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कैसे लता से OP Nayyar की नफरत ने आशा जी को बनाया स्टार।

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आशा भोसले आशा भोसले द लेजेंड्री सिंगर नहीं बन पाती अगर उनकी जिंदगी में यह शख्स नहीं होते। यह शख्स उनकी बहन लता मंगेशकर नहीं बल्कि यह शख्स वो है जिसने जिंदगी में लता मंगेशकर के साथ कभी काम नहीं किया जो घमंड से कहता था कि मैं लता मंगेशकर के साथ काम किए बिना सक्सेसफुल म्यूजिक कंपोजर बन गया। जिसके म्यूजिक के चर्चे और ईगो के चर्चे फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर थे। जिस दौर में आशा भोसले को म्यूजिक कंपोजर्स यह कहकर रिजेक्ट कर देते थे कि तुम तो लता की तरह नहीं गा सकती या तुम तो गीता दत्त को कॉपी करती हो।

उस दौर में इन्होंने आशा को निखारा अपने अंडर ग्रूम किया और आशा भोसले को बनाया आशा भोसले द लेजेंड। यह शख्स है ओपी नयर। और आज कब की और कैसे में भोसले सिस्टर्स और ओपी नयर के रिश्तों के बारे में ही बात करेंगे। कब ओपी नयर ने आशा भोसले के अंदर से लता फोबिया हटाया? क्यों ओपी नयर ने कभी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया? और कैसे जो ओपी नयर एक शानदार म्यूजिशियन थे वो आशा के दीवाने बनकर बर्बाद हो गए। सबसे पहले तो बात करते हैं कि क्यों ओपी नयर ने कभी भी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया।

जिस लता मंगेशकर को फिल्म और गाने की हिट मशीन माना जाता था। आखिर ओपी नयर और लता मंगेशकर के बीच ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने लता मंगेशकर के साथ कभी काम नहीं किया। 1952 में ओपी नयर आसमान नाम की फिल्म के म्यूजिक के लिए काम कर रहे थे। इस फिल्म का एक गाना उन्हें लता मंगेशकर से गवाना था। लता मंगेशकर की रिकॉर्डिंग का टाइम फिक्स हो गया था। उनके लिए स्टूडियो की बुकिंग भी हो गई थी और रिकॉर्डिंग के लिए सारा ऑर्केस्ट्रा स्टूडियो में आ गया था। बस लता मंगेशकर का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन काफी इंतजार करने के बावजूद लता मंगेशकर स्टूडियो में गाना गाने नहीं पहुंची। यह बेहद शॉकिंग बात थी। हां, लता मंगेशकर बिजी थी, तो वह लेट आ सकती थी, लेकिन लता मंगेशकर हां कहकर स्टूडियो में पहुंची ही नहीं। यह अनप्रोफेशनल बिहेवियर लता मंगेशकर ने अपने पूरे करियर में कभी नहीं किया।

तो आखिर क्या वजह हुई कि लता मंगेशकर ने टाइम दिया उसके बावजूद वो रिकॉर्डिंग करने नहीं पहुंची। बताया जाता है कि आसमान के सारे गाने ओपी नयर ने गीता दत्त से गवाए थे और लता मंगेशकर को जो गाना गवाया जा रहा था वो साइड एक्ट्रेस का गाना था। लता मंगेशकर हमेशा हीरोइनों के लिए ही अपनी आवाज देती थी। लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनका जो गाना है वह साइड हीरोइन पर यूज होना है तो वो रिकॉर्डिंग में पहुंची ही नहीं। ओपी नयर को यह बात चुभ गई और ऐसी चुभ कि ता उम्र उन्होंने लता मंगेशकर को अपनी किसी भी फिल्म में गाना नहीं गवाया और कभी उनसे कोई पूछता कि लता मंगेशकर से आपने गाना क्यों नहीं गवाया तो वह कहती कि उसकी आवाज बहुत पतली और तीखी है। मेरे म्यूजिक को उसकी आवाज सपोर्ट नहीं कर सकती। मेरे म्यूजिक को रिच और सोलफुल आवाजें ही सपोर्ट कर सकती है। जैसे कि गीता दत्त, शमशाद बेगम और आशा भोसले।

