ब्रॉट टू यू बाय सलूजा गोल्ड भारत का सबसे भरोसेमंद सलूजा गोल्ड टीएमडी बार्स सलूजा गोल्ड टीएमटी अब सही पकड़े हो कांट्रेक्टर बाबू मजबूती सब कुछ है अमेरिकी राष्ट्रपति डोन्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि हम जंग जीत रहे हैं वो भी बहुत बड़े अंतर से। 20 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर दावा किया है कि अमेरिका इस संघर्ष में पूरी तरह आगे है।
उन्होंने लिखा कि मैं यह जंग बहुत बड़े अंतर से जीत रहा हूं। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। हमारी सेना ने शानदार काम किया है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर आप फेक न्यूज़ पढ़ेंगे जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉलस्टेट जनरल या वाशिंगटन पोस्ट तो आपको लगेगा कि हम हार रहे हैं। दुश्मन भी इस इन मीडिया रिपोर्ट्स को देखकर भ्रमित है। लेकिन हकीकत यह है कि उनकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उनकी एयरफोर्स कमजोर पड़ गई है। उनके पास मिसाइल या एयर डिफेंस सिस्टम नहीं बचा है
और उनके कई पुराने नेता भी अब नहीं रहे। उन्होंने आगे कहा कि सबसे अहम बात यह है कि हमने जो नाकेबंदी की है वो तब तक नहीं हटेगी जब तक कोई समझौता नहीं होता। इस वजह से ईरान को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है जो लंबे समय तक चल नहीं सकता। ट्रंप ने कहा कि कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थान ईरान के पक्ष में खड़े हैं। लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब मैं जिम्मेदारी संभाल रहा हूं। जैसे चुनाव में उन्होंने मेरा विरोध किया था वैसे ही अब भी कर रहे हैं। लेकिन नतीजा वही होगा। हम जीतेंगे। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर उनकी अगुवाई में कोई डील होती है तो वो 2015 की न्यूक्लियर डील जेसीपीओए से कहीं बेहतर होगी। जेसीपीओए यानी कि जॉइंट कॉम्प्रहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन। इसे आमतौर पर ईरान न्यूक्लियर डील के नाम से जाना जाता है।
यह समझौता 2015 में हुआ था। इसमें ईरान और दुनिया के बड़े देश जैसे कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस, जर्मनी और यूरोपीय संघ शामिल थे। इस समझौते में तय हुआ था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सिर्फ शांति के कामों के लिए करेगा। जैसे बिजली बनाने के लिए बदले में दूसरे देश ईरान पर लगी कई आर्थिक पाबंदियां हटा देंगे। उन्होंने पुरानी डील को सबसे खराब समझौते में से एक बताया। ट्रंप का कहना है कि अगर वह बीच में नहीं आते तो ईरान अब तक न्यूक्लियर वेपन बना चुका होता। जिससे इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को खतरा हो सकता था। उन्होंने दावा किया है कि उनकी डील दुनिया में शांति और सुरक्षा लाएगी। अब आते हैं पाकिस्तान में होने वाली बातचीत पर। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है। लेकिन यहां सबसे ज्यादा गड़बड़ी दिख रही है। ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि अमेरिका की हाई लेवल टीम पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुकी है। इस टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दूत स्टीव विटक और सलाहकार जेरड कुशनर शामिल हैं।
लेकिन दूसरी तरफ रटर्स और एपी की रिपोर्ट कहती है कि सोमवार तक जेडी वेंस रवाना ही नहीं हुए थे। यानी खुद अमेरिका के भीतर से ही अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। इस बीच यह भी चर्चा है कि ईरान इस बातचीत से बाहर भी हो सकता है और इसकी वजह बताई जा रही है हॉर्मोन स्टेट को लेकर हो रहा विवाद सीज फायर का उल्लंघन और अमेरिका की तरफ से ईरानी जहाज को ज्त किया जाना। ईरान ने कहा है कि हालात बातचीत के लायक नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार से ईरान के विदेश मंत्री अब्बास सराकची ने बात की और कहा कि अमेरिका की उकसाने वाली हरकतें और बार-बार सीज फायर तोड़ना सबसे बड़ी दिक्कत है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान के व्यापारिक जहाजों में दखल दे रहा है और लगातार धमकी भरी भाषा इस्तेमाल कर रहा है। अराची ने कहा कि ईरान अभी हर पहलू पर विचार करेगा और उसके बाद ही तय करेगा कि बातचीत में शामिल होना है या नहीं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियान ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर सही तरीके से बातचीत करनी है तो सबसे जरूरी है कि जो वादे किए जाएं उन्हें निभाए जाएं। ईरान को अमेरिका पर पहले से भरोसा नहीं है क्योंकि उसके पुराने अनुभव अच्छे नहीं रहे। ऊपर से अमेरिका के अधिकारी कभी कुछ कहते हैं कभी कुछ और जिससे लगता है कि वो ईरान से बराबरी की बातचीत नहीं बल्कि उसे झुकाना चाहते हैं। लेकिन ईरान साफ कहता है कि वो दबाव या ताकत के आगे झुकने वाला नहीं है। इन सबके बीच पाकिस्तान उम्मीद लगाए बैठा है कि बातचीत हो जाएगी। रॉयटर से बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा कि ईरान की तरफ से कुछ पॉजिटिव संकेत मिले हैं और कोशिश की जा रही है कि वो बातचीत में शामिल हो। उन्होंने कहा कि हालात बदलते रहते हैं लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि वो यहां आए। पिछले हफ्ते जैसे कि आप जानते हैं कि पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में पहली सीधी बातचीत हुई थी अमेरिका और ईरान के बीच जो करीब 21 घंटे तक चली थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अमेरिका की तरफ से जेडी वेंस, स्टीव विडकफ और जेरेट कुशनर शामिल थे। जेडी वेंस ने इसे निराशाजनक बताया था। जबकि ईरान ने डील ना होने की वजह अमेरिका की ज्यादा मांगों को बताया था। सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जो दो हफ्ते का सीज फायर हुआ है, उसकी डेडलाइन 22 अप्रैल को खत्म हो रही है। अमेरिका ने साफ कह दिया है कि अगर इस समय तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो फिर बहुत सारे बम गिरने शुरू हो जाएंगे। तो फिलहाल इस खबर में इतना ही। आपकी इस खबर पर क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं। मेरा नाम आसिफ असरार है। कैमरे के पीछे हमारे साथी राहुल हैं। देखते रहिए दिल एलन टॉप। शुक्रिया।