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ईरान पर ट्रंप ने हमला क्यों किया..करीबी ने ही खोल दिए राज!..

Hindi Post

दुनिया में दो चीजें ऐसी हैं जो सबको चाहिए और सब उस पर कब्जा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। एक तेल दूसरा सोना और यही दो चीजें ऐसी हैं जो दुनिया चला रही है। जिसके पास तेल है जिसके पास गोल्ड है वो दुनिया का राजा है। और इसी के लिए युद्ध होते रहे हैं। इसी के लिए बम बरसते रहे हैं। सरकारें गिराई जाती रही हैं। देश तबाह किए जाते रहे हैं। तख्तापलट होता रहा है। वेनेजुएला से लेकर ईरान तक यही हो रहा है। और अमेरिका का तो पूरा इतिहास ही ऐसा है। अब ईरान के मामले में यही खुलासा हुआ है।

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के एक सेनेटर हैं लिंडसे ग्राहम जिनको ट्रंप का बहुत करीबी और खास माना जाता है। लिंडसे ग्राहम ने ईरान पर हमले के पीछे का असली राज खोल दिया है। रिपब्लिकन सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक टीवी प्रोग्राम में खुलेआम कहा बॉस कि ईरान के तेल पर अमेरिका की नजर है। वेनेजुएला की तरह ईरान पर कंट्रोल चाहते हैं। ईरान और वेनेजुएला के पास दुनिया का 31% तेल भंडार है। इतने बड़े तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा।

इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। सबसे बड़ी बात कि इससे चीन को बड़ा झटका लगेगा। चीन इन दोनों देशों से तेल खरीदता रहा है। ईरान पर अमेरिका का कंट्रोल चीन के लिए बुरे सपने जैसा होगा। यानी सीधा हिसाब वही है बॉस जो हम आपको पाठशाला में बोलते रहे। ना तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम से इनको कोई खतरा था। ना ही ईरान किसी पर हमला करने जा रहा था। ना ही इस ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना इनका असली मकसद था।

पूरा खेल तमाशा तेल का है बॉस। इनको पूरे दुनिया में तेल जहां-जहां है वहां घुसना है और लूटना है। अमेरिका एक गुंडागर्दी करता हुआ देश दिख रहा है। एक लुटेरा देश दिख रहा है कि जहां तेल है लाओ मुझे दो। मैं उसका इस्तेमाल करूंगा। सुनिए लिंट से ग्राहम डोनाल्ड ट्रंप के करीबी खुद अपने मुंह से बता रहे हैं। 31% ऑफ़ द वर्ल्ड ऑल रिजर्व्स गोना हैव अ पार्टनरशिप विथ 31% ऑफ़ द नोन रिजर्व्स। दिस इज़ चाइना दिस इज़ गुड इन्वेस्टमेंट मिलिट्री समथिंग बिफोर। आपको क्या लगता है डॉनल्ड ट्रंप अकेले संघ की है। उनके साथ का हर आदमी सनक में डूबा हुआ है।

वो कह रहा है मुझे प्राउड है कि हम ऐसा कर रहे हैं। ये तो पूरी दुनिया को पता है कि जहां कहीं भी तेल दिखता है अमेरिका उस तेल पर कब्जा करने के लिए कूद जाता है। फिर आगे पीछे कुछ नहीं देखता। बॉस लोग तो इस बात का मजाक उड़ाते रह। मीम बनाते रहे कि अगर खाने के तेल में ज्यादा तेल दिख जाए। खाने के खाने में तेल ज्यादा दिख गया तो कढ़ाई में अमेरिका कूद जाएगा। ये इन लोगों का हाल है।

उत्तर कोरिया पर ट्रंप हमला क्यों नहीं करते? लोग पूछते हैं। किम जोंग भी तो धमकी देता रहता है। परमाणु हथियार होने का दावा खुलेआम करता है। ईरान में परमाणु हम तो कभी परमाणु बम तो अभी तक दिखा नहीं। उत्तर के कोरिया तो खुले कहता है कि उसके पास है। वहां क्यों नहीं जाते डॉन्ड ट्रंप? अमेरिका क्योंकि उत्तर कोरिया के पास ना तो तेल है ना सोना है। ऊपर से वो ऐसा सनकी है कि परमाणु बम भी फोड़ देगा। उनको पता है।

वेनेजुएला पर भी तेल के लिए अमेरिका ने हमला किया। वहां के राष्ट्रपति को उठा के ले आए। किडनैपिंग कर लिया बॉस। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। अब इसीलिए ईरान पर हमला किया। ईरान के तेल पर कब्जा करने के लिए युद्ध छेड़ दिया और दुनिया को बता रहे हैं कि देखो हम तो तुम्हारे लिए कर रहे हैं। अरे मत करो जाओ। वेनेजुएला का मामला ट्रंप ने क्लोज कर दिया। अब ईरान की बारी है।

यह सोचे थे कि खामई को मार देंगे। वहां जैसे माधुरों को उठा लिए। खामनाई को मारेंगे। ईरान घुटनों पे गिरेगा। अपना कोई वहां पपेट बैठा देंगे कठपुतली। अब पूरा तेल उठा लेंगे। क्योंकि ईरान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है। ऊपर से उस तेल की क्वालिटी बहुत अच्छी। ईरान के अलावा अन्य खाड़ी देशों के साथ अमेरिका के संबंध अच्छे हैं। ईरान ही वो देश है जो अमेरिका को आंख दिखाता रहता है।