बहरहाल आसमान का वो गाना जो वह लता मंगेशकर से गवाना चाहते वो बाद में उन्होंने सिंगर राजकुमारी दुबे से गवाया। ओपी नयर जाने जाते थे अपनी ईगो के लिए। अगर कोई आर्टिस्ट नखरे दिखाता तो वह उसे रिप्लेस कर देते। इस बात के लिए वह जाने जाते थे। उनके म्यूजिक को वह सबसे ऊपर रखते थे। इसी दौरान ओपी नयर की मुलाकात आशा भोसले से हुई। आशा भोसले उस वक्त टफ दौर से गुजर रही थी। तीन बच्चों की सिंगल मदर थी। काम उन्हें चाहिए था। गाना वह जानती थी। लेकिन लता मंगेशकर, गीता दत्त, शमशाद बेगम यह सभी कंपोजर्स की पहली चॉइस होती थी। इनके अलावा कोई दूसरे सिंगर के साथ काम ही नहीं करना चाहता था। इस कंपटीशन में आशा भोसले अपने आप को कैसे खड़ा करती?आशा भोसले को कुछ फिल्में मिलती भी लेकिन वो लो बजट की फिल्में होती और उन फिल्मों में भी जब वो गाती तो कंपोजर्स उन्हें कहते अपनी बहन लता की तरह गाओ। तब ओपी नयर ने आशा भोसले को ग्रूम करने की कोशिश की। आशा भोसले को ओपी नयर ने ही कहा कि तुम अपनी नई स्टाइल खोजो और उस पर काम करो। लता से अलग तुम तभी हो सकती हो जब तुम अपनी खुद की स्टाइल बनाओगी। तुम्हें या तो मार्केट में लता मंगेशकर की तरह गाने के लिए कहा जाता है या फिर जब तुम गाती हो तो लोग कहते हैं कि तुम तो गीता दत्त को कॉपी करती हो। इसीलिए तुम्हें अपनी स्टाइल खोजनी होगी और ओपी नयर अपने हिसाब से आशा भोसले को ग्रूम करने लगे। इस ग्रूमिंग का असर हुआ भी।

आशा भोसले ने एक स्टाइल डेवलप की और उनकी ये स्टाइल फिल्मों में खूब पसंद की जाने लगी। हालांकि इनिशियली उन्होंने आइटम नंबर्स ही गाए जो उस जमाने के हिसाब से ठीक नहीं माने जाते थे और लता मंगेशकर तो इस गानों के बिल्कुल ही खिलाफ थी लेकिन इन्हीं गानों को गाकर आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाई ओपी नयर के साथ रहते हुए लेकिन आशा भोसले को मार्केट में खड़ा करना आसान नहीं था। कंपटीशन बहुत टफ था और आशा भोसले का सबसे बड़ा कंपटीशन तो लता मंगेशकर ही था।ओपी नयर ने अपने एक इंटरव्यू में एक किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया कि नया दौर फिल्म का म्यूजिक उन्हीं के पास आया था। लेकिन प्रोड्यूसर ने जिद कर ली थी कि गाने सारे लता मंगेशकर ही गाएगी। ओपी नयर ने कह दिया कि लता मंगेशकर गाने गाएगी तो मैं म्यूजिक ही नहीं बनाऊंगा। मैं म्यूजिक बनाऊंगा तो उसके गाने सिर्फ और सिर्फ आशा भोसले ही गाएगी। आशा भोसले के लिए वो लड़े और नया दौर के गाने उन्होंने सारे के सारे आशा भोसले से ही गवाए। यह सारे गाने सुपरहिट थे। यह वो गाने थे जो इनिशियली लता मंगेशकर को जाने वाले थे। ओपी नयर ने अपने एक इंटरव्यू में कोट करते हुए कहा था कि बी आर चोपड़ा की नया दौर से पहले आशा भोसले को सब एक कैब्रिज सिंगर के रूप में ही देखते थे। नया दौर के बाद ही उनके पास और अलग टाइप के सॉन्ग्स के ऑफर्स आने लगे। अपनी अलग स्टाइल बनाना और गाने गाना और फिर वो गाने मार्केट में चल भी जाना और बिना लता मंगेशकर के ओपी नयर ने तो अपनी गहरी छाप इंडस्ट्री में छोड़ ही दी थी। साथ ही उन्होंने आशा भोसले को भी नई पहचान दे दी थी।आशा भोसले अपनी इस नई पॉपुलैरिटी को एंजॉय कर रही थी।

