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“डबल M” फैक्टर ने ममता बनर्जी को कैसे नुकसान पहुंचाया ? BJP ने मुस्लिम-बहुल इलाकों में भी जीत कैसे हासिल की ?

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ममता बनर्जी की ताकत मुस्लिम वोटर और महिलाएं माने जाते थे। बीते 15 सालों से बंगाल में उनकी लगातार बनी रही सत्ता के यह मुख्य फैक्टर थे जो इस बार कमजोर पड़ते दिखे हैं। माना जा रहा है कि इसी के चलते ममता बनर्जी की पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा है। आर्चकर मेडिकल कॉलेज में रेप और मर्डर जैसी घटना ने महिलाओं के बीच सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया था। इसके अलावा महिला आरक्षण बिल के गिर जाने को मुद्दा बनाते हुए भाजपा ने जमकर प्रचार किया।

यही नहीं महिलाओं को केंद्र में रखते हुए भाजपा ने कई ऐलान भी किए। इसका सीधा असर चुनाव में दिखा। अब दूसरे एम की बात करें तो यह है मुस्लिम फैक्टर। इस बार यह समुदाय पहले की तरह लामबंद नहीं हुआ। टीएमसी में ही अंदर खाने चर्चा है कि एसआईआर, वक और ओबीसी लिस्ट से मुस्लिम जातियों को बाहर किए जाने के मसले पर ममता समाज का पक्ष नहीं रख पाई। ऐसी भावना मुस्लिमों के बीच रही और वे पहले की तरह टीएमसी के पक्ष में एकजुट नहीं रहे। दो सीटों पर जीतने वाले हुमायूं कबीर ने रहीसई कसर पूरी कर दी।

इस तरह माहौल बदलता चला गया। वहीं दूसरी तरफ हिंदू वोटर जरूर पहले के मुकाबले भाजपा के पक्ष में अधिक लामबमंद दिखे और यह चीज नतीजों में तब्दील हो गई। यहां तक कि मुर्शिदाबाद जिले में भाजपा को आठ सीटें मिल गई। यह मुस्लिम बहुल जिला है और टीएमसी यहां बीते कई चुनाव से बेहद मजबूत रही है। इसी तरह मालदा में भी भाजपा को छह सीटों पर जबरदस्त जीत मिली है। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, साउथ 24 परगना और पश्चिम वर्धमान जिले में भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा हुआ है। एक्सपर्ट मानते हैं कि मुस्लिम और महिला दो अहम फैक्टर हैं जो टीएमसी के खिलाफ चले गए।

अब मुस्लिमों की अच्छी आबादी वाली बहरामपुर सीट से भाजपा के कैंडिडेट सुब्रत मात्रा को जीत मिली है। इसके अलावा खारग्राम, कांडी, नावाग्राम, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, बेलदांगा और बुरवांग भी भाजपा जीत गई है। मालदा की इंग्लिश बाजार सीट से भाजपा के अमलान भादुरी को बड़ी जीत मिली है। वह 93,784 वोट से जीत गए। इसके अलावा हबीबपुर सीट से जोयल मुर्मू जीते हैं। भाजपा की जीत में एक बड़ा फैक्टर केंद्रीय नेतृत्व भी रहा।

पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के ज्यादातर इलाकों में खुद जाकर प्रचार किया। इसके अलावा होम मिनिस्टर अमित शाह ने 10 दिनों तक बंगाल में डेरा जमाए रखा। वहीं चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और विप्लव देव भी लगातार जुटे रहे। कई राज्यों के नेताओं ने भी बंगाल में जमकर प्रचार किया। भाजपा की रणनीति विधानसभा के लिए तो थी ही बल्कि बूथ स्तर के लिए भी पार्टी काफी एक्टिव थी। अंत में इसका असर दिखा है और ऐसी कई सीटों पर भी नतीजा पलट गया जहां भाजपा पहले नहीं जीती थी। इस अपडेट पर आपका क्या कहना है? कमेंट कर हमें जरूर बताएं।

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