इसलिए ईरान पर हमला ही कर दिया। ईरान में करीब 209 बिलियन बैरल तेल का भंडार है। ग्लोबल सप्लाई का 4.5% तेल ईरान प्रोड्यूस करता है। प्रतिदिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन। ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन है। 2025 में चीन ने ईरान के तेल निर्यात का 90% से ज्यादा खरीदा था। क्योंकि बाकी देश उस तरह से खरीद ही नहीं सकते। अमेरिका ने सेंशन लगा रखा था। ईरान के तेल भंडार पर अगर अमेरिका का कंट्रोल हो गया तो चीन की परेशानी बढ़ जाएगी और यही ट्रंप का प्लान भी है कि एक तो तेल ले लो ऊपर से चीन के साथ खेल कर दो। ट्रंप ने पहले ही वेनेजुएला पर कब्जा कर लिया है। वहां के राष्ट्रपति माधुर अरेस्ट है। अमेरिका की कैद में है।

वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है जो अब अमेरिका के कंट्रोल में है। अगर ईरान के ऑयल रिजर्व पर अमेरिका का कंट्रोल हो जाता है तो ट्रंप के हाथ वो खजाना लग जाएगा जिससे अमेरिका ऑयल किंग हो जाएगा। भाई अगर आप देखेंगे इस वक्त हालत क्या है?


वेनेजुएला उसको अगर आप देखेंगे वेनेजुएला वहां पर 303 बिलियन कह रहा हूं मिलियन नहीं बिलियन बैरल तेल मौजूद है 303 बिलियन बैरल तेल का भंडार है और दुनिया का 17 से 19% 17 से 19% कच्चा तेल। यह कहां पे है बॉस?
यह है। आपको बता रहा हूं वेनेजुएला में। दुनिया का 17 से 19% वो तो ऑलरेडी ट्रंप ने ले लिया मधुरों को किडनैप करके। अब उसकी नजर है प्लस ईरान पर। ईरान में कितना है बॉस? ईरान में है 209 बिलियन। बिलियन बैरल। ठीक है? इसके पास 303, इसके पास 209। और यह दुनिया का कितना है बॉस?


दुनिया का कहा जाता है कि ऑलमोस्ट 11% से लेके 13% स्टोर है। रिजर्व है। दोनों देशों के पास कुल मिला दीजिए अगर आप इन दोनों को जोड़ दीजिए तो ये 30% दुनिया का तेल हो जाता है बॉस। 30% कच्चा तेल। अब आप खुद सोचिए कि अगर दुनिया के 30% कच्चे तेल के भंडार पर अमेरिका का कंट्रोल हो गया तो वो क्या नहीं कर सकता? और उसके पास खुद का तेल तो है ही है। कच्चे तेल के मामले में अमेरिका की मोनोपोली हो जाएगी। यानी सारी लड़ाई इस बात की है कि कौन कच्चा तेल बेचेगा, किसे बेचेगा, अमेरिका को इस पर कंट्रोल चाहिए। अमेरिका यह सब तय करना चाहता है जिसके लिए ट्रंप जगह-जगह कूद रहे हैं।

ट्रंप किसी भी कीमत पर ईरान के तेल पर कब्जा चाहते हैं। इसके लिए ट्रंप ने इजराइल को भी हड़का दिया। क्योंकि ट्रंप का मकसद तेल भंडार पर हमला करना नहीं, तेल पर कब्जा करना है। इजराइल ने ईरान के तेल भंडार पर भयंकर हमले कर दिए। इजराइल के हमले के बाद तेल भंडार जलने लगे और धुएं का गुबार छा गया। ट्रंप भड़क गए। इजराइल ने ईरान के 30 से ज्यादा ऑयल डिपो पर हमला किया। युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका इजराइल में यह पहला बड़ा मतभेद है। इजराइल के हमलों पर अमेरिका ने कहा कि क्या बकवास है?

जी। ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा कि राष्ट्रपति को यह पसंद नहीं आया है। राष्ट्रपति ट्रंप तेल बेचना चाहते हैं। उसे जलाना नहीं चाहते। अमेरिका ने कहा कि तेल भंडार पर हमला अच्छा विचार नहीं था। भाई अमेरिका को ईरान से तेल चाहिए। इजराइल को ईरान को खत्म कर देना है। क्योंकि उसके हिसाब से जो उसके मिडिल ईस्ट में दुश्मन है उसमें से एक को तो निपटाओ इसी बहाने। तो दोनों का मकसद यहां मिसमैच हो गया। तो ट्रंप नाराज हो गए कि अरे क्या कर रहे हो?


तेल में आग काहे लगा रहे हो? वही लूटने तो निकले हैं हम। इजराइल के हमलों से ट्रंप की नाराजगी इसलिए है क्योंकि ट्रंप का प्लान इसी तेल पर कब्जे का है। जबकि इजराइल ईरान को बर्बाद करना चाहता है। ट्रंप के करीबी लिंट से ग्राहम के बयान के बाद कुछ बातें बिल्कुल क्लियर हो गई। ईरान युद्ध एक रिसोर्स वॉर है जिसका मकसद तेल के संसाधनों पर कंट्रोल करना है। दूसरा इस युद्ध के जरिए चीन की इकोनमिक ग्रोथ को अमेरिका रोकना चाहता है। चीन अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए वेनेजुएला और ईरान पर निर्भर है।

कच्चे तेल की चाबी अपने पास रखकर अमेरिका अपना ग्लोबल डोमिनेंस बढ़ाना चाहता है। यानी पूरा खेल अमेरिका को दुनिया का बाप बनाने का है। यानी पर्दे पर भले ही ईरान के खिलाफ अमेरिका युद्ध लड़ता दिख रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे का असली खेल तेल से जुड़ा हुआ है। क्रूड ऑयल ईरान की लाइफलाइन है। इसी के दम पर ईरान की इकॉनमी चलती है। ईरान के कच्चे तेल का हब खार्ग आइलैंड है

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