उन्हें नई जिंदगी मिल गई थी। उनका करियर चल पड़ा था और खुशियों से भर गया था। ओपी नयर जिन्होंने आशा भोसले को मेंटोर किया। आशा भोसले भी उन्हें बहुत अडोर करती और धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार डेवलप हो गया। आशा भोसले ऑलरेडी तीन बच्चों की मदद थी और ओपी नयर चार बच्चों के पिता थे। ऑलरेडी मैरिड थे। लेकिन आशा भोसले की आवाज के वह ऐसे दीवाने बने कि उन्होंने अपनी पिछली पसंदीदा सिंगर्स गीता दत्त और शमशाद बेगम को भी भुला दिया। ओपी नयर आशा भोसले से ही अपने गाने इसलिए गवाने लगे क्योंकि आशा भोसले भी उनको लेकर काफी पज़ेसिव हो गई थी और अपनी जगह वो किसी और सिंगर को देख ही नहीं सकती थी।ओपी नयर ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं और आशा इमोशनली इनवॉल्व हो गए थे। आशा ने मुझसे प्रॉमिस मांगा था कि मैं आशा के अलावा किसी और सिंगर के साथ काम ना करूं। मैं आशा भोसले को बहुत पसंद करता था। उन्हें चाहता था। इसीलिए उनकी बात मैंने मानी और मैंने मेरी फेवरेट सिंगर गीता दत्त को भी तब साइडलाइन किया। वो अब बस आशा भोसले के साथ ही म्यूजिक बनाते। यह बात उनके म्यूजिक की पहचान बन गई थी। लेकिन यही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुई। आशा भोसले के साथ ओपी नयर काम कर रहे थे। इकलौती सिंगर थी। ओपी नयर के गानों की पहचान वह बन चुकी थी। लेकिन जब आशा भोसले सक्सेसफुल हो गई और उन्हें बाहर भी काम मिलने लगा तो फिर उनकी प्रायोरिटीज शिफ्ट होने लगी और जब आशा भोसले की लाइफ में आर डी बर्मन की एंट्री हुई तब तो आशा भोसले पूरी तरह से बदल गई। इधर बात करें ओपी नयर की तो वो इस इंसिडेंट से बुरी तरह टूट गए। जिस आशा के वह दीवाने थे वह अब खुद आर डी बर्मन की दीवानी हो गई है। ओपी नयर की फेवरेट सिंगर उनसे दूर जा चुकी थी। म्यूजिक का दौर भी बदल गया था। अब सवाल यह उठता है कि आशा भोसले ने ओपी नयर को छोड़ा या ओपी नयर ने आशा भोसले को छोड़ा।

तो इस बात पर ओपी नयर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैंने ही आशा भोसले को छोड़ा था। मुझे महसूस हो गया था कि मेरे करियर का अंत आ गया है। और जब आप किसी ऐसी औरत से प्यार करते हो जो खुद से ज्यादा या किसी और से भी ज्यादा सिर्फ और सिर्फ अपने करियर को पसंद करती हो तो आप हमेशा उसकी लाइफ में दूसरे नंबर पर ही रहोगे। आशा एक करियर ओरिएंटेड औरत थी और मुझे पता था कि आशा के सामने जब ऑप्शंस आएंगे कि मुझे चुने या अपने करियर को तो वह अपने करियर को ही चुनेगी। इसीलिए मैंने ही पहले उसे छोड़ दिया। ओपी नयर ने कहा कि इसके लिए वो आशा भोसले को भी जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं। मार्केट और दुनिया ने इन दोनों ही बहनों को कनिंग बना दिया। ओपी नयर ने अपने इसी इंटरव्यू में लता मंगेशकर की भी तारीफ की थी और कहा था कि लता मंगेशकर से मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।वो बहुत अच्छी सिंगर है। आशा से भी अच्छी सिंगर है। बस मेरे गानों में उनकी आवाज सूट नहीं होती। ओपी नयर म्यूजिक देते रहे नई-नई सिंगर्स के साथ। लेकिन उस म्यूजिक में वो वाली बात नहीं थी जो म्यूजिक उन्होंने आशा भोसले, गीता दत्त और शमशाद बेगम के साथ बनाया था। नए दौर में ओपी नयर अपनी चमक खोने लगे। इसी दौरान ईयर 1975 में फिल्म प्राण जाए पर वचन ना जाए जिसके लिए आशा भोसले ने आवाज दी थी हमको कभी सॉन्ग के लिए उस गाने को बेस्ट फीमेल सिंगर का अवार्ड मिल रहा था। आशा भोसले यह अवार्ड लेने नहीं पहुंची। लेकिन ओपी नयर यह अवार्ड लेने पहुंचे आशा भोसले की जगह और स्टेज पर जाकर आशा की तरफ से उन्होंने यह अवार्ड एक्सेप्ट किया। लेकिन अवार्ड लेकर जब वह घर लौट रहे थे तो उन्होंने उस ट्रॉफी को अपनी कार से फेंका और उस ट्रॉफी को कुचल दिया और उसके साथ ही उन्होंने आशा को अपनी जिंदगी से भुला दिया। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा एक्स की ट्रॉफी को कुचल के उन्हें सुकून मिला और फाइनली आशा भोसले को उन्होंने भी भुला दिया। लेकिन आशा को मेंटोर करने की, आशा से प्यार करने की कीमत उन्हें अभी आगे और चुकानी थी और बहुत ज्यादा चुकानी थी। ओपी नयर के करियर में तो रफ पैच आ ही गया था।

