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क्या बिल गेट्स करा रहे हैं आर्टिफिशियल बारिश? NCR की बारिश का सच क्या ?..

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दिल्ली एनसीआर में हो रही बारिश और सोशल मीडिया पर फैल रही एक चौंकाने वाली थ्योरी क्या सच में यह बारिश प्राकृतिक नहीं बल्कि एक एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है? क्या दुनिया के सामने सबसे बड़े बिजनेसमैन में से एक बिल गेट्स पूरी दुनिया पर आर्टिफिशियल बारिश करा रहे हैं और क्या इस बारिश में भीगना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है? सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे ने लोगों के बीच डर और भ्रम दोनों पैदा कर दिया है।

आइए करते हैं इस वायरल दावे का फैक्ट चेक। नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं। सबसे पहले आपको बता दें यह वायरल दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है। इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर भारत में हो रही बारिश की असली वजह पश्चिमी विक्षोभ है। यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस। यह एक सामान्य मौसम प्रणाली है जो मेडिटेरियन सी से उठती है

और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए भारत के उत्तरी हिस्सों में बारिश और बर्फबारी लाती है। मौसम विभाग ने साफ तौर पर बताया है कि मार्च के दौरान लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की वजह से उत्तर भारत में बारिश गरज चमक और तेज हवाएं देखने को मिली है। यानी इस बारिश का किसी भी तरह के आर्टिफिशियल एक्सपेरिमेंट से कोई लेना देना नहीं है। अब बात उस दावे की जिसमें कहा जा रहा है कि बारिश में केमिकल मिलाए गए हैं।

दरअसल हावर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी सोलर जियो इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट का हवाला देकर यह भ्रम फैलाया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट सोलर रेडिएशन मैनेजमेंट पर रिसर्च करता है। जिसका मकसद सूरज की रोशनी को कम करके धरती को ठंडा करना है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रोजेक्ट का बारिश कराने या केमिकल रेंज से कोई सीधा संबंध नहीं है। और इससे जुड़े बड़े प्रयोग पहले ही बंद किए जा चुके हैं।

वहीं क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीक जरूर मौजूद है लेकिन यह भी सीमित स्तर पर और खास परिस्थितियों में ही इस्तेमाल किया जाता है। मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के मुताबिक इतने बड़े पैमाने पर पूरे क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग कराना संभव ही नहीं है। तो साफ है कि दिल्ली एनसीआर की बारिश किसी भी तरह के बिल गेट्स एक्सपेरिमेंट का हिस्सा नहीं है। यह पूरी तरह एक प्राकृतिक मौसम प्रक्रिया है

और सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है दावा सिर्फ एक अफवाह है। ऐसे में जरूरी है कि किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। ऐसे में जरूरी यह है कि किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। फिलहाल इस फैक्ट चेक में इतना ही। ऐसी ही हर वायरल खबर की सच्चाई हम आप तक लाते रहेंगे.

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