आप देख रहे हैं लाइव हिंदुस्तान, ईरान, इसराइल, अमेरिका जंग के हवाले से ताजा अपडेट लेकर हाजिर हैं। जिसमें अपडेट के साथ-साथ बहुत सी ऐसी बातें भी होती हैं जो विश्लेषणात्मक होती हैं और आपको पसंद भी आती है। मेरे साथ हैं मेरे सहयोगी दिव्यांशु। एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि जो अरब मलिक हैं वो इस जंग में क्यों नहीं कूद रहे हैं? जबकि उनके यहां भारी नुकसान हो रहा है और बड़े पैमाने पर उनके यहां के जो अमेरिकन बेससेस हैं उनको नुकसान पहुंच रहा है।
उनके यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंच रहा है। तो इसको लेकर के एक बात जब सामने आई तो क़तर के पूर्व पीएम है हमद बिन जासिम बिन जाबिर अलथानी। इन्होंने एक बात कही है और वो ये है कि और ये बात उन्होंने यहां वहां या ऐसे ही मीडिया में नहीं कही। उन्होंने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल से कहा है कि किसी भी हाल में गल्फ देशों को यानी खाड़ी देशों को या अरब मुालिक को इस जंग में नहीं कूदना चाहिए क्योंकि वो मानते हैं कि अगर गल्फ मुालिक इस जंग में किसी भी तरह से कूद पड़े तो अमेरिका दूसरे ही सेकंड पीछे हट जाएगा और वो इस जंग से हट जाएगा और चाहेगा कि ईरान और अरब ख्ते के मुल्क लड़े।
ये एक रीजनल वॉर हो जाएगा और अमेरिका चाहेगा कि खूब इनको हथियार दो। कहेगा हम हट जाते हैं लेकिन आपको हथियार खूब देते हैं। बेचेगा इनको और फिर ये आपस में लड़ेंगे। यानी दोनों तरफ से जो है मुस्लिम्स आपस में लड़ेंगे और दो पूरा रीजनल वॉर अमेरिका इसको कराने की फिराक में है। यही वजह है और इस सच्चाई को ऐसा नहीं कि अरब देश जानते नहीं है। वो अच्छी तरह से जानते हैं और यही वजह है कि वो इस जंग का हिस्सा नहीं बन रहे हैं।
बिल्कुल अगर पुराना इतिहास भी अगर अमेरिका की देख, अमेरिका का देखें हम तो यही नजर आता है। चाहे वो वर्ल्ड वॉर के टाइम का भी देखें कल हमने वो वीडियो भी बनाया था। किस तरीके से उसने अपने आप को ऊपर ले जाने की कोशिश की। यानी दो लोगों को भिड़ाओ, दोनों को हथियार भेजो और फिर पैसे कमाओ। यही रणनीति उसकी रही है। हालांकि इधर जो है वह मामला बहुत ज़्यादा पेचीदा हो चुका है।
क्योंकि अगर ये किसी तरीके से जिस तरीके से चाह रहे हैं वही हम लोग बात भी कर रहे थे। ये यही सोच रहे हैं भाई कि किसी तरीके से जो मुस्लिम मुल्क हैं वो सऊदी, क़तर, बहरीन, कुवैत इन सबको कुछ इसी तरीके से चाहते हैं कि ये लोग आपस में भिड़ जाए और उसके बाद मैं जो है वहां से निकल पाऊं। मैं बोल दूंगा कि इन लोगों की आपसी लड़ाई है। अब मैं उस क्षेत्र से अलग हो जाऊंगा। फिर मुझे बनना पड़ेगा चौधरी। बेसिकली और सौदागर हथियारों का साथ में चौधरी कि देखो हम बीच में हैं। हम सुला सुन सब और ये चाह रहे हैं
