कौन बनेगा करोड़पति? आपने देखा होगा। अमिताभ बच्चन शो को होस्ट करते हैं और कैंडिडेट से जो प्रतियोगी होता है उससे कुछ सवाल पूछते हैं। अगर आपके सवाल सही तो आप इनाम जीतेंगे। इनाम जीतने वाले कई हैं। लेकिन फिलहाल चर्चा मध्य प्रदेश के शिवपुर के तहसीलदार की जिन्होंने काफी फेम पाया था जब वह केबीसी के प्रोग्राम में गई थी। कौन बनेगा करोड़पति के जो का जो प्रोग्राम है उसमें गई थी।
ना सिर्फ अमिताभ बच्चन से मुलाकात की बल्कि इस पूरे खेल में ₹50 लाख की राशि भी जीत कर आई थी। फिलहाल आपको बता दें कि तहसीलदार मैडम का नाम भ्रष्टाचार और घोटालों में आया है। नाम ऐसा कि तहसीलदार मैडम जेल तक जा सकती है। विस्तार से इस रिपोर्ट में आपको बताएंगे। नमस्कार। आप देख रहे हैं एमपी तक और मैं हूं आपके साथ आकांक्षा ठाकुर। देखिए मध्य प्रदेश के शिवपुर की एक तहसीलदार मैडम आजकल काफी चर्चा में है। तब भी आई थी चर्चा में जब उनका केबीसी में सिलेक्शन हुआ था।
ना सिर्फ केबीसी का उन्होंने गेम खेला। अमिताभ बच्चन से मुलाकात की। माया नगरी मुंबई पहुंची बल्कि ₹50 लाख की राशि जीतकर कहीं ना कहीं मध्य प्रदेश का नाम भी रोशन करती हुई दिखाई दी थी। लेकिन अब उन्हीं तहसीलदार मैडम का नाम जो है वह घोटालों की लिस्ट में आ गया है। घपला भी करोड़ों लाखों का बताया जा रहा है। आपको बता दें मध्य प्रदेश के शिवपुर जिले के विजयपुर की तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है
बाढ़ राहत राशि घोटाले के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह पूरा मामला साल 2021 में शिवपुर जिले में आई बाढ़ के बाद पीड़ितों [संगीत] के लिए राहत राशि के वितरण का था। आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस वक्त पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से भी अधिक दलालों ने मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ यानी कि ₹.5 करोड़ की राशि बांट दी।
यह गड़बड़ी डिप्टी कलेक्टर के ऑडिट में पकड़ में आई। जिसके बाद बड़ौदा थाने में एफआईआर दर्ज की गई। जांच में यह भी आरोप लगा है कि राहत राशि वितरण के दौरान रिश्तेदारों और परिचितों को बाढ़ पीड़ित दिखाकर रकम उनके खातों में डलवाई गई। इस कथित घोटाले में तहसील कार्यालय के कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत बताई गई थी। पुलिस ने जांच में 100 से भी अधिक लोगों को आरोपी बनाया था।
जिनमें अमिता सिंह तोमर जो कि तहसीलदार थी और 25 पटवारियों को शामिल किया गया था। व इस पूरे मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए तहसीलदार अमिता सिंह तोमर ने ग्वालियर खंडपीठ जो है हाईकोर्ट की मध्य प्रदेश की वहां पर अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। जहां से उनको करारा झटका मिला था। आपको बता दें कि ग्वालियर हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया था।
जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के साथ अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी। अब या तो उन्हें स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा या फिर पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है। वहीं आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राजस्व अमले और प्रशासनिक तंत्र में अब हलचल तेज हो गई है। माना यह जा रहा है कि बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी उनको गिरफ्तार कर सकती है।
इससे पहले अगर वह खुद सरेंडर कर दे तो अलग बात है। वहीं आपको बता दें कि अमिता सिंह तोमर केबीसी पार्टिसिपेंट थे जिसको लेकर वह काफी चर्चा में आई थी। साल 2011 में अमिता सिंह तोमर ने केबीसी के पांचवें सीजन में ₹50 लाख जीते थे। जिसके बाद वह सुर्खियां में आई थी। वहीं आपको बता दें कि पिछले कई सालों में उन्होंने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट डालकर भी विवादों में रही।
अह कमेंट्स और संविधान से जुड़ी एक पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट करने पर [संगीत] अमिता सिंह तोमर जो है वह निलंबित भी हो चुकी है। साथ ही आपको बता दें कि अमिता सिंह तोमर बार-बार हो रहे तबादलों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भी कर चुकी है। लेकिन फिलहाल जमानत की अर्ज़ खारिज हो गई है। अब देखना होगा कि क्या अमिता सिंह की गिरफ्तारी होती है या वो खुद सरेंडर करती है।