आर डी बर्मन के साथ दूसरी शादी करने के बाद भी आशा भोसले ने क्यों नहीं बदला अपना भोसले सर ने? 292 साल की आशा भोसले अब इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं। आशा भोसले की जिंदगी किसी सैराब से भी कम नहीं रही। लेकिन उनका सामना आशा भोसले ने बहुत ही बाधुरी के साथ किया। [संगीत] शायद आप लोगों में से कई लोग होंगे जो उनकी कहानी को जानते होंगे। लेकिन एक सवाल जो आपके मन में भी आता होगा हमेशा ही आता होगा कि आशा भोसले ने दो शादियां की। पहली शादी गणपतराव भोसले के साथ काफी दर्द भरी रही। वहीं दूसरी शादी राहुल देव बर्मन के साथ। अपने तलाक के काफी समय बाद उन्होंने की। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने अपना आखिरी नाम भोसले ही क्यों रखा? क्या बर्मन साहब जिन्हें लोग फिल्म इंडस्ट्री के लोग पंचम दा भी बुलाते थे उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं हुई होगी। यह सवाल आज के समय में शायद उतना जायज ना लगे। लेकिन उस दौर में जब यह काफी आम बात हुआ करती थी अपने पति के सरनेम को एक्सेप्ट करना उस समय में आशा [संगीत] भोसले ने ऐसा क्यों नहीं किया? इसके पीछे छुपे जवाब को समझने के लिए आपको आशा भोसले की पूरी कहानी समझनी होगी। 1933 में जन्मी आशा भोसले अपने भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थी। बचपन से ही रिबल चाइल्ड रही थी।
मां ने बोला कि बाल नहीं कटवाना है तो छोटी आशा बाल कटवा के आ गई। कम उम्र में पिता का देहांत हो गया। लेकिन जिंदगी तब पलटी जब आशा ने 16 साल की उम्र में लता [संगीत] दीदी के 31 साल के मैनेजर गणपतराव भोसले से भागकर शादी कर ली। पूरा परिवार नाखुश था। लता दीदी ने भी फासले बढ़ा [संगीत] लिए। शादी के कुछ दिन तो सब ठीक रहा लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद असल चैलेंज शुरू हो गया। शादी में बहुत कुछ झेला और एक दिन गणपतराव भोसले ने प्रेग्नेंट आशा भोसले को उनके तीन बच्चों के साथ घर से निकाल दिया। [संगीत] बहादुर आशा ने तब भी हार नहीं मानी। बहन के घर गई और अपने करियर की शुरुआत की। [संगीत] अब यहां एक और चैलेंज खड़ा हो गया था। इंडस्ट्री में लता मंगेशकर अपना पैर ऑलरेडी जमा चुकी थी और आशा को काम भी चाहिए था क्योंकि [संगीत] बच्चे पालने थे, पैसे चाहिए थे। अब ऐसे में उन्होंने फैसला किया कि वह लता मंगेशकर के टाइप्स के गाने नहीं गाएंगी।
लेकिन जिंदगी तो टफ थी ही। काम करना, [संगीत] बच्चे पालना, घर संभालना, बच्चों को संस्कार देना और सब कुछ काफी चैलेंजिंग था लेकिन हौसला भी था। और उसी समय आशा भोसले जी ने [संगीत] आर डी बर्मन के साथ ओ हसीना जुल्फों वाली और दम मारोदम जैसे गाने गाए जो संगीत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए। अब हालांकि आर डी बर्मन और आशा भोसले एक दूसरे को बचपन से ही जानते थे क्योंकि पंचमदा एक छोटे बच्चे हुआ करते थे जब आशा जी उनके पिता सजन देव बर्मन के पास रिकॉर्डिंग के लिए जाया करती थी। [संगीत] लेकिन असली कहानी 1960 के दशक में शुरू हुई। जब आशा भोसले ने पंचम दा को कई हिट्स [संगीत] गाने दिए। अब दोनों ही अपनी पहली शादियों में कड़वे अनुभव से गुजर चुके थे। आशा जी गणपत राव भोसले [संगीत] से अलग होकर अकेले अपने बच्चों को पाल रही थी और पंचम का भी तलाक हो चुका था। संगीत के जुनून और खाने के शौक ने उन्हें एक दूसरे के करीब लाया। [संगीत] पंचम दा ने काफी समय तक आशा जी को शादी के लिए मनाया और आखिरकार 1980 में दोनों ने शादी कर ली। पंचमदा आशा जी से उम्र में 6 साल छोटे थे। लेकिन उनके बीच सम्मान [संगीत] का रिश्ता था। शादी के बाद भी आशा जी ने अपने भोसले सरनेम को नहीं बदला [संगीत] क्योंकि वह उनकी [नाक से की जाने वाली आवाज़] अपनी पहचान बन चुकी थी। फिल्म इंडस्ट्री में सब कोई उन्हें आशा भोसले के नाम से जानते थे और पंचंदा ने इसका पूरा सम्मान [संगीत] भी किया।