कि ईरान से ये भिड़े सब के सब ये सब ईरान से भिड़े आपस में भी भिड़े या ईरान से भिड़े तो एक तरह का ये रीजनल वॉर छिड़ जाए। जैसे एक दौर में गल्फ वॉर छिड़ा था जो आठ साल तक चलता रहा। उसमें भी अमेरिका का बैकअप था। उसने ही अरब देशों को अपने साथ में लेकर के ईरान के खिलाफ सद्दाम हुसैन को बहकाया बहका उनको हथियार उपलब्ध कराए और वो ईरान से भिड़े ये वो और आठ साल तक चला पूरी दुनिया में उस वक्त भी तेल का बहुत काल पड़ा और यहां पे अमेरिका फिर बीच में चौधरी बन के आया जैसा कि आपने कहा और इसके पीछे एक और वजह है
जो कि एक्सपर्ट बताते हैं और जो खुद कतर के पूर्व पीएम ने एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा है कि जैसे ही आप लड़ेंगे आपस में और लड़ेंगे खूब लड़ेंगे अमेरिकन हथियारों से लड़ेंगे, लंबी लड़ाई लड़ेंगे, अमेरिका तो देता रहेगा आपको। आप ईरान से लड़ेंगे, ईरान भी लड़ता रहेगा। आप हो जाएंगे कमजोर। और जब आप कमजोर होते हैं तो फिर मौका मिलता है इजराइल को। जहां जो भी देश कमजोर होता है वहां इजराइल घुसने की तैयारी करता है
और इजराइल का एक ही ख्वाब है जैसा कि आरोप लगता है उसके ऊपर वो है ग्रेटर इसराइल बनाना और उसको लेकर के वो तरह-तरह के जतन करते हैं और अमेरिका का हाथ उनके सर पर है और अमेरिका उनके लिए रास्ते बनाता है और वो आगे बढ़ते हैं। ये देखिए दिव्यांशु ने हमारे लिए तैयार किया है ग्रेटर इजराइल का मैप। बिल्कुल ये देखिए किस तरीके से जो ये एक तरीके से आप देखिए बेसिकली अगर इसराइल की बात करें तो वर्तमान इसराइल जिसे मान्यता है वो इधर पे स्थित है।
इधर आपकी गाजा पट्टी हो गई और ये हो गया छोटा सा इसराइल बहुत छोटा सा अगर पूरे इस मैप पर अगर आप देख रहे हैं और वर्ल्ड मैप पे देखेंगे तो वो नजर ही नहीं आएगा आपको एक तरीके से। इतना ज्यादा छोटा है वो और लेकिन जो ग्रेटर इसराइल ये आप देख रहे हैं। ये पूरा बल्कि इसको एक तरीके से हमने ट्रांसपेरेंट उसने कर दिया है कि आप देशों को भी देख सकते हो। इसके अलावा किस तरीके से इन्होंने जगह-जगह पर वो कब्जा किया था।
एक बारी आगे लेकर जाइएगा। यह हम आपको दिखा दें इनका इन पे जो आरोप लगाए अब तक इसराइल ने अब तक क्या-क्या इनके नाम पे रिकॉर्ड रहे हैं। वो रिकॉर्ड आप देखिए कहां-कहां इन्होंने अपना फ्लैग जहां-जहां फ्लैग इनका दिखाई दे रहा है आपको इन्होंने कभी यहां पर कब्जा किया था। कुछ दिन तक वहां रूल किया और बाद में कहीं-कहीं छोड़ दिया। जैसे कि सिनाई प्रायदीप जो मिस्र का यहां पर भी 1967 से 1982 तक इनका पूरी तरीके से कब्जा था।
