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‘मोज्तबा खामनी IRGC की कठपुतली’ नेतान्याहू के बयान से बौखलाया ईरान

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नमस्कार, मैं हूं सुजता गोखरेती और सवाल इंडिया का यह है कि युद्ध को शुरू हुए 14 दिन हो गए हैं। दो हफ्ते की इस जंग के बाद क्या हम तय कर पाएंगे कि जीत कौन रहा है? अमेरिका जीत रहा है या फिर ईरान। आपको कुछ तस्वीरें दिखाती हूं और कुछ जानकारी देती हूं जिससे इस सवाल के जवाब शायद आप तक पहुंच पाए। ईरान की तरफ से सबसे पहले एक एआई वीडियो जारी किया गया। जिसके जरिए वह एक बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रहा है। सिर्फ एक लाइन खमनई इज बैक। ईरान यह मैसेज देना चाह रहा है कि खमनई का अस्तित्व खत्म नहीं हुआ है। सीनियर खमनई की जगह अब कमान जूनियर खमनई यानी मोस्तबा के हाथ में है। और इसीलिए लिख रहे हैं खमनई अभी जिंदा है। खमनई इस बैक। ये वीडियो जारी किया है। यह वीडियो ऐसे समय में आया जब अमेरिका से लेकर इजराइल तक पूछा जा रहा है कि अगर मुस्तबा सही सलामत है तो सामने क्यों नहीं आते? हालांकि ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि मुझे लगता है कि वो घायल है। वो किसी ना किसी रूप में जिंदा जरूर है। यह कहा ट्रंप ने। अब यह तस्वीर जारी की है ईरान ने। अगली तस्वीर ईरान की ही राजधानी तेहरान से आई जहां लाखों लोग इजराइल के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान के अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह रैली ईरान की एकता का प्रतीक है और यहां के लोग किसी भी आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार हैं।

खास बात यह है कि जब ईरान के लोग नारेबाजी कर रहे थे तब आसपास धमाके की आवाज भी सुनाई जा सुनी जा रही थी। तो आप सोचिए एक तरफ लोग सड़कों पर और दूसरी तरफ धमाके हो रहे हैं पीछे। लेकिन इन सबके बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है। दावा है कि आईआरजीसी के हमले में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को नुकसान पहुंचा है। कहा जा रहा है कि ओमान सागर के पास यूएसएस अब्राहम लिंकन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि यूएसएस अब्राहम लिंकन पूरी तरह से सुरक्षित है। उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन अगर यह नुकसान हुआ है तो ये अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका है। इसीलिए पूछ रहे हैं कि क्या अमेरिका जीत रहा है? ईरान ने इजराइल पर भी ड्रोन अटैक किए। जो तस्वीरें आई उनके बारे में कहा जा रहा है कि बेर शेवा के सैनिक हेड क्वार्टर्स पर हमले हुए हैं। ईरान का दावा है कि उन्होंने ऐसे रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जिनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हो रहा था। ईरान ने ये भी कहा कि उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। तो सोचिए कि दोनों तरफ से हमले अभी भी हो रहे हैं। और अब यह देख लीजिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नितिन याहू क्या बोल रहे हैं? नितिन याू ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैयद मुस्तबा खमनई को आईआरजीसी की कठपुतली बोल दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हम हवाई हमले करते रहेंगे और सड़कों पर उतरने के लिए जरूर जगह मिल सके ईरानियों को। यह कहा उन्होंने और नेतन या के ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि आतंकी संगठनों के किसी भी नेता के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लेंगे। यानी कि वो यह कहना चाह रहे हैं लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी उनकी एक्सपायर हो गई है। इसका मतलब क्या है? क्या अब वो मुस्तफा को निशाना बनाने वाले हैं? 14 दिन बाद कौन जीता है यह जंग? ईरान युद्ध को शुरू हुए 14 दिन हो गए। लेकिन युद्ध किस ओर बढ़ रहा है? क्या कोई जीत रहा है? अगर जीत रहा है तो कौन जीत रहा है? दुबई की यह तस्वीर देखिए जहां ईरान ने अपनी मिसाइलों से हमला बोल दिया। अटैक दूसरी तरफ से भी हो रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने को निशाना बनाया। टालीगन टू न्यूक्लियर साइट पर बी टू बमर से बंकर बस्टर बम गिराया गया। युद्ध के 14 दिनों का विनाशकारी हिसाब भी समझ लीजिए। अमेरिका की तरफ से 11 जाने गई हैं। शुरुआती छ दिनों में अमेरिका की तरफ से युद्ध की लागत लगभग ₹1 लाख करोड़ रही। इस हिसाब से 13 दिनों का अनुमानित खर्च ₹ लाख करोड़ से अधिक का हो चुका है। इन 14 दिनों में अमेरिका ने अब तक 24,000 करोड़ से अधिक के सैन्य उपकरण इस्तेमाल किए हैं। अब जरा इन 14 दिनों में ईरान का पक्ष देखिए क्योंकि ईरान भले ही युद्ध के मैदान में टिका हुआ है। उसे इसकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ रही है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामई की अमेरिका और इजरायली हवाई हमलों में मौत हो गई। अब तक ईरान के करीब 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 1 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक यदि युद्ध लंबा खींचता है तो ईरान की जीडीपी में 10% से अधिक की गिरावट आ सकती है। ईरान अपने शहीदों और निर्दोष नागरिकों की मौत का बदला जरूर लेगा। ईरान उन बच्चियों की मौत का बदला जरूर लेगा जो दुश्मन के हमले में मारी गई। किसी भी शहादत को भुलाया नहीं जाएगा और जब तक न्याय नहीं मिलता संघर्ष जारी रहेगा। और आज सवाल इंडिया का यह है कि 14 दिन बाद क्या तय हो पाया है कि कौन जीत रहा है ईरान का यह महायुद्ध? सवाल यह कि युद्ध में 2 लाख करोड़ खर्च हुए हैं। ट्रंप को क्या मिला है? ईरान में नया रहबर आया। लेकिन ईरानियों को क्या मिला है? सवाल यह भी कि युद्ध में अब तक 1300 लोगों की जान गई है। जिम्मेदार कौन है? और सवाल यह कि ईरान पर हमले से दुनिया सुरक्षित हुई या खतरा और बढ़ गया है? मैं आपको बताऊं कि मेरे साथ जो मेहमान जुड़ रहे हैं एंबेसडर दीपक बोरा को आप स्क्रीन पर देख रहे हैं। हमारे साथ प्रमित माकडे जुड़ रहे हैं जो कि अमेरिका से हैं। ट्रंप समर्थक हैं। नज़र अब्बास रिवी साहब जुड़ रहे हैं। ईरान से जुड़ रहे हैं। ईरान समर्थक हैं। मेजर जनरल के के सिन्हा आपको अब देख सकते हैं। डिफेंस एक्सपर्ट हैं। सर को