध्यात्म की राह पकड़ लेंगी
और देश दुनिया ग्लैमर को छोड़कर मेडिटेशन में अपना सुकून तलाशेंगी हर किसी को इनकी जिंदगी हैरान करती है। वेल यह तो रही अभी की बात लेकिन वापस इनके करियर की तरफ देखें तो आपको क्या लगता है? क्यों ग्रेसी जैसी अच्छी आर्टिस्ट, खूबसूरत दिवा और सोफेस्टिकेटेड पर्सन बॉलीवुड में लंबा करियर नहीं बना पाई और काफी कम समय में इंडस्ट्री से गायब हो गई। अपनी राय कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर दीजिएगा। साथ ही इनकी कौन सी फिल्म या किरदार आपको सबसे ज्यादा पसंद है यह भी लिखना मत भूलिएगा। तो दोस्तों, आज की वीडियो में फिलहाल के लिए बस इतना ही। इसी तरह के कुछ और दिलचस्प किस्से कहानियों के साथ अगले एपिसोड में आपसे होगी मुलाकात। आप हमारे काम को YouTube के थैंक्स बटन के जरिए सपोर्ट कर सकते हैं। जिससे हम आपके लिए अपने तीनों चैनलों पर और बेहतरीन काम कर सकें। तो मिलते हैं अगले एपिसोड में। फिलहाल हमें दीजिए इजाजत। नमस्कार।