उनकी पर्सनल लाइफ भी प्रॉब्लम में आ गई थी क्योंकि ऑलरेडी वह अपने परिवार वालों को छोड़कर आशा भोसले के साथ अपनी एक नई दुनिया बसा चुके थे।अब जब आशा भोसले ही उनकी जिंदगी से चली गई तो ओपी नयर ने एक बार फिर से अपने परिवार के पास जाने की कोशिश की। लेकिन परिवार वालों ने उन्हें अपनाया ही नहीं। ओपी नयर एक ईगोस्टिक इंसान के रूप में जाने जाते थे। जब परिवार वालों से उन्हें वह प्यार अपनापन नहीं मिला तो उन्होंने भी परिवार वालों को छोड़ दिया और तो और अपनी घर गाड़ी प्रॉपर्टी जो भी थी वो परिवार को देकर वहां से निकल गए। उनका परिवार मरीन ड्राइव में उनके फोर बीएचके होम में रहता और ओपी नयर फिर होटल में या गेस्ट हाउस में रहकर अपना टाइम बिताते। इसी दौरान ओपी नयर की लाइफ में माधुरी जोगलेकर नाम की सिंगर आई और उसके साथ ओपी नयर लिव इन में रहने लगे। लेकिन यह रिश्ता भी कुछ सालों में खत्म हो गया और माधुरी से ओपी नयर सेपरेट हो गए।एक बार फिर से ओपी नयर अकेले हो गए। फिल्म इंडस्ट्री तो वह छोड़ ही चुके थे और फिल्म इंडस्ट्री को जो कुछ उन्होंने दिया था उसके रिटर्न में फिल्म इंडस्ट्री ने ना कभी उन्हें याद किया ना ही उन्हें क्रेडिट दिया। फिर चाहे आशा भोसले ही क्यों ना हो। वो बड़ी सिंगर बन गई। सब तरफ उनकी चर्चा थी। हर जगह वो स्पीचेस देती। अपने काम के बारे में बात करती। अपनी बहन लता के बारे में बात करती। आर डी बर्मन के म्यूजिक के बारे में बात करती। अपने स्ट्रगल के बारे में बात करती। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने करियर के लिए ओपी नयर को क्रेडिट नहीं दिया। अगर वह क्रेडिट देती और ओपी नयर का क्या योगदान था उनके करियर में उसे डिटेल से बताती तो शायद ओपी नयर को यह इंडस्ट्री रिस्पेक्ट करती और वो कहां हैं, क्या कर रहे हैं, इसकी खैर खबर हमेशा रखती। लेकिन शायद ओपी नयर की किस्मत ही ऐसी थी कि आशा भोसले ने भी उनका नाम लेना बंद कर दिया। और इस तरह से एक बड़ा स्टार इंडस्ट्री से गायब हो गया। हां, उनकी बातें आती रहती कि ओपी नयर अब अकेले हो गए हैं।उन्होंने घर परिवार छोड़ दिया है। उनकी देखरेख के लिए भी कोई नहीं है।

वो थाने में एक गेस्ट हाउस में रहते हैं। नखवा फैमिली है। उन्हीं के घर में रहते हैं। नखवा फैमिली वाले ही उनकी देखरेख करते हैं और उन्हें खाना देते हैं। शॉकिंग बात तो यह थी कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बाद ओपी नयर ने म्यूजिक भी छोड़ दिया और वह तो होम्योपैथी करने लगे। वो होम्योपैथिक दवाइयां देते और लोगों का होम्योपैथिक इलाज करने लगे थे। म्यूजिक इंडस्ट्री से दूर थे लेकिन उनके शौक वही थे। वो स्टाइलिश वे में रहते, अच्छा खाते, अच्छे कपड़े पहनते। यह उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक किया। 2007 में अचानक से खबर आती है कि ओपी नयर की डेथ हो गई है। इस खबर से भी ज्यादा रुला देने वाली खबर यह थी कि ओपी नयर की डेथ में ना फिल्म इंडस्ट्री से कोई पहुंचा ना उनके परिवार से कोई पहुंचा। इतना बड़ा लेजेंड अकेलेपन में गुजर गया।किसी ने उसकी परवाह नहीं की। इसके पीछे रीजन यह था कि नखवा फैमिली जिसके साथ ओपी नयर रहते थे। ओपी नयर अक्सर उनसे अपनी जिंदगी के बारे में बात करते थे और उन्होंने नकवा परिवार से कहा था कि कभी मुझे कुछ हो जाए मैं मर जाऊं तो मेरे परिवार वालों को मेरा चेहरा तक मत दिखाना और उन्हें बताना मत कि मेरी डेथ हो गई है और ना ही फिल्म इंडस्ट्री से किसी को बुलाना। नखवा फैमिली ने ओपी नयर की उस आखिरी इच्छा को माना। जब ओपी नयर की डेथ हुई तो नखवा परिवार ने ही उनका अंतिम संस्कार किया और जब अंतिम संस्कार हो गया उसके बाद लोगों में बताया गया कि ओपी नयर इस दुनिया में नहीं रहे।

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