हम अब देखिए जब से यह आरोपित आरोपों के मुताबिक हमने बनाया फिलिस्तनी क्षेत्र जिसका आरोप है वेस्ट बैंक गजा यरूशलम 1967 से इन्होंने कब्जा रखा है उनके इलाकों को गोलान हाइट्स सीरिया 1967 से कब्जा की पूरी तैयारी थी कब्जा भी किया था और वर्तमान में एक वीडियो भी हम आगे दिखाएंगे कि उन्होंने हाल फिलहाल में कब्जा भी कर लिया जब से बसर अलाद की गवर्नमेंट वहां से हटी इसके अलावा सीनाई प्रायदीप की हमने चर्चा की दक्षिणी लेबनान की बात करें तो वहां भी 1978 से 2000 तक इनका एक तरीके से पूरा का पूरा बखूबी इन्होंने इसी साउथ लेबनान में हिजबुल्लाह इस वक्त इनके कब्जे के खिलाफ लड़ने का दावा करवा तो ये एक रणनीति है कि भाई आपस में जितना लड़ेंगे जो देश जितना कमजोर होगा आपको हम सीरिया का उदाहरण देते हैं। सीरिया की मिसाल देते हैं।
सीरिया में बशर अल असद का जब तख्ता पलट हुआ और अबू मोहम्मद जौलानी उर्फ़ अहमद अलशरा सत्ता में आते हैं। उनकी एचटीएस आती है। जब तक ये पूरी प्रक्रिया चल रही थी। इजराइल ने आननफानन में घंटों में जो है अपनी सेनाएं गोलान हाइट्स में भेज दी। कुछ हिस्सा तो गोलान हाइट्स का उनके पास 1967 से था और बाकी का हिस्सा जो सीरिया के कंट्रोल में था यानी बशर असद की गवर्नमेंट के कंट्रोल में था।
जैसे ही जलानी की सरकार आई ये वो देखिए आप देखिए ये गोलान हाइट्स पर इसराइल की सेनाएं मौजूद हो गई। घुस गई। उन्होंने कंट्रोल हासिल कर लिया। भारी बंबार्डिंग की और ये हिस्सा अपने कंट्रोल में ले लिया। आज वहां इजराइल मौजूद है और कहता है कि भ हम रणनीतिक दृष्टि से हैं। जब कभी हमें ऐसा एहसास होगा कि अब ये एरिया सुरक्षित हो गया तो छोड़ देंगे तो वो कल वो दिन कभी नहीं आता। जिनजिन इलाकों में इजराइल ने कब्जा किया है वो फिर छोड़ता आसानी से नहीं है ऐसा भी आरोप लगता रहा है।
तो यही वजह है कि गल्फ देश जो है अरब देश है वो नहीं चाहते कि ईरान और अमेरिका इजराइल की जंग में वो बीच में कूदे क्योंकि जैसे ही अगर वो ऐसा करते हैं तो ये सारा खेल जो है दूसरे रूप में बदल जाएगा। अमेरिका हट जाएगा और कहेगा अब लड़ो तुम लोग। हां बिल्कुल ये एक कहावत नहीं सुनी आपने कि बंदर बांट वाली स्थिति कि दो लोगों को भिड़ा दो एक रोटी के लिए और लड़ाई चल रही थी तीसरा आएगा कि भाई रुको मैं मध्यस्थता कर रहा हूं पूरी रोटी लेकर फरार हो जाएगा अब आप लोग भूखे मरो और यही कारण है कि जो स्थिति बनती जा रही है
हालांकि इस वक्त जो अरब की कंट्रीज है अरब मुल्क हैं वो बहुत ज्यादा एहतियात बरत रहे हैं इसीलिए बरत रहे हैं उनको पता है कि ये चीज कि देखो अगर किसी तरीके से हम इनके झांसे में आए क्योंकि भिड़ा तो इन्होंने दिया ही है इन्होंने लंका तो लगा रखी है। लेकिन अगर हम पहुंचते हैं उस स्थिति में और हम भी गोला बारूद तानने लगते हैं क्योंकि अभी जो लड़ाई चल रही है अगर आप देखेंगे तो ये एक तरीके से अमेरिका, इसराइल और ईरान की है।
