जबलपुर के बरगी डैम में नाव पलटने से अभी तक नौ लोगों के शव मिल चुके हैं। जिनमें कुल 34 लोग सवार थे। 28 लोगों को बचा लिया गया है। वहीं चार लोग अभी भी लापता हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त क्रूज में लगभग 43 से 47 पर्यटक सवार थे। इस हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिवारजनों को
₹2 लाख और घायलों को ₹50 देने की घोषणा की है। उन्होंने लिखा मध्य प्रदेश के जबलपुर में नाव पलटने से हुई जान माल की हानि अत्यंत दुखद है। इस दुखद घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। ज्ञान गवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को
2 ₹ लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को ₹00 दिए जाएंगे। इस भयावह हादसे पर प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव ने शोक जताया है। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए 44 लाख की आर्थिक सहायता का ऐलान भी किया है। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। जबलपुर शहर से 40 किमी दूर बरगी बांध में दो दशक से क्रूज का संचालन हो रहा है
। इसे नर्मदा क्वीन नाम दिया गया है। क्षमता 90 पर्यटकों की है। ऐसे में भले ही ओवरलोडिंग की घटना वजह नहीं रही हो, लेकिन कहीं ना कहीं मौसम के पूर्वानुमान की अनदेखी और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवाना इसका कारण हो सकता है। अब एबीवी न्यूज़ सरकार से सवाल पूछता है कि क्या क्रूज़ का वैध फिटनेस प्रमाण पत्र था? अंतिम बार जांच कब हुई थी? क्या सभी यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी? क्योंकि अक्सर क्रूज पर लोग जैकेट उतार देते हैं
। क्या मौसम विभाग की आंधी की चेतावनी के बावजूद क्रूज को पानी में ले जाने की अनुमति दी गई? इतने बड़े जल क्षेत्र की तुलना में प्रशिक्षित गोताखोरों और लाइफ गार्ड्स की संख्या हमेशा कम रही है। घटना के समय कितने लाइफ गार्ड्स थे? जब तूफान तेज हो गया और चालक को बोट किनारे के लिए यात्रियों ने कहा तो इसे नजरअंदाज क्यों किया गया? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। इस अपडेट पर आपका क्या कहना है? कमेंट कर हमें जरूर बताएं।