मेरे पिता के जैसे पिता किसी को ना मिले। मेरी लाश को पिता हाथ भी ना लगाएं। यह शब्द वकील प्रियांंशु श्रीवास्तव के हैं। 23 अप्रैल को कानपुर कचहरी परिसर में प्रियांंशु ने अपनी जान दे दी। प्रियांंशु की उम्र 23 साल थी। लॉ से ग्रेजुएशन करने के बाद वह अपने पिता राजेंद्र कुमार के साथ प्रैक्टिस कर रहे थे। 23 अप्रैल की दोपहर करीब 3:00 बजे कचहरी में तेज आवाज आई। आवाज सुनकर सभी वकील देखने के लिए भागे। पहुंच कर देखा तो प्रियांंशु का सिर बुरी तरह फट चुका था। उसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। वहां मौजूद वकीलों ने तुरंत पुलिस को इन्फॉर्म किया और प्रियांंशु को लेकर उर्मला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रियांंशु को मृत घोषित कर दिया।
24 अप्रैल को प्रियांंशु का पोस्टमार्टम किया गया। पुलिस की जांच में प्रियांंशु के मोबाइल से दो पेज का एक लेटर भी मिला। लेटर में उसने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए। प्रियांंशु ने लिखा कि मैं एक रजिस्टर्ड वकील हूं जिसने 2025 में कानपुर से लॉ की पढ़ाई पूरी की है। वक्त की कमी होने की वजह से मैं प्रयागराज के यूपी बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाया। प्रियांंशु ने आगे कहा कि जब मैं 5 से छ साल का था तो मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई। मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही है।
लेकिन मैं आज सारी बातें बताना चाहता हूं ताकि किसी और के साथ ऐसा ना हो। 6 साल की उम्र में मैंने चोरी से फ्रिज में रखा आम का जूस पी लिया था। इसके लिए मुझे निर्वस्त्र करके घर से बाहर निकाल दिया गया। माना कि हर माता-पिता को शुरू से सख्त रवैया अपनाना चाहिए। लेकिन इतनी भी सख्ती ना हो कि बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगे। वो लिखते हैं मैंने कई बार इन सब माहौल से बाहर निकल कर आगे बढ़ने की कोशिश की। लेकिन मैं इस तरह बेगैरत की जिंदगी नहीं जीना चाहता था।
पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर बनाना। परीक्षा से एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो मारने लग जाना। ये सब तो एक हद तक समझ आता है। लेकिन हर समय हर मिनट शक की नजरों से देखना जरूरत से ज्यादा एक-एक मिनट का हिसाब लेना कहीं ना कहीं यह मानसिक टॉर्चर ही है। इस टॉर्चर के साथ मैं और नहीं जी सकता। वो लिखते हैं कि साल 2016 में मैंने नौवीं में एडमिशन लिया तो पापा ने यह शर्त रख दी कि मैं अगर कंप्यूटर का चयन नहीं करूंगा तो वो मुझे निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। उनके दबाव में आकर ही मैंने ऐसे सब्जेक्ट का चयन किया। उसे चुना जिसमें मेरा इंटरेस्ट ही नहीं था। जिसका नतीजा यह रहा कि उस सब्जेक्ट को इतना पढ़ने के बाद भी मैं उसमें ज्यादा अंक नहीं ला पाया। ज्यादा मार्क्स स्कोर नहीं कर पाया।
इसके चलते बाकी सब्जेक्ट्स को कम टाइम देने की वजह से नौवीं में मेरे नंबर कम आए। साल 2016 में करीब 4 महीने तक घर बनने की वजह से मेरे हाई स्कूल की पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाई। रिजल्ट आने से पहले पापा ने मुझे धमकी दी कि अगर हाई स्कूल में नंबर कम आए तो घर से निकाल देंगे। प्रियांंशु के मुताबिक पिता हर समय उसके ऊपर नजर रखते जिससे उसे मोहल्ले में बेइज्जती महसूस होती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लेटर में प्रियांंशु ने लिखा कि मेरे जैसे पिता किसी को ना मिले। प्रियांशु ने यह इच्छा जताई कि पिता उसके शव को हाथ भी ना लगाएं। फिलहाल प्रियांंशु के बाद उसके इस लेटर को उसकी हैंडराइटिंग और डिजिटल प्रूफ से मिलाकर जांच की जा रही है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रियांंशु के जान देने के पीछे पारिवारिक विवाद था या कोई और वजह। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी वजह सामने आ पाएगी। फिलहाल इस खबर में इतना ही। खबर लिखी है हमारी साथी रक्षा ने। मैं हूं शेख नावेद। देखते रहिए लंदन टॉक।