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ट्रम्प व्हाइट हाउस में प्रेयर पर घिरे, लोगों ने क्या-क्या पूछा?

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ईरान के साथ जंग को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब केवल प्रार्थनाओं का ही सहारा रह गया है। ऐसा हम नहीं बल्कि अमेरिका के लोग खुद कह रहे हैं। बल्कि अमेरिका क्या दुनिया भर के लोगों के बीच यही चर्चा है। वाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रार्थना करती तस्वीरें वायरल होने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। कौन सी है यह चर्चाएं? इन पर बात [संगीत] करेंगे डिटेल में। पहले आप यह वीडियो देखिए। मैं प्रार्थना करता हूं कि आप उन पर अपनी कृपा और सुरक्षा बनाए रखें। मैं प्रार्थना करता हूं कि आप हमारे सैनिकों और हमारी सशस्त्र सेनाओं में सेवार सभी पुरुषों और महिलाओं पर अपनी कृपा और सुरक्षा बनाए रखें। हे ईश्वर हम प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे राष्ट्रपति को वो शक्ति प्रदान करते रहे जिसकी उन्हें हमारे राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए आवश्यकता है। आ ग्रेट नेशन एस वी कम बैक टू वन नेशनल लिबर्ट जस्टिस वी योरली ब्लेसिंग इन जीसस जैसा कि आप देख सकते हैं वीडियो में ट्रंप अपने समर्थकों के साथ डेस्क पर बैठकर प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं। ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा गया कि यह प्रार्थना अमेरिका

और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए की गई थी। हालांकि इस वीडियो के वायरल होने के बाद ट्रंप विरोधी और ईरान समर्थकों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया। कहा गया कि क्या हुआ उन बड़े-बड़े दावों का? डोनाल्ड ट्रंप को आखिर किस बात का डर है या यूं समझे कि उनके हाथ से बात अब निकल चुकी है कि अब ईश्वर की शरण में जाने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। इन चर्चाओं के बीच जिस बात की चर्चा सबसे ज्यादा हुई वो थी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के हालिया बयान की जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान पर कट्टरपंथियों का शासन है। अपने बयान में मार्को रूबिया ने कहा था ईरान पर पागलों का शासन है। धार्मिक कट्टरपंथी पागलों का। इस बयान के बाद जब ट्रंप का प्रार्थना करता हुआ वीडियो सामने आया तो लोगों ने पूछा कि अगर ईरान पर कट्टरपंथियों का शासन है

तो फिर आप क्या हैं? इसी कड़ी में एक यूजर ने लिखा रूबियों ने कहा था कि ईरान पर धार्मिक कट्टरपंथियों का शासन है। वाइट हाउस की वर्तमान की स्थिति। एक और यूजर ने कहा और फिर तुम ईरान पर धार्मिक चरमपंथियों के शासन का आरोप लगाते हो। एक और यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि अमेरिका धीरे-धीरे ईरान जैसे धार्मिक देश की ओर बढ़ रहा है।” इसी बीच कुछ लोगों ने ऐसा दावा भी किया कि ट्रंप जंप केवल इसीलिए चाहते हैं ताकि एब्सस्टीन मामले में लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। इसी कड़ी में एक यूजर ने तंज कसते हुए एक फोटो पोस्ट किया। इसी के साथ यूजर ने लिखा देश ने वाइट हाउस में इससे [संगीत] अधिक भ्रष्ट, लालची, घृणास्पद, हत्यारा और आध्यात्मिक एवं भावनात्मक रूप से [संगीत] विक्षिप्त व्यक्ति को कभी नहीं झेला है। या तो यह ईसाई धर्म प्रचारक बेहद भोले हैं या फिर खून से लथपथ व्यक्ति के साथ अपने जुड़ाव का फायदा उठा रहे हैं। एक और यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, “ट्रंप ने आंखें बंद कर मन ही मन में कहा होगा, “हे भगवान, इस युद्ध को जितना हो सके [संगीत] उतना लंबा चलने दो। कृपया सबका ध्यान भटकाओ।” मैं आपसे विनती करता हूं एस्टीन मामले में मेरे बारे में जो भी कुछ सामने आ सकता है उससे मेरी रक्षा करो।

