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पहलगाम में सबके पास है QR , हैरान पाकिस्तान।

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पहलगाम हमले को अब एक साल पूरा होने जा रहा है। नतीजतन चप्पे-चप्पे पर सेना के जवान मुस्तैद हैं। सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं। इस बीच भारतीय सेना ने के को याद दिलाते हुए औकात में रहने का संदेश दिया है। पहलगाम के लोगों को क्यूआर कोड दिए गए हैं। इस क्यूआर कोड की कहानी और इसकी रणनीति हम आपको जरूर । लेकिन उससे पहले भारतीय सेना ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर जो संदेश साझा किया है, उसे आप देखें।

आपकी स्क्रीन पर जो तस्वीर दिख रही है, यह सेना ने जारी की है। इस पर लिखा है सम बाउंड्रीज शुड नेवर बी क्रॉस्ड। गौर करें कि क्रॉस्ड की स्पेलिंग में जीरो की जगह सिंदूर की डिब्बी रखी हुई है। यह डिब्बी भारतीय सेना के शौर्य की याद दिलाती है। सिंदूर की याद दिलाती है। इस तस्वीर के निचले हिस्से में सेना ने लिखा है इंडिया डज नॉट फॉरगेट।

अब देखें कि इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए सेना ने जो लिखा सेना ने साफ तौर पर लिखा कि जब इंसानियत की सीमाएं पार की जाती हैं तो उस पर प्रतिक्रिया निर्णायक होती है। न्याय मिलता है। भारत एकजुट है। जाहिर है भारत की यह एकजुटता ऑपरेशन के समय देखने को मिली थी। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सेना हो या जनता सब एकजुट थे। पक्ष विपक्ष के नेताओं के मिलेजुले ने के पनाहगार पाकिस्तान की पूरी कलई विदेशों में जाकर खोल दी थी। लेकिन इसके साथ ही भारत ने कुछ खास तैयारियां भी की। पहलगाम बरसी के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर सेना के जवानों का पहरा है।

थल हो या जल हर तरफ सेना पसरी है। अब जानिए क्यूआर कोड क्या राज। यह जो आप पहलगाम के लोगों के हाथों में कोड देख रहे हैं, यह दरअसल जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से जारी किया गया है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पुलिस ने स्थानीय पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ाने और पोनी वालों, टैक्सी ड्राइवरों जैसे काम में लगे लोगों के लिए वेरिफिकेशन का यह क्यूआर कोड जारी किया है। इसी कोड से इन सारे लोगों की पहचान हो जाती है। इस तरीके के जरिए पुलिस 25,000 से ज्यादा लोगों को डिजिटल रूप से ट्रैक कर रही है।

पुलिस की इस पहल से किसी भी स्थानीय शख्स को कोई परेशानी नहीं है। सुनिए पहलगाम में रहने वाले बशीर अहमद की बात। मेरा नाम बशीर अहमद है। मैं लोकल पहलगांव का रहने वाला हूं सर। घोड़े वाला। अच्छा घोड़े घोड़े हैं आप? हां जी। तो ये बताइए क्यूआर कोड आपके हाथ में है। इससे क्या फायदा है.

आप लोगों को? क्यूआर कोड हमारे हाथ में इसलिए है क्योंकि यह हमारी फैसिलिटी है और कोई बाहर के लोग मतलब इनलीगल कोई आदमी नहीं आ सकता है। यह हमारे लिए बहुत अच्छे है। ये क्यूआर कोड आप लोगों को कब दिया गया है? ये लगभग 20 दिन से पहले पुलिस स्टेशन से मिला सर। अच्छा पुलिस स्टेशन से मिला है। जी सर। यानी कि आपका मानना है जो हमारे हाथ में क्यूआर कोड है ये किसी और के पास नहीं हो सकता है। कोई भी यहां पे इललीगली काम नहीं कर सकता। नहीं कर सकता। यह खासतौर पहलगांव के लिए लोकल जो घोड़े वाले हैं उसको और जो काम यहां टूरिस्ट बिज़नेस करते हैं, यह हमारे लिए बहुत अच्छा है। क्या? यह अच्छे कदम उठाया गवर्नमेंट ने। क्या घोड़े वालों को भी खाली दिया गया या टैक्सी स्टैंड दिया? नहीं नहीं बाकी लोगों को भी दिया।

अच्छा किन-किन को दिया गया है? घोड़े वाले को भी दिया। जो मजदूर है उसको भी दिया। उसको कोई मजदूर कर रहे हैं यहां पे उसको रिस्प पर मतलब लोकल आदमी वहां पुलिस स्टेशन साथ जाते हैं और यह हमारे लिए बेनिफिट अच्छी है। गुजार अहमद वाणी बताते हैं कि पहलगाम की उन लोगों ने कभी कल्पना नहीं की थी। लेकिन अब इस क्यूआर कोड से ऐसे किसी हमले की आशंका खत्म हो जाती है। जाहिर है सुरक्षा की ऐसी चाक चौबंद तैयारी के बाद यहां के टूरिस्ट प्लेसों की भी रौनक लौट रही है। आतंकी वारदात की आशंका अब लगभग खत्म हो चुकी है। जिसने यहां पे क्यूआर कोड्स प्रोवाइड किए और वह हमारे लिए बहुत ही अच्छी काम है और क्योंकि उसमें बाहर का कोई भी काम नहीं कर सकेंगे।

यहां के लोकल बंदे जो है चाहे वो ट्रांसपोर्टर है चाहे वो पोनी वाला है चाहे वो शाल वाला हो चाहे वो होटल वाला हो तो वही उसमें काम करेगा उससे हमें भी पता चलेगा हां कि ये यहां का लोकल बंदा है क्योंकि जो जिस हालात से हम गुजर गए ये हमें हमारे एक्सपेक्ट से बाहर था कि हमें जो देखना पड़ा यह दिन हमें दोबारा ना देखने पड़े कुल मिलाकर सरकार सेना और पुलिस प्रशासन ने जम्मू कश्मीर के खूबसूरती उसकी रौनक और वहां की सुरक्षा शिक्षा फिर लौटा दी है।

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