आप अक्सर देखते हैं। हमारे चैनल पर भी कार्यक्रमों में भी और हर्षवर्धन त्रिपाठी जी हैं। वरिष्ठ पत्रकार हैं। हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं सबसे पहले नज़र साहब और प्रम जी के पास इसलिए जा रही हूं क्योंकि 14 दिन हो गए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद यह युद्ध भड़का। आज 14 दिन बाद क्या हम यह तय कर पा रहे हैं कि यह जंग कौन जीत रहा है? क्या यह कह पाएंगे? मैं अगर आपसे सबसे पहले ईरान ही चलती हूं क्योंकि यह सवाल वहां पर पूछा जाए। मैं नज़र साहब अगर आपसे पूछूं क्या यह जंग अमेरिका जीत रहा है? जी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। ये सवाल मुझसे ना पूछे आप। ये सवाल आप दुनिया से पूछिए। दुनिया में जो एनालिस्ट हैं, आपके साथ बड़े-बड़े एनालिस्ट जुड़ते हैं। आपके साथ बड़े-बड़े एक्टिविस्ट जुड़ते हैं। मिलिट्री एक्सपर्ट्स जुड़ते हैं और दुनिया भर के जो स्पेशलिस्ट है, एक्सपर्ट्स हैं, वो जुड़ते हैं। आप उनसे पूछे कि क्या अमेरिका जंग जीत रहा है या अमेरिका जंग नहीं जीत रहा है। अगर ट्रंप साहब के बयान को देखें कि सुबह उठते हैं वो कहते हैं कि जंग खत्म हो गई है। हम जंग खत्म करने वाले हैं। हमने सारे टारगेट अचीव कर लिए हैं। फिर वो रात में कहते हैं कि हम 20 गुना ज्यादा शक्ति के साथ हमला करेंगे। फिर अगले दिन वो कहते हैं कि आज अगर ईरान ने जो है स्टेट ऑफ हुमस को छोड़ा खाली नहीं किया या जाने नहीं दिया तो हम आग बरसा देंगे। हम तबाही कर देंगे। फिर वह कहते हैं कि इजराइल की गलती है। फिर कभी वह अपने दामाद को डांटते हैं, कभी अपने डिफेंस मिनिस्टर को डांटते हैं। और इस तरह से उनके जो कंट्राडिक्शनल वाले बयान है उससे आप खुद समझ सकते हैं कि अमेरिका की स्थिति एक जंग में क्या है। और दूसरी तरफ से आप ईरान की जो जमीनी हालत है मैं आपको बताऊं कि इस वक्त ईरान में जो आवाम सड़कों पे उतरी है और अपनी निजाम के सपोर्ट में और अपनी आर्म फर्सेस के सपोर्ट में नारे लगा रही है। और एक ही बात कह रही है कि ये जंग रुकनी नहीं चाहिए। एक पांचवी क्लास के बच्चे से ले यहां के सुप्रीम लीडर तक एक ही बात कह रहे हैं कि यह जंग रुकेगी नहीं। यह जंगायक रहेगी जब तक उससे आपको फायदा क्या होगा? उससे फायदा क्या होगा? नज़र साहब मुझे यह बताइए। इससे तो नुकसान हो रहा है। ईरान में आज भी धमाके हो रहे हैं। जी फायदा आप उससे पूछिए जिसने अटैक शुरू किया है। यहां तो ये डिफेंस कर रहे हैं। इन्होंने डिफेंस किया है। इनके घर में घुस के इनके बुजुर्ग शख्सियत को मार दिया गया। आप हत्या मृत्यु क्यों कह रही है? आप कत्ल कहिए अससिनेशन हुआ है। एक मुल्क के लीडर का अससिनेशन कर दिया गया है। इनकी गैरत को ललकारा गया है। इनकी इनको जलील करने की कोशिश की गई। ये चाह रहे हैं कि घुटने पे टिक जाए। ईरानी ईरान और ईरानी जो है वो घुटने पे आ जाए। जैसे इस पूरे रीजन के दूसरे मलिक हैं। तो ईरान का ये कहना है कि हम तस्लीम नहीं होने वाले। हम जंग करेंगे। जिन्होंने हमारे ऊपर हमला किया है जो आक्रांता है हम उनको सबक सिखाएंगे ताकि उनका दिमाग ठिकाने आ जाए और इस तरह की हरकत वो दोबारा ना करने पाए और बिल्कुल