एप्सन मामले को लेकर इस तरह के कई कमेंट सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने ट्रंप से ईरान में तबाही के बाबत भी सवाल किए। इसी कड़ी में एक यूजर ने ईरान में मारी गई 100 बच्चियों का जिक्र छेड़ते हुए पूछा कि क्या उनके लिए भी कोई प्रार्थना कर रहा है? एक और यूजर ने लिखा ट्रंप निर्दोष ईरानियों को मार रहे हैं और अमेरिका के पाखंडी ईसाई उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। प्रभु यीशु ऐसा कभी नहीं करते। एक अन्य यूजर ने लिखा किसी को भी इस बात का यकीन नहीं है कि इनमें से कोई भी व्यक्ति ठग के अलावा कुछ और है। एक अन्य यूजर ने कहा कितनी भी प्रार्थना कर लो तुम्हारे हाथों से [संगीत] खून के धब्बे नहीं धुलेंगे। वहीं कुछ यूज़र्स ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए कि डोनाल्ड ट्रंप कभी भी प्रार्थना नहीं करते ना ही चर्च जाते हैं जब तक कि [संगीत] वोट का मसला ना हो। एक यूजर ने कहा बेहद हास्यस्पद डोनाल्ड ट्रंप को वोट की जरूरत पड़ने से पहले कभी भी चर्च जाते [संगीत] या भगवान का शुक्रिया अदा करते या बाइबल के वचन पढ़ते नहीं देखा गया। उन्हें तो पता भी नहीं था कि भगवान है। जब तक कि इवेंिकल्स ने उन्हें बताया नहीं और अब हम यहां हैं। अब भी चर्च नहीं जाते। बाइबल के वचन नहीं पढ़ते और प्रार्थना भी नहीं करते। इसी बीच कुछ लोगों का यह भी कहना था कि इस तरह के युद्ध में बड़े नेता खासतौर पर देश के पीएम और प्रेसिडेंट तो सुरक्षित रहते हैं। जिन लोगों या उनके बच्चों की कुर्बानी दी जाती है वह आम नागरिक होते हैं।

हालांकि यह तबाही कब रुकेगी इस बारे में फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता। जिस तरह से दोनों देशों के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। इस युद्ध के जल्दी थमने के तो आसार नहीं लग रहे। बहरहाल इस युद्ध को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के रवय और वाइट हाउस की ओर से की गई बयानबाजी को लेकर आपके क्या विचार हैं? क्या आपको भी यह जंग जायज लगती है? अपने विचार हमारे साथ साझा करें कमेंट सेक्शन में। जंग से जुड़ी हर लेटेस्ट अपडेट और देश और दुनिया से जुड़ी बाकी अहम खबरों के लिए आप देखते रहिए लाइव हिंदुस्तान। पश्चिम एशिया का महायुद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता है। ईरान ने अब अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को एक ऐसी अंतिम चेतावनी दे दी है जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

तेहरान का फरमान साफ है। अगर मिसाइलों के कहर से बचना है तो अपने मुल्क से अमरीकियों और उसके सैन्य ठिकानों को बाहर निकाल फेंको। तैरान टाइम्स के हवाले से एक ईरानी सांसद ने सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर और तुर्की जैसे देशों के नेताओं को सीधी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर यह देश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के निशाने पर नहीं आना चाहते तो उन्हें अपने क्षेत्र से अमेकी नागरिकों और सेना को तुरंत हटाना होगा। यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिका और इजराइल के हमले ईरान को भीतर तक जख्मी कर रहे हैं। युद्ध की लपटें अब समंदर की गहराई तक पहुंच चुकी हैं।

बुधवार को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत डेना को डुबो दिया। इस हमले में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराची ने इसे समुद्र में किया गया अत्याचार बताया। उन्होंने गुस्से में कहा कि डेना भारतीय नौसेना का मेहमान बनकर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में गया था। जहां बिना चेतावनी उस पर हमला किया गया। ईरान ने कसम खाई है कि अमेरिका को इस पाप का पछतावा होगा। बदला लेने की शुरुआत भी हो चुकी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है जिसमें भीषण आग लग गई। हालांकि अमेरिका अभी इस पर चुप है। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान के शदीद ड्रोंस ने पूरे क्षेत्र में अफरातफरी मचा रखी है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरानी मिसाइलों की बारिश को झेल पाना नामुमकिन हो जाएगा। इस खूनी संघर्ष में इंसानी जानों की कीमत बेहद भारी है। सुप्रीम लीडर खामने की मौत के बाद भी ईरान ने घुटने टेकने से इंकार कर दिया है। फाउंडेशन ऑफ मार्टिस के मुताबिक अब तक इस युद्ध में कम से कम 1230 लोग अपनी जान गवा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध लंबा चल सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या खाड़ी देश अमेरिका की दोस्ती के लिए ईरान के मिसाइलों का सामना करने के लिए तैयार है या फिर ईरान की इस धमकी के बाद पश्चिम एशिया के नक्शे पर दोस्ती और दुश्मनी की नई लकीरें खींचेगी। बारूद की यह गन अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने को तैयार है। [संगीत]

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