जी और इसमें अगर वो किसी तरीके से रिटेशन की कोशिश करते हैं या जैसे जिस तरीके से हमने यूएई के प्रेसिडेंट नयन का वो एक वीडियो देखा था जिसमें वो कह रहे हैं कि हमारी चमड़ी मोटी है। हमारी स्किन जो है वो लेयर उसकी बहुत मोटी है और जो दुश्मन है वो समझ रहा है कि हम बहुत पतले हैं। तो ऐसा नहीं है। हम लड़ते रहेंगे। तो अगर वह लड़ने की स्थिति में आती अभी अभी क्या मैं एक रिपोर्ट देख रहा था कि यह अफ्रीका में जो हम लोगों ने बहुत सारी वहां पे कवर भी किया था वहां लड़ाने की पूरी फिराक है। अभी तक वहां कमजोर स्थिति नहीं बन रही है।
यूएई की तरफ से आरोप है कि वहां पे हथियारों की खी पहुंचाई जा रही है। सूडान में हां और यही वजह वहां सऊदी की भी चीजें हैं। सऊदी का ये भी आरोप लग रहा है कि ये दोनों लड़ा रहे हैं वहां पे। और यही कारण है कि आप समझिए कि यह कहीं और खेल कर रहे हैं। अमेरिका इनके साथ खेल कर रहा है और इसराइल अमेरिका के साथ खेल कर रहा है। सबको नचाने वाला जो आरोप है वो यही लग रहा है कि वो वो इसराइल में बैठे हैं। इजराइल वाले हैं। उनके कहने पे अमेरिका वॉर में भी चला जाता है।
उन्हीं के कहने पर अब वो चाह रहे हैं कि अरब के जो कंट्रीज अरब के जो मुल्क हैं वो भी बकायदा अमेरिका की तरफ घुसाए। और एक बार जैसे ही वो आते हैं अमेरिका वहां से निकल लेगा। इन लोगों को भिड़ा के छोड़ देगा कि अब ये लड़ाई जो है वो वो खाड़ी की है। वो हमारी नहीं है। क्योंकि सारा खेल अगर आप समझेंगे तो अल्टीमेटली तेल की तरफ जाता है। खार्क जैसे आइसलैंड पर जब हमला किया जाता है तभी इनकी तरफ से कहा जाता है कि वो आप समझिए कि ईरान का कोहिनूर अगर कोई कहा जाता है तो वो खार्क द्वीप है।
और वही कारण है कि ये चाहते हैं कि वहां पर हमला करो और ईरान का सबसे ज्यादा तेल जो है उसी द्वीप उसी आइसलैंड के सहारे निकलता है। और यही वजह है कि अब पूरी की पूरी रणनीति पूरा का पूरा जो खेल है वह घूम फिर कर यहीं पहुंचाया है और वह जो पूर्व प्रधानमंत्री है कतर के उनकी तरफ से बिल्कुल सही एक तरीके से वो बिल्कुल और ये सिर्फ उनकी तरफ से कही गई बात नहीं कई सऊदी के अधिकारी भी सोशल मीडिया पर ये कहते रहे हैं कि इजराइल के लिए अमेरिका हमको छोड़कर निकल गया है। वो सारा अपना फोकस इजराइल पर रखते हैं।
उनकी हर अच्छाई बुराई का केंद्र रहता है इजराइल। उसी के लिए अच्छा भी करेंगे। उसी के लिए बुरा। यानी अगर अरब देशों में वो मौजूद है तो इजराइल के का अच्छा हो इसलिए मौजूद है। अगर वो चाहेंगे कि कभी अरब देश कमजोर हो तो इजराइल का अच्छा हो इसलिए और इजराइल का एक ही सपना है ग्रेटर इजराइल क्योंकि उसके पास जमीन की कमी है और कई उनके लीडर ऐलानिया तौर पर बोल चुके हैं जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर हैं।
वह कहते रहे कि हमारा है लक्ष्य कि हमारा जो है नील नदी से लेकर के दरिया फररा तक यानी मिस्र से लेकर के इराक तक जितना भी इलाका है वो हमारा है और ये हमारा आज से नहीं बरसों से और एक ना एक दिन हम उसे पाकर रहेंगे और हमेशा पाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। तो जब जब उनको मौका मिलता है कि कोई कमजोर हुआ वो वहां पर हावी हो जाते हैं जिसका सीधा उदाहरण सीरिया है