वाज़ है कि आवाम आप वीडियोस देखें आप देखिए ब्लास्ट हो रहे हैं हमले हो रहे हैं लेकिन आवाम सड़कों पे है आप के वीडियोस देखें एक और सब लोग बंकर के अंदर चले जाते हैं। तो सवाल ये पूछना चाहिए जिन्होंने युद्ध को शुरू किया था कि आपने किस हदफ के लिए युद्ध को शुरू किया था। आपने किस नैतिक बल के बिना पे यह युद्ध देखिए मैं नज़र साहब अब यह समझना चाह रही हूं कि 14 दिन के बाद इस जंग ने क्या हासिल किया है अगर अमेरिका ये कह रहा है मैं एक बार जरा प्रमित जी से पूछ लेती हूं आप कह रहे हैं हमारे हम ये जारी रखेंगे जंग आप कह रहे हैं जंग जारी रहेगी नुकसान तो दुनिया का होगा आपका भी होगा अमेरिका का भी हो रहा है प्रमित जी डॉनल्ड ट्रंप ने क्या हासिल कर लिया इस 14 दिन की जंग पे आपने कहा सत्ता चेंज होगी सत्ता तो चेंज नहीं हुई वहां मुस्तफा खमनाई सुप्रीम लीडर बने हुए आपने कहा कि ईरान सरेंडर कर देगा। ईरान ने सरेंडर नहीं किया। क्या हासिल किया आपने? नहीं देखिए अभी केवल 14 दिन ही हुए हैं। इट इज वेरी स्माल टाइम। एक तरह से लंबा समय है। लेकिन और वी आर अमेरिका इस प्रिपयर्ड फॉर अ लिटिल लगर वॉर। देखिए सबसे बड़ी बात है अमेरिका ने क्या हासिल किया है या अमेरिकन प्रेसिडेंट क्यों इस तरह से चाहता है? सी वी कैन नॉट लेट अमेरिकन सिटीजंस टू बी ऑन अ हार्म्स वे। हमको किसी भी प्रकार का अमेरिका की मेन लैंड में अमेरिकन सिटीजंस को नुकसान ना हो। यह हमारा सबसे पहला उद्देश्य है। इसलिए अमेरिका अपनी लड़ाई हजारों मील दूर उन देशों में लड़ता है जहां से उसको एक थ्रेट नजर आता है। अरे अरे ये देखिए ये देखिए आप जो बात कह रहे हैं प्रमित साहब आपकी कंसर्न यह है कि आपके लोगों को कोई नुकसान ना पहुंचे। अमेरिकियों को कोई नुकसान ना पहुंचे। लेकिन बाकी देश में लोगों को कोई भी नुकसान पहुंचे उससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। नहीं नहीं बाकी देश नहीं मैडम जहां

पर इस्लामिक जिहादी फंडामेंटलिज्म का जो गढ़ है जहां से पूरी दुनिया को खतरा है क्या मैं उस देश को एक न्यूक्लियर कैपेबल देश होने दूंगा न्यूक्लियर वॉर जंग की वजह से पूरी दुनिया इसमें झुलस रही है प्रमित जी मैडम देयर आर शॉर्ट टर्म शॉर्ट टर्म पेंस आर देयर फॉर लॉन्ग टर्म गेंस कुछ आपको पेन लेना पड़ेगा पूरी दुनिया को जिससे लॉन्ग टर्म पूरी दुनिया ये बिल्कुल भाषा डोनल्ड ट्रंप से रमित जी ये भाषा बिल्कुल डोनल्ड ट्रम्प की है जो आपने कहा लॉन्ग टर्म्स के लिए शॉर्ट टर्म लॉसेस मैडम आज अमेरिका में मैं महसूस मैं सेफ महसूस करता हूं। मेरे बच्चे सेफ महसूस करते हैं वो इसलिए कि अमेरिका हैज़ दैट मिलिट्री पावर। अमेरिका हैज़ दैट स्ट्रेंथ कि कोई अमेरिका के अगेंस्ट में आवाज नहीं उठा सके। आज के पहले की जो सल्तनते थी अमेरिका में दे वेर नॉट दैट स्ट्रोंग। दे वेयर लेट पीपल टॉक अबाउट डेथ टू अमेरिका। मैडम मैं डेथ टू अमेरिका को कैसे सुन सकता हूं? हाउ कैन आई पे 1.1 ट्रिलियन डॉलर ऑन माय डिफेंस? एंड देखिए मेरा फिर वाजिब सवाल आपसे यह होगा अगर आप डेथ टू अमेरिका नहीं सुन सकते तो वो डेथ टू सुप्रीम लीडर क्यों सुनेंगे? कोई भी देश मैं सिर्फ ये पूछ रही हूं कोई भी देश क्यों सुनेगा ये? और इसीलिए ये जंग खत्म नहीं हो रही है। मैडम इस्लामिक फंडामेंटली जिहादीस आर डेड टू द होल वर्ल्ड नॉट टू अमेरिका। होल वर्ल्ड तो मैं इसी पर इसी पर मैं एक बार एंबेसडर बोरा के पास जा रही हूं। एंबेसडर बोरा डिपेंड करता है द होल। जी डोन्ड ट्रंप के समर्थक हैं। वो कह रहे हैं कि लॉन्ग टर्म गस के लिए शॉर्ट टर्म लॉसेस जरूरी हैं। सर क्या यह शॉर्ट टर्म लॉस है? हम अभी 14 दिन के बाद भी असर्टेन नहीं कर पा रहे हैं कि डॉनल्ड ट्रंप को एक बड़ी जीत मिल गई है या कह सकते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद बेटा। जब आप होता हूं। इट्स ऑलवेज अ प्लेजर टू बी विद मैंने सुना है हमारे अभी दो लोगों ने जो कहा है और जो हमारे फ्रेंड फ्रॉम द यूनाइटेड स्टेट्स कह रहे हैं इट्स अ परफेक्टली लेजिटमेट पॉइंट ऑफ व्यू कि हम लोग नहीं चाहते कि ऐसी सरकार के पास ऐसी रिजीम के पास परमाणु हथियार हो जिन्होंने ये कसम खाई है सुन लीजिएगा कि इजराइल को जीने का अधिकार नहीं है यहूदी इंसान नहीं है को मिटा देना चाहिए आई डोंट एक्सेप्ट देम बेटा मेरे मेरे एक्सटेंडेड परिवार में तो एक यहूदी दामाद है क्या बोलूं उसको कि तेरे जीने का अधिकार नहीं है सेकंड इशू आई वांट टू टेल यू बेटा मेरा अपना मानना है मेरा अपना एक ग्रुप है WhatsApp ग्रुप इसमें बहुत सारे बुद्धिजीवी हैं। मुझसे कहीं ज्यादा ज्ञानी देहानी लोग हैं। इजराइल से हैं, अरब कंट्री से हैं, ईरान से हैं, यूरोप से हैं, अमेरिका से हैं। वो कह रहे हैं कि 48 घंटे में सीज फायर हो जाएगा। अब होता है कि नहीं होता है ये आपने देखना। और तीसरी चीज जो मुझे बताई गई है और मुझे मालूम है कि हमारे ईरान के जो मेहमान है वो शायद नाराज हो जाए। आपसे विनती है कि आप सुन लीजिए कि ये जो मुस्तदा खुमेनी साहब हैं या तो ये बहुत बुरी तरह से घायल हो गए हैं या फिर नहीं है हमारे साथ। अब माने ना माने जो आपने कहना है जो करना है वो करिएगा। पर ये सवाल पूछा गया है कि वो लोग डायरेक्टली सामने क्यों नहीं आए? उनके बिहाफ पे मैसेजेस से क्यों पड़ रहे हैं? और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से क्रिएट किए हुए वीडियोस आप क्या दिखा रहे? वो तो मैं भी दिखा सकता हूं कि मैं प्लनेट वीनस पे बैठा हूं, चाय पी रहा हूं। इट मीन्स नथिंग। सो मेरी अपनी मानना है मैम। आज की दुनिया में जो अमेरिका की ताकत है लेट मी कंक्लूड उसके सामने कोई टिक नहीं सकता। और जो टिकने की कोशिश करेगा बहुत मार पड़ेगी। पर एंबेसडर और आपने कह दिया कोई टिक नहीं सकता है। अमेरिका सुपर पावर है।

ये दुनिया जान रही है। लेकिन मैं मेजर जनरल सिन्हा एक सवाल इसलिए पूछ रही हूं आपसे क्योंकि जब रूस ने युद्ध शुरू किया तो सबने यही सोचा कि यूक्रेन टिक नहीं पाएगा। यूक्रेन खत्म हो जाएगा। आज चार साल हो गए हैं सर। वो युद्ध अभी भी जारी है। तो रूस ने क्या हासिल किया उस जंग में? आज वही सवाल पूछ रही हूं। 