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कौन है मोहम्मद अली ज़फ़री जो ईरान को हारने नहीं दे रहा? इस एक आदमी ने यूएस-इजरायल के छुड़ाए पसीने..

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ईरान समेत मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच एक नाम लगातार चर्चा में है और वह नाम है मोहम्मद अली जाफरी का। मोहम्मद अली जाफरी ईरान की सैन्य रणनीति का वो वास्तुकार माना जाता है जिसने ऐसी रक्षा नीति तैयार की जिसने देश को बड़े पैमाने पर हमलों के बावजूद लड़ाई जारी रखने में सक्षम बनाया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया।

इस अभियान में फाइटर, प्लेन, ड्रोन और मिसाइलों के जरिए ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनई, आईआरजीसी प्रमुख मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अजीज नसीर जादेह और सशस्त्र बलों के प्रमुख सैयद अब्दुल रहीम मौसवी सहित कई बड़े अधिकारी मारे गए। अमेरिका को लगा कि ईरान की कमांड और कंट्रोल प्रणाली टूट चुकी है और कुछ ही दिनों में ईरानी व्यवस्था ढह जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ईरान अब भी मुकाबले में मजबूती से खड़ा है।

इसके पीछे जिस व्यक्ति की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है, वह है इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड स्कोप यानी आईआरजीसी के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अली जाफरी और उनकी मोजेक डिफेंस रणनीति। मोहम्मद अली जाफरी ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे हैं। 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस्लामी क्रांति के बाद आईआरजीसी की खुफिया इकाई में अपना सैन्य करियर शुरू किया जो ईरान के कुर्दिस्तान क्षेत्र में सक्रिय थी। उन्होंने ईरान इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया और धीरे-धीरे सेना में ऊंचे पदों तक पहुंचे।

1992 में उन्हें आईआरजीसी की जमीनी सेना का कमांडर बनाया गया और साथ ही सराल्लाह नाम की एक विशेष इकाई की जिम्मेदारी दी गई जिसका काम तेहरान की रक्षा करना था। वहीं 2005 में उन्हें आईआरजीसी के सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज का प्रमुख बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने मोजेक डिफेंस सिद्धांत विकसित किया। वहीं 2007 में उन्हें आईआरजीसी का कमांडर इन चीफ बनाया गया

और उन्होंने इस रणनीति को पूरी तरह लागू कर दिया। अब बात अगर जाफरी की रणनीति की करें तो विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति ईरान को जरूरी नहीं कि युद्ध जिताए लेकिन उसकी हार लगभग असंभव बना देती है। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता आईआरजीसी की वैचारिक प्रतिबद्धता और जाफरी की रणनीति ने मिलकर उसे ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया कि उसके विरोधियों को तेज जीत के बजाय लंबे और महंगे युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।

मोहम्मद अली जाफरी ने अपने अध्ययन में यह समझने की कोशिश की कि अत्यधिक केंद्रित कमान वाली सेनाएं संकट के समय क्यों जल्दी बिखर जाती हैं। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने ऐसी सैन्य व्यवस्था तैयार की जिसमें फैसले लेने की ताकत कई स्तरों पर बांट दी गई है। नतीजा यह हुआ कि सेना किसी एक नेतृत्व या मुख्यालय पर निर्भर नहीं रही और उसे पूरी तरह निष्क्रिय करना लगभग असंभव हो गया

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