जो हमने आपको बताया और यही वजह है कि अरब देश इस बात को भलीभांति समझ गए हैं कि अगर उन्होंने ईरान के साथ किसी भी रूप में लड़ाई शुरू की तो ये ग्रेटर इजराइल के ख्वाब का एक अहम चरण हो जाएगा। हमको इस बात से बचना है और किसी भी सूरत में ईरान से मुकाबला नहीं करना है क्योंकि नुकसान हो रहा है अमेरिकन सेंटर्स पे और अमेरिका की पूरी चाल है कि सब लड़े एक रीजनल वॉर छेड़ना चाहिए और वो हो नहीं पा रही। इसी यही वजह है कि आपने इससे पहले के वीडियो में दिव्यांशु बताया कि ट्रंप किस तरह से झुंझुला गए हैं। फ्रस्टेट हो गए हैं।
बौखला गए हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। कोई साथ नहीं दे रहा। अब उन्हें फील होने लगा है। तो लोगों को बुरा भला कहते हैं। लोगों को पे गुस्सा निकालते हैं और इस तरह की वो कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उसके पीछे वजह यही है कि इन्होंने जो काम शुरू किया है उसमें कोई नहीं आना चाहता। आना चाहता और यही वजह है कि वो जो इनके अलाय जो इनके पार्टनर हैं ये इनकी कंट्रीज पर जब हमला हो रहा है बिल्डिंग जल रही हैं। ड्रोन गिर रहे हैं वहां पर वो तमाम अंतरराष्ट्रीय वो हाउसेस भी है एक तरीके के चाहे वो बैंक के संस्थान हो।
Apple जैसे स्टोर पर भी कुछ ऐसी खबरें आ रही है कि वहां पर भी ईरान निशाना बनाना शुरू कर चुका है। जितने भी फाइनशियल सेंटर है वहां भी हमले हो रहे हैं। तो यही वजह है कि इनकी तरफ से कहा जा रहा है वो वो सब यही है। बेकार है वो सब मतलब देश इनका चल रहा है। पिटाई इनके इनके पार्टनर की हो रही है और ये कह रहे हैं नहीं नहीं वो वो मूर्ख बनाने वाले हैं। क्योंकि अपने आप को महाशक्ति मानने का दंभ अभी तक गया नहीं है।
तो वो कभी स्वीकारेंगे नहीं हार। इजराइल में भी जितना नुकसान हुआ है वो कभी नहीं बताएगा क्योंकि अमेरिका और इजराइल इसको बात को छिपा लेते हैं और भारी सेंसरशिप है और अब यही बात इन्होंने इनको भी बता दी है इसलिए इनके यहां भी सेंसरशिप है और सजा देंगे इस तरह की धमकियां दी जा रही है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है कि इसकी वीडियो मत बनाओ हमले की वीडियो मत बनाओ और अगर कोई वीडियो चल भी रहा है तो उसको कह दे रहे हैं
ये एआईआई तो आप छुपा सकते हैं लेकिन जो हो रहा है वो दुनिया जानती है दुनिया अब बहुत छोटी हो गई है लोगों को सब पता है कि क्या हो रहा है कहां क्या हो रहा है आप छुपाइए आप पुराने तौर तरीकों से छिपाई है लेकिन असलियत सबके सामने है। बहरहाल यह था हमारा आज का भी यह वीडियो जिस पर हम आपके लिए विश्लेषण लेकर आए। कैसा लगा आपको और अरब देशों का यह निर्णय कितना सटीक कितना सही है हमें कमेंट बॉक्स पर जरूर बताइएगा