14 दिन के बाद मुझे नहीं पता युद्ध कितना लंबा चलेगा। लेकिन क्या हम क्लियर विनर एक दिख रहा है आपको इस जंग में? जय हिंद सुचारित। देखिए आपने आज पूछा है कि 14 दिन के वार में कहां है? मैं स्ट्रेटेजिकली उसको इसको एनालाइज करूंगा रिव्यू ऑफ़ द सिचुएशन। तो मेरे को तो एसेट्रिक वफेयर के अंदर में जो आयाम है वो जीतता हुआ दिखाई देता है कि जो कन्वेंशनल है कि आप बड़े-बड़े शिप ले के पहुंचे और जो चीजें करें बाय एयर पावर यू डिस्ट्रॉय जिसमें ह्यूमिनिटी मारी जाती है उसके अंदर में अंधाधुंध आप उसी जगह में मारते रहते हैं। चाहे वो गाजा हो या कहीं हो। इट इज द लूजर बिग लूजर। देखिए आज मैं नहीं कह रहा हूं। सेक्रेटरी ऑफ ट्रेजरी है स्कॉट बसन। उन्होंने कहा वी कैन नॉट ओपन स्ट्रेट ऑफ आवर मोस और यह लड़ाई जिस दिन शुरू हुई थी 28 तारीख को उसके दो दिन बाद यही आवाज आई थी अमेरिका से वी विल कॉट द व्हीकल आपने अभी बताया था यूएसएस अब्राहम लिंकन के ऊपर में वाई जे12 जिसको सीएम30 मिसाइल्स कहते हैं एंटी शप है उससे हमला हुआ इट हैज़ गॉन टू थर्ड उसकी सक्सेसिव लाइन है जो एयरक्राफ्ट कैरियर की वो स्टेट ऑफ यू नो जो ओमान है उससे भी पीछे चला गया। इसके अलावा यूएसएस जेरार्ड फोर्ट में आज आग लगे हैं। दो लोग उसमें झुलस के मर गए हैं। वहां के सैनिक बड़ी घटनाएं हैं। केसी747 रिफ्यूलिंग टैंकर्स जो है वो जॉर्डन और इराक के लाइन पे वो तो क्षतिग्रस्त हुए हैं। आपने बताया कि चार उसमें मारे गए हैं अमेरिकन सोल्जर्स। इसके अलावा एक केसी 135 है। ये इजराइल के अंदर। तो यह मिलिट्री रिव्यू मैं आपको कह रहा हूं 14 दिन के बारे में। आपने बहुत बताया कि कितने पैसे खर्च हुए, क्या हुआ, कितने लोग मारे गए। ये कहना 1998 में हमारे को कहते थे भारत को किसी भी तरीके से हम आपको न्यूक्लियर वेपन्स नहीं बनाने। यही था यही नैरेटिव था। आपके ऊपर रोका गया। ईरान के साथ में चार साल यू नो एक चेंज ऑफ़ रिजीम हुई थी। जो हम 79 की बात करते हैं 53 में इसके पहले जो बैठाया गया था यू नो जो वहां के पर सर देखिए यहां पर यहां पर एक बड़ी बात ये भी कही जा रही है जो एंबेसडर बोरा ने कहा कि ईरान यहूदियों के खिलाफ है और कहता है दे डोंट हैव अ राइट टू लिव यानी कि उनकी जिंदगी उन्हें जीने का अधिकार नहीं है। तो इस ये एकिस्टेंशियल थ्रेट है यानी उनकी जान अगर उन्हें रहना है अस्तित्व बनाए रखना है तो वो ईरान पर हमला करेंगे। अब क्या इसे सोचते हुए तो ये जंग जारी क्योंकि आप एक मुल्क को हटा तो नहीं सकते हैं मानचित्र से तो फिर तो ये जंग लगातार चलती रहेगी। मैं एक बार जरा एक बड़ी खबर बता दूं और फिर मैं हर्षवर्धन जी के पास जा रही हूं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगथ ने ईरान को एक बड़ी धमकी दी है।

वो कह रहे हैं आज ईरान पर अब तक के सबसे ज्यादा हमले होंगे। जंग जीतने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। ईरान को ऐसी सजा देंगे कि दुनिया देखेगी। ईरान की मिसाइलों में 90% गिरावट आ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर घायल है और शायद मुस्तफा का चेहरा भी विकृत हो गया है। भूमिगत हो गया ईरान का नेतृत्व। अमेरिका और इजराइल ने 15,000 ठिकानों पर हमले किए हैं। जल्द तबाह हो जाएगी ईरान की सभी रक्षा कंपनियां और ट्रंक के हाथ में सारे पत्ते होंगे वो तय करेंगे। एक बार मैं नज़र साहब और हर्षवर्धन जी को ले। नज़र साहब क्या ये सही है? वो कह रहे हैं कि ऐसे हमले होंगे जो आपने कभी देखे नहीं है और ये मुझे लगता है पीठ पिछले कई दिनों से ऐसे बयान दे रहे हैं। देखिए मैं पहले जो हमारे साथी हैं उन्होंने जो बातें कही उस दो तीन टिप्पणी करना चाहूंगा। बोरा साहब ने कहा कि यहूदियों को जीने का हक नहीं ईरान ये कहता है। तो मैं इनवाइट करता हूं बोरा साहब को कि वो आए ईरान में देखें कि यहूदी तेहरान में कितनी बड़ी तादाद में रहते हैं। उनकी इबादतगाहें हैं। वो वोट देते हैं। हत्ता पार्लियामेंट के अंदर एक रिजर्व सीज भी है यहूदियों के लिए। तो यह जो नैरेटिव पुश किया जाता है यह नैरेटिव सही नहीं है। फ़क्चुअली इनकरेक्ट है। जब कहा जाता है कि इजराइल खत्म होना चाहिए तो यह कहा जाता है कि फिलिस्तीनियों को जिन फिलिस्तीनियों को इजराइल को निकाला गया वहां से उनको वापस बुलाया जाए जो रिफ्यूजी स्टेटस पे रहे हैं। एक रेफरेंडम हो और एक ऐसी सरकार वहां बने कि जहां पे 1948 से पहले रहने वाले वहां पे फिलिस्तीनी जो थे अरब और जितने यहूदी थे उनके साथ मिलके एक रेफरेंडम हो जो उनके साथ जुल्म किया गया है। 70 80 साल से उनको दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया गया है। यह मतलब होता है मकबर इजराइल का। एक ये बात। दूसरी बात जो हमारे दोस्त अमेरिका से जुड़े हैं वो जो कह रहे हैं न्यूक्लियर पावर नहीं बनने देंगे। मैं उनसे सवाल करूंगा और आपसे सुचित्रा जी जो जून में पिछले साल जंग हुई थी। 28 बार ट्वीट करके ट्रंप साहब ने क्या कहा था? हमने ईरान की न्यूक्लियर पावर खत्म कर दी। हमने ईरान के न्यूक्लियर रिएक्टर खत्म कर दिए।

तो मेरे बाद मेरा सवाल यह है पूरी दुनिया से अकलमंद लोगों से कि जब न्यूक्लियर रिएक्टर खत्म हो गए, न्यूक्लियर पावर खत्म हो गई तो अब ये आपने जो गैर कानानूनी तौर से क्रिमिनल एक्टिविटी करते हुए ईरान पे अटैक किया और ताज्जुब की बात खैर मुझे ताज्जुब नहीं है दुनिया को शायद अब ताज्जुब हो अटैक की शुरुआत आयतुल्ला खामनाई के ऊपर अटैक से नहीं हुई है। अटैक की शुरुआत 170 बच्चियों के कत्ल से हुई है। 170 बच्चियों को टारगेट करके प्रिसिशन के साथ मिसाइल मार के उनको मारा गया है। यहां से जंग की शुरुआत हुई है। तो मेरा सवाल ये कि जब न्यूक्लियर पावर ईरान नहीं रह गया उसके अलावा तो देखिए अभी इस बार जो जंग शुरू की गई है वो बिना नकाब के दाखिल हुए हैं। एक सेकंड दीजिए मुझे रिजीम चेंज इनका असली मकसद है ये चाहते हैं रिजीम चेंज कर दें। कभी न्यूक्लियर पावर के नाम पे आते हैं। कभी वुमन राइट्स के नाम पे आते हैं। कभी ह्यूमन राइट्स के नाम पे आते हैं। मुख्तलिफ बहाने से आते थे। इस बार बिना बहाने से आए हैं। तो लेकिन इस बार ईरानी आवाम भी ये कह रही है कि क्योंकि आपने दोबारा दो बार नेगोशिएशन टेबल पे थे। अटैक हुआ। पिछले साल जून में नेगोशिएशंस के दरमियान अटैक किया गया। इस बार भी नेगोशिएशन हो रही थी। फ्राइडे को ओमान के मिनिस्टर ने कहा नतीजा आने वाला है और सैटरडे की सुबह अटैक कर दिया गया। कोई भी दुनिया का नैतिक इंसान कोई भी इंसान जिसके पास दो पैसे का भी मोरल अगर बाकी है। नेगोशिएशन टेबल पे बुला के आप हमला करते हैं। आप किस दुनिया में रह रहे हैं?

आप क्या मसलन ये आदिवासी कानून? आदिवासी भी मैं नहीं कह रहा हूं। ये कौन सी दुनिया का कानून है? जंगल का कानून है वो किसी भी मुल्क पे अटैक और वहां के लीडर सर देखिए साहब यह तो एक बहुत बड़ी चर्चा है इस चर्चा में दुनिया भर दुनिया में के मुल्कों में ये चर्चा हो रही है कि जो अमेरिका ने किया वो कितना सही है अमेरिका ने घुसकर कैसे एक नेता को मार दिया लेकिन इस सबके बीच आज मैं हर्षवर्धन जी ये सवाल पूछ रही हूं आपने सबको सुना आपने ईरान में जो बैठे हुए हैं नजर साहब उनको सुना आपने डोनल्ड ट्रंप के समर्थक को सुना 14 दिन के बाद पूरी दुनिया पर इस युद्ध का असर है एंड वी डू नॉट हैव अ क्लियर विनर। हमारे पास कोई ऐसा देश नहीं कि हम कह सके इन्होंने जंग जीत ली है। क्या ये हकीकत नहीं है? सुचिता ना तो अमेरिका जंग जीत रहा है ना ईरान मानवता हार रही है। लोग हार रहे हैं। और खामने के शासन का मैं कतई समर्थक नहीं हूं क्योंकि खामनेई ने बहुत से ईरानियों को मरवाया है। महसा अमीनी अभी तक मुझे याद है। मैं उम्मीद करूंगा कि नजर साहब कुछ बोलेंगे उस पर और मैं नहीं जानता हूं। आपने कहा ईरान से जुड़े हुए हैं तो जहां से जुड़े हुए हैं अगर तेहरान से या जहां से भी जुड़े हुए हैं क्या हालात हो गए होंगे वहां 14 दिनों में गाजा में हमने देखा बर्बादी हो गई तबाही हो गई हमास को लोग जिसको कहते हैं ना कि उस आतंकवादी हमले के खिलाफ उस पे बोलने को तैयार नहीं थे गाजा की बर्बादी हो गई और यह तो कतई नहीं हो

सकता कि दुनिया में कोई एक व्यक्ति कहे कि हम तय करेंगे दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में क्या होता है। डोनाल्ड ट्रंप जो ये कर रहे हैं हमने ही अगर किसी भी तरह से किसी भी चीज़ के लिए गुनहगार मानते थे, दोषी मानते थे, वह शासन नहीं आने दे रहे थे। और अगर ईरान में इतना है तो क्यों वहां पर किसी तरह की डेमोक्रेसी की बहाली नहीं हो पा रही है? क्यों वहां पर महिलाओं बच्चों के अधिकार नहीं है? क्यों सब कुछ इस तरह से आज के समय में चलाया जा रहा है जो कतई आज के आधुनिक युग का नहीं है। और फिर मैं कह रहा हूं ट्रंप जो कर रहे हैं उसको मैं कतई जस्टिफाई नहीं करता। और ये दादागिरी तो चल ही नहीं सकी। हम भारत के लोग हमारी तो ईरान से भी दोस्ती है, अमेरिका से भी दोस्ती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि ईरान से दोस्ती हम करके करें क्या? ईरानियों को अधिकार नहीं है। ईरान के साथ कोई बातचीत का नहीं है। ईरान के जो शासन है वो जिस तरह के शासन से चलता है और अमेरिका की मुश्किल है कि वहां एक ट्रंप जैसा आदमी आ गया है। जिसको अपनी सनक दुनिया चलानी है। तो कैसे ये हो पाएगा? और मुझे लगता है कि ये सबसे खतरनाक है। ये कित

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