कहा जाता है कि आशा भोसले अपने बच्चों की वजह से भी अपना सरनेम नहीं बदल पाई क्योंकि उनके तीनों बच्चों का सरनेम भोसले था और वह अपने बच्चों से अलग नाम नहीं जोड़ना चाहती थी। अब हालांकि कोई असल वजह आज तक सामने नहीं आ पाई लेकिन यह कुछ कयास लगाए जाते हैं। अब दोस्तों आशा भोसले की जिंदगी में कई समय के बाद आया सुख भी ज्यादा समय तक नहीं रह पाया। 1994 में पंचमदा 54 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से गुजर गए। हालांकि यह उनकी जिंदगी का कोई आखिरी दुख भी नहीं था। अभी तो 60 साल की आशा को और भी कई दुखों का पहाड़ उठाना था। आशा भोसले ने गाना जारी रखा। अपने और अपनी दीदी लता मंगेशकर के साथ अफवाहओं पर भी कई सफाइयां दी कि दोनों के बीच में किस तरह का रिश्ता रहा था। कैसे उन्होंने लता दी से अलग गाने के टाइप्स चुने। ऐसे ही समय बीतता रहा। तभी आशा भोसली की बेटी की 2012 में डेथ हो जाती है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनके मौत की कोई वजह आज तक सामने तो आ नहीं पाई। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि बेटी वर्षा काफी समय से डिप्रेशन [संगीत] में थी। साल 2008 में आशा भोसले की बेटी वर्षा ने नींद की गोलियां खाकर खुदकुशी करने की कोशिश भी की थी। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें उस समय बचा लिया था। फिर 2012 में उन्होंने एक बिना लाइसेंस वाली बंदूक से खुद को गोली [संगीत] मार ली। बेटी का तलाक हो चुका था इसीलिए वो अपनी मां आशा भोसले के साथ रह रही थी।
उस समय आशा भोसले घर पर नहीं थी। पुलिस के मुताबिक जब दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला तो ड्राइवर घर के अंदर आया और वहां वाशा की डेड [संगीत] बॉडी मिली हुई थी। आशा भोसले ने पहले शादी में कई दुख झेले। फिर तलाक झेला और उसके बाद इंडस्ट्री में बने रहने की होड़ और पैसे कमाने की मार भी झेली। दूसरी शादी की अच्छी चली लेकिन फिर पति [संगीत] नहीं रहा। लेकिन अब एक बड़ा दुख और आशा भोसले की जिंदगी में आ चुका था। उनके सामने उनकी औलाद गुजर चुकी थी और दुख का यह सिलसिला एक बार फिर उनकी जिंदगी में 3 साल बाद आया। जब उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले भी बेटी के मौत के 3 साल बाद यानी कि 2015 में कैंसर का शिकार हो गए और उनका भी देहांत हो गया। आशा भोसले ने अपने सामने अपने दोनों बच्चों को खो दिया और अब 92 साल की उम्र में वह इस दुनिया को भी अलविदा कहकर चली [संगीत] गई हैं।
2022 में लता मंगेशकर इस दुनिया को छोड़कर चली गई थी और अब 4 साल बाद आशा भोसले भी नहीं रही। काफी हिम्मत काफी हौसले की कहानी है आशा भोसले की। शायद यह कुछ शब्द उनके उस दर्द भरे दौर को उतने अच्छे से एक्सप्लेन ना कर पाए। लेकिन उनके गाने बखूबी यह बता देते हैं कि आशा भोसले ने कितने जतन किए हैं [संगीत] अपनी जिंदगी जीने के लिए। एक ऐसी सिंगर जिन्होंने 12,000 गाने गाए। संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। जिंदगी भर दुखों का पहाड़ उठाया और फिर भी मुस्कुराई और गुनगुनाई। [संगीत] तड़कते-भड़कते गाने से लेकर गज़ल तक वो गाई और [संगीत] दुनिया में एक नई मिसाल बनाई। कमेंट बॉक्स में हमें आशा भोसले की अपनी फेवरेट गाने को लिखना बिल्कुल मत भूलिएगा और ऐसे ही और रिपोर्ट्स के लिए एक्सप्रेस कैफे को सब्सक्राइब भी जरूर [संगीत